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Showing posts from May, 2017

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी प्रकट किया जबसे स्वयं को, किया प्रमानित प्रमाणों को शास्त्रों का ये ज्ञान नहीं है,सत्य प्रकाश प्रवाह यही है।। शक्ति क्या कार्य क्या करती, क्रियात्मक रूप में प्रमाणित करती।। साकार बने तो शिव या ब्रह्म है,आकारा रहित शक्ति रूप है।। शक्ति तो सर्वत्र ही कर्ता, नाम रूप ही सम्मुख रहता।। जिनकी आराध्य परम शक्ति है, महानआत्मा की भक्ति है।। वीर पीर गुरु देव कहलाये,इनसे ऊपर भगवान बनाये।। ठीक वृक्ष की भांति ही इनका, आध्यत्मवाद में महत्व होता ।। परम शक्ति एक मात्र रचयिता, शेष सभी इसकी ही रचना।। संत ऋषि मुनि ज्ञानी,या गुरु की कोई वाणी।। देवी देव या भगवान प्रदर्शन, भक्ति आधार है एक ही दर्पण।। रहस्यवाद आध्यत्मवाद है,गहराई में ज्ञान स्वाद है।। शारीरिक सुख मन की शांति,जग में रहकर जग से मुक्ति।। जैसे वृक्ष का मूल है शक्ति,फिर भरम या शिव भक्ति है।। ईश्वर की सृष्टि रचना है,विरक्ति भाव से प्रेम ही करना है।। नेककर्म व्यवहार नियम है, निस्वार्थ भक्ति और संयम है।। आध्यत्म में जितने भी विशेषण है,शक्ति की भक्ति का फल है।। प्रातः काल सुरभि सुर वेला,शक्ति इच्छा समय सुनहरा।। प्रकृति सुनाये संगीत अनोखा, खेल शक्ति का इंद्रधनुष की रेखा।। सैभाग्य से हमने ये सच पाया, जीने अपनी शरण बुलाया।। मन और तन का संगम है,जीवन सुखमय तभी सम्भव है।। मन हो प्रफुल्लित ईश कृपा है, शरीर क्रियाशील यहीं जुड़ा है।। ईश्वर की ये है अनेकम्पा,जुड़ा मन से ईश का नाता।। करूँ प्रणाम श्री चरणों में,रखना सदा अपनी शरण में।। परम शक्ति सर्व भूवन्दनी,सत्यम शिवम का अर्थ है यही।। 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी जैसे वृक्ष किसी मधुवन का,महत्व उसके प्रत्येक भाग का जड़ तना शाखाएं पत्ते,फूल फल गिरी बीज के कच्चे पुनः बीज मिट्टी में जड़ है,तना लताएं फिर फूल फल है आध्यात्मवाद भी जड़ जीवन की, जन्म पूर्व मृत्यु की कुंजी मानव का भी यही चक्र है,सतत निरन्तर कर्म चक्र है शक्ति साधारण फिर महाशक्ति, सर्वोच्च मगर रहे परम शक्ति।। सृष्टि एक वृक्ष है भारी,जिसमें छिपे रहस्य गुणकारी।। शक्ति जब मान्यता है देती,किसी को भी तन अपना कहती।। या यकायक प्रकट हो जाती,स्वयं भु तब ही कहलाती।। कर्ता तो शक्ति ही रहती,कार्य वही हर रूप में करती।। जैसे वृक्ष का एक तना है,शेष रूप उस पर ही बना है।। संत ऋषि मुनि औ ज्ञानी,वीर पीर गुरुओं की वाणी।। देवी देव भगवान ये सारे,हर पल परम शक्ति को पुकारे।। जैसे लता शाखाएँ होती है,पत्ते फूल से सज़्ज़ित होती है फल और फूल रौनक नव लाये, फल की महिमा सब जग पाये।। देवी देव शाखा औ लताएं,शक्ति दिव्य का वोध कराएँ।। रूप सभी ये साधन माध्यम हैं,परम शक्ति सत्य वचन है।। रहस्य ये गहरे अध्यात्मजगत के,भेद है है गहरे सत्य भगत के।। पवन प्रातः ये वोध कराए, कलकल सरिता गीत यही गाए।। शक्ति सत्य के भेद को जाने,ज्ञान से तिमिर भेद पहचाने।। एक पूज्य सकल सृष्टि में,शेष भरम मानव दृष्टि में।। मोह लोलुपता से मुक्त कर पाए, श्री चरणों में शीश झुकायें।। सदवुद्धि सदमार्ग हम चाहें,प्रातः सांझ यही वन्दना गाएँ।। 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

मुल्ला नसीरुद्दीन का नाम किसने नहीं सुना है। बगदाद के रेगिस्तान में 800 वर्ष पूर्व घूमने वाले मुल्ला परमज्ञानी थे। परंतु ज्ञान बांटने के उनके तरीके बड़े अनूठे थे। वे लेक्चर नहीं देते थे बल्कि हास्यास्पद हरकत करके समझाने की कोशिश करते थे। उनका मानना था कि हास्यास्पद तरीके से समझाई बात हमेशा के लिए मनुष्य के जहन में उतर जाती है। बात भी उनकी सही है, और मनुष्यजाति के इतिहास में वे हैं भी इकलौते ज्ञानी जो हास्य के साथ ज्ञान का मिश्रण करने में सफल रहे हैं। आज मैं उनके ही जीवन का एक खूबसूरत दृष्टांत बताता हूँ। एक दिन मुल्ला बगदाद की गलियों से गुजर रहे थे। प्रायः वे गधे पर और वह भी उलटे बैठकर सवारी किया करते थे। और कहने की जरूरत नहीं कि उनका यह तरीका ही लोगों को हंसाने के लिए पर्याप्त था। खैर, उस दिन वे बाजार में उतरे और कुछ खजूर खरीदे। फिर बारी आई दुकानदार को मुद्राएं देने की। तो उन्होंने अपने पायजामे की जेब में टटोला, पर मुद्रा वहां नहीं थी। फिर उन्होंने अपने जूते निकाले और जमीन पर बैठ गए। जूतों को चारों ओर टटोलने लगे, परंतु मुद्राएं जूतों में भी नहीं थी। अबतक वहां काफी भीड़ एकत्रित हो गई थी। एक तो मुल्ला की सवारी ही भीड़ इकट्ठी करने को पर्याप्त थी, और अब ऊपर से उनकी चल रही हरकतें भी लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनती जा रही थी। देखते-ही-देखते पचास के करीब लोग मुल्ला के आसपास एकत्रित हो गए थे। ...यानी माजरा जम चुका था। इधर मुल्ला एक तरफ मुद्राएं ढूंढ़ रहे थे और दूसरी तरफ खरीदे खजूर भी खाए जा रहे थे। निश्चित ही दुकानदार इस बात से थोड़ा टेंशन में आ गया था। एक तो यह व्यक्ति उटपटांग जगह मुद्राएं ढूंढ़ रहा है और ऊपर से खजूर भी खाए जा रहा है। कहीं मुद्राएं न मिली तो क्या इसके पेट से खजूर निकालकर पैसे वसूलूंगा? ...अभी दुकानदार यह सब सोच ही रहा था कि मुल्ला ने सर से टोपी उतारी और फिर उसमें मुद्राएं खोजने लगा। अबकी दुकानदार से नहीं रहा गया, उसने सीधा मुल्ला से कहा- यह मुद्राएं यहां-वहां क्या खोज रहे हो? सीधे-सीधे कुर्ते की जेब में क्यों नहीं देखते? इस पर मुल्ला बोला- लो, यह पहले क्यों नहीं सुझाया? इतना कहते-कहते मुल्ला ने कुर्ते की जेब में हाथ डाला और मुद्राएं दुकानदार को थमाते हुए बोला- वहां तो थी ही। यह तो ऐसे ही चान्स ले रहा था। यह सुनते ही पूरी भीड़ हंस पड़ी। भीड़ में से एक बुजुर्ग बोला भी- लगता है कोई पागल है। जब मालूम है कि मुद्रा कुर्ते की जेब में है तो भी यहां-वहां ढूंढ़ रहा है। अब मुल्ला की बारी आ गई थी। जो बात कहने हेतु उन्होंने इतना सारा नाटक किया था, वह कहने का वक्त आ गया था। सो उन्होंने बड़ी गंभीरतापूर्वक सबको संबोधते हुए कहा- पागल मैं, जो मुद्राएं जहां रखी है वहां नहीं खोज रहा हूँ। वाह रे दुनियावालों थोड़ा अपने गिरेबान में झांको। यह जानते हुए भी कि रब दिल में बसा हुआ है तुम लोग उसे मंदीर मस्जिदों में खोजते फिर रहे हो। यदि मैं पागल हूँ तो तुम लोग महा-पागल हो। क्योंकि मैं तो मामूली बात पर यह मूर्खता कर रहा था, तुमलोग तो विश्व के सबसे अहम सत्य के मामले में यह मूर्खता कर रहे हो. 🌹🌹👁🙏👁🌹🌹💲 ओशो

