प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी सकल सृष्टि का एक ही स्वामी सर्वशक्तिमान वो अन्तर्यामी सर्वज्ञ सर्वश्रेष्ठ सर्व्यापक एक नियन्ता वही संचालक नियम शक्तियां गुण है निराले कर्मफल प्राणी का देने वाले जीव निर्जीव के हैं निर्माता सर्वगुण सम्पन्न भाग्यविधाता मनुष्य सर्वश्रेष्ठ रचना जिसकी जो श्वांसों को है महकाता मूक अंश मानव के अन्दर जो प्राणों को आधार है देता सत्य ज्ञान प्रकाश वही है समग्र अस्त्तित्व का है प्रदाता नहीं धर्म क्षेत्र से वो है सीमित सर्वोच्च पूर्ण अजय कहलाता प्रातः मंगल वन्दन की वेला सुन्दर प्रकृति के दृश्य समाता एक है मलिक एक नियन्ता ईश्वर अल्लाह गॉड एक दाता सर्वश्रेष्ठ है मनुष्य बनाया सोचें क्या वो हमसे चाहता नेककर्म सदव्यवहार करें हम मानव धर्म सर्वोपरि होता न्याय प्रतीक किंतु करुणाकर गुणभण्डार हमें यही सिखाता चाहें जो स्वयं को करें सभी से जीवन नियम यही सिखलाता धर्म क्षेत्र हर बन्धन मुक्त है जन्म मरण मोक्ष जो देता ऊँचे पर्वत खाई झील औ सागर तरुवर झरने गुण जिसके गाता सांझ सवेरे करवद्ध वन्दना सदवुद्धि मार्ग हमें देना दाता असंख्य उपकार से रची ये सृष्टि जिसका मानव उपयोग है करता रहें आभारी अहंकार से दूर सदा श्रध्दा प्रेम से मन शीश झुकाता 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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