Posts

Showing posts from August, 2018

⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈⛈ बुद्धिमान व्यक्ति वह है, जो लौटकर यह देखे कि मैं पचास साल जी लिया, कौन सी आशा अपेक्षा पूरी हुई? अगर मैंने चाहा था प्रेम, तो मुझे मिला? अगर मैंने चाहा था सुख, तो मैंने पाया? अगर मैंने चाही थी शाति, तो फलित हुई? अगर मैंने आनंद की आशा बांधी थी, तो उसकी बूंद भी मिली? मैं पचास वर्ष जी लिया हूं मैंने जो भी चाहा था, जो आशाएं लेकर जीवन की यात्रा पर निकला था, जीवन के रास्ते में वह कोई भी मंजिल घटित नहीं हुई। फिर भी मैं उन्हीं आशाओं को बांधे चला जा रहा हूं! कहीं ऐसा तो नहीं कि मेरी आशाएं ही दुराशाएं हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि जो मैं चाहता हूं वह जीवन का नियम ही नहीं है कि मिले; और वह मैंने चाहा ही नहीं, जो कि मिल सकता था। और कभी यह नहीं सोचते कि जिसे हम आज अतीत कह रहे हैं, वह भी कभी भविष्य था। उसमें भी हमने आशा के बहुत—बहुत बीज बोकर रखे थे, वे एक भी फलित नहीं हुए एक भी अंकुर नहीं निकला, एक भी फूल नहीं खिला। तो पहली तो आशा की व्यर्थता इससे बनती है कि समय बीतता चला जाता है, लेकिन जो भूल हमने कल की थी, वही हम आज भी करते हैं, वही हम कल भी करेंगे। मौत आ जाएगी, लेकिन हमारी भूल नहीं बदलेगी। 🍬🍬🍬🍬🍬🍬ओशो🍬🍬🍬🍬🍬🍬

*एक बार गुरु नानक जी से किसी ने पूछा कि 5 छिद्रों वाले घड़े को पानी से कैसे भरेंगे ?* *गुरु नानक जी ने मुस्कान के साथ उत्तर दिया -पानी में ही डूबा रहने दो ;भरा ही रहेगा !* *इसी तरह हमारी 5 इन्द्रियाँ परमात्मा में ही डूबी रहेंगी तो संसार क्या बिगाड़ लेगा* *तन की जाने, मन की जाने,* *जाने चित की चोरी ।* *उस प्रभु से क्या छिपावे* *जिसके हाथ है सब की डोरी*

दुनिया के पहले प्रधानमंत्री होंगे जिन्होंने खुद को ही इतनी सारी उपाधियां दी👇 👉चौकीदार 👉56 इंच का सीने वाला 👉फकीर 👉भागीदार 👉कामदार 👉चाय वाला 👉गंगा का बेटा 👉अटल का बेटा 👉गरीब का बेटा 👉नसीब वाला लेकिन एक बात अभी तक नहीं सुनी "अपने मां बाप का बेटा"😂😂 #dalalmedia

शब्द भी एक तरह का भोजन है। किस समय कौनसा शब्द परोसना है वो आ जाये तो दुनिया मे उससे बढ़िया रसोइया कोई नही है। शब्द का भी अपना एक स्वाद है, बोलने से पहले स्वयं चख लीजिये। अगर खुद को अच्छा नही लगे तो दूसरों को कैसे अच्छा लगेगा। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

*हमारे मन में अगर किसी को भी दुख देने का जरा सा भी भाव है , तो हम अपने लिए बीज बो रहे हो.* *क्योंकि हमारे मन में जो दुख देने का बीज है , वह हमारे ही मन की भूमि में गिरेगा.* *किसी दूसरे के मन की भूमि में नहीं गिर सकता.* *बीज तो हमारे भीतर है , वृक्ष भी हमारे भीतर ही होगा.* *फल भी हमें ही भोगना होगा....!!*

प्रेम का कोई रुप नहीं ये तो बस .... ... मुस्कराते हुए चेहरे में दिख जाता है करुणामय हृदय में बह जाता है उम्मीद भरी आँखों में उग जाता है कभी आँसू बन के भी निकलता है दो अंजानों में भी पनप जाता है न जाने कब ये दिलों में समा जाता है रुप बदल बदल के ये मिलता है रुपरेखा नहीं इसकी , अनंत में विचरता है , असंभव इसकी व्याख्या है ,,,,,, नहीं पता,,,,......,,,,, मैं कौन हूँ ,,,, कहाँ हूँ ? जहाँ प्रेम है ........मैं वहीं हूँ ।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि नोटबंदी से वापस आये नोटों की संख्या 100% से अधिक हो गई है क्योकि सिर्फ भारतीय बैको मे ही 99.3% यानी 15 लाख 31 हजार करोड़ आ गये जबकि नेपाल से 20000 करोड व भूटान के 5000 करोड़ के पुराने नोट वापस आना बाकी है मतलब चलन मे 100% वापसी मे 101% #Demonetization

💐☘💥💐☘💥💐☘💥💐 अनमोल वचनः इस बात को लेकर चिंतित मत हों कि कोई दूसरे आप को क्यों नहीं समझ पा रहे... चिंता का विषय ये होना चाहिए आप अपने आप को क्यों नहीं समझ पा रहे... जीओ जुनून के साथ और अपनी ज़िंदगी से प्यार करो... 🙏ओम् शान्ति 🙏 🌹सुप्रभात🌹 💐☘💥💐☘💥💐☘💥💐

मोदी ने पूरे देश को बर्बाद कर दिया रोजगार छीन गया बेरोजगारी बढ़ गई फर्जी योजनाओं पर अकूत धन खर्च कर देश को कंगाल बना दिया पूंजीपतियों का अरबों रुपए माफ कर नीरव मेहुल को फर्जी ढंग से बैंकों से लोन दिलवाकर और विदेश भगवाकर देश का बेड़ा गर्क कर दिया और अंधे भक्त अब भी माला जप रहे है?

इस नोटबन्दी का यही हासिल हुआ कि भाजपा के भव्य कार्यालय बन गए है और गरीब की सालो से इकठ्ठा की गई पूंजी एक झटके में स्वाहा हो गई, गृहणियों की बचत बर्बाद हो गयी, बच्चों ने अपनी गुल्लकें फोड़ दी अर्थव्यवस्था दसियो साल पीछे चली गई!

नोटबंदी के बाद 2016-17 में रिजर्व बैंक ने 500 और 2,000 रुपये के नए नोट तथा अन्य मूल्य के नोटों की छपाई पर 7,965 करोड़ रुपये खर्च किए है और कई सौ करोड़ रुपया एटीएम में इन नए नोटो को केलिब्रेट करने के लिए लगाया गया यानी सोने से घड़ावन महंगी पड़ी है!

मध्यम और छोटे व्यापारी इस चोट से उबर ही नही पाए मोदी सरकार ने कहा था कि नोटबन्दी का मुख्य मकसद कालाधन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है लेकिन कितने काले धन वालो को पकड़ा गया इसका कोई जवाब ढ़ाई सालो में मोदी सरकार नही दे पाई है ? अब सबसे बड़ी बात सुनिए जो आपको जरूर समझनी चाहिए!

लोग नोटबंदी से बुरी तरह प्रभावित हुए कई लोग लाइनों में मर गए व्यापार धंधों का जो नुकसान हुआ है उसका कोई हिसाब ही नही है कई कम्पनिया और छोटे उद्योग दीवालिया हो गये लाखों लोग अपने रोजगार से हाथ धो बैठे बड़े पैमाने पर मजदूर ओर गरीब लोग शहरों से गांवों की ओर पलायन करने पर मजबूर हो गए

यानी यह तो ऐसा ही है जैसे चूहे मारने के लिए खड़ी फसल आग लगा दी जाए, उन नदियो में बहाए गए नोटो का क्या हुआ,नेपाल आदी देशो मे जमा रकम का क्या हुआ?? जो करोड़ों रुपये भरे सूटकेस मिले थे वह कहां गए यह भी नही पता चल सका!!

8 नवंबर, 2016 को 15,417.93 अरब रुपये की वैल्यू के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट सर्कुलेशन में थे इसके बाद इनमें से जितने नोट वापस आए हैं, उनकी कुल वैल्यू 15,310.73 अरब रुपये है यानी सिर्फ 0.7 फीसदी ही नोट वापस नही आये हैं क्या सिर्फ 0.7 फीसदी ही काला धन था ?

मोदी के अंदर जरा सी भी शर्म बची हुई है तो उसे तुरंत PM पद से इस्तीफा दे देना चाहिए आज RBI की एनुअल जनरल रिपोर्ट आई है जिसमे यह बिल्कुल साफ कर दिया गया है कि नोटबंदी के दौरान बंद हुए लगभग सभी पुराने नोट वापस आ चुके है 99.3 फीसदी से भी ज्यादा पुराने नोट रिजर्व बैंक के पास लौट आए है

एक सुन्दर संदेश अवश्य पढ़ें और चाहें तो आगे पहुँचायें : एक महिला रोज मंदिर जाती थी ! एक दिन उस महिला ने पुजारी से कहा अब मैं मंदिर नही आया करूँगी ! इस पर पुजारी ने पूछा -- क्यों ? तब महिला बोली -- मैं देखती हूँ लोग मंदिर परिसर में अपने फोन से अपने व्यापार की बात करते हैं ! कुछ ने तो मंदिर को ही गपशप करने का स्थान चुन रखा है ! कुछ पूजा कम पाखंड,दिखावा ज्यादा करते हैं ! इस पर पुजारी कुछ देर तक चुप रहे फिर कहा -- सही है ! परंतु अपना अंतिम निर्णय लेने से पहले क्या आप मेरे कहने से कुछ कर सकती हैं ! महिला बोली -आप बताइए क्या करना है ? पुजारी ने कहा -- एक गिलास पानी भर लीजिए और 2 बार मंदिर परिसर के अंदर परिक्रमा लगाइए । शर्त ये है कि गिलास का पानी गिरना नहीं चाहिये ! महिला बोली -- मैं ऐसा कर सकती हूँ ! फिर थोड़ी ही देर में उस महिला ने ऐसा ही कर दिखाया ! उसके बाद मंदिर के पुजारी ने महिला से 3 सवाल पूछे - 1.क्या आपने किसी को फोन पर बात करते देखा ! 2.क्या आपने किसी को मंदिर में गपशप करते देखा ! 3.क्या किसी को पाखंड करते देखा ! महिला बोली -- नहीं मैंने कुछ भी नहीं देखा ! फिर पुजारी बोले --- जब आप परिक्रमा लगा रही थीं तो आपका पूरा ध्यान गिलास पर था कि इसमें से पानी न गिर जाए इसलिए आपको कुछ दिखाई नहीं दिया, अब जब भी आप मंदिर आयें तो अपना ध्यान सिर्फ़ परम पिता परमात्मा में ही लगाना फिर आपको कुछ दिखाई नहीं देगा ! सिर्फ भगवान ही सर्वत्र दिखाई देगें ... !! !! जाकी रही भावना जैसी .. प्रभु मूरत देखी तिन तैसी !! *जीवन मे दुःखो के लिए कौन जिम्मेदार है ?* *👉🏻ना भगवान,* *👉🏻ना गृह-नक्षत्र,* *👉🏻ना भाग्य,* *👉🏻ना रिश्तेदार,* *👉🏻ना पड़ोसी,* *👉🏻ना सरकार,* *जिम्मेदार हम स्वयं हैं* *1) आपका सरदर्द, फालतू विचार का परिणाम* *2) पेट दर्द, गलत खाने का परिणाम* *3) आपका कर्ज, जरूरत से ज्यादा खर्चे का परिणाम* *4) आपका दुर्बल /मोटा /बीमार शरीर, गलत जीवन शैली का परिणाम* *आपके कोर्ट केस, आप के अहंकार का परिणाम* *6) आपके फालतू विवाद, ज्यादा व् व्यर्थ बोलने का परिणाम* *उपरोक्त कारणों के अलावा सैकड़ों कारण है और बेवजह दोषारोपण दूसरों पर करते रहते *इसमें ईश्वर दोषी नहीं है* *अगर हम इन कष्टों के कारणों पर बारीकी से विचार करें तो पाएंगे की कहीं न कहीं हमारी अज्ञानता और खामखां की सोच ही इनके पीछे है। 🙏🏼जय श्री मदन जी🙏🏼