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी ऊंचे पर्वत स्रंग बनाये,हिम से श्वेत शिखर सजाये कलकल नदियां गीत सुनाये,कोयल पीहू सरगम गाये खंजन गौरया और पंखुरी,दे पवन को भक्ति की लड़ी प्रातः समीर कहे तरुवर से,करे वन्दनम परमेश्वर से कुछ भी नहीं सृष्टि में व्यर्थ है,प्रत्येक रचना का अपना अर्थ है दुःख सुख जीवन धूप छाँव है,कर्मो का ही ये फैलाव है नहीं पराया हर कोई अपना,हर अपना पर है इक सपना एक सर्वोच्च जो सकल सृष्टि में,परम शक्ति कहलाये जग में सत्य ज्ञान का वोध कराए,मन मे प्रकाश का दीप जगाये करो निरन्तर प्रेम सभी से,सद्व्यहार सदा ही सबसे कर्मफल का आधार यही है,पाप पुण्य का सार यही है नाम रूप और धर्म मुक्त है,ईश्वर सर्वत्र सर्वरूप है जो कुछ मानव ने बनाया,समझ स्कन न ईश्वर की माया हर आध्यत्म का मूल यही है,अंश ईश का सबमें वही है करें वन्दना अंश यदि जागे,सत्य असत्य का वोध हो आगे जिसको ज्ञानी रहे खोजते,जंगल जंगल वन वन रहे भटकते उस शक्ति को अब पहचाने,नियम गन और शक्तियां जाने चिन्तन मनन मन्थन कर पाएं,श्रध्दा से हम शीश झुकायें सदवुद्धि सदमार्ग पाएं,श्री चरणों मे विनती यही गाएँ चरण शरण सदा हम मांगे,स्नेह प्रेम वरदान भी चाहें भूलों की हम करें याचना,हाथ शीश रहे यही प्रर्थना 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी ऊंचे पर्वत स्रंग बनाये,हिम से श्वेत शिखर सजाये कलकल नदियां गीत सुनाये,कोयल पीहू सरगम गाये खंजन गौरया और पंखुरी,दे पवन को भक्ति की लड़ी प्रातः समीर कहे तरुवर से,करे वन्दनम परमेश्वर से कुछ भी नहीं सृष्टि में व्यर्थ है,प्रत्येक रचना का अपना अर्थ है दुःख सुख जीवन धूप छाँव है,कर्मो का ही ये फैलाव है नहीं पराया हर कोई अपना,हर अपना पर है इक सपना एक सर्वोच्च जो सकल सृष्टि में,परम शक्ति कहलाये जग में सत्य ज्ञान का वोध कराए,मन मे प्रकाश का दीप जगाये करो निरन्तर प्रेम सभी से,सद्व्यहार सदा ही सबसे कर्मफल का आधार यही है,पाप पुण्य का सार यही है नाम रूप और धर्म मुक्त है,ईश्वर सर्वत्र सर्वरूप है जो कुछ मानव ने बनाया,समझ स्कन न ईश्वर की माया हर आध्यत्म का मूल यही है,अंश ईश का सबमें वही है करें वन्दना अंश यदि जागे,सत्य असत्य का वोध हो आगे जिसको ज्ञानी रहे खोजते,जंगल जंगल वन वन रहे भटकते उस शक्ति को अब पहचाने,नियम गन और शक्तियां जाने चिन्तन मनन मन्थन कर पाएं,श्रध्दा से हम शीश झुकायें सदवुद्धि सदमार्ग पाएं,श्री चरणों मे विनती यही गाएँ चरण शरण सदा हम मांगे,स्नेह प्रेम वरदान भी चाहें भूलों की हम करें याचना,हाथ शीश रहे यही प्रर्थना 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

देरी के लिये क्षमा प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी परम शक्ति ही परब्रह्म है,साकार बने तो शिव औ ब्रह्म है एक वही पूर्ण है स्वयं मैं,वही मात्र नश्वर है होता वही अनादि और अनन्त है,जिसका पाया नहीं अंत है जब जब मैहर या कृपा होती, अमुक शक्ति का आचरण करती जैसे औलिया का दीवाना,बन सूफी बस् गाये तराना देवी जिस में प्रकट है होती,लाल चुंदरी ओढ़ है लेती भैरव यति या हो हनुमंता,स्वभाव भक्त का इष्ट के जैसा ज्ञान नहीं धर्म ग्रन्थों का,ये ज्ञान है स्वयं श्री मत का जिसने रची ये सृष्टि सारी,ग्रन्थ लिखे अनुभव आधारी देव देवी और शक्ति में, अन्तरभेद होते भक्ति में जिन पर शक्ति कृपा है करती,देव देवी फिर वही कहलाती कर्ता तो शक्ति ही होती ,जो नर नारी से परे ही रहती जो युगों युगों के बाद साकार हो,वही शिव ब्रह्म बना हो महानात्माये ज्ञान तो देती,पर पूर्ण भेद से अनभिज्ञ ही रहती गूढ़ रहस्य आध्यत्मवाद के,विषय वही परम शक्ति के खोले प्रशिक्षण केंद्र आद्यात्म का,देती ज्ञान क्रियात्मक ढंग का धर्म ग्रन्थों से ज्ञान न देती,आदर करो सभी का कहती परम शक्ति तक जो पहुंचे है,आवाज़ भी उन तक पहुंचे है जड़ तना शाखाएं होती,पत्ते लताएं फूल फल देती सबकुछ तो एक चक्र ही होता,जल वाष्प फिर बून्द वह बनता वायु में नमी छिपी होती है,कारण जो वर्षा का बनती है एक सर्वोच्च परम शक्ति है,ऋषि मिनियों में जाग्रत होती है ईश्वर एक शेष अनेक है,जिसके सब मस्तक को टेक है दांव मानव इतिहास पुराना,शक्ति ने मिटाया असत्य का ताना शक्ति उपासक जो भी होता,श्रेष्ठ सदा वो ही है रहता नर नारी से मुक्त वो शक्ति,देती वही सभी को वो मुक्ति जीव निर्जीव को मान्यता देती,कार्य मगर वो स्वयं ही करती जो भी धार्मिक गाथाएं,तत्कालीन व्यवस्थाएँ है नहींसीमित उसमे शक्ति है, बन्धी मात्र भाव भक्ति है साधु संत और महात्मा,देवी देव और परमात्मा परमशक्ति सर्वोपरि है,ऊंच नीच से भी ऊपर है देवी देव भगवान पूजते,परम शक्ति को माथा है टेकते कर्मफलदाता भाग्यविधाता,सर्वोच्च शक्ति सृष्टि निर्माता जब वही शक्ति प्रकट है होती,स्वयं भु भी कहलाती प्रायः तो अदृश्य ही रहती,भक्ति प्रेम में प्रकट है होती भाग्यशाली शरण जो पाये,हृदय ज्ञान की ज्योति जगाये कोटि कोटि नमन चरणों मे,नाम तेरा हो सदा वाणी में ब्रह्म को जाने बने ब्रह्म ज्ञानी,क्षमा करो मेरी नादानी श्री चरणों मे शीश झुकायें,सदवुद्धि सदमार्ग पाएं 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

देरी के लिये क्षमा प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी परम शक्ति ही परब्रह्म है,साकार बने तो शिव औ ब्रह्म है एक वही पूर्ण है स्वयं मैं,वही मात्र नश्वर है होता वही अनादि और अनन्त है,जिसका पाया नहीं अंत है जब जब मैहर या कृपा होती, अमुक शक्ति का आचरण करती जैसे औलिया का दीवाना,बन सूफी बस् गाये तराना देवी जिस में प्रकट है होती,लाल चुंदरी ओढ़ है लेती भैरव यति या हो हनुमंता,स्वभाव भक्त का इष्ट के जैसा ज्ञान नहीं धर्म ग्रन्थों का,ये ज्ञान है स्वयं श्री मत का जिसने रची ये सृष्टि सारी,ग्रन्थ लिखे अनुभव आधारी देव देवी और शक्ति में, अन्तरभेद होते भक्ति में जिन पर शक्ति कृपा है करती,देव देवी फिर वही कहलाती कर्ता तो शक्ति ही होती ,जो नर नारी से परे ही रहती जो युगों युगों के बाद साकार हो,वही शिव ब्रह्म बना हो महानात्माये ज्ञान तो देती,पर पूर्ण भेद से अनभिज्ञ ही रहती गूढ़ रहस्य आध्यत्मवाद के,विषय वही परम शक्ति के खोले प्रशिक्षण केंद्र आद्यात्म का,देती ज्ञान क्रियात्मक ढंग का धर्म ग्रन्थों से ज्ञान न देती,आदर करो सभी का कहती परम शक्ति तक जो पहुंचे है,आवाज़ भी उन तक पहुंचे है जड़ तना शाखाएं होती,पत्ते लताएं फूल फल देती सबकुछ तो एक चक्र ही होता,जल वाष्प फिर बून्द वह बनता वायु में नमी छिपी होती है,कारण जो वर्षा का बनती है एक सर्वोच्च परम शक्ति है,ऋषि मिनियों में जाग्रत होती है ईश्वर एक शेष अनेक है,जिसके सब मस्तक को टेक है दांव मानव इतिहास पुराना,शक्ति ने मिटाया असत्य का ताना शक्ति उपासक जो भी होता,श्रेष्ठ सदा वो ही है रहता नर नारी से मुक्त वो शक्ति,देती वही सभी को वो मुक्ति जीव निर्जीव को मान्यता देती,कार्य मगर वो स्वयं ही करती जो भी धार्मिक गाथाएं,तत्कालीन व्यवस्थाएँ है नहींसीमित उसमे शक्ति है, बन्धी मात्र भाव भक्ति है साधु संत और महात्मा,देवी देव और परमात्मा परमशक्ति सर्वोपरि है,ऊंच नीच से भी ऊपर है देवी देव भगवान पूजते,परम शक्ति को माथा है टेकते कर्मफलदाता भाग्यविधाता,सर्वोच्च शक्ति सृष्टि निर्माता जब वही शक्ति प्रकट है होती,स्वयं भु भी कहलाती प्रायः तो अदृश्य ही रहती,भक्ति प्रेम में प्रकट है होती भाग्यशाली शरण जो पाये,हृदय ज्ञान की ज्योति जगाये कोटि कोटि नमन चरणों मे,नाम तेरा हो सदा वाणी में ब्रह्म को जाने बने ब्रह्म ज्ञानी,क्षमा करो मेरी नादानी श्री चरणों मे शीश झुकायें,सदवुद्धि सदमार्ग पाएं 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी शक्ति ही कर्ता हरेक रूप में,सामान्य पुरुष या भूप में शक्ति है तो शिव शिव है,शक्ति रहित शिव भी इक शव है ज्ञान वही जो सिध्द होता,असत्य नहीं सर्वकालिक होता मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों से,भिन्न हु गिरिजा के घरों से आध्यात्म शिक्षा के कई केंद्र है,नहीं प्रशिक्षण कोई केंद्र है रहे असम्भव प्रशिक्षण देना,स्वयं भु अतिरिक्त किसी का देना जो कहना सत्यापित करना,दुरूह बहुत् प्रमाण नित देना अद्यतमवाद के हर पहलू में, कष्ट सिलसिले हो माध्यम में जब से शुरू कार्यप्रणाली हई है,साकार रूप साधन ही बने है श्री ज्योति जी भी प्रायः,शिवलिंग का अध्याय बने हैं नहीं सोच विचार किसी का,छोटा सा इतिहास है इसका त्रिकालदर्शी के आपने गुण है,नहीं स्वभाव में विचलन है शील स्वभाव धैर्य से पूरित,परम शक्ति दयामय निश्चित तेरी कृपा से उद्देश्य को जाने, भू पर क्यों आये पहचाने नेककर्म सदव्यवहार करें सबसे,भूल कभी ना हो यबी हमसे श्री चरणों अरदास हमारी,पाये स्नेह की दृष्टि तुम्हारी प्रातः वन्दन यही हमारा,बन के रहूँ मैं दास तुम्हारा 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

