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जय श्री मदन जी
प्रातः वन्दन
अध्यात्म जरूरी क्यों जीवन मे,क्यों मन लगे सदा सिमरन में
कौन है जो सांसो को चलाये,कौन है जो तारे चमकाए
जिसकी इच्छा सकल चराचर,शक्ति कर्ता कैसे क्यों कर
जन्म मरण पर जिसका नियंत्रण, जिसकी इच्छा भू आकर्षण
शिशु से तरुण किशोर युवा फिर, वयस्क प्रौढ़ मृत्यु का भी डर
कैसे सतत प्रक्रिया चलती,वही गर्भ में पोषण करती
जन्म पूर्व से मृत्यु पर्यन्त तक,सबकुछ शक्ति करे निर्धारित
धर्म सम्प्रदाय से मुक्त सदा ही,राष्ट्र द्वीप ना कोई बन्धन ही
जीव निर्जीव सबकी निर्माता, न्यायकरिणी कर्मफलदाता
सकल सृष्टि है युग्म रूप में,करे संचालित शक्ति तन में
नहीं श्रेष्ठ या कोई निम्नतम,आत्मा तन में है अध्यात्म
यूँ तो समाज में भ्रमित धारणा, करती नियंत्रण कभी अन्य आत्मा
अनिवार्य अध्यात्म है सृष्टि में,छिपा रहस्य ईश का इसमें
जिसने सकल सृष्टि को बनाया,जीवन मूल तत्वों को सजाया
शक्ति की भी कुछ इच्छाएं, सत्य असत्य का वोध कराएं
अनिवार्य कर्मफल है मानव का, करे स्थापित अस्तित्व अध्यात्म का
परम आवश्यक आध्यत्म जीवन मे,
रहे ईश्वर का भान हर मन में
नित्य समय कुछ दिन का निकालो,मन में उसकी छवि पुकारो
भिन्न है मत और भिन्न मान्यता,किन्तु शक्ति की है स्वीकारता
ज्ञान ध्यान भक्ति अनहद का स्वर, इच्छा शक्ति की इनसे ऊपर
अदृश्य सदृश्य भाव हृदय के,महसूस करे शक्ति हर मन के
जिसकी भक्ति भाव हो जैसा, पाया उसने प्रमाण भी वैसा
असीम रहस्य आध्यत्म की सरिता,प्रेम प्रवाह मुखर ये सविता
बड़भागी जन शरण जो पाई,स्नेह स्पर्श निकटता पाई
ज्ञान की मन में जोत जगाई, करूँ प्रणाम मैं शीश झुकाई
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