सूफी संत मिशन के 10 सिद्धांत 1. मानवता या आदमियत ही एकमात्र सच्चा धर्म है। 2. मानवता या आदमियत का आदर,सम्मान और सेवा एकमात्र सच्ची पूजा है। 3.आत्मबोध-आत्मज्ञान ही एकमात्र सच्ची मुक्ति या नजात है। 4. स्वंय को जानना परमात्मा को जानना है,चूंकि स्वंय से अलग कोई परमात्मा नही है।जैसे- फल से अलग कोई बीज नही है। 5. आत्मा ही परमात्मा,रूह ही खुदा,आत्मा ही सतनाम या soul ही god है,जिससे संसार प्रकट या जाहिर हुआ और उसकी ज्योति सर्वव्यापी और कण कण में है,जैसे- बीज से पेड़ प्रकट या जाहिर है और उसके कण कण में बीज की ज्योति या नूर मौजूद है। जात तेरी पाक है,हर नापाक को लेकर हम कैसे नापाक हैं,तेरी जात को लेकर। 6. मानवता या आदमियत के प्रति अहंकार,नफरत का परित्याग करना और निःस्वार्थ सेवा करने को कुर्बानी या बलिदान कहते हैं। 7. मरने के बाद मनुष्य ,मनुष्य शरीर मे ही जन्म लेगा। जैसे- शेर का बच्चा शेर, घोड़ा का बच्चा घोड़ा और फल से फल और फूल से फूल ही होगा।ये प्रकीर्ति या कुदरत का नियम है।क्योंकि जो जिस योनि से गया है, उसी योनि में आकर अपने कर्मो को भोगेगा। 8. मानव या आदमी के अंदर तमाम योनियां या मख़लूक़ात है जो अपने कर्मो से पहचाना जाता है कि वो किस योनि में थे और है। 9. प्राणी परमात्मा का परिवार है,प्राणी से प्रेम परमात्मा से प्रेम है, चूंकि प्राणी से अलग परमात्मा नही है।पूरा विश्व परमात्मा का रूप है।परंतु धर्म के नाम पर मन्दिर,मस्जिद,गिरजा,गुरुद्वारा,काशी,काबा बना कर सर्वव्यापी परमात्मा को छोटा कर दिया गया है,इसलिए लोगों की बुद्धि और समझ छोटी हो गयी है और विचार छोटे हो गए हैं। 10.तमाम मनुवंशी या औलादे आदम को आत्मा का रूप in समझकर उनकी इज्जत और खिदमत या आदर और सेवा करे और अपने आपको छोटा समझे।

सूफी परम्परा में गुरु को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 1.पीर ख़िरका-- यानि जिस गुरु से शिष्य दीक्षा ग्रहण करता है, वह पीर ख़िरका कहलाता है।पीर ख़िरका आजीवन वही रहता है, वह कभी नही बदलता। 2. पीर सोहबत-- जिस गुरु के सान्निध्य में शिष्य रहता है ,उसे पीर सोहबत कहते हैं।किसी भी कारण से यदि शिष्य अपने गुरु से दूर हो और अन्य गुरु की सोहबत में रहता हो,तो वह गुरु पीर सोहबत कहलाता है। 3. पीर तालीम-- जिस गुरु से शिष्य को ध्यान की दीक्षा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिलता है,वह पीर तालीम कहलाते हैं। एक शिष्य के पीर सोहबत और पीर तालीम कई हो सकते हैं, लेकिंपिर ख़िरका एक ही रहेगा।

🌴 *हर कण में तीर्थ है!!* *आदमी ने एक दुनिया बना ली है । जो आदमी की बनाई हुई है , उसमें तुम परमात्मा तलाश रहे हो । अगर पाना ही हो तो मंदिरों--मस्जिदों में , गिरजे--गुरुद्वारों में मत तलाशो , क्योंकि वे आदमी के बनाए हुए हैं । आदमी के बनाए हुए में परमात्मा का हस्ताक्षर नहीं है । वे मूर्तियां आदमी ने गढ़ी हैं , तुम जैसे आदमियों ने गढ़ी हैं , जिन्हें खुद भी परमात्मा का कोई पता नहीं था । जिन्हें पता है वे परमात्मा की मूर्ति नहीं गढ़ सकते , क्योंकि वह अमूर्त है , मंदिर नहीं बना सकते , क्योंकि यह सारा अस्तित्व उसका मंदिर है । जिन्हें पता है वे तीर्थ निर्मित नहीं करते । प्रत्येक कण तीर्थ है । जहां तुम हो वहां तीर्थ है , क्योंकि हर तरफ परमात्मा ने ही तुम्हे घेरा है । तुम उससे ही घिरे हो.....!!* 💠 🙏😊शुभ रात्रि

💎💠 💎💠💎💠💎💠💎 💎             *अनमोल रतन*          💎 💎💠 💎💠💎💠💎💠💎 Q. पवित्रता और पावनता में क्या अंतर है ❓❓कृपया वर्णन करे । 💎 ✍🏻पवित्रता हम आत्माओं का एक नेचुरल गुण है परन्तु पावनता एक स्टेज/अवस्था है।.......पावनता में पवित्रता समाहित है परन्तु पवित्रता में पावनता नहीँ। 💎 ✍🏻वर्तमान समय में कोई भी पावन आत्मा नही।......हम ब्राह्मण आत्मायें पवित्र है परन्तु पावन नही।.....पावन सिर्फ देवी-देवताओं को कहते हैं। 💎 ✍🏻 परन्तु ये भी सत्य है की बिना पवित्रता की धारणा के कोई भी पावन नही बन सकता।.....अतैव पवित्रता , पावन बनने का पहला स्टेप है। 💎 ✍🏻 पावन अर्थात  सतोगुणी,सतोप्रधान  ,निर्विकारी पूर्ण शुद्ध आत्मा।......देवी-देवतायें ही पावन कहे जाते हैं अभी हम सभी पावन बनने का पुरुषार्थ कर रहे। ................................................ 💎 Q :- क्या ब्रह्मचर्य का पालन ही पवित्रता है❓❓ ✍🏻 नही सिर्फ ब्रह्मचर्य के पालन को पवित्रता नही कहेंगे।ब्रह्मचर्य का अर्थ सिर्फ तन की पवित्रता से नही है।...    ..ब्रह्मचर्य तन , मन ,दृष्टि ,वृत्ति और कृति की पवित्रता को कहते हैं।......सिर्फ एक बाप के अलावा यदि कहीं और बुद्धियोग गया तो उसे भी ब्रह्मचर्य का पालन नही कहेंगे।......बाप की श्रीमत प्रमाण जो धारणाएं हैं उनको यथार्थरूप से पालन करना ही ब्रह्मचर्य है। 💎💠 💎💠💎💠💎💠💎

मोदी भक्त 3 प्रकार के है 1)साधारण भक्त जिनका सरकार से मोहभंग हो चुका है वो अपनी गलती पे पछता रहे है 2)महाभक्त जो अपना मुँह छुपा रहे है और इस महंगाई और भ्रष्टाचार को देशहित बता रहे है 3)अंधभक्त जिन्हें अभी भी अच्छे दिन का इंतज़ार है आप कौन से वाले भक्त हो? नही होतो रिट्वीट करो

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर "आपत्तिजनक टिप्पणी" करने वाली देश की प्रथम "हिंदू अदालत" की "जज" "डॉo पूजा शकुन पांण्डेय" पर देश भर में कितनी जगह से "मुकद्दमा" दर्ज हुआ है....?? क्या देश में राष्ट्र भक्त "मर" चुके हैं जो ऐसे लोगों को "सबक" नही सिखाते...?

अनुमान 2015 मोदी 2029 तक PM रहेगे अनुमान 2016 मोदी 2024 तक PM रहेगे अनुमान 2017 मोदी 2019 मे PM बनेगे 99% अनुमान 2018 मोदी 2019 मे PM बनेगे 50% 👉अनुमान 2019 मोदी प्रधानमंत्री नही बन पायेगे 100% जैसे जैसे रुपया गिर रहा है वैसे वैसे मोदी की लोकप्रियता भी गिर रही है 👉Agree RT

दुनिया विरोध करे तो तुम ङरना मत, क्यूंकि जिस पेङ पर फल लगते है, दुनिया उसे ही पत्थर मारती है......!!

भाई बहन का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं । बचपन खूबसूरत की यादों सहित।

*कृपया रोना मत* 😢😢 पिताजी जोऱ से चिल्लाते हैं । प्रिंस दौड़कर आता है, और पूछता है... क्या बात है पिताजी? पिताजी- तूझे पता नहीं है, आज तेरी बहन रौनक आ रही है? वह इस बार हम सभी के साथ अपना जन्मदिन मनायेगी.. अब जल्दी से जा और अपनी बहन को लेके आ, हाँ और सुन...तू अपनी नई गाड़ी लेकर जा जो तूने कल खरीदी है... उसे अच्छा लगेगा, प्रिंस - लेकिन मेरी गाड़ी तो मेरा दोस्त ले गया है सुबह ही... और आपकी गाड़ी भी ड्राइवर ये कहकर ले गया कि गाड़ी की ब्रेक चेक करवानी है। पिताजी - ठीक है तो तू स्टेशन तो जा किसी की गाड़ी लेकर या किराया की करके? उसे बहुत खुशी मिलेगी । प्रिंस - अरे वह बच्ची है क्या जो आ नहीं सकेगी? आ जायेगी आप चिंता क्यों करते हो कोई टैक्सी या आटो लेकर--- पिताजी - तूझे शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुए? घर मे गाड़ियाँ होते हुए भी घर की बेटी किसी टैक्सी या आटो से आयेगी? प्रिंस - ठीक है आप जाओ मुझे बहुत काम है मैं जा नहीं सकता । पिताजी - तूझे अपनी बहन की थोड़ी भी फिकर नहीं? शादी हो गई तो क्या बहन पराई हो गई ? क्या उसे हम सबका प्यार पाने का हक नहीं? तेरा जितना अधिकार है इस घर में, उतना ही तेरी बहन का भी है। कोई भी बेटी या बहन मायके छोड़ने के बाद पराई नहीं होती। प्रिंस - मगर मेरे लिए वह पराई हो चुकी है और इस घर पर सिर्फ मेरा अधिकार है। तडाक ...! अचानक पिताजी का हाथ उठ जाता है प्रिंस पर, और तभी माँ आ जाती है । मम्मी - आप कुछ शरम तो कीजिए ऐसे जवान बेटे पर हाँथ बिलकुल नहीं उठाते। पिताजी - तुमने सुना नहीं इसने क्या कहा, ? अपनी बहन को पराया कहता है ये वही बहन है जो इससे एक पल भी जुदा नहीं होती थी हर पल इसका ख्याल रखती थी। पाकेट मनी से भी बचाकर इसके लिए कुछ न कुछ खरीद देती थी। बिदाई के वक्त भी हमसे ज्यादा अपने भाई से गले लगकर रोई थी। और ये आज उसी बहन को पराया कहता है। प्रिंस -(मुस्कुराकर) बुआ का भी तो आज ही जन्मदिन है पापा...वह कई बार इस घर मे आई है मगर हर बार अॉटो से आई है..आपने कभी भी अपनी गाड़ी लेकर उन्हें लेने नहीं गये... माना वह आज वह तंगी मे है मगर कल वह भी बहुत अमीर थी । आपको मुझको इस घर को उन्होंने दिल खोलकर सहायता और सहयोग किया है। बुआ भी इसी घर से बिदा हुई थी फिर रश्मि दी और बुआ मे फर्क कैसा। रश्मि मेरी बहन है तो बुआ भी तो आपकी बहन है। पापा... आप मेरे मार्गदर्शक हो आप मेरे हीरो हो मगर बस इसी बात से मैं हरपल अकेले में रोता हूँ। की तभी बाहर गाड़ी रूकने की आवाज आती है.... तब तक पापा भी प्रिंस की बातों से पश्चाताप की आग मे जलकर रोने लगे और इधर प्रिंस भी कि रौनक दौड़कर पापा मम्मी से गले मिलती है.. लेकिन उनकी हालत देखकर पूछती है कि क्या हुआ पापा? पापा - तेरा भाई आज मेरा भी पापा बन गया है । रश्मि - ए पागल...!! नई गाड़ी न? बहुत ही अच्छी है मैंने ड्राइवर को पीछे बिठाकर खुद चलाके आई हूँ और कलर भी मेरी पसंद का है। प्रिंस - happy birthday to you दी...वह गाड़ी आपकी है और हमारे तरफ से आपको birthday gift..!! बहन सुनते ही खुशी से उछल पड़ती है कि तभी बुआ भी अंदर आती है । बुआ - क्या भैया आप भी न, ??? न फोन न कोई खबर, अचानक भेज दी गाड़ी आपने, भागकर आई हूँ खुशी से ऐसा लगा कि पापा आज भी जिंदा हैं .. इधर पिताजी अपनी पलकों मे आँसू लिये प्रिंस की ओर देखते हैं और प्रिंस पापा को चुप रहने का इशारा करता है। इधर बुआ कहती जाती है कि मैं कितनी भाग्यशाली हूँ कि मुझे बाप जैसा भैया मिला, ईश्वर करे मुझे हर जन्म मे आप ही भैया मिले... पापा मम्मी को पता चल गया था कि.. ये सब प्रिंस की करतूत है, मगर आज फिर एक बार रिश्तों को मजबूती से जुड़ते देखकर वह अंदर से खुशी से टूटकर रोने लगे। उन्हें अब पूरा यकीन था कि... मेरे जाने के बाद भी मेरा प्रिंस रिश्तों को सदा हिफाजत से रखेगा बेटी और बहन ये दो बेहद अनमोल शब्द हैं जिनकी उम्र बहुत कम होती है । क्योंकि शादी के बाद बेटी और बहन किसी की पत्नी तो किसी की भाभी और किसी की बहू बनकर रह जाती है। शायद लड़कियाँ इसी लिए मायके आती होंगी कि... उन्हें फिर से बेटी और बहन शब्द सुनने को बहुत मन करता होगा।।।।। दोस्तों कैसी लगी आपको ये कहानी जवाब जरूर दे

