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प्रातः वन्दन
जय श्री मदन जी
सर्वोच्च सृष्टि में एक है,सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान
न्यायप्रिय प्रेम रूप,दाता दयानिधान।।
नित नित तेरी वन्दना,हे मेरे करतार
कर्ता धर्ता औ हर्ता,सृष्टि के सिरजनहार।।
सदवुद्धि ज्ञान हमें दो, है भव के तारनहार
दशों दिशाएं गाती महिमा,करती नमन हज़ार।।
देवी देव सब तोहे निहारें,करते तेरी पुकार
तू आराध्य भू अम्बर का,माया अपरम्पार।।
नदियाँ पर्वत सागर झरने,तेरे ही गुण गाएँ
शस्य श्यामला वसुन्धरा, आधार तुझी से पाये।।
मानव सर्वश्रेष्ठ कृति, नित नियमों पे चल पाये
जीव निर्जीव का संचालक, अपना ज्ञान कराए।।
करे व्यवहार सदा औरों से ,जो स्वयं हित चाहे
मृदु भाषा मीठी हो बोली,सबके मन को भाये।।
किये उपकार जो दाता ने,मन में रहे आभार
क्षमा याचना और प्रार्थना,सदा करे उद्धार।।
विश्वनाथ तू जगन्नानाथ,हे नाथों के नाथ
झुकाये मस्तक वन्दना,जोड़े दोनों हाथ।।
है सर्वेश्वर पूर्ण परमेश्वर,सदा करो कल्याण
तन मन मेरे सदा रहे ,श्वांस श्वांस तेरा भान।।
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