*"जहाँ प्रयत्नों की उंचाई"* *"अधिक होती हैं"* *"वहाँ नसीबो को भी"* *"झुकना पड़ता हैं"* *परिवर्तन से डरना* *और संघर्ष से कतराना,* *मनुष्य की सबसे बड़ी* *कायरता है !* *जीवन का सबसे बड़ा गुरु* *वक्त होता है,* *क्योंकि जो वक्त सिखाता है* *वो कोई नहीं सीखा सकता !* 🌷💐🌹🙏*"सुप्रभात"*🙏🌹💐🌷

*"जहाँ प्रयत्नों की उंचाई"* *"अधिक होती हैं"* *"वहाँ नसीबो को भी"* *"झुकना पड़ता हैं"* *परिवर्तन से डरना* *और संघर्ष से कतराना,* *मनुष्य की सबसे बड़ी* *कायरता है !* *जीवन का सबसे बड़ा गुरु* *वक्त होता है,* *क्योंकि जो वक्त सिखाता है* *वो कोई नहीं सीखा सकता !* 🌷💐🌹🙏*"सुप्रभात"*🙏🌹💐🌷

🌹🌞 शुभ 👁🙏🏻👁प्रभात🌞🌹20-5 *आप अकेले बोल तो सकते है;* *परन्तु...* *बातचीत नहीं कर सकते ।* *आप अकेले आनन्दित हो सकते है* *परन्तु...* *उत्सव नहीं मना सकते।* *अकेले आप मुस्करा तो सकते है* *परन्तु...* *हर्षोल्लास नहीं मना सकते.* *हम सब एक दूसरे* *के बिना कुछ नहीं हैं;* *यही रिश्तों की खूबसूरतीहै...!* 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹 *प्यारी-सी सुबह का प्यारा-सा प्रणाम*👏🏾

नई नवेली दुल्हन जब ससुराल में आई तो उसकी सास बोली : बींदणी कल माता के मन्दिर में चलना है। बहू ने पूछा : सासु माँ एक तो ' माँ ' जिसने मुझ जन्म दिया और एक ' आप ' हो और कोन सी माँ है ? सास बडी खुश हुई कि मेरी बहू तो बहुत सीधी है । सास ने कहा - बेटा पास के मन्दिर में दुर्गा माता है सब औरतें जायेंगी हम भी चलेंगे । सुबह होने पर दोनों एक साथ मन्दिर जाती है । आगे सास पीछे बहू । जैसे ही मन्दिर आया तो बहू ने मन्दिर में गाय की मूर्ति को देखकर कहा : माँ जी देखो ये गाय का बछड़ा दूध पी रहा है , मैं बाल्टी लाती हूँ और दूध निकालते है । सास ने अपने सिर पर हाथ पीटा कि बहू तो " पागल " है और बोली :- बेटा ये स्टेच्यू है और ये दूध नही दे सकती। चलो आगे । मन्दिर में जैसे ही प्रवेश किया तो एक शेर की मूर्ति दिखाई दी । फिर बहू ने कहा - माँ आगे मत जाओ ये शेर खा जायेगा। सास को चिंता हुई की मेरे बेटे का तो भाग्य फूट गया । और बोली - बेटा पत्थर का शेर कैसे खायेगा ? चलो अंदर चलो मन्दिर में, और सास बोली - बेटा ये माता है और इससे मांग लो , यह माता तुम्हारी मांग पूरी करेंगी । बहू ने कहा - माँ ये तो पत्थर की है ये क्या दे सकती है ? , जब पत्थर की गाय दूध नही दे सकती ? पत्थर का बछड़ा दूध पी नही सकता ? पत्थर का शेर खा नही सकता ? तो ये पत्थर की मूर्ति क्या दे सकती है ? *"अगर कोई दे सकती है तो आप ......... है"* *" आप मुझे आशीर्वाद दीजिये "*। तभी सास की आँखे खुली ! वो बहू पढ़ी लिखी थी, तार्किक थी, जागरूक थी , तर्क और विवेक के सहारे बहु ने सास को जाग्रत कर दिया ! अगर मानवता की प्राप्ति करनी है तो पहले असहायों , जरुरतमंदों, गरीबो की सेवा करो परिवार, समाज में लोगो की मदद करे । *"अंधविश्वास और पाखण्ड को हटाना ही मानव सेवा है "* । *"बाकी मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च तो मानसिक गुलामी के केंद्र हैं"* ना कि ईश्वर प्राप्ति के ........ *"मानव का सफर पत्थर से शुरु हुआ था। पत्थरों को ही महत्व देता है और आज पत्थर ही बन कर रह गया"*।-------- ------------------------ 1. चूहा अगर *पत्थर* का तो उसको पूजता है। (गणेश की सवारी मानकर) लेकिन जीवित चूहा दिख जाये तो पिंजरा लगाता है और चूहा मार दवा खरीदता है। 2.सांप अगर *पत्थर* का तो उसको पूजता है। (शंकर का कंठहार मानकर) लेकिन जीवित सांप दिख जाये तो लाठी लेकर मारता है और जबतक मार न दे, चैन नही लेता। 3.बैल अगर *पत्थर* का तो उसको पूजता है। (शंकर की सवारी मानकर) लेकिन जीवित बैल(सांड) दिख जाये तो उससे बचकर चलता है । 4.कुत्ता अगर *पत्थर* का तो उसको पूजता है। (शनिदेव की सवारी मानकर) लेकिन जीवित कुत्ता दिख जाये तो 'भाग कुत्ते' कहकर अपमान करता है। 5. शेर अगर *पत्थर* का तो उसको पूजता है। (दुर्गा की सवारी मानकर) लेकिन जीवित शेर दिख जाये तो जान बचाकर भाग खड़ा होता है। हे मानव! *"पत्थर से इतना लगाव क्यों और जीवित से इतनी नफरत क्यो ???????????"* *"किसी इंसान के छूने से अशुद्ध होता है और किसी जानवर के मुत्र से शुद्ध ये कैसा न्याय ???????*

रखना सिर पर हाथ सदा , हम कभी भी डोलें नां तेरे अनादर में दाता, इक शब्द भी बोलें नां तेरी इच्छा से हमको फिर जीत या हार मिले बदले में हमको दाता, चाहे कष्ट हज़ार मिलें । 🌹🌹जय श्री मदन जी सभी को 🌹🌹

