प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी असीम विशाल है सृष्टि सारी, अनेक सौरमण्डल जिसमें भारी इस संसार मे सात द्वीप है,भू खण्डों के अनेक रूप है भारत मे भी राज्य भिन्न है,परिवेश विचार परिपाटी भिन्न है लेकिन जो सृष्ट स्वामी है,सर्वज्ञ सर्वव्यापक अन्तर्यामी है सकल सृष्टि सन्चालन करती,परम शक्ति सर्वोच्च है होती शब्द आपके जो सम्मुख है,श्री मुख अरविंद के स्वर हैं शक्ति अनादि और अनन्ता, सिद्ध करती है सर्वसमर्थता कर्ता तो सदा शक्ति ही रहती,रूप को अपने प्रयोग ही करती उसकी इच्छा सर्वोपरि है,अंदर होकर भी तन से ऊपर है रहस्य अद्यतमवाद के है ये,शरीर आत्मा साथ रहे है करो विचार सत्य को जानो,शक्ति स्वामी सृष्टि को जानो उचित नहीं हर भेद को देना,उचित वही तुमसे है कहना पुनर्जन्म की जो धारणा है,नहीं अवश्यक उसको जानना है चाहे कुछ भी मनुष्य आत्मा,रहती मगर शक्ति नियन्ता अपनी इच्छा से नहीं जन्म मृत्यु है, कर्मफल सीमित एक चक्र है उलझे देवी देव में प्राणी,ज्ञान अधूरा या अज्ञानी अज्ञान तिमिर में तन को त्यागे,क्या शक्ति को वो जन पावे मूल बिना नहीं तना सम्भवता,शाखाएं लताएं फिर है पत्ता फूल लगे तब फल आये,फल का बीज मूल बन जाये जैसे जल का वाष्प बन जाना,वारिश चक्र रूप में आना सागर पर्वत और बदल का,सूर्य का संग होता है नाता जीवात्मा तन में आये,शिशु वयस्क वृध्द बन धाये जन्म से लेकर मृत्यु को पाना,सत्य जगत में आना जाना प्रकृति के है नियम निराले,निर्जीव बीज वृक्ष को पाले ऐसा ही आध्यात्मवाद है,अदृश्य में जड़तावाद है ब्रह्म शिव साकार तना है,शाखाएं पत्ते कर्म बन्धा है ईश्वर सदा ही अर्थ को करता,धर्म विचार विविधता देता सोचो सत्य शाखा या पत्ते है,सोचो क्यों इनमें भटके है धर्म की शिक्षा मूल रूप है, तना संस्थापक का स्वरूप है भू पर तब अवतार हैं होते,महानात्मा शाखाएं बनते परम शक्ति साकार जब बनती,नहीं किसी की पूजा करती सदियों तक जब करें आराधना,सिध्द अमुक की हो उपासना हाथ जोड़ करूँ यही वन्दना,रह पाऊँ सदा आपकी शरणा 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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