प्राकृतिक आपदाओं पर हुई नई खोजों के नतीजें मानें तो इन दिनों बढ़ती मांसाहार की प्रवृत्ति भूकंप और बाढ़ के लिए जिम्मेदार है। आइंस्टीन पेन वेव्ज के मुताबिक मनुष्य की स्वाद की चाहत- खासतौर पर मांसाहार की आदत के कारण प्रतिदिन मारे जाने वाले पशुओं की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। सूजडल (रूस) में पिछले दिनों हुए भूस्खलन और प्राकृतिक आपदा पर हुए एक सम्मेलन में भारत से गए भौतिकी के तीन वैज्ञानिकों ने एक शोधपत्र पढ़ा। डा. मदन मोहन बजाज, डा. इब्राहीम और डा. विजयराजसिंह के तैयार किए शोधपत्र के आधार पर कहा गया कि भारत में पिछले दिनों आए तीन बड़े भूकंपों में आइंस्टीन पैन वेव्ज (इपीडबल्यू) या नोरीप्शन वेव्ज बड़ा कारण रही है। इन तरंगों की व्याख्या यह की गई है कि कत्लखानों में जब पशु काटे जाते हैं तो उनकी अव्यक्त कराह, फरफराहट, तड़प वातावरण में भय और चिंता की लहरें उत्पन्न करती है। यों कहें कि प्रकृति अपनी संतानों की पीड़ा से विचलित होती है। अध्ययन मे बताया गया है कि प्रकृति जब ज्यादा क्षुब्ध होती है तो मनुष्य आपस में भी लड़ने भिड़ने लगते हैं और विभिन्न देश प्रदेशों में दंगे होने लगते हैं। सिर्फ स्वाद के लिए बेकसूर जीव जंतुओं की हत्या भी इस तरह के दंगों का कारण बनती है पर कभी कदा। ज्यादातर मामलों में प्राकृतिक उत्पात जैसे अतिवृष्टि, अनावृष्टि, बाढ़, भूकंप, ज्वालामुखी के विस्फोट जैसे संकट आते हैं। इस अध्ययन के मुताबिक एक कत्लखाने से जिसमें औसतन पचास जानवरों को मारा जाता है 1040 मेगावाट ऊर्जा फेंकने वाली इपीडब्लू पैदा होती है। दुनिया के करीब 50 लाख छोटे बड़े कत्लखानों में प्रतिदिन 50 लाख करोड़ मेगावाट की मारक क्षमता वाली शोक तरंगे या इपीडव्लू पैदा होती है। सम्मेलन में माना गया कि कुदरत कोई डंडा ले कर तो इन तंरगों के गुनाहगार लोगों को दंड देने नहीं निकलती। उसकी एक ठंडी सांस भी धरती पर रहने वालों को कंपकंपा देने के लिए काफी है। कत्लखानों में जब जानवरों को कत्ल किया जाता है तो बहुत बेरहमी के साथ किया जाता है बहुत हिंसा होती है बहुत अत्याचार होता है। जानवरों का कतल होते समय उनकी जो चीत्कार निकलती है, उनके शरीर से जो स्ट्रेस हारमोन निकलते है और उनकी जो शोक वेभ निकलती है वो पूरी दुनिया को तरंगित कर देती है कम्पायमान कर देती है। परीक्षण के दौरान लैबरोट्री में भी जानवरों पर ऐसा हीं वीभत्स अत्याचार होता है। जानवरों को जब कटा जाता है तोह बहुत दिनों तक उनको भूखा रखा जाता है और कमजोर किया जाता है फिर इनके ऊपर ७० डिग्री सेंट्रीगेड गर्म पानी की बौछार डाली जाती है उससे शरीर फूलना शुरु हो जाता है तब गाय भैंस तड़पना और चिल्लाने लगते हैं तब जीवित स्थिति में उनकी खाल को उतारा जाता है और खून को भी इकठ्ठा किया जाता है | फिर धीरे धीरे गर्दन काटी जाती है, एक एक अंग अलग से निकला जाता है। आज का आधुनिक विज्ञानं ने ये सिद्ध किया है के मरते समय जानवर हो या इन्सान अगर उसको क्रूरता से मारा जाता है तो उसके शरीर से निकलने वाली जो चीख पुकार है उसकी बाइब्रेसन में जो नेगेटिव वेव्स निकलते हैं वो पूरे वातावरण को बुरी तरह से प्रभावित करता है और उससे सभी मनुष्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, इससे मनुष्य में हिंसा करने की प्रवृत्ति बढ़ती है जो अत्याचार और पाप पूरी दुनिया में बढ़ा रही है | दिल्ली के दो प्रोफेसर है एक मदनमोहन जी और एक उनके सहयोगी जिन्होंने बीस साल इनपर रिसर्च किया है और उनकी रिसर्च ये कहती है कि जानवरों का जितना ज्यादा कत्ल किया जायेगा जितना ज्यादा हिंसा से मारा जायेगा उतना ही अधिक दुनिया में भूकंप आएंगे, जलजले आएंगे, प्राकृतिक आपदा आयेगी उतना ही दुनिया में संतुलन बिगड़ेगा

एक बार एक इंटरव्यू में नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि अमिताभ बच्चन का सार्थक सिनेमा में कोई खास योगदान नहीं रहा क्योंकि वो विशुद्ध व्यावसायिक अभिनेता है। इसके बाद पत्रकार ने अमिताभ बच्चन को तुरंत यह बात बताई और उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही? अमिताभ बच्चन ने कहा,जब नसीरुद्दीन शाह जैसा अंतरराष्ट्रीय अभिनेता कुछ कहता है तो आत्म मंथन करना चाहिये, प्रतिक्रिया नहीं देना चाहिये। एक बार गुलज़ार से किसी ने उनके पांच सबसे पसंदीदा गीतकारों के नामपूछे। गुलज़ार ने पांच गीतकार गिनवा दिये,उसमे जावेद अख्तर का नाम नहीं था। फिर क्या था पत्रकार ने ये बात जावेद अख्तर को बताई और प्रतिक्रिया चाही? जावेद अख्तर ने कहा,इस बात पर बस मैं ये कह सकता हूँ कि गुलज़ार साहब की लिस्ट में जगह पाने के लिए मुझे अभी और मेहनत करना होगा। जरूरी नहीं है कि कीचड़ फेंकने वाले पर कीचड़ ही फेंका जाए बोलना और प्रतिक्रिया करना जरूरी है लेकिन संयम और सभ्यता का दामन नहीं छूटना चाहिये। ईश्वर ने फूलों का सृजन किया है, कुछ तो कारण होगा फूलो का अनुसरण करने वाले ही सुखद मुकाम तक पहुंचते है।

*गुस्सा* बंद दुकान में कहीं से घूमता फिरता एक सांप घुस गया। दुकान में रखी एक आरी से टकराकर सांप मामूली सा जख्मी हो गया। घबराहट में सांप ने पलट कर आरी पर पूरी ताक़त से डंक मार दिया जिस कारण उसके मुंह से खून बहना शुरू हो गया। अब की बार सांप ने अपने व्यवहार के अनुसार आरी से लिपट कर उसे जकड़ कर और दम घोंट कर मारने की पूरी कोशिश कर डाली। अब सांप अपने गुस्से की वजह से बुरी तरह घायल हो गया। दूसरे दिन जब दुकानदार ने दुकान खोली तो सांप को आरी से लिपटा मरा हुआ पाया जो किसी और कारण से नहीं केवल अपनी तैश और गुस्से की भेंट चढ़ गया था। *कभी कभी गुस्से में हम दूसरों को हानि पहुंचाने की कोशिश करते हैं मगर समय बीतने के बाद हमें पता चलता है कि हमने अपने आप का ज्यादा नुकसान किया है।* *अब इस कहानी का सार ये है कि* अच्छी जिंदगी के लिए कभी कभी हमें, कुछ चीजों को, कुछ लोगों को, कुछ घटनाओं को, कुछ कामों को और कुछ बातों को इग्नोर करना चाहिए। *अपने आपको मानसिक मजबूती के साथ इग्नोर करने का आदी बनाइये।* *जरूरी नहीं कि हम हर एक्शन का एक रिएक्शन दिखाएं।* हमारे कुछ रिएक्शन हमें केवल नुकसान ही नहीं पहुंचाएंगे बल्कि हो सकता है कि हमारी जान ही ले लें। *सबसे बड़ी शक्ति सहन शक्ति है।*

👣👣👣👣👣👣👣👣👣 रात्री को सोते समय अपने 👣 पैरों के नीचे भी एक तकिया रख कर सोना चाहिए। इससे पैरों की थकान जल्दी से चली जाती हैं। दिमाग तक ज्यादा खून पहुंचता है। नींद भी जल्दी पूरी हो जाती है। एक सप्ताह प्रयोग करके देख लीजिए। 👣👣👣👣👣👣👣👣👣

