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प्रातः वन्दन
जय श्री मदन जी
शक्ति ही कर्ता हरेक रूप में,सामान्य पुरुष या भूप में
शक्ति है तो शिव शिव है,शक्ति रहित शिव भी इक शव है
ज्ञान वही जो सिध्द होता,असत्य नहीं सर्वकालिक होता
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारों से,भिन्न हु गिरिजा के घरों से
आध्यात्म शिक्षा के कई केंद्र है,नहीं प्रशिक्षण कोई केंद्र है
रहे असम्भव प्रशिक्षण देना,स्वयं भु अतिरिक्त किसी का देना
जो कहना सत्यापित करना,दुरूह बहुत् प्रमाण नित देना
अद्यतमवाद के हर पहलू में, कष्ट सिलसिले हो माध्यम में
जब से शुरू कार्यप्रणाली हई है,साकार रूप साधन ही बने है
श्री ज्योति जी भी प्रायः,शिवलिंग का अध्याय बने हैं
नहीं सोच विचार किसी का,छोटा सा इतिहास है इसका
त्रिकालदर्शी के आपने गुण है,नहीं स्वभाव में विचलन है
शील स्वभाव धैर्य से पूरित,परम शक्ति दयामय निश्चित
तेरी कृपा से उद्देश्य को जाने, भू पर क्यों आये पहचाने
नेककर्म सदव्यवहार करें सबसे,भूल कभी ना हो यबी हमसे
श्री चरणों अरदास हमारी,पाये स्नेह की दृष्टि तुम्हारी
प्रातः वन्दन यही हमारा,बन के रहूँ मैं दास तुम्हारा
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