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प्रातः वन्दन
जय श्री मदन जी
है सर्वोच्च सदा ही सनातन कण कण में वास तुम्हारा है
तू सर्वज्ञ है सर्वव्यापक भवभय भंजनहारा है
सदृश्य अदृश्य में दाता मेरे एक तू ही करतारा है
सकल सृष्टि है रचना तुम्हारी दिशाएं तेरा उजियारा है
तू ही अल्लाह गॉड वाहेगुरु ओम एक ओंकारा है
राधस्वामी शक्ति अनादि शिव और निरंकारा है
समय समय पर ज्ञान कराता देता भेद अपारा है
मानव सर्वश्रेष्ठ प्राणी नहीं समझे सत्य अपारा है
सुख दुःख यश मान प्रतिष्ठा हाथ उसी के उचारा है
कर्मो का जो फल देता है एक ही तारनहारा है
मानव का है धर्म यही सत्य को जाने और माने
करे पहचान स्वयं अस्तित्व की क्यो भू पे गया उतारा है
अंश उसी का हर प्राणी में मूक रह करता सारा है
हे सर्वेश्वर पूर्ण परमेश्वर श्री चरणों में प्रणाम हमारा है
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