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी असीम विशाल है सृष्टि सारी, अनेक सौरमण्डल जिसमें भारी इस संसार मे सात द्वीप है,भू खण्डों के अनेक रूप है भारत मे भी राज्य भिन्न है,परिवेश विचार परिपाटी भिन्न है लेकिन जो सृष्ट स्वामी है,सर्वज्ञ सर्वव्यापक अन्तर्यामी है सकल सृष्टि सन्चालन करती,परम शक्ति सर्वोच्च है होती शब्द आपके जो सम्मुख है,श्री मुख अरविंद के स्वर हैं शक्ति अनादि और अनन्ता, सिद्ध करती है सर्वसमर्थता कर्ता तो सदा शक्ति ही रहती,रूप को अपने प्रयोग ही करती उसकी इच्छा सर्वोपरि है,अंदर होकर भी तन से ऊपर है रहस्य अद्यतमवाद के है ये,शरीर आत्मा साथ रहे है करो विचार सत्य को जानो,शक्ति स्वामी सृष्टि को जानो उचित नहीं हर भेद को देना,उचित वही तुमसे है कहना पुनर्जन्म की जो धारणा है,नहीं अवश्यक उसको जानना है चाहे कुछ भी मनुष्य आत्मा,रहती मगर शक्ति नियन्ता अपनी इच्छा से नहीं जन्म मृत्यु है, कर्मफल सीमित एक चक्र है उलझे देवी देव में प्राणी,ज्ञान अधूरा या अज्ञानी अज्ञान तिमिर में तन को त्यागे,क्या शक्ति को वो जन पावे मूल बिना नहीं तना सम्भवता,शाखाएं लताएं फिर है पत्ता फूल लगे तब फल आये,फल का बीज मूल बन जाये जैसे जल का वाष्प बन जाना,वारिश चक्र रूप में आना सागर पर्वत और बदल का,सूर्य का संग होता है नाता जीवात्मा तन में आये,शिशु वयस्क वृध्द बन धाये जन्म से लेकर मृत्यु को पाना,सत्य जगत में आना जाना प्रकृति के है नियम निराले,निर्जीव बीज वृक्ष को पाले ऐसा ही आध्यात्मवाद है,अदृश्य में जड़तावाद है ब्रह्म शिव साकार तना है,शाखाएं पत्ते कर्म बन्धा है ईश्वर सदा ही अर्थ को करता,धर्म विचार विविधता देता सोचो सत्य शाखा या पत्ते है,सोचो क्यों इनमें भटके है धर्म की शिक्षा मूल रूप है, तना संस्थापक का स्वरूप है भू पर तब अवतार हैं होते,महानात्मा शाखाएं बनते परम शक्ति साकार जब बनती,नहीं किसी की पूजा करती सदियों तक जब करें आराधना,सिध्द अमुक की हो उपासना हाथ जोड़ करूँ यही वन्दना,रह पाऊँ सदा आपकी शरणा 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

एक आदमी ने नारदमुनि से पूछा मेरे भाग्य में कितना धन है... : नारदमुनि ने कहा - भगवान विष्णु से पूछकर कल बताऊंगा... : नारदमुनि ने कहा- 1 रुपया रोज तुम्हारे भाग्य में है... : आदमी बहुत खुश रहने लगा... उसकी जरूरते 1 रूपये में पूरी हो जाती थी... : एक दिन उसके मित्र ने कहा में तुम्हारे सादगी जीवन और खुश देखकर बहुत प्रभावित हुआ हूं और अपनी बहन की शादी तुमसे करना चाहता हूँ... : आदमी ने कहा मेरी कमाई 1 रुपया रोज की है इसको ध्यान में रखना... इसी में से ही गुजर बसर करना पड़ेगा तुम्हारी बहन को... : मित्र ने कहा कोई बात नहीं मुझे रिश्ता मंजूर है... : अगले दिन से उस आदमी की कमाई 11 रुपया हो गई... : उसने नारदमुनि को बुलाया की हे मुनिवर मेरे भाग्य में 1 रूपया लिखा है फिर 11 रुपये क्यो मिल रहे है...?? : नारदमुनि ने कहा - तुम्हारा किसी से रिश्ता या सगाई हुई है क्या...?? : हाँ हुई है... : तो यह तुमको 10 रुपये उसके भाग्य के मिल रहे है... इसको जोड़ना शुरू करो तुम्हारे विवाह में काम आएंगे... : एक दिन उसकी पत्नी गर्भवती हुई और उसकी कमाई 31 रूपये होने लगी... : फिर उसने नारदमुनि को बुलाया और कहा है मुनिवर मेरी और मेरी पत्नी के भाग्य के 11 रूपये मिल रहे थे लेकिन अभी 31 रूपये क्यों मिल रहे है... क्या मै कोई अपराध कर रहा हूँ...?? : मुनिवर ने कहा- यह तेरे बच्चे के भाग्य के 20 रुपये मिल रहे है... : हर मनुष्य को उसका प्रारब्ध (भाग्य) मिलता है... किसके भाग्य से घर में धन दौलत आती है हमको नहीं पता... : लेकिन मनुष्य अहंकार करता है कि मैने बनाया,,,मैंने कमाया,,, मेरा है,,, मै कमा रहा हूँ,,, मेरी वजह से हो रहा है... : हे प्राणी तुझे नहीं पता तू किसके भाग्य का खा कमा रहा है...।।👌👌👌👌👌अगर अच्छा लगे तो आगे बढ़ने दो।

*हँसता हुआ मन* *और* *हँसता हुआ चेहरा* *यही सच्ची संपति है....!!* *इस पर* *आयकर विभाग की रेड कभी नहीं पड़ती*....!! 🌹 *सुप्रभात*🌹 🎋🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🎋 *✍🏻किसी ने गौतम बुद्ध से पूछा,"* *आप बड़े है फिर भी निचे बैठते है"* *बहुत ही खूबसूरत जवाब दिया..* *"निचे बैठने वाला इंसान कभी गिरता नहीं.*."|। 🌴G⭕⭕D🌴 🌴〽⭕➰N❗NG🌴 🌺🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🌺

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी दूर किया अज्ञान तिमिर को,पावन किया सत्य से मन को उलझा प्राणी दैनिक दिनचर्या,नहीं आध्यत्म की परिचर्या करता मनन नहीं ईश्वर का,अज्ञात लक्ष्य रहे जीवन का मानव चोला छोड़ के भी जाना,मृतु के सत्य को निम्न ही माना देख काल को फिर घबराता,आंकलन कर्मो का तब करता करे प्रायश्चित अंत समय वो, रहे पित्त फिर माथा वो तब ही कहा विद्वान जनों ने,समय प्रतीक्षा प्रलय समय मे हर पल उसका ध्यान विचारों,सुबह सांझ नित नाम पुकारो असीम आध्यत्म का सागर गहरा, समय चक्र का उसमें फेरा विपरीत स्तिथि मन भटकाये, तब ईश्वर ही धैर्य बंधाये जो विश्वास करे हृदय से,मिले संग तभी ईश्वर से त्रिकालदर्शी सर्वज्ञ शक्ति, करे जो भी निष्काम की भक्ति अंश उसी का जाग्रत होता,सत्य वोध तब स्वयं का होता असीम शक्ति का सारा पसारा,जैसे किरणों से सूर्य विस्तारा जिसके जैसे संस्कार है होते, निकट प्रिय वो शक्ति के होते शक्ति देती रूप मान्यता,उसी रूप में वो जाना जाता कर्तव्य है उसका दायित्व को जाने, अहम भाव को जितना जाने विनयशीलता रोम रोम हो,त्याग समर्पण और प्रेम हो जब इन गुणों की न्यूनता होती,स्थानों की महत्ता घटती समाज में जितने भी स्थान है,वीर पीर या भगवान है आधार सभी का समर्पण होता,यदि वो आकर्षण मुक्त हो रहता नहीं भटकता यश मान प्रतिष्ठा, रखता यदि वो सच्ची निष्ठा स्वभाव आदते और विचार, बनाते मनोरथ सिध्द आधार करे विचार क्यों जगत में आया,सो जन जीवन सफल बनाया उद्देश्य सहित हम आये धरा पर, सदमार्ग स्वयं निर्धारित कर जिसने सत्य मर्म को पाया,नहीं उलझता फिर वो माया आत्मा मिलन तब ईश को चाहे,अंश जीवात्मा तृप्ति तब पाये सुने आत्मा आवाज़ सदा वो, रहे समर्पित निरन्तर ही हो नेककर्म और सदव्यवहार,रहे सदा जीवन आधार सत्य ज्ञान प्रकाश फैलाएं,जो चाहो हम वो कर पाये दया निधे हे भाग्यविधाता,सर्वोच्च शक्ति कर्मफलदाता करें नमन हम शीश झुकाकर, कृपा दृष्टि रखना करुणाकर नित्य पंखुरी वन्दना गाये, सागर पर्वत तुम्हें ध्यायें गाये प्रातः पवन मतवारी,श्री चरणों मे विनय हमारी मन ये चाहे शरण तुम्हारी, मनोकामना यही हमारी🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

जय श्री मदन जी प्रातः वन्दन अध्यात्म जरूरी क्यों जीवन मे,क्यों मन लगे सदा सिमरन में कौन है जो सांसो को चलाये,कौन है जो तारे चमकाए जिसकी इच्छा सकल चराचर,शक्ति कर्ता कैसे क्यों कर जन्म मरण पर जिसका नियंत्रण, जिसकी इच्छा भू आकर्षण शिशु से तरुण किशोर युवा फिर, वयस्क प्रौढ़ मृत्यु का भी डर कैसे सतत प्रक्रिया चलती,वही गर्भ में पोषण करती जन्म पूर्व से मृत्यु पर्यन्त तक,सबकुछ शक्ति करे निर्धारित धर्म सम्प्रदाय से मुक्त सदा ही,राष्ट्र द्वीप ना कोई बन्धन ही जीव निर्जीव सबकी निर्माता, न्यायकरिणी कर्मफलदाता सकल सृष्टि है युग्म रूप में,करे संचालित शक्ति तन में नहीं श्रेष्ठ या कोई निम्नतम,आत्मा तन में है अध्यात्म यूँ तो समाज में भ्रमित धारणा, करती नियंत्रण कभी अन्य आत्मा अनिवार्य अध्यात्म है सृष्टि में,छिपा रहस्य ईश का इसमें जिसने सकल सृष्टि को बनाया,जीवन मूल तत्वों को सजाया शक्ति की भी कुछ इच्छाएं, सत्य असत्य का वोध कराएं अनिवार्य कर्मफल है मानव का, करे स्थापित अस्तित्व अध्यात्म का परम आवश्यक आध्यत्म जीवन मे, रहे ईश्वर का भान हर मन में नित्य समय कुछ दिन का निकालो,मन में उसकी छवि पुकारो भिन्न है मत और भिन्न मान्यता,किन्तु शक्ति की है स्वीकारता ज्ञान ध्यान भक्ति अनहद का स्वर, इच्छा शक्ति की इनसे ऊपर अदृश्य सदृश्य भाव हृदय के,महसूस करे शक्ति हर मन के जिसकी भक्ति भाव हो जैसा, पाया उसने प्रमाण भी वैसा असीम रहस्य आध्यत्म की सरिता,प्रेम प्रवाह मुखर ये सविता बड़भागी जन शरण जो पाई,स्नेह स्पर्श निकटता पाई ज्ञान की मन में जोत जगाई, करूँ प्रणाम मैं शीश झुकाई 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

