प्रातः वन्दन जय श्री मदन जी एक ईश का सकल पसारा, एक ही सृष्टि का करतारा सर्वज्ञ कण कण में व्यापक,एक ही सृष्टि संचालक सर्वोच्च एक ही कर्मफलदाता,एक ही है सृष्टि निर्माता एक है नियम शिक्षएँ एक है,रूप नाम चाहे अनेक है करो व्यवहार वही औरों से,चाहो अपने तुम् जैसे एक नूर से सब जग उपजे, एक ही अंश सभी में सूझे नाम रूप में बन्धा नहीं है, प्रेम भक्ति का सार वही है भू जल अग्नि वायु समाया, नीलगगन भी जिसकी माया प्रातः पंखुरी गीत सुनाये,एक उसी की महिमा गाये नित्य प्रभाकर शीश झुकाये,तभी प्रकाशित जग कर् पाये रंग बिरंगे सुमन औ मधुवन,प्रतः तुमको करते वन्दन हे परम शक्ति हे सर्वेश्वर ,करूँ नमन पूर्ण परमेश्वर मन वुद्धि नियंत्रण करना,सदा ही अपनी शरण मे रखना कृपा तुम्हारी तुम तक आये,दया से हम सदमार्ग पाएं सदा करूँ गुणगान तुम्हारा,श्री चरणों मे प्रणाम हमारा 🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏

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