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प्रातः वन्दन
जय श्री मदन जी
जैसे वृक्ष किसी मधुवन का,महत्व उसके प्रत्येक भाग का
जड़ तना शाखाएं पत्ते,फूल फल गिरी बीज के कच्चे
पुनः बीज मिट्टी में जड़ है,तना लताएं फिर फूल फल है
आध्यात्मवाद भी जड़ जीवन की, जन्म पूर्व मृत्यु की कुंजी
मानव का भी यही चक्र है,सतत निरन्तर कर्म चक्र है
शक्ति साधारण फिर महाशक्ति, सर्वोच्च मगर रहे परम शक्ति।।
सृष्टि एक वृक्ष है भारी,जिसमें छिपे रहस्य गुणकारी।।
शक्ति जब मान्यता है देती,किसी को भी तन अपना कहती।।
या यकायक प्रकट हो जाती,स्वयं भु तब ही कहलाती।।
कर्ता तो शक्ति ही रहती,कार्य वही हर रूप में करती।।
जैसे वृक्ष का एक तना है,शेष रूप उस पर ही बना है।।
संत ऋषि मुनि औ ज्ञानी,वीर पीर गुरुओं की वाणी।।
देवी देव भगवान ये सारे,हर पल परम शक्ति को पुकारे।।
जैसे लता शाखाएँ होती है,पत्ते फूल से सज़्ज़ित होती है
फल और फूल रौनक नव लाये, फल की महिमा सब जग पाये।।
देवी देव शाखा औ लताएं,शक्ति दिव्य का वोध कराएँ।।
रूप सभी ये साधन माध्यम हैं,परम शक्ति सत्य वचन है।।
रहस्य ये गहरे अध्यात्मजगत के,भेद है है गहरे सत्य भगत के।।
पवन प्रातः ये वोध कराए, कलकल सरिता गीत यही गाए।।
शक्ति सत्य के भेद को जाने,ज्ञान से तिमिर भेद पहचाने।।
एक पूज्य सकल सृष्टि में,शेष भरम मानव दृष्टि में।।
मोह लोलुपता से मुक्त कर पाए, श्री चरणों में शीश झुकायें।।
सदवुद्धि सदमार्ग हम चाहें,प्रातः सांझ यही वन्दना गाएँ।।
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