*परमात्मा की लाठी* एक साधु वर्षा के जल में प्रेम और मस्ती से भरा चला जा रहा था, कि उसने एक मिठाई की दुकान को देखा जहां एक कढ़ाई में गरम दूध उबाला जा रहा था तो मौसम के हिसाब से दूसरी कढ़ाई में गरमा गरम जलेबियां तैयार हो रही थीं। साधु कुछ क्षणों के लिए वहाँ रुक गया, शायद भूख का एहसास हो रहा था या मौसम का असर था। साधु हलवाई की भट्ठी को बड़े गौर से देखने लगा साधु कुछ खाना चाहता था लेकिन साधु की जेब ही नहीं थी तो पैसे भला कहां से होते, साधु कुछ पल भट्ठी से हाथ सेंकनें के बाद चला ही जाना चाहता था कि नेक दिल हलवाई से रहा न गया और एक प्याला गरम दूध और कुछ जलेबियां साधु को दे दीं। मलंग ने गरम जलेबियां गरम दूध के साथ खाई और फिर हाथों को ऊपर की ओर उठाकर हलवाई के लिए प्रार्थना की, फिर आगे चल दिया। साधु बाबा का पेट भर चुका था दुनिया के दु:खों से बेपरवाह, वो फिर एक नए जोश से बारिश के गंदले पानी के छींटे उड़ाता चला जा रहा था। वह इस बात से बेखबर था कि एक युवा नव विवाहिता जोड़ा भी वर्षा के जल से बचता बचाता उसके पीछे चला आ रहा है। एक बार इस मस्त साधु ने बारिश के गंदले पानी में जोर से लात मारी। बारिश का पानी उड़ता हुआ सीधा पीछे आने वाली युवती के कपड़ों को भिगो गया उस औरत के कीमती कपड़े कीचड़ से लथपथ हो गये। उसके युवा पति से यह बात बर्दाश्त नहीं हुई। इसलिए वह आस्तीन चढ़ाकर आगे बढ़ा और साधु के कपड़ो को पकड़ कर खींच कर कहने लगा -"अंधा है?तुमको नज़र नहीं आता तेरी हरकत की वजह से मेरी पत्नी के कपड़े गीले हो गऐ हैं और कीचड़ से भर गऐ हैं?" साधु हक्का-बक्का सा खड़ा था जबकि इस युवा को साधु का चुप रहना नाखुशगवार गुज़र रहा था। महिला ने आगे बढ़कर युवा के हाथों से साधु को छुड़ाना भी चाहा, लेकिन युवा की आंखों से निकलती नफरत की चिंगारी देख वह भी फिर पीछे खिसकने पर मजबूर हो गई। राह चलते राहगीर भी उदासीनता से यह सब दृश्य देख रहे थे लेकिन युवा के गुस्से को देखकर किसी में इतनी हिम्मत नहीं हुई कि उसे रोक पाते और आख़िर जवानी के नशे मे चूर इस युवक ने, एक जोरदार थप्पड़ साधु के चेहरे पर जड़ दिया। बूढ़ा मलंग थप्पड़ की ताब ना झेलता हुआ लड़खड़ाता हुआ कीचड़ में जा गिरा। युवक ने जब साधु को नीचे गिरता देखा तो मुस्कुराते हुए वहां से चल दिया। बूढ़े साधु ने आकाश की ओर देखा और उसके होठों से निकला वाह मेरे भगवान कभी गरम दूध जलेबियां और कभी गरम थप्पड़!!! लेकिन जो तू चाहे मुझे भी वही पसंद है। यह कहता हुआ वह एक बार फिर अपने रास्ते पर चल दिया। दूसरी ओर वह युवा जोड़ा अपनी मस्ती को समर्पित अपनी मंजिल की ओर अग्रसर हो गया। थोड़ी ही दूर चलने के बाद वे एक मकान के सामने पहुंचकर रुका। वह अपने घर पहुंच गए थे। वो युवा अपनी जेब से चाबी निकाल कर अपनी पत्नी से हंसी मजाक करते हुए ऊपर घर की सीढ़ियों तय कर रहा था। बारिश के कारण सीढ़ियों पर फिसलन हो गई थी। अचानक युवा का पैर फिसल गया और वह सीढ़ियों से नीचे गिरने लगा। महिला ने बहुत जोर से शोर मचा कर लोगों का ध्यान अपने पति की ओर आकर्षित करने लगी जिसकी वजह से काफी लोग तुरंत सहायता के लिये युवा की ओर लपक, लेकिन देर हो चुकी थी। युवक का सिर फट गया था और कुछ ही देर में ज्यादा खून बह जाने के कारण इस नौजवान युवक की मौत हो चुकी थी। कुछ लोगों ने दूर से आते साधु बाबा को देखा तो आपस में कानाफूसी होने लगी कि निश्चित रूप से इस साधु बाबा ने थप्पड़ खाकर युवा को श्राप दिया है अन्यथा ऐसे नौजवान युवक का केवल सीढ़ियों से गिर कर मर जाना बड़े अचम्भे की बात लगती है। कुछ मनचले युवकों ने यह बात सुनकर साधु बाबा को घेर लिया। एक युवा कहने लगा कि - "आप कैसे भगवान के भक्त हैं जो केवल एक थप्पड़ के कारण युवा को श्राप दे बैठे। भगवान के भक्त में रोष व गुस्सा हरगिज़ नहीं होता। आप तो जरा सी असुविधा पर भी धैर्य न कर सकें।" साधु बाबा कहने लगा -"भगवान की क़सम! मैंने इस युवा को श्राप नहीं दिया।" -"अगर आप ने श्राप नहीं दिया तो ऐसा नौजवान युवा सीढ़ियों से गिरकर कैसे मर गया?" तब साधु बाबा ने दर्शकों से एक अनोखा सवाल किया कि -"आप में से कोई इस सब घटना का चश्मदीद गवाह मौजूद है?" एक युवक ने आगे बढ़कर कहा -"हाँ! मैं इस सब घटना का चश्मदीद गवाह हूँ।" साधु ने अगला सवाल किया-"मेरे क़दमों से जो कीचड़ उछला था क्या उसने युवा के कपड़ों को दागी किया था?" युवा बोला- "नहीं। लेकिन महिला के कपड़े जरूर खराब हुए थे।" मलंग ने युवक की बाँहों को थामते हुए पूछा- "फिर युवक ने मुझे क्यों मारा?" युवा कहने लगा - "क्योंकि वह युवा इस महिला का प्रेमी था और यह बर्दाश्त नहीं कर सका कि कोई उसके प्रेमी के कपड़ों को गंदा करे। इसलिए उस युवक ने आपको मारा।" युवा की बात सुनकर साधु बाबा ने एक जोरदार ठहाका बुलंद किया और यह कहता हुआ वहाँ से विदा हो गया..... *तो! भगवान की क़सम! मैंने श्राप कभी किसी को नहीं दिया लेकिन कोई है जो मुझसे प्रेम रखता है।अगर उसका यार सहन नहीं कर सका तो मेरे यार को कैसे बर्दाश्त होगा कि कोई मुझे मारे? और वो मेरा यार इतना शक्तिशाली है कि दुनिया का बड़े से बड़ा राजा भी उसकी लाठी से डरता है।* सच है। उस परमात्मा की लाठी दीख़ती नहीं और आवाज भी नहीं करती लेकिन पड़ती है तो बहुत दर्द देती है। हमारे कर्म ही हमें उसकी लाठी से बचाते हैं, बस कर्म अच्छे होने चाहियें। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Every single number thrown around by Modi and his ministers on job creation has turned out to be misleading and plain wrong. He promised 10 crore jobs but has actually taken away existing employment. #Jumla #Employment

1. पटेल की मूर्ति के लिए 4000 करोड़ मंजूर किये। 2. शिवाजी की मूर्ति के 2600 करोड़। 3. मोदी की विदेश यात्राओं के लिए 1400 करोड़। जब केरल के बाढ़ पीड़ितों की मदद की बारी आई तो दिए मात्र 500 करोड़। आरंभ में तो केवल 100 करोड़ ही मंजूर किए थे। बेशर्मी पर पुनर्चिंतन के बाद।

एक अजीब किस्म की नास्तिकता कहानी मैंने सुनी है। एक गांव में एक नास्तिक था। बड़ा तार्किक, बड़ा बौद्धिक। गांव के आस्तिक उससे हार चुके थे। गांव के महात्मा, पंडित, पुरोहित, सब उससे हाथ जोड़ लिए थे। आखिर एक परिव्राजक संन्यासी गांव में आया। उस नास्तिक ने उससे भी विवाद किया। उस संन्यासी ने कहा कि मुझसे न करो विवाद, मुझसे समय न गंवाओ; मुझे खुद ही पता नहीं है, खोज रहा हूं, कह नहीं सकता कि ईश्वर है, इसलिए यह तो कैसे कहूं कि तुम गलत हो। मुझे सत्य का खुद को ही पता नहीं है। लेकिन एक आदमी है जो जानता है। तुम वहां चले जाओ। व्यर्थ यहां समय खराब न करो—अपना और दूसरों का। उस आदमी से तुम्हें मिल जाएगा। अगर जवाब मिल सकता है तो उस आदमी से मिल सकता है। और मैं सारा देश घूम चुका हूं, बस वह एक आदमी है जो तुम्हें तृप्ति दे दे तो दे दे, न दे तो समझना कि तृप्ति तुम्हारे भाग्य में ही नहीं है। “कौन वह आदमी है?” पूछा उस नास्तिक ने। तो उसने एक फकीर का नाम लिया। चल पड़ा नास्तिक उस फकीर की तलाश में। वह फकीर एक मंदिर में ठहरा हुआ था। सुबह हुए तो देर हो चुकी थी, अब तो नौ बज रहे थे। सारी दुनिया जाग गयी थी। आलसी से आलसी भी जाग गये थे और फकीर अभी मस्त नींद में सोया हुआ था। इतना ही नहीं, शंकरजी की पिंडी पर पैर रखे हुए था। नास्तिक की तो छाती दहल गयी। उसने कहा: यह तो कोई महानास्तिक है। मैं विवाद करता हूं जरूर, ईश्वर नहीं है, ऐसे तर्क भी देता हूं लेकिन शंकरजी की पिंडी पर पैर रखकर लेटने की हिम्मत मेरी भी नहीं, पता नहीं, कौन जाने, ईश्वर हो ही, फिर पीछे झंझट आये। तर्क और विवाद तो ठीक है मगर कृत्य…ऐसा नास्तिक कृत्य तो मैं भी नहीं कर सकता। इस आदमी ने भी किसके पास भेज दिया! यह तो महागुरु है, हमसे भी बहुत आगे गया हुआ है। और यह कोई समय है संन्यासी के सोने का? सारी दुनिया जग गयी। आलसी से आलसी आदमी भी जग गया। जो रात आधी रात तक जागा था, वह भी जग गया। और ये महापुरुष अभी सो रहे हैं! और शास्त्र कहते हैं कि जाग जाना चाहिए साधक को ब्रह्ममहूर्त में। और इनके संबंध में मुझे बताया गया कि ये साधक नहीं सिद्ध हैं। झकझोर कर फकीर को जगाया। फकीर ने आंख खोली। उस नास्तिक ने पूछा कि पूछने तो बहुत प्रश्न हैं लेकिन पहले दो प्रश्न जो अभी अभी उठे हैं और ताजे हैं। पहला तो यह कि साधु संन्यासियों को ब्रह्ममहूर्त में उठना चाहिए, आप अब तक क्यों सो रहे हैं? वह फकीर हंसने लगा। उसने कहा: मैंने एक राज समझ लिया है कि जब आंख खोलो तब ब्रह्ममहूर्त। और तो कोई ब्रह्ममहूर्त है ही नहीं। जब तक आंख बंद तब तक रात। हम ब्रह्ममहूर्त में नहीं उठते, हम जब उठते हैं तब ब्रह्ममहूर्त होता है। यह बात बड़ी गहरी है। ऊपर से तो लगे कि जैसे फकीर मजाक कर रहा है, हल्की—फुलकी बात कह रहा है। लेकिन उसने सारे शास्त्रों का सार कह दिया। सारे सदगुरुओं का निचोड़ इतना ही है कि आंख खोलो तो सुबह और आंख बंद रही तो रात। नास्तिक ने कहा कि मेरा मुंह बंद कर दिया। मेरा मुंह आज तक कोई बंद नहीं कर सका। मगर मैं अब तुमसे क्या कहूं! तुम भी ठीक ही कह रहे हो। और दूसरा प्रश्न—शंकरजी की पिंडी पर पैर क्यों रखे हो? तो उस फकीर ने कहा: और कहां पैर रखूं? जहां है वही है। जहां पैर रखूं उसी के सिर पर पड़ते हैं। यह पृथ्वी भी उसी का पिंड है। यह छोटी सी पिंडी है, यह जरा बड़ा पिंड है। और बड़े पिंड हैं, महापिंड हैं सूरज है, महासूर्य है। कहां पैर रखूं? आखिर कहीं तो रखूं? पैर दिये हैं तो रखूंगा? और तू कौन है पूछने वाला? जब मुलाकात मेरी होगी तो आमने सामने बात हो लगी कि पैर क्यों दिये थे पैर दिये थे तो कहें तो रखूंगा! और फिर पिंडी में शंकर हैं, और मेरे पैरों में नहीं? पत्थर में शंकर हैं, और मुझ जीवित देह में नहीं? जब से जागा हूं तब से वही बाहर है, वही भीतर है बस वही है। ----osho---