*सम्बन्ध को जोड़ना* *एक कला है,* *लेकिन* *"सम्बन्ध को निभाना"* *एक साधना है* *जिंदगी मे हम कितने सही और कितने गलत है, ये सिर्फ दो ही शक्स जानते है..* *"ईश्वर "और अपनी "अंतर-आत्मा"* *और हैरानी की बात है कि दोनों नजर नहीं आते...!* *🌹🙏 सुप्रभात🙏🌹* *आपका दिन मंगलमय हो* 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

¸.•*""*•.¸ ¸.•*""*•.¸ ¸.•*""*•.¸ 🌺🌻🌹🌷🌼🌸💐🍄🌲🌳 *आज का विचार* *(Thought of the Day)*🌞. *"ज़िन्दगी" बदलने के लिए* *लड़ना पड़ता है..! और* *आसान करने के लिए* *समझना पड़ता है..!* *वक़्त आपका है, चाहो तो सोना बना लो और चाहो तो सोने में गुज़ार दो..!* *अगर कुछ अलग करना है तो भीड़ से हटकर चलो..!* *भीड़ साहस तो देती है पर* *पहचान छीन लेती है...!* *मंज़िल ना मिले तब तक हिम्मत मत* *हारो और ना ही ठहरो.... क्योंकी*, *पहाड़ से निकलने वाली नदियों ने* *आज तक रास्ते में किसीसे नहीं पूछा... "समन्दर कितना दूर है..*. 🌺🌻🌹🌷🌼🌸💐🍄🌲🌳 *🌹हँसते रहिए हंसाते रहिए🌹* *🌹सदा मुस्कुराते रहिए🌹* *आपका दिन शुभ और मँगलमय हो*। 🙏🙏 *सुप्रभात*🙏🙏

*शरीर की ब्लाक नसों को खोलने का आयुर्वेदिक नुश्खा* *ज़रूरी जड़ीबूटी* 1 gm दाल चीनी 10 gm काली मिर्च साबुत 10 gm तेज पत्ता 10 gm मगज 10 gm मिश्री डला 10 gm अखरोट गिरी 10 gm अलसी टोटल 61 gm सभी सामान रसोई का ही है *बनाने की विधि* सभी को मिक्सी में पीस के बिलकुल पाउडर बना ले और 6 gm की 10 पुड़िया बन जायेगी एक पुड़िया हर रोज सुबह खाली पेट नवाये पानी से लेनी है और एक घंटे तक कुछ भी नही खाना है चाय पी सकते हो ऐड़ी से ले कर चोटी तक की कोई भी नस बन्द हो खुल जाएगी हार्ट पेसेंट भी ध्यान दे ये खुराक लेते रहो पूरी जिंदगी हार्टअटैक या लकवा नहीं होगा।

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी रंग रूप आकर में निश्चित,भौतिक मात्र वह कहलाती जीवन की आवश्यकताएं,वस्तु मात्र निर्धारित करती शरीर हमारा भौतिक होता,ईश्वर अंश संचालित करता शरीर सभी को दिखाई देता,अंश मगर अदृश्य ही रहता आत्मा चेतना औ तन मिलकर,प्राणी होता है दृष्टिगोचर आत्माओं को भी श्रेणी होती,विशेषण से सम्बोधित होती जिसका जैसा स्वभाव संस्कार,और रहे ईश्वर से प्यार भू जल अग्नि वायु और गगन, आवश्यक मानव के तन रचना ईश्वर की हरेकआत्मा,महात्मा या परम आत्मा परम शक्ति है मात्र रचयिता,कर्ता धर्ता यही है हर्ता शक्ति से ही सृष्टि संचालित, शक्ति सबकुछ करे निर्धारित शिव शक्ति के भेद को जानो,शक्ति बिना शिव शव ही मानो शिव शक्ति का भेद ये गहरा, डाला रूप का इस पे पहरा भोजन वस्त्र तन ये चाहे,आत्मा ईश मिलन को चाहे तन की भांति आत्मा की आवश्यकता, ईश मिलन तृप्ति पूरकता मनन भजन पूजा औ सिमरन,आत्मा चाहे चिन्तन दर्शन जड़ नहीं वह चेतन है,शक्ति का भी अपना एक मन है राग द्वेष प्यार औ नफरत,करे महसूस शक्ति हर चाहत असीम शक्ति के रहस्य ये गहरे, हमने पाये पल ये सुनहरे कोयल कूक पपीहा गाये, भू से नभ शक्ति ही समाये करूँ वन्दना शीश झुकाऊँ, मन वचन कर्म से तरी हो पाऊँ 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

