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प्रातः नमन
जय श्री मदन जी
एक ही सत्य से आलोकित,धरती सूर्य अकाश
एक ही नूर का फैला ,चारों ओर प्रकाश
भिन्न भिन्न ज्ञान के कारण,है भिन्न भिन्न अनुभूति
हरेक रूप में रहे सदा , कर्ता एक ही शक्ति
चुना है जिसको साधन, करवाती अहसास
सर्वज्ञ है सर्वव्यापक,तन मन रहे अभास
मनमोही रूप सकार,महिमा है
अपरम्पार
मानष नहीं साधारण, है सृष्टि के करतार
जीव निर्जीव के रचयिता,ये सबके तारनहार
सत्य न्याय के है प्रतीक,पावन इनका
प्यार
धर्म नाम और क्षेत्र परे,ईश्वर का आधार
गहन भेद इनको पाने के,करते हैं भव से पार
नाम मदन इनका है प्यारा, मानकपुर में धाम
हाथ जोड़ आदर सहित,चरणों मे प्रणाम
🙏👏🙏👏🙏👏🙏🙏🙏
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