*सिकंदर उस जल की तलाश में था, जिसे पीने से मानव अमर हो जाते हैं.!* *काफी दिनों तक दुनियाँ में भटकने के पश्चात आखिरकार उस ने वह जगह पा ही ली, जहाँ उसे अमृत की प्राप्ति हो* 👉 *उसके सामने ही अमृत जल बह रहा था, वह अंजलि में अमृत को लेकर पीने के लिए झुका ही था कि तभी एक बुढा व्यक्ती जो उस गुफा के भीतर बैठा था, जोर से बोला, रुक जा, यह भूल मत करना...!’* *बड़ी दुर्गति की अवस्था में था वह बुढा !* *सिकंदर ने कहा, ‘तू रोकने वाला कौन...?’* *बुढे ने उत्तर दिया, ..मैं अमृत की तलाश में था और यह गुफा मुझे भी मिल गई थी !, मैंने यह अमृत पी लिया !* *अब मैं मर नहीं सकता, पर मैं अब मरना चाहता हूँ... !* *देख लो मेरी हालत...अंधा हो गया हूँ, पैर गल गए हैं, *देखो...अब मैं चिल्ला रहा हूँ...चीख रहा हूँ...कि कोई मुझे मार डाले, लेकिन मुझे मारा भी नहीं जा सकता !* *अब प्रार्थना कर रहा हूँ परमात्मा से कि प्रभु मुझे मौत दे !* सिकंदर चुपचाप गुफा से बाहर वापस लौट आया, *बिना अमृत पिए !* *सिकंदर समझ चुका था कि जीवन का आनन्द ✨उस समय तक ही रहता है, जब तक हम उस आनन्द को भोगने की स्थिति में होते हैं!* *इसलिए स्वास्थ्य की रक्षा कीजिये !* *जितना जीवन मिला है,उस जीवन का भरपूर आनन्द लीजिये !* ❣🥀 *हमेशा खुश रहिये ?*❣🥀 *दुनियां में सिकंदर कोई नहीं, वक्त ही सिकंदर है..* 🙏सहृदय नमस्कार 🙏

जिओ यूनिवर्सिटी को 1000 हजार करोड़ की मदद वहीँ केरल की बाढ़ग्रस्त जनता के लिए 500 करोड़... ये कौन सा शासन है?

मैं क्या बतलाऊँ कौन हूँ ??? मैं कभी जीत हूँ तो कभी हार भी हूँ मैं मैं कभी जीवन हूँ तो कभी मृत्यु भी हूँ मैं मैं कभी अच्छा हूँ तो कभी बदनाम भी हूँ मैं मैं कभी आगाज़ हूँ तो कभी अंजाम भी हूँ मैं मैं कभी पुत्र हूँ कभी माता हूँ, तो कभी बाप भी हूँ मैं मैं कभी पर्वत, मैं कभी खाई हूँ,तो खुद की परछाई भी हूँ मैं मैं कभी भेद खोलता सत्य हूँ, तो कभी रहस्य छुपाता मौन हूँ मैं, मैं कभी दुष्ट पापी मूढ़मति आत्मा हूँ तो परम सत्य परमात्मा भी हूँ मैं मैं क्या अब अपना परिचय दूं ? मैं क्या बतलाऊँ कौन हूँ ??? मैं मैं की जिसको हवा लगी उसको दवा न दुआ लगी।

अगर बुलाने पर पाकिस्तान जाने वाले #सिद्धू धोखेबाज और गद्दार हैं तो बिना बुलाए पाकिस्तान जाने वाले प्रधानमंत्री जी क्या हैं ?

कहने वाले से सो गुणा बेहतर होता है सुनने वाला सुनने वाले से हजार गुणा बेहतर होता है गुनने वाला गुनने वाले से लाख गुणा बेहतर होता है करने वाला

जंगल का शेर अर्थात राजा कभी रोया नहीं करता हमेशा वार किया करता है!दुश्मनों पर और एक बेचारे मोदी जी जब जी चाहा तब रो लिये 2014 में बोला था चीन को लाल आंखें दिखाऊंगा!लाला आंखे दिखाने वाला व्यक्ति कभी भी रोता नहीं है!मेरे प्यारे बहनों और भाइयों जाग जाअओ अब भी समय है,देश को बचा लो।।

चार घंटे पैदल चलकर 24घंटे पहले हुई मौत को दबा देते हैं। अगले दिन अचानक घड़ियाली आँसू बहा देते हैं। धन्य हैं नर के भेष में छिपे ऐसे भेड़िए जो हर जगह अपनी औकात दिखा देते हैं। सवाल सबके जेहन मे उठ रहे हैं। मन ही मन मसोस कर रह जा रहे हैं।। "बस सही समय पर चोट होगी" जयहिंद।

अब्दुल कलाम "मुस्लिम" थे लेक़िन उन्हें एक भी हिंदू नफ़रत नही करते । अटल बिहारी बाजपेयी "हिन्दू" थे लेक़िन उन्हें एक मुस्लिम नफ़रत नही करता था ।

श्री जवाहरलाल नेहरू से अटल जी की तुलना करना देश की जनता को सोभा नही देता,, नेहरू जी एक महान व्यक्तित्व थे उनकी छवि अपने आप मे अनोखी थी,, जबकि अटल जी सिर्फ एक राजनेता थे जिन्होंने गुजरात दंगों पर चुप्पी साधकर अपनी सहिष्णुता पर सवालिया निशान लगा दिया था ! #AtalBihariVajpayee

किसी मज़ार पर एक फकीर रहता था। सैकड़ों भक्त उस मज़ार पर आकर दान-दक्षिणा चढ़ाते थे।उन भक्तों में एक बंजारा भी था। वह बहुत गरीब था,फिर भी, नियमानुसार आकर माथा टेकता,फकीर की सेवा करता,औरफिर अपने काम पर जाता,उसका कपड़े का व्यवसाय था,कपड़ों की भारी पोटली कंधों पर लिए सुबह से लेकर शाम तक गलियों में फेरी लगाता, कपड़े बेचता।एक दिन उस फकीर को उस पर दया आ गई,उसने अपना गधा उसे भेंट कर दिया।अब तो बंजारे की आधी समस्याएं हल हो गईं।वह सारे कपड़े गधे पर लादता और जब थक जातातो खुद भी गधे पर बैठ जाता।यूं ही कुछ महीने बीत गए,,एक दिन गधे की मृत्यु हो गई।बंजारा बहुत दुखी हुआ,उसने उसे उचित स्थान पर दफनाया,उसकी कब्र बनाईऔर फूट-फूट कर रोने लगा।समीप से जा रहे किसी व्यक्ति नेजब यह दृश्य देखा,तो सोचाजरूर किसी संत की मज़ार होगी।तभी यहबंजारा यहां बैठकर अपना दुख रो रहा है।यह सोचकर उस व्यक्ति ने कब्र परमाथा टेका और अपनी मन्नत हेतु वहां प्रार्थनाकी कुछ पैसे चढ़ाकर वहां से चला गया।कुछ दिनों के उपरांत ही उसव्यक्ति की कामना पूर्ण हो गई। उसनेखुशी के मारे सारे गांव मेंडंका बजाया कि अमुक स्थान पर एक पूर्ण फकीर की मज़ार है।वहां जाकर जो अरदास करो वह पूर्ण होती है।मनचाही मुरादे बख्शी जाती हैं वहां।उस दिन से उस कब्र परभक्तों का तांता लगना शुरू हो गया।दूर-दराज से भक्त अपनी मुरादे बख्शाने वहां आने लगे।बंजारे की तो चांदी हो गई,बैठे-बैठे उसे कमाई का साधन मिल गया था।एक दिन वही फकीर जिन्होंने बंजारे को अपना गधा भेंट स्वरूप दिया था वहां से गुजर रहे थे।उन्हें देखते ही बंजारे ने उनके चरण पकड़ लिएऔर बोला-"आपके गधे नेतो मेरी जिंदगी बना दी। जब तक जीवित थातब तक मेरे रोजगार में मेरी मदद करता थाऔर मरने के बादमेरी जीविका का साधन बन गया है।"फकीर हंसते हुए बोले,"बच्चा! जिस मज़ारपर तू नित्य माथा टेकने आता था,वह मज़ार इस गधे की मां की थी।"बस यूही चल रहा है ।