*बुद्ध ने मानवता को ऐसा क्या दिया कि कोई भी सहज और सरल व्यक्ति बिना किसी दबाव के बुद्धानुयाई बनने को स्वत: सहमत होने लगता है।* इसके निम्न प्रमुख कारण हैं:— *1. धर्म मानव का स्वभाव है :* बुद्ध कहते हैं, धर्म सिद्धान्त नहीं, ?मानव स्वभाव है। मानव के भीतर धर्म रात—दिन बह रहा है। ऐसे में सिद्धान्तों से संचालित किसी भी धर्म को धर्म कहलाने का अधिकार नहीं। उसे धर्म मानने की जरूरत ही नहीं है। धर्म के नाम पर किसी प्रकार की मान्यताओं को ओढने या ढोने की जरूरत ही नहीं है। अपने आप में मानव का स्वभाव ही धर्म है। *2. मानो मत, जानो :* बुद्ध कहते हैं, अपनी सोच को मानने के बजाय जानने की बनाओ। इस प्रकार बुद्ध वैज्ञानिक बन जाते हैं। अंधविश्वास और पोंगापंथी के स्थान पर बुद्ध मानवता के बीच विज्ञान को स्थापित करते हैं। बुद्ध ने धर्म को विज्ञान से जोड़कर धर्म को अंधभक्ति से ऊपर उठा दिया। बुद्ध ने धर्म को मानने या आस्था तक नहीं रखा, बल्कि धर्म को भी विज्ञान की भांति सतत खोज का विषय बना दिया। कहा जब तक जानों नहीं, तब तक मानों नहीं। बुद्ध कहते हैं, ठीक से जान लो और जब जान लोगे तो फिर मानने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि जानने के बाद तो मान ही लोगे। बुद्ध वैज्ञानिक की तरह से धर्म की बात कहते हैं। इसीलिए बुद्ध नास्तिकों को भी प्रिय हैं। *3. परम्परा नहीं मौलिकता :* बुद्ध मौलिकता पर जोर देते हैं, पुरानी लीक को पीटने या परम्पराओं को अपनाने पर बुद्ध का तनिक भी जोर नहीं है। इसीलिये बुद्ध किसी भी उपदेश या तथ्य को केवल इस कारण से मानने को नहीं कहते कि वह बात वेद या उपनिषद में लिखी है या किसी ऋषी ने उसे मानने को कहा है। बुद्ध यहां तक कहते हैं कि स्वयं उनके/बुद्ध के द्वारा कही गयी बात या उपदेश को भी केवल इसीलिये मत मान लेना कि उसे मैंने कहा है। बुद्ध कहते हैं कि इस प्रकार से परम्परा को मान लेने की प्रवृत्ति अन्धविश्वास, ढोंग और पाखण्ड को जन्म देती है। बुद्ध का कहना है कि जब तक खुद जान नहीं लो किसी बात को मानना नहीं। यह कहकर बुद्ध अपने उपदेशों और विचारों का भी अन्धानुकरण करने से इनकार करते हैं। विज्ञान भी यही कहता है। *4. दृष्टा बनने पर जोर :* बुद्ध दर्शन में नहीं उलझाते, बल्कि उनका जोर खुद को, खुद का दृष्टा बनने पर है। बुद्ध दार्शनिकता में नहीं उलझाते। बुद्ध कहते हैं कि जिनके अन्दर, अपने अन्दर के प्रकाश को देखने की प्यास है, वही मेरे पास आयें। उनका अभिप्राय उपदेश नहीं ध्यान की ओर है, क्योंकि ध्यान से अन्तरमन की आंखें खुलती हैं। जब व्यक्ति खुद का दृष्टा बनकर खुद को, खुद की आंखों से देखने में सक्षम हो जाता है तो वह सारे दर्शनों और पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर सत्य को देखने में समर्थ हो जाता है। इसलिये बुद्ध बाहर के प्रकाश पर जोर नहीं देते, बल्कि अपने अन्दर के प्रकाश को देखने की बात कहते हैं। अत: खुद को जानना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। *5. मानवता सर्वोपरि :* बुद्ध कहते है-सिद्धांत मनुष्य के लिये हैं। मनुष्य सिद्धांत के लिये नहीं। बुद्ध के लिये मानव और मानवता सर्वोच्च है। इसीलिय बुद्ध तत्कालीन वैदिक वर्णव्यवस्था और आश्रम-व्यवस्था को भी नकार देते हैं, क्योंकि बुद्ध की दृष्टि में सिद्धान्त नहीं, मानव प्रमुख है। मानव की आजादी उनकी प्राथमिकता है। बुद्ध कहते हैं, वर्णव्यवस्था और आश्रम-व्यवस्था मानव को गुलाम बनाती है। अत: बुद्ध की दृष्टि में वर्णव्यवस्था, आश्रम-व्यवस्था जैसे मानव निर्मित सिद्धान्त मृत शरीर के समान हैं। जिनको त्यागने में ही बुद्धिमता है। यहां तक कि बुद्ध की नजर में शासक का कानून भी उतना मूल्यवान नहीं है, जितना मनुष्य है। यदि कानून सहज मानव जीवन में दखल देता है, तो उस कानून को अविलम्ब बदला जाना जरूरी है। *6. स्वप्नवादी नहीं, यथार्थवादी :* बुद्ध ने सपने नहीं दिखाये, हमेशा यथार्थ पर जोर दिया, मानने पर नहीं, जानने पर जोर दिया। ध्यान और बुद्धत्व को प्राप्त होकर भी बुद्ध ने अपनी जड़ें जमीन में ही जमाएं रखी। उन्होंने मानवता के इतिहास में आकाश छुआ, लेकिन काल्पनिक सिद्धान्तों को आधार नहीं बनाया। बुद्ध स्वप्नवादी नहीं बने, बल्कि सदैव यथार्थवादी ही बने रहे। यही वजह है कि बुद्ध का प्रकाश संसार में फैला। *7. ईश्वर की नहीं, खुद की खोज :* बुद्धकाल वैदिक परम्पराओं से ओतप्रोत था। अत: अनेकों बार, अनकों लोगों ने बुद्ध से ईश्वर को जानने के बारे में पूछा। लोग जानने आते थे कि ईश्वर क्या है और ईश्वर को केसे पाया जाये? बुद्ध ने हर बार, हर एक को सीधा और सपाट जवाब दिया—व्यर्थ की बातें मत पूछो। पहले ध्यान में तो उतरो, पहले अपने अंतस की चेतना को तो समझो। पहले अपनी खोज तो करो। जब खुद को जान जाओगे तो ऐसे व्यर्थ के सवाल नहीं पूछोगे। *8. अच्छा और बुरा, पाप और पुण्य :* बुद्ध किसी जड़ सिद्धान्त या नियम के अनुसार जीवन जीने के बजाय मानव को बोधपूर्वक जीवन जीने की सलाह देते हैं। बुद्ध कहते हैं, जो भी काम करें बोधपूर्वक करें, होशपूर्वक क्योंकि बोधपूर्वक किया गया कार्य कभी भी बुरा नहीं हो सकता। जितने भी गलत काम या पाप किये जाते हैं, सब बोधहीनता या बेहोशी में किये जाते हैं। इस प्रकार बुद्ध ने अच्छे और बुरे के बीच के भेद को समझाने के लिये बोधपूर्वक एवं बोधहीनता के रूप में समझाया। बुद्ध की दृष्टि में प्रेम, करुणा, मैत्री, होश, जागरूकता से होशपूर्वक बोधपूर्वक किया गया हर कार्य अच्छा, श्रृेष्ठ और पुण्य है। बुद्ध की दृष्टि में क्रोध, मद, बेहोशी, मूर्छा, विवेकहीनता से बोधहीनता पूर्वक किया गया कार्य बुरा, निकृष्ट और पाप है। *9. कठिन नहीं सहजता :* बुद्ध जीवन की सहजता के पक्ष में हैं, न कि असहज या कठिन या दु:खपूर्ण जीवन जीने के पक्षपाती। बुद्ध कहते हैं, कोई लक्ष्य कठिन है इस कारण वह सही ही है और इसी कारण उसे चुनोती मानकर पूरा किया जाये। यह अहंकार का भाव है। इससे अहंकार का पोषण होता है। इससे मानव जीवन में सहजता, करुणा, मैत्री समाप्त हो जाते हैं। अत: मानव जीवन का आधार सहजता, सरलता, सुगमता है मैत्रीभाव और प्राकृतिक होना चाहिये। *10. अंधानुकरण नहीं:* बुद्ध कहते हैं, मैंने जो कुछ कहा है हो सकता है, उसमें कुछ सत्य से परे हो! कुछ ऐसा हो जो सहज नहीं हो। मानव जीवन के लिये उपयुक्त नहीं हो और जीवन को सरल एवं सहज बनाने में बाधक हो, तो उसे सिर्फ इसलिये कि मैंने कहा है, मानना बुद्धानुयाई होने का सबूत नहीं है। सच्चे बुद्धानुयाई को संदेह करने और स्वयं सत्य जानने का हक है। अत: जो मेरा अंधभक्त है, वह बुद्ध कहलाने का हकदार नहीं। 🙏🏻

एक मेढक पहाड़ की चोटी पर चढ़ने का सोचता है और आगे बढ़ता है बाकी के सारे मेंढक शोर मचाने लगते हैं "ये असंभव है.. आज तक कोई नहीं चढ़ा.. ये असंभव है.. नहीं चढ़ पाओगे" मगर मेंढक आख़िर पहाड़ की चोटी पर पहुँच ही जाता है.. जानते हैं क्यूँ? क्योंकि वो मेंढक "बहरा" होता है.. और सारे मेंढकों को चिल्लाते देख सोचता है कि सारे उसका उत्साह बढ़ा रहे हैं इसलिए अगर आपको अपने लक्ष्य पर पहुंचना है तो नकारात्मक लोगों के प्रति "बहरे" हो जाइए |         ---------Thought for the Day  !!! जय श्री मदन जी  

*ब्राह्मणवाद एक लंगड़ा राजा है . . . जिसका अस्तित्व दो बैसाखी पर टिका हुआ है . . .दंगा और अंधविश्वास* . . . . .*दंगा से इन्हें सत्ता मिलती है तथा* अंधविश्वास से दौलत* *जिस दिन इनसे ये दोनो बैसाखी छीन ली जाये उसी दिन से भारत विकास के पथ पर दौड़ पड़ेगा* 🌹🌷🌻 *🙏🏻सुप्रभात🙏🏻*🌻🌷🌹

🌹🌞 शुभ👁🙏🏻👁प्रभात🌞🌹16-5 " *मिट्टी* का *मटका* और *परिवार* की *कीमत* सिर्फ *बनाने* वाले को पता होती है , *तोड़ने* वाले को नहीं।" *संघर्ष पिता से सीखीऎ..!* *संस्कार माँ से सीखऎे...!!* _*बाकी सब कुछ दुनिया सिखा देगी...!!!* 💐💐💐 *अच्छा सुनो, मदर्स डे हो गया.... अब !! *बाकी 364 दिन भी माँ का ख्याल रखना* 🙏🏻Every Day Mother's Day 👏🏾

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी एक ईश का सकल पसारा, एक ही सृष्टि का करतारा सर्वज्ञ कण कण में व्यापक,एक ही सृष्टि संचालक सर्वोच्च एक ही कर्मफलदाता,एक ही है सृष्टि निर्माता एक है नियम शिक्षएँ एक है,रूप नाम चाहे अनेक है करो व्यवहार वही औरों से,चाहो अपने तुम् जैसे एक नूर से सब जग उपजे, एक ही अंश सभी में सूझे नाम रूप में बन्धा नहीं है, प्रेम भक्ति का सार वही है भू जल अग्नि वायु समाया, नीलगगन भी जिसकी माया प्रातः पंखुरी गीत सुनाये,एक उसी की महिमा गाये नित्य प्रभाकर शीश झुकाये,तभी प्रकाशित जग कर् पाये रंग बिरंगे सुमन औ मधुवन,प्रतः तुमको करते वन्दन हे परम शक्ति हे सर्वेश्वर ,करूँ नमन पूर्ण परमेश्वर मन वुद्धि नियंत्रण करना,सदा ही अपनी शरण मे रखना कृपा तुम्हारी तुम तक आये,दया से हम सदमार्ग पाएं सदा करूँ गुणगान तुम्हारा,श्री चरणों मे प्रणाम हमारा 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

-माँ- माँ एक ऐसा शब्द हैं, जिसे सिर्फ़ बोलने से ही अपने हृदय में प्यार और ख़ुशी की लहर आ जाती हैं…और ऐसे पावन दिवस पर हर माँ को मेरा प्रणाम…🙏🏻 हैपी Mothers डे…💝

-माँ- माँ एक ऐसा शब्द हैं, जिसे सिर्फ़ बोलने से ही अपने हृदय में प्यार और ख़ुशी की लहर आ जाती हैं…और ऐसे पावन दिवस पर हर माँ को मेरा प्रणाम…🙏🏻 हैपी Mothers डे…💝

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी परम शक्ति सर्वोच्च सृष्टि में,सर्वज्ञ रहे उसकी दृष्टि में त्रिलादर्शी अन्तर्यामी है,सर्वेश्वर सबके स्वामी हैं जीव निर्जीव के निर्माता,पूर्ण परमेश्वर भाग्यविधाता सत्य प्रेम न्याय प्रतीका,कर्मफलदाता ओम सरूपा अदभुत रूप अलौकिक काया,दशों दिशाएं तुम्हारी माया भू जल अम्बर तू ही समाया, कण कण व्यापक तेरी काया निस्वार्थ प्रेम में बन्ध जाते हो,भाव रूप से मिल जाते हो ज्ञानी तुमको रहें खोजते,वन वन जंगल तुम्हें ढूंढते सरल प्रीत में विरल सदा ही,तुमको पाने की नहीं कोई विधा ही जान सका जिसे तुमने जनाया,अपनी इच्छा से अपना बनाया नहीं रूप पर रूप बनाते,अपने प्रेमी को अहसास कराते जो जन चले राह तुम्हारी,वो जन तेरा बने पुजारी काम क्रोध मद लोभ को जीते,दम्भ छोड़ वो तुझपे रीझे व्यवहार करे औरों से ऐसा,खुद को चाहे औरों से जैसा सदा करे गुणगान तुम्हारा,भक्त तुम्हे हो सबसे प्यारा सदा भक्त की लाज बचाते, एक टेर पर दौड़े आते उचित अनुचित का वोध कराते, कांटों में भी सुमन खिलाते सबके होते नहीं किसी के,लग्न मगन की तुम् हो गीते वाणी छोटी गुण का गाऊँ,श्री चरणों मे शीश झुकाऊँ 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