🔴 स्वतंत्रता ........💃 मेरे प्रिय आत्मन्! एक संध्या एक पहाड़ी सराय में एक नया अतिथि आकर ठहरा। सूरज ढलने को था, पहाड़ उदास और अंधेरे में छिपने को तैयार हो गए थे। पक्षी अपने निबिड़ में वापस लौट आए थे। तभी उस पहाड़ी सराय में वह नया अतिथि पहुंचा। सराय में पहुंचते ही उसे एक बड़ी मार्मिक और दुख भरी आवाज सुनाई पड़ी। पता नहीं कौन चिल्ला रहा था? पहाड़ की सारी घाटियां उस आवाज से...लग गई थीं। कोई बहुत जोर से चिल्ला रहा था--स्वतंत्रता, स्वतंत्रता, स्वतंत्रता। वह अतिथि सोचता हुआ आया, किन प्राणों से यह आवाज उठ रही है? कौन प्यासा है स्वतंत्रता को? कौन गुलामी के बंधनों को तोड़ देना चाहता है? कौनसी आत्मा यह पुकार कर रही? प्रार्थना कर रही? और जब वह सराय के पास पहुंचा, तो उसे पता चला, यह किसी मनुष्य की आवाज नहीं थी, सराय के द्वार पर लटका हुआ एक तोता स्वतंत्रता की आवाज लगा रहा था। वह अतिथि भी स्वतंत्रता की खोज में जीवन भर भटका था। उसके मन को भी उस तोते की आवाज ने छू लिया। रात जब वह सोया, तो उसने सोचा, क्यों न मैं इस तोते के पिंजड़े को खोल दूं, ताकि यह मुक्त हो जाए। ताकि इसकी प्रार्थना पूरी हो जाए। अतिथि उठा, सराय का मालिक सो चुका था, पूरी सराय सो गई थी। तोता भी निद्रा में था, उसने तोते के पिंजड़े का द्वार खोला, पिंजड़े के द्वार खोलते ही तोते की नींद खुल गई, उसने जोर से सींकचों को पकड़ लिया और फिर चिल्लाने लगा--स्वतंत्रता, स्वतंत्रता, स्वतंत्रता। वह अतिथि हैरान हुआ। द्वार खुला है, तोता उड़ सकता था, लेकिन उसने तो सींकचे को पकड़ रखा था। उड़ने की बात दूर, वह शायद द्वार खुला देख कर घबड़ा आया, कहीं मालिक न जाग जाए। उस अतिथि ने अपने हाथ को भीतर डाल कर तोते को जबरदस्ती बाहर निकाला। तोते ने उसके हाथ पर चोटें भी कर दीं। लेकिन अतिथि ने उस तोते को बाहर निकाल कर उड़ा दिया। निश्चिंत होकर वह मेहमान सो गया उस रात। और अत्यंत आनंद से भरा हुआ। एक आत्मा को उसने मुक्ति दी थी। एक प्राण स्वतंत्र हुआ था। किसी की प्रार्थना पूरी करने में वह सहयोगी बना। वह रात सोया और सुबह जब उसकी नींद खुली, उसे फिर आवाज सुनाई पड़ी, तोता चिल्ला रहा था--स्वतंत्रता, स्वतंत्रता। वह बाहर आया, देखा, तोता वापस अपने पिंजड़े में बैठा हुआ है। द्वार खुला है और तोता चिल्ला रहा है--स्वतंत्रता, स्वतंत्रता। वह अतिथि बहुत हैरान हुआ। उसने सराय के मालिक को जाकर पूछा, यह तोता पागल है क्या? रात मैंने इसे मुक्त कर दिया था, यह अपने आप पिंजड़े में वापस आ गया है और फिर भी चिल्ला रहा, स्वतंत्रता? सराय का मालिक पूछने लगा, उसने कहा, तुम भी भूल में पड़ गए। इस सराय में जितने मेहमान ठहरते हैं, सभी इसी भूल में पड़ जाते हैं। तोता जो चिल्ला रहा है, वह उसकी अपनी आकांक्षा नहीं, सिखाए हुए शब्द हैं। तोता जो चिल्ला रहा है, वह उसकी अपनी प्रार्थना नहीं, सिखाए हुए शब्द हैं, यांत्रिक शब्द हैं। तोता स्वतंत्रता नहीं चाहता, केवल मैंने सिखाया है वही चिल्ला रहा है। तोता इसीलिए वापस लौट आता है। हर रात यही होता है, कोई अतिथि दया खाकर तोते को मुक्त कर देता है। लेकिन सुबह तोता वापस लौट आता है। मैंने यह घटना सुनी थी। और मैं हैरान होकर सोचने लगा, क्या हम सारे मनुष्यों की भी स्थिति यही नहीं है? क्या हम सब भी जीवन भर नहीं चिल्लाते हैं--मोक्ष चाहिए, स्वतंत्रता चाहिए, सत्य चाहिए, आत्मा चाहिए, परमात्मा चाहिए? लेकिन मैं देखता हूं कि हम चिल्लाते तो जरूर हैं, लेकिन हम उन्हें सींकचों को पकड़े हुए बैठे रहते हैं जो हमारे बंधन हैं। हम चिल्लाते हैं, मुक्ति चाहिए, और हम उन्हीं बंधनों की पूजा करते रहते हैं जो हमारा पिंजड़ा बन गया, हमारा कारागृह बन गया। कहीं ऐसा तो नहीं है कि यह मुक्ति की प्रार्थना भी सिखाई गई प्रार्थना हो, यह हमारे प्राणों की आवाज न हो? अन्यथा कितने लोग स्वतंत्र होने की बातें करते हैं, मुक्त होने की, मोक्ष पाने की, प्रभु को पाने की। लेकिन कोई पाता हुआ दिखाई नहीं पड़ता। और रोज सुबह मैं देखता हूं, लोग अपने पिंजड़ों में वापस बैठे हैं, रोज अपने सींकचों में, अपने कारागृह में बंद हैं। और फिर निरंतर उनकी वही आकांक्षा बनी रहती है। सारी मनुष्य-जाति का इतिहास यही है। आदमी शायद व्यर्थ ही मांग करता है स्वतंत्रता की। शायद सीखे हुए शब्द हैं। शास्त्रों से, परंपराओं से, हजारों वर्ष के प्रभाव से सीखे हुए शब्द हैं। हम सच में स्वतंत्रता चाहते हैं? और स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपनी चेतना को स्वतंत्र करने में समर्थ नहीं हो पाता, उसके जीवन में आनंद की कोई झलक कभी उपलब्ध नहीं हो सकेगी। स्वतंत्र हुए बिना आनंद का कोई मार्ग नहीं है।

🌿 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 *👌💥: एक खूबसूरत सोच :💥👌* *✍🏻जिदंगी मे दो शब्द बहुत खास है:- 'प्रेम' और 'ध्यान'..... क्योंकि ये अस्तित्व के मंदिर के दो विराट दरवाजे हैं, चाहो तो 'प्रेम' से प्रवेश कर जाओ, चाहो तो 'ध्यान' से प्रवेश कर जाओ।* *👉🏻शर्त एक ही हैः अहंकार दोनों में छोड़ना होता है।.....* 🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾 ‼ *सुप्रभात*‼ *_🍁🙏🏻आपका दिन मंगलमय हो*🙏🏻🍁_

श्रद्धेय अटल जी के गंभीर रूप से अस्वस्थ्य होने के समाचार आ रही। उनके स्वास्थ्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना। उन्ही की एक कविता- ठन गई! मौत से ठन गई! जूझने का मेरा इरादा न था, किसी मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई। मौत की उम्र क्या ? दो पल भी नहीं, ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ, लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ? तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ, सामने वार कर फिर मुझे आज़मा। मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र, शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर। बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं, दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं। प्यार इतना परायों से मुझको मिला, न सगों से रहा कोई बाक़ी गिला। हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये, आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए। आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है, नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है। पार पाने का क़ायम मगर हौसला, देख तूफ़ाँ का तेवर, नदी तन गई। मौत से ठन गयी!! मौत से ठन गयी!!

Aaj phir nazar mili unse Jo nazar meri base the Aaj phir nazar mili unse Jo nazar meri base the Khula mann ka mere darpan Is rang mein woh saje the Aaj phir nazar mili unse Jo nazar meri base the Muskuraa bhi rha hoon Aur chupa bhi rha hoon Janne yeh kaisi arz hai Unko suna bhi rha hoon Meri khaamoshiyon mein aksar Main jinko dhoondhta hoon Meri khaamoshiyon mein aksar Main jinko dhoondhta hoon Tum wohi to nahin ho Dekh mujhko jo hanse the Aaj phir nazar mili unse Jo nazar meri base the Shikhwa-e-dil sunaayun Ya unko gale lagaayun Shikhwa-e-dil sunaayun Ya unko gale lagaayun Kya unse jaa milun main Ya unse nazar churaauun Yeh kaisi berukhi hai Yeh kaisi dillagi hai Woh saamne hain mere Aur unki hi aas jagi hai Mehka hai maan yeh mera Behki hai rooh meri Unki hi ik sada ab Faili hai har suu meri Roshan hue ab woh mujhmein Jo mujhmein aa bujhe the Aaj phir nazar mili unse Jo nazar meri base the Woh haqeeqat hi hai meri Ya mera tasavvur hai? Koi raahguzar hai meri Ya phir mera humsafar hai? Pal pal goonjta mujhmein Ban ke azaan subah ki Meri shikayaton mein shaamil Kabhi lage mujhe dua si Meri nazar mein ik nazar hai Jo dekhti har pal mujhko Sab usko meri khabar hai Meri shaam woh sehr woh Dekh jhoomta main usko Kabhi hosh to kabhi nashe se Aaj phir nazar mili unse Jo nazar meri base the Saaki ka haal to bas Saaki hi jaanta hai Ilm khuda ka sab se sachha Ghat ghat mein maanta hai Mera murshid dekho mujhko Jaam-e-nazar pila rha hai Is mauj mein woh apni Mujhko bhi mila rha hai Yeh kaisi kasak jagi hai peene ki jo lat lagi hai Zameen se falak tak lage woh hai bas wohi hai ghul rahe ab khud hi mein Sab khud se jo faasle the Aaj phir nazar mili unse Jo nazar meri base the

मौत खड़ी थी सर पर इसी इंतजार में थी ना झूकेगा ध्वज मेरा 15 अगस्त के मौके पर तू ठहर इंतजार कर लहराने दे बुलंद इसे मैं एक दिन और लड़ूंगा मौत तेरे से मंजूर नही है कभी मुझे झुके तिंरगा स्वतंत्रता के मौके पे 😢😢 🙏 *कोटि कोटि नमन* 🙏 *भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी* 💐💐🌷🌷💐💐

*इच्छाऐं सीमित* *खुशी देती हैं,,,* ✍🏻✨💕🍡✨✍🏻 *संतोष हमेशा का आनंद देता है ***

😊♥😊♥😊♥😊♥ *इंसान बहुत कमाल का है* *पसन्द करे तो बुराई नही देखता,* *नफरत करे तो अच्छाई नही देखता!*

💗🌀💗🌀💗🌀💗🌀💗🌀💗 *_⚖ कर्म एक सीख_* *_छोटी सी कहानी 📚_* _🌷एक भिखारी रोज एक दरवाजें पर जाता और भिख के लिए आवाज लगाता, और जब घर मालिक बाहर आता तो उसे गंदी_गंदी गालिया और ताने देता, मर जाओ, काम क्यूं नही करतें, जीवन भर भीख मांगतें रहोगे, कभी_कभी गुस्सें में उसे धकेल भी देता, पर भिखारी बस इतना ही कहता, ईश्वर तुम्हारें पापों को क्षमा करें।_ _🌷एक दिन सेठ बड़े गुस्सें में था, शायद व्यापार में घाटा हुआ था, वो भिखारी उसी वक्त भीख मांगने आ गया, सेठ ने आओ देखा ना ताओ, सीधा उसे पत्थर से दे मारा, भिखारी के सर से खून बहने लगा, फिर भी उसने सेठ से कहा ईश्वर तुम्हारें पापों को क्षमा करें, और वहां से जाने लगा, सेठ का थोड़ा गुस्सा कम हुआ, तो वहां सोचने लगा मैंने उसे पत्थर से भी मारा पर उसने बस दुआ दी, इसके पीछे क्या रहस्य है जानना पड़ेगा, और वहां भिखारी के पीछे चलने लगा।_ _🌷भिखारी जहाँ भी जाता सेठ उसके पीछे जाता, कही कोई उस भिखारी को कोई भीख दे देता तो कोई उसे मारता, जालिल करता गालियाँ देता, पर भिखारी इतना ही कहता, ईश्वर तुम्हारे पापों को क्षमा करें, अब अंधेरा हो चला था, भिखारी अपने घर लौट रहा था, सेठ भी उसके पीछे था, भिखारी जैसे ही अपने घर लौटा, एक टूटी फूटी खाट पे, एक बुढिया सोई थी, जो भिखारी की पत्नी थी, जैसे ही उसने अपने पति को देखा उठ खड़ी हुई और भीख का कटोरा देखने लगी, उस भीख के कटोरे मे मात्र एक आधी बासी रोटी थी, उसे देखते ही बुढिया बोली बस इतना ही और कुछ नही, और ये आपका सर कहा फूट गया?_ _🌷भिखारी बोला, हाँ बस इतना ही किसी ने कुछ नही दिया सबने गालिया दी, पत्थर मारें, इसलिए ये सर फूट गया, भिखारी ने फिर कहा सब अपने ही पापों का परिणाम हैं, याद है ना तुम्हें, कुछ वर्षो पहले हम कितने रईस हुआ करते थे, क्या नही था हमारे पास, पर हमने कभी दान नही किया, याद है तुम्हें वो अंधा भिखारी, बुढिया की ऑखों में ऑसू आ गये और उसने कहा हाँ, कैसे हम उस अंधे भिखारी का मजाक उडाते थे, कैसे उसे रोटियों की जगह खाली कागज रख देते थे, कैसे हम उसे जालिल करते थे, कैसे हम उसे कभी_कभी मार वा धकेल देते थे, अब बुढिया ने कहा हाँ सब याद है मुजे, कैसे मैंने भी उसे राह नही दिखाई और घर के बनें नालें में गिरा दिया था, जब भी वहाँ रोटिया मांगता मैंने बस उसे गालियाँ दी, एक बार तो उसका कटोरा तक फेंक दिया।_ _🌷और वो अंधा भिखारी हमेशा कहता था, तुम्हारे पापों का हिसाब ईश्वर करेंगे, मैं नही, आज उस भिखारी की बद्दुआ और हाय हमें ले डूबी।_ _🌷फिर भिखारी ने कहा, पर मैं किसी को बद्दुआ नही देता, चाहे मेरे साथ कितनी भी जात्ती क्यू ना हो जाए, मेरे लब पर हमेशा दुआ रहती हैं, मैं अब नही चाहता, की कोई और इतने बुरे दिन देखे, मेरे साथ अन्याय करने वालों को भी मैं दुआ देता हूं, क्यूकि उनको मालूम ही नही, वो क्या पाप कर रहें है, जो सीधा ईश्वर देख रहा हैं, जैसी हमने भुगती है, कोई और ना भुगते, इसलिए मेरे दिल से बस अपना हाल देख दुआ ही निकलती हैं।_ _🌷सेठ चुपके-चुपके सब सुन रहा था, उसे अब सारी बात समझ आ गयी थी, बुढे-बुढिया ने आधी रोटी को दोनो मिलकर खाया, और प्रभु की महिमा है बोल कर सो गये।_ _🌷अगले दिन, वहाँ भिखारी भिख मांगने सेठ कर यहाँ गया, सेठ ने पहले से ही रोटिया निकल के रखी थी, उसने भिखारी को दी और हल्की से मुस्कान भरे स्वर में कहा, माफ करना बाबा, गलती हो गयी, भिखारी ने कहा, ईश्वर तुम्हारा भला करे, और वो वहाँ से चला गया।_ _🌷सेठ को एक बात समझ आ गयी थी, इंसान तो बस दुआ-बद्दुआ देते है पर पूरी वो ईश्वर वो जादूगर कर्मो के हिसाब से करता हैं।_ _🌷 हो सके तो बस अच्छा करें, वो दिखता नही है तो क्या हुआ, सब का हिसाब पक्का रहता है उसके पास।_ 💗🌀💗🌀💗🌀💗🌀💗🌀💗

मेरी सूरति सुहागन जाग री। का तू सोबे मोह नींद में उठके भजन बीच लाग री। अनहद शबद सुनो चित्त देके झड़त मधुर धुन राग री। चरण शीश दे विनती करियो पाओगी अटल सुहाग री। कहत कबीर सुनो भाई साधो जगत पीठ दे भाग री। मेरी सुरति सुहागन बाग री।

*एक फ़क़ीर से जब मैंने कहा आज़ादी मुबारक हो* *फ़क़ीर ज़ोर ज़ोर से हसने लगा और कहने लगा कि -* *सांसारिक तौर पर कहूँ तो ये बाहरी आज़ादी मुबारक हो, लेकिन अगर सिर्फ तुझे देख कर कहूँ तो तुम आज़ाद हुए कब हो* *तुम गुलाम, तुम्हारी रूह कैद और गुलाम तो सिर्फ गुलामी ही कर सकता है जो तुम बखूबी कर भी रहे हो फिर तुझे कैसे कहूँ कि आज़ादी मुबारक हो* *तुम सन्तोष तो चाहते हो लेकिन मन का आदेश तुम्हे बिना रुके सिर्फ दौड़ाया जा रहा है और तुम दौड़ते जा रहे हो.* *फिर तुम आज़ाद कैसे* *तुम शांति तो चाहते लेकिन, मन का हुकुम तुझे दंगो फसादों, निंदा और चुगली में उलझाया जा रहा है* *फिर तुम आज़ाद कैसे* *तुम सत्मार्ग तो चाहते हो, लेकिन मन के कहे तुम कुमार्ग पर चलने को लाचार और विवश हो* *फिर तुम आज़ाद कैसे* *तुम तो परमात्मा से मिलाप भी चाहते हो लेकिन मन के हुकुम के चलते तुम खुद को दुनियाँ के रंग तमाशों में गुमराह किये जा रहे हो* *फिर तुम आज़ाद कैसे* *तुम मालिक की भजन बन्दगी भी करना चहते हो लेकिन मन ने तुझे कहा - ये सब मुझे नही भाता, छोड़ ये सब और तूने छोड़ भी दिया* *फिर तुम आज़ाद कैसे* *तुम रूह को ऊपर उठाने की कोशिश करना चाहते हो, लेकिन मन तुझसे बाहरी कर्मकाण्ड करवा कर तुम्हारी कोशिश को दबा देता है* *फिर तुम आज़ाद कैसे* *तुम जाना कहीं और चाहते हो लेकिन मन अपने आदेश से तुम्हे ले कहीं और जाता है। तुम तो एक गुलाम ही हुए ना* *फिर तुम आज़ाद कैसे* *फिर आखरी में उस फकीर ने कहा जिस दिन तुम मन की गुलामी से आज़ाद हो कर रूह को मन की ज़ंजीरों से रिहा कर लोगे* *उस दिन ये फ़क़ीर तुझे सच्चे दिल से कहेगा कि ऐ प्यारे तुझे आज़ादी मुबारक हो*

मेरे सामने ही एक पूरी फैमिली बैठी थी। मम्मी, पापा, बेटा और बेटी। हमारी टेबल उनकी टेबल के पास ही थी। हम अपनी बातें कर रहे थे, वो अपनी। पापा खाने का ऑर्डर करने जा रहे थे। वो सभी से पूछ रहे थे कि कौन क्या खाएगा? बेटी ने कहा बर्गर। मम्मी ने कहा डोसा। पापा खुद बिरयानी खाने के मूड में थे। पर बेटा तय नहीं कर पा रहा था। वो कभी कहता बर्गर, कभी कहता कि पनीर रोल खाना है। पापा कह रहे थे कि तुम ठीक से तय करो कि क्या लोगे? अगर तुमने पनीर रोल मंगाया, तो फिर दीदी के बर्गर में हाथ नहीं लगाओगे। बस फाइनल तय करो कि तुम्हारा मन क्या खाने का है ? हमारे खाने का ऑर्डर आ चुका था। पर मेरे बगल वाली फैमिली अभी उलझन में थी। बेटे ने कहा कि वो तय नहीं कर पा रहा कि क्या खाए। मां बोल रही थी कि तुम थोड़ा-थोड़ा सभी में से खा लेना। अपने लिए कोई एक चीज़ मंगा लो। पर बेटा दुविधा में था। पापा समझा रहे थे कि इतना सोचने वाली क्या बात है ? कोई एक चीज़ मंगा लो। जो मन हो, वही ले लो। पर लड़का सच में तय नहीं कर पा रहा था। वो बार-बार बोर्ड पर बर्गर की ओर देखता, फिर पनीर रोल की ओर। मुझे लग रहा था कि उसके पापा ऐसा क्यों नहीं कह देते कि ठीक है, एक बर्गर ले लो और एक पनीर रोल भी। उनके बीच चर्चा चल रही थी। पापा बेटे को समझाने में लगे थे कि कोई एक चीज़ ही आएगी। मन को पक्का करो। *आखिर में बेटे ने भी बर्गर ही कह दिया।* जब उनका खाना चल रहा था, हमारा खाना पूरा हो चुका था। कुर्सी से उठते हुए अचानक मेरी नज़र लड़के के पापा से मिली। उठते-उठते मैं उनके पास चला गया और हैलो करके अपना परिचय दिया। बात से बात निकली। मैंने उनसे कहा कि मन में एक सवाल है, अगर आप कहें तो पूछूं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “पूछिए।” "आपका बेटा तय नहीं कर पा रहा था कि वो क्या खाए। वो बर्गर और पनीर रोल में उलझा था। मैंने बहुत देर तक देखा कि आप न तो उस पर नाराज़ हुए, न आपने कोई जल्दी की। न आपने ये कहा कि आप दोनों चीज़ ले आते हैं। मैं होता तो कह देता कि दोनों चीज़ ले आता हूं, जो मन हो खा लेना। बाकी पैक करा कर ले जाता।" उन्होंने कहा, “ये बच्चा है। इसे अभी निर्णय लेना सीखना होगा। दो चीज़ लाना बड़ी बात नहीं थी। बड़ी बात है, इसे समझना होगा कि ज़िंदगी में दुविधा की गुंजाइश नहीं होती। *फैसला लेना पड़ता है मन का क्या है, मन तो पता नहीं क्या-क्या करने को करता है। पर कहीं तो मन को रोकना ही होगा।* अभी नहीं सिखा पाया तो कभी ये कभी नहीं सीख पाएगा। “इसे ये भी सिखाना है कि *जो चाहा, उसे संतोष से स्वीकार करो।* इसीलिए मैं बार-बार कह रहा था कि अपनी इच्छा बताओ। *इच्छा भी सीमित होनी चाहिए।* “और एक बात, इसे समझाता हूं कि *जो एक चीज़ पर फोकस नहीं कर पाते, वो हर चीज़ के लिए मचलते हैं।* *और सच ये है कि हर चीज़ न किसी को मिलती है, न मिलेगी।”*

🔻 नदी में हाथी की लाश बही जा रही थी। 🔸एक कौए ने लाश देखी, तो प्रसन्न हो उठा, तुरंत उस पर आ बैठा। 🔸यथेष्ट मांस खाया। 🔸नदी का जल पिया। 🔸उस लाश पर इधर-उधर फुदकते हुए कौए ने परम तृप्ति की डकार ली। वह सोचने लगा, अहा! यह तो अत्यंत सुंदर यान है, यहां भोजन और जल की भी कमी नहीं। 🔸फिर इसे छोड़कर अन्यत्र क्यों भटकता फिरूं? 🔸कौआ नदी के साथ बहने वाली उस लाश के ऊपर कई दिनों तक रमता रहा। भूख लगने पर वह लाश को नोचकर खा लेता, प्यास लगने पर नदी का पानी पी लेता। 🔸अगाध जलराशि, उसका तेज प्रवाह, किनारे पर दूर-दूर तक फैले प्रकृति के मनोहरी दृश्य-इन्हें देख-देखकर वह विभोर होता रहा। 🔸नदी एक दिन आखिर महासागर में मिली। वह मुदित थी कि उसे अपना गंतव्य प्राप्त हुआ। 🔸सागर से मिलना ही उसका चरम लक्ष्य था, किंतु उस दिन लक्ष्यहीन कौए की तो बड़ी दुर्गति हो गई। चार दिन की मौज-मस्ती ने उसे ऐसी जगह ला पटका था, जहां उसके लिए न भोजन था, न पेयजल और न ही कोई आश्रय। 🔸सब ओर सीमाहीन अनंत खारी जल-राशि तरंगायित हो रही थी। 🔸कौआ थका-हारा और भूखा-प्यासा कुछ दिन तक तो चारों दिशाओं में पंख फटकारता रहा, अपनी छिछली और टेढ़ी-मेढ़ी उड़ानों से झूठा रौब फैलाता रहा, किंतु महासागर का ओर-छोर उसे कहीं नजर नहीं आया। 🔸आखिरकार थककर, दुख से कातर होकर वह सागर की उन्हीं गगनचुंबी लहरों में गिर गया। एक विशाल मगरमच्छ उसे निगल गया। 🔸शारीरिक सुख में लिप्त मनुष्यों की भी गति उसी कौए की तरह होती है, जो आहार और आश्रय को ही परम गति मानते हैं और अंत में अनन्त संसार रूपी सागर में समा जाते है। 🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸🔸Copied post ...