प्रातः नमन जय श्री मदन जी एक ही सत्य से आलोकित,धरती सूर्य अकाश एक ही नूर का फैला ,चारों ओर प्रकाश भिन्न भिन्न ज्ञान के कारण,है भिन्न भिन्न अनुभूति हरेक रूप में रहे सदा , कर्ता एक ही शक्ति चुना है जिसको साधन, करवाती अहसास सर्वज्ञ है सर्वव्यापक,तन मन रहे अभास मनमोही रूप सकार,महिमा है अपरम्पार मानष नहीं साधारण, है सृष्टि के करतार जीव निर्जीव के रचयिता,ये सबके तारनहार सत्य न्याय के है प्रतीक,पावन इनका प्यार धर्म नाम और क्षेत्र परे,ईश्वर का आधार गहन भेद इनको पाने के,करते हैं भव से पार नाम मदन इनका है प्यारा, मानकपुर में धाम हाथ जोड़ आदर सहित,चरणों मे प्रणाम 🙏👏🙏👏🙏👏🙏🙏🙏

*हो गई अच्छे दिन की शुरआत* ATM से 4 बार से अधिक पैसा निकलने पर 150 रु टैक्स और 23 रुपये सर्विस चार्ज मिलाकर कुल 173 कटेंगे .. जो नोटबन्दी के समर्थन में लम्बी लम्बी हाँक रहे थे उन बेवकूफों को एक और तोहफा। एक मार्च से बैंक में 4 ट्रांसेक्शन के बाद हर ट्रांसेक्शन पर 150 रुपये चार्ज लगेगा। जनता के गले पर एक बार में छुरा क्यों नहीं फेर देते??कमाओ तो टैक्स , बचाओ तो टैक्स और तो और बैंक में जमा कराओ तो टैक्स फिर वापस निकालो तो टैक्स ( आप सभी से आग्रह इसे आगे वारवर्ड करें ) नहीं तो सहें ।

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी जीव निर्जीव को जिसने बनाया सकल सृष्टि ही है जिसकी माया भू से लेकर नीलगगन तक कण कण में एक वही है समाया सकल सृष्टि उपकार उसी का जो परम पिता परमेश्वर है कहाया मूल आधार जो प्रत्येक जीव का अंश उसी हर प्राणी में समाया समझ किसी की कभी न आया कैसे पर्वत हिम को बनाया सूखी घास को खाकर गैया ने हम सबको कैसे दूध पिलाया भू के अंदर वो विधा कौन सी जिसने गन्ने में शक्कर घुलवाया एक कीड़े की लार ने मानव को रेशम सा अमूल्य वस्त्र पहनाया कैसे प्रातः कोयलिया गाये थिरक थिरक के मोर नचाया कहत कबीर रहीम रसखान औ मीरा उस ब्रह्म पूर्ण की फैली सब माया वो सखा सूर का ईसा का ईश्वर अल्लाह नवी का वाहेगुरु कहलाया मस्ती सूफी की कलमा कुरान का गीता के गीतों में वो एक ही गाया उसी नूर से अस्तित्व हम सबका प्यार के हर अहसास में जिसे पाया शब्द रूप नाम से असीम है सत्य न्याय का प्रतीक कहलाया कर्मफल दाता भाग्य विधाता अभेद्य अपार कोई जान न पाया जाने क्या उद्देश्य जन्म के हम सारे क्या ईश्वर ने निश्चित करवाया रहे न भटकन सत्य हम जाने इच्छा से अपनी हमे वोध कराया सत्य ज्ञान से किया प्रकाशित जलराशि वायु में वही तो समाया रंग बिरंगे सुमन फूलों बूटों में मेरा स्वामी खुदा ही मुस्काया श्री चरणों सृष्टि स्वमी के श्रद्धा प्रेम से मैंने शीश झुकाया 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी सर्वोच्च सृष्टि में एक है,सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान न्यायप्रिय प्रेम रूप,दाता दयानिधान।। नित नित तेरी वन्दना,हे मेरे करतार कर्ता धर्ता औ हर्ता,सृष्टि के सिरजनहार।। सदवुद्धि ज्ञान हमें दो, है भव के तारनहार दशों दिशाएं गाती महिमा,करती नमन हज़ार।। देवी देव सब तोहे निहारें,करते तेरी पुकार तू आराध्य भू अम्बर का,माया अपरम्पार।। नदियाँ पर्वत सागर झरने,तेरे ही गुण गाएँ शस्य श्यामला वसुन्धरा, आधार तुझी से पाये।। मानव सर्वश्रेष्ठ कृति, नित नियमों पे चल पाये जीव निर्जीव का संचालक, अपना ज्ञान कराए।। करे व्यवहार सदा औरों से ,जो स्वयं हित चाहे मृदु भाषा मीठी हो बोली,सबके मन को भाये।। किये उपकार जो दाता ने,मन में रहे आभार क्षमा याचना और प्रार्थना,सदा करे उद्धार।। विश्वनाथ तू जगन्नानाथ,हे नाथों के नाथ झुकाये मस्तक वन्दना,जोड़े दोनों हाथ।। है सर्वेश्वर पूर्ण परमेश्वर,सदा करो कल्याण तन मन मेरे सदा रहे ,श्वांस श्वांस तेरा भान।। 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी सकल सृष्टि का एक ही स्वामी सर्वशक्तिमान वो अन्तर्यामी सर्वज्ञ सर्वश्रेष्ठ सर्व्यापक एक नियन्ता वही संचालक नियम शक्तियां गुण है निराले कर्मफल प्राणी का देने वाले जीव निर्जीव के हैं निर्माता सर्वगुण सम्पन्न भाग्यविधाता मनुष्य सर्वश्रेष्ठ रचना जिसकी जो श्वांसों को है महकाता मूक अंश मानव के अन्दर जो प्राणों को आधार है देता सत्य ज्ञान प्रकाश वही है समग्र अस्त्तित्व का है प्रदाता नहीं धर्म क्षेत्र से वो है सीमित सर्वोच्च पूर्ण अजय कहलाता प्रातः मंगल वन्दन की वेला सुन्दर प्रकृति के दृश्य समाता एक है मलिक एक नियन्ता ईश्वर अल्लाह गॉड एक दाता सर्वश्रेष्ठ है मनुष्य बनाया सोचें क्या वो हमसे चाहता नेककर्म सदव्यवहार करें हम मानव धर्म सर्वोपरि होता न्याय प्रतीक किंतु करुणाकर गुणभण्डार हमें यही सिखाता चाहें जो स्वयं को करें सभी से जीवन नियम यही सिखलाता धर्म क्षेत्र हर बन्धन मुक्त है जन्म मरण मोक्ष जो देता ऊँचे पर्वत खाई झील औ सागर तरुवर झरने गुण जिसके गाता सांझ सवेरे करवद्ध वन्दना सदवुद्धि मार्ग हमें देना दाता असंख्य उपकार से रची ये सृष्टि जिसका मानव उपयोग है करता रहें आभारी अहंकार से दूर सदा श्रध्दा प्रेम से मन शीश झुकाता 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

गीता में लिखा कि आत्मा अमर है ये कभी मरती नही है ये सिर्फ एक शरीर से दूसरे शरीर मे प्रवेश करती है। तो कोई ये बता सकता है कि क्या एक आत्मा किसी ब्राह्मण के शरीर से निकल कर किसी शुद्र के शरीर मे प्रवेश करती है क्या ??? या दलित की आत्मा सिर्फ दलित के शरीर ने और ब्राह्मण की आत्मा सिर्फ ब्राह्मण के शरीर मे ???😊😊😊 यदि सभी जीवों में आत्मा है और आत्मा को ही परमात्मा बोला जाता है ( गीता में लिखा है ) अगर आत्मा की कोई जात है तो प्रमाण दीजिये ?? अगर नही दे सकते तो फिर ऊंची जाति और नीची जाति का सवाल कहाँ से आया ??? #जातिवाद ही मानवता के लिये सिर्फ केंसर है।।

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी प्रचलित जितने नाम जगत में मेरे ही असंख्य नाम है प्यारे मैं सर्वोच्च सकल सृष्टि में भ्रमित है मानष जन सारे में जी रचयिता कुल सृष्टि का रचना जीव जगत नज़ारे साधु संत गुरु वीर पीर सब देवी देव भगवान पुकारे गोल है पृथ्वी स्थिर है फिर भी दरिया पर्वत सागर वन न्यारे पठार नदियाँ और मरुस्थल सजे सुनहरी झीलों के किनारे कहीं श्वेत दूधिया हिम शैल खण्ड कहीं सतरंगी जीवन की बहारें नियमो में बन्धे सारे सौरमण्डल निश्चित गति दिशा क्रम सब सारे असंख्य है प्राणी चाहे जगत में भाषा विवेक मनुष्य हित सारे गुरुत्व उर्वरा श्रंगार दिया भू को और अंतरिक्ष में उड्डयन पसारे उलझ गया मानष अज्ञान अंधेरे भूले जीवन उद्देश्य फिर सारे परम शक्ति जड़ नहीं चेतन है चाहे ज्ञान प्रकाश हो उजाले एक ही है कर्मफलदाता जो सर्वशक्तिमान सर्वज्ञ भवतारे हे ईश्वर सर्वेश्वर पूर्ण परमेश्वर रहे चरणों में समर्पित तुम्हारे 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