*🤔Surprise Test🤔* एक प्रोफ़ेसर अपनी क्लास में आते ही बोले, ........“चलिए,आज आप सभी का *Surprise Test* हो जाय।" सुनते ही घबराहट फैल गई *Students* में! कुछ किताबों के पन्ने पलटने लगे तो कुछ लगे पढ़ने सर के दिए नोट्स। “ये सब कुछ काम नहीं आएगा….”, प्रोफेसर साहब मुस्कुराते हुए बोले, *Questionpaper* .............रख रहा हूँ आपके सामने, जब सारे पेपर बट जाएं तभी आप उसे पलट कर देखें।" बाँट दिए गए पेपर्स सभी *Students* को। “ठीक है ! अब आप पेपर देख सकते हैं।"बोले प्रोफेसर साहब। अगले ही क्षण सभी *Question paper* को 😌😌😌 निहार रहे थे, *लेकिन यह क्या?* .............कोई प्रश्न था ही नहीं उस पेपर में ! था तो *White* पेपर पर केवल एक *Black* स्पॉट⚫ *"यह क्या सर?* इसमें तो *Question* है ही नहीं!", एक छात्र खड़ा होकर बोला । “जो भी है आपके सामने है। आपको बस इसी को *Explain* करना है।लेकिन!ध्यान रहे इसके लिए आपके पास केवल 10 मिनट ही हैं *And ur time starts now.*" चुटकी बजाते 😊 मुस्कुराते हुए बोले प्रोफेसर। कोई चारा न था उन हैरान *Students* के पास। वे जुट गए उस अजीब से प्रश्न का *Answer* लिखने में। 10 मिनट बीतते ही प्रोफेसर साहब ने फिर से बजाई चुटकी *Time is over.*और लगे *Answer Sheets* collect करने। *Students* अभी भी हैरान परेशान। प्रोफेसर साहब ने सभी *Answer Sheets* चैक कीं। सभी ने ⚫ *Black स्पॉट* ⚫ को अपनी तरह से समझाने की कोशिश की थी, लेकिन किसी ने भी उस स्पॉट के चारों ओर मौजूद *White Space* के बारे में लिखने की जहमत ही नहीं उठाई। प्रोफ़ेसर साहब गंभीर होते हुए बोले,“इस *Test* का आपके *Academics* से कोई लेना-देना नहीं है, ना ही मैं इसके कोई *Marks* देने वाला हूँ। इस *Test* के पीछे मेरा एक ही मकसद है.......... ...............मैं आपको जीवन की एक अद्भुत सच्चाई बताना चाहता हूँ। देखिये! यह पेपर 99% *White*है…... .........लेकिन आप में से किसी ने भी इसके बारे में नहीं लिखा और अपना 100% *Answer* केवल उस एक चीज को *Explain* करने में लगा दिया जो मात्र 1% है…......... .............. यही बात हमारी *Life* में भी देखने को मिलती है।......… .............. *Problems* हमारे जीवन का एक छोटा सा हिस्सा होती हैं, लेकिन हम अपना पूरा ध्यान इन्हींपर लगा देते हैं…..... ...........कोई दिन रात अपने *Looks* को लेकर परेशान रहता है तो कोई अपने *carrier* को लेकर चिंता में डूबा रहता है, तो कोई पैसों का रोना रोता रहता है,कोई दूसरे की छोटी सी गलती को अपने दिमाग में रखे रखता है। क्यों नहीं हम अपनी *Blessings Count* कर खुश होते हैं…..... ..............क्यों नहीं हम पेट भर खाने के लिए उस सर्व शक्तिवान प्रभु को *Thanks* कहते हैं….......? क्यों नहीं हम अपनी प्यारी सी फैमिली के लिए शुक्रगुजार होते हैं….....? क्यों नहीं हम *Life* की उन 99% चीजों की तरफ ध्यान देते जो सचमुच हमारे जीवन को अच्छा बनाती हैं.........? क्यों नहीं हम अपने मित्रों सम्बन्धियों की *Mistakes* को *Ignore* कर अपने *Relations* को टूटने से बचाते है..........? *Students* प्रोफेसर साहब की दी गई इस सीख से गदगद थे। आईये आज से ही हम *Life* की *Problems* को ज्यादा *Seriously* लेना छोडें,मित्रों/सम्बन्धियों की *Mistakes* को भूलें और जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को.......... ........... *ENJOY करना सीखें तभी हम ज़िन्दगी को सही मायने में जी पायेंगे......* सही है न ✅✅✅

🙏🙏🙏🙏 *धरती का श्रृंगार वृक्ष हैं*। प्राणवायु दे रहे सभी को, ऐसे परम उदार वृक्ष हैं। ईश्वर के अनुदान वृक्ष हैं, फल-फूलों की खान वृक्ष हैं। मूल्यवान औषधियां देते, ऐसे दिव्य महान वृक्ष हैं। देते शीतल छांव वृक्ष हैं, रोकें थकते पांव वृक्ष हैं। लाखों जीव बसेरा करते, जैसे सुंदर गांव वृक्ष हैं। जनजीवन के साथ वृक्ष हैं, खुशियों की बारात वृक्ष हैं। योगदान से इस धरती पर, ले आते वरदान वृक्ष हैं। जीव-जगत की भूख मिटाते, ये सुंदर फलदार वृक्ष हैं। जीवन का आधार वृक्ष हैं, धरती का श्रृंगार वृक्ष हैं। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 *आओ हम सब लोग मिल तरुपुत्र और तरु मित्र बनाये* सावन में एक पेड़ जरूर लगाये! 🙏🙏🙏 *

*एक सूफी कहानी : -* एक फकीर जो एक वृक्ष के नीचे ध्यान कर रहा था, रोज एक लकड़हारे को लकड़ी काटते ले जाते देखता था। एक दिन उससे कहा कि सुन भाई, दिन— भर लकड़ी काटता है, दो जून रोटी भी नहीं जुट पाती। तू जरा आगे क्यों नहीं जाता। वहां आगे चंदन का जंगल है। एक दिन काट लेगा, सात दिन के खाने के लिए काफी हो जाएगा। गरीब लकड़हारे को भरोसा तो नहीं आया, क्योंकि वह तो सोचता था कि जंगल को जितना वह जानता है और कौन जानता है! जंगल में ही तो जिंदगी बीती। लकड़ियां काटते ही तो जिंदगी बीती। यह फकीर यहां बैठा रहता है वृक्ष के नीचे, इसको क्या खाक पता होगा? मानने का मन तो न हुआ, लेकिन फिर सोचा कि हर्ज क्या है, कौन जाने ठीक ही कहता हो! फिर झूठ कहेगा भी क्यों? शांत आदमी मालूम पड़ता है, मस्त आदमी मालूम पड़ता है। कभी बोला भी नहीं इसके पहले। एक बार प्रयोग करके देख लेना जरूरी है। तो गया। लौटा फकीर के चरणों में सिर रखा और कहा कि मुझे क्षमा करना, मेरे मन में बड़ा संदेह आया था, क्योंकि मैं तो सोचता था कि मुझसे ज्यादा लकड़ियां कौन जानता है। मगर मुझे चंदन की पहचान ही न थी। मेरा बाप भी लकड़हारा था, उसका बाप भी लकड़हारा था। हम यही काटने की, जलाऊ—लकड़ियां काटते—काटते जिंदगी बिताते रहे, हमें चंदन का पता भी क्या, चंदन की पहचान क्या! हमें तो चंदन मिल भी जाता तो भी हम काटकर बेच आते उसे बाजार में ऐसे ही। तुमने पहचान बताई, तुमने गंध जतलाई, तुमने परख दी। जरूर जंगल है। मैं भी कैसा अभागा! काश, पहले पता चल जाता! फकीर ने कहा कोई फिक्र न करो, जब पता चला तभी जल्दी है। जब घर आ गए तभी सबेरा है। दिन बड़े मजे में कटने लगे। एक दिन काट लेता, सात— आठ दिन, दस दिन जंगल आने की जरूरत ही न रहती। एक दिन फकीर ने कहा; मेरे भाई, मैं सोचता था कि तुम्हें कुछ अक्ल आएगी। जिंदगी— भर तुम लकड़ियां काटते रहे, आगे न गए; तुम्हें कभी यह सवाल नहीं उठा कि इस चंदन के आगे भी कुछ हो सकता है? उसने कहा; यह तो मुझे सवाल ही न आया। क्या चंदन के आगे भी कुछ है? उस फकीर ने कहा : चंदन के जरा आगे जाओ तो वहां चांदी की खदान है। लकडिया—वकडिया काटना छोड़ो। एक दिन ले आओगे, दो—चार छ: महीने के लिए हो गया। अब तो भरोसा आया था। भागा। संदेह भी न उठाया। चांदी पर हाथ लग गए, तो कहना ही क्या! चांदी ही चांदी थी! चार—छ: महीने नदारद हो जाता। एक दिन आ जाता, फिर नदारद हो जाता। लेकिन आदमी का मन ऐसा मूढ़ है कि फिर भी उसे खयाल न आया कि और आगे कुछ हो सकता है। फकीर ने एक दिन कहा कि तुम कभी जागोगे कि नहीं, कि मुझी को तुम्हें जगाना पड़ेगा। आगे सोने की खदान है मूर्ख! तुझे खुद अपनी तरफ से सवाल, जिज्ञासा, मुमुक्षा कुछ नहीं उठती कि जरा और आगे देख लूं? अब छह महीने मस्त पड़ा रहता है, घर में कुछ काम भी नहीं है, फुरसत है। जरा जंगल में आगे देखकर देखूं यह खयाल में नहीं आता? उसने कहा कि मैं भी मंदभागी, मुझे यह खयाल ही न आया, मैं तो समझा चांदी, बस आखिरी बात हो गई, अब और क्या होगा? गरीब ने सोना तो कभी देखा न था, सुना था। फकीर ने कहा : थोड़ा और आगे सोने की खदान है। और ऐसे कहानी चलती है। फिर और आगे हीरों की खदान है। और ऐसे कहानी चलती है। और एक दिन फकीर ने कहा कि नासमझ, अब तू हीरों पर ही रुक गया? अब तो उस लकड़हारे को भी बडी अकड़ आ गई, बड़ा धनी भी हो गया था, महल खड़े कर लिए थे। उसने कहा अब छोड़ो, अब तुम मुझे परेशांन न करो। अब हीरों के आगे क्या हो सकता है? उस फकीर ने कहा. *हीरों के आगे मैं हूं। तुझे यह कभी खयाल नहीं आया कि यह आदमी मस्त यहां बैठा है, जिसे पता है हीरों की खदान का, वह हीरे नहीं भर रहा है, इसको जरूर कुछ और आगे मिल गया होगा! हीरों से भी आगे इसके पास कुछ होगा, तुझे कभी यह सवाल नहीं उठा?* *रोने लगा वह आदमी। सिर पटक दिया चरणों पर। कहा कि मैं कैसा मूढ़ हूं मुझे यह सवाल ही नहीं आता। तुम जब बताते हो, तब मुझे याद आता है। यह तो मेरे जन्मों—जन्मों में नहीं आ सकता था खयाल कि तुम्हारे पास हीरों से भी बड़ा कोई धन है।* फकीर ने कहा : *उसी धन का नाम ध्यान है।* *अब खूब तेरे पास धन है, अब धन की कोई जरूरत नहीं। अब जरा अपने भीतर की खदान खोद, जो सबसे कीमती है!!! 💐🙏

जब मस्जिद में आये पैसे से मदरसे चला करते है जहां पैसा बच्चों की शिक्षा में काम आता है , तब मंदिर में आये पैसों को बच्चों के स्कूल में क्यूं नही लगाया जाता ? क्योंकि