Is kavita ko sabhi groups me send karen please..... ☝एक बार इस कविता को 💘दिल से पढ़िये 😋शब्द शब्द में गहराई है... ⛺जब आंख खुली तो अम्‍मा की ⛺गोदी का एक सहारा था ⛺उसका नन्‍हा सा आंचल मुझको ⛺भूमण्‍डल से प्‍यारा था 🌹उसके चेहरे की झलक देख 🌹चेहरा फूलों सा खिलता था 🌹उसके स्‍तन की एक बूंद से 🌹मुझको जीवन मिलता था 👄हाथों से बालों को नोंचा 👄पैरों से खूब प्रहार किया 👄फिर भी उस मां ने पुचकारा 👄हमको जी भर के प्‍यार किया 🌹मैं उसका राजा बेटा था 🌹वो आंख का तारा कहती थी 🌹मैं बनूं बुढापे में उसका 🌹बस एक सहारा कहती थी 🌂उंगली को पकड. चलाया था 🌂पढने विद्यालय भेजा था 🌂मेरी नादानी को भी निज 🌂अन्‍तर में सदा सहेजा था 🌹मेरे सारे प्रश्‍नों का वो 🌹फौरन जवाब बन जाती थी 🌹मेरी राहों के कांटे चुन 🌹वो खुद गुलाब बन जाती थी 👓मैं बडा हुआ तो कॉलेज से 👓इक रोग प्‍यार का ले आया 👓जिस दिल में मां की मूरत थी 👓वो रामकली को दे आया 🌹शादी की पति से बाप बना 🌹अपने रिश्‍तों में झूल गया 🌹अब करवाचौथ मनाता हूं 🌹मां की ममता को भूल गया ☝हम भूल गये उसकी ममता ☝मेरे जीवन की थाती थी ☝हम भूल गये अपना जीवन ☝वो अमृत वाली छाती थी 🌹हम भूल गये वो खुद भूखी 🌹रह करके हमें खिलाती थी 🌹हमको सूखा बिस्‍तर देकर 🌹खुद गीले में सो जाती थी 💻हम भूल गये उसने ही 💻होठों को भाषा सिखलायी थी 💻मेरी नीदों के लिए रात भर 💻उसने लोरी गायी थी 🌹हम भूल गये हर गलती पर 🌹उसने डांटा समझाया था 🌹बच जाउं बुरी नजर से 🌹काला टीका सदा लगाया था 🏯हम बडे हुए तो ममता वाले 🏯सारे बन्‍धन तोड. आए 🏯बंगले में कुत्‍ते पाल लिए 🏯मां को वृद्धाश्रम छोड आए 🌹उसके सपनों का महल गिरा कर 🌹कंकर-कंकर बीन लिए 🌹खुदग़र्जी में उसके सुहाग के 🌹आभूषण तक छीन लिए 👑हम मां को घर के बंटवारे की 👑अभिलाषा तक ले आए 👑उसको पावन मंदिर से 👑गाली की भाषा तक ले आए 🌹मां की ममता को देख मौत भी 🌹आगे से हट जाती है 🌹गर मां अपमानित होती 🌹धरती की छाती फट जाती है 💧घर को पूरा जीवन देकर 💧बेचारी मां क्‍या पाती है 💧रूखा सूखा खा लेती है 💧पानी पीकर सो जाती है 🌹जो मां जैसी देवी घर के 🌹मंदिर में नहीं रख सकते हैं 🌹वो लाखों पुण्‍य भले कर लें 🌹इंसान नहीं बन सकते हैं ✋मां जिसको भी जल दे दे ✋वो पौधा संदल बन जाता है ✋मां के चरणों को छूकर पानी ✋गंगाजल बन जाता है 🌹मां के आंचल ने युगों-युगों से 🌹भगवानों को पाला है 🌹मां के चरणों में जन्‍नत है 🌹गिरिजाघर और शिवाला है 🌹हर घर में मां की पूजा हो 🌹ऐसा संकल्‍प उठाता हूं 🌹मैं दुनियां की हर मां के 🌹चरणों में ये शीश झुकाता हूं... जितना आप अपनी माँ को प्यार करते हैं उतना शेयर करें

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी है सर्वोच्च सदा ही सनातन कण कण में वास तुम्हारा है तू सर्वज्ञ है सर्वव्यापक भवभय भंजनहारा है सदृश्य अदृश्य में दाता मेरे एक तू ही करतारा है सकल सृष्टि है रचना तुम्हारी दिशाएं तेरा उजियारा है तू ही अल्लाह गॉड वाहेगुरु ओम एक ओंकारा है राधस्वामी शक्ति अनादि शिव और निरंकारा है समय समय पर ज्ञान कराता देता भेद अपारा है मानव सर्वश्रेष्ठ प्राणी नहीं समझे सत्य अपारा है सुख दुःख यश मान प्रतिष्ठा हाथ उसी के उचारा है कर्मो का जो फल देता है एक ही तारनहारा है मानव का है धर्म यही सत्य को जाने और माने करे पहचान स्वयं अस्तित्व की क्यो भू पे गया उतारा है अंश उसी का हर प्राणी में मूक रह करता सारा है हे सर्वेश्वर पूर्ण परमेश्वर श्री चरणों में प्रणाम हमारा है 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी सदा सनातन सत्य शिव सुन्दर सकल सृष्टि में एक करुणाकर वही पूज्य और वंदनीय सर्वदा कर्मफलदाता वही रत्नाकर सर्वश्रेष्ठ सर्वशक्तिमान सदा ही करूँ प्रणाम मैं शीश झुकाकर सदवुद्धि मार्ग और लगन देना यही प्रार्थना हे पूर्ण परमेश्वर 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

Digital marketing? 🤔 ...Have you heard about it? Do YOU know why digital marketing is the next big thing in India? 🇮🇳 If you want to shift your career to Digital Marketing in 2017, or grow your business using digital... read on 👇🏽 Companies who sell products and services need to advertise where people hangout... Right? People used to watch TV, listen to Radio and read Newspapers. 📻 So companies used to advertise on these channels a lot. 💸 ...But in 2017, we the people don't use TV, Radio and Newspapers anymore. 🙈 Now, people use laptops, tablets and mobile phones! 📱 💻 Even you are reading this on the internet! I am sure that your usage of TV and Newspapers have come down because of social media and internet. Traditional media is in heavy decline. 📉 And digital media is on the rise... 👍🏼 Companies like Jio, Airtel, Vodafone etc. have increased internet usage in India 🇮🇳 So if companies keep spending money on old mediums, they will die. To survive, they need to start advertising on the digital and internet channels. ...Digital channels include Search Engines, Social Media, Internet Marketing, Mobile Marketing and so on. And that's why digital marketing is so important. 🌟 Google estimates that a total of 1 Billion Dollars will be spent on digital channels in 2017. 💰💰💰 ...That's nearly 6,900 Crore Rupees! 😮 And digital marketing spending is growing every year. 📈 Small businesses, Entrepreneurs, and Corporates will be spending this money on digital channels. And they need digital marketers to handle this spend! 😎 Even political parties and non-profit organisations are looking at digital marketing to spread awareness. So what's in it for us? 🇮🇳 If you are a student, you have a great future in the digital marketing field. If you are a working professional, you can consider shifting to the digital marketing field. If you are an entrepreneur, you should learn digital marketing to grow your business using digital channels. So how to get started with learning digital marketing? 🎓 There are plenty of resources online to learn digital marketing. You can learn for free from many places, or you can enroll in a paid course. If you do not know where to start, I can help! I will teach you digital marketing. For Free! All you need to do is visit LearnDigitalMarketing.com and sign up with your Name and Email ID. You will get 25 free lessons to your email Inbox. You will get one video lesson every 2 days. Start learning -> Sign up at LearnDigitalMarketing.com 🖋 Who am I? 🤔 What's my experience with Digital Marketing? Hi! My name is Deepak and I started my first website in 2008. It was a website about motorcycles called BikeAdvice. It started as a hobby but within 4 years, it became the No.1 motorcycle website in India with more than 1,000,000 visitors per month. ...I grew my website with SEO, Email Marketing, Social Media Marketing and Content Marketing. 🔼 Digital Marketing helped me start with a small website from home to a company of 5 authors. 🏛 I used this experience to help a lot of companies with digital marketing such as Practo, Instamojo, Exotel and Razorpay. In the course of my career I have invested more than a million dollars in digital marketing. I started writing about my experiences at a new blog DigitalDeepak and applied the same concepts to grow my blog! And within a few years it has grown to 1,00,000+ page views a month, 76,000+ Facebook Likes & 87,000+ email subscribers! I am also a columnist for Entrepreneur Magazine and YourStory and I write & publish about digital marketing. 🖊 I've written and published a book called 'How to get your dream digital marketing job' and it is available for purchase at Amazon. 📗 You can get a copy of my book for free if you sign up for my course. Start learning -> Sign up at LearnDigitalMarketing.com and get 25 video lessons delivered to your inbox for free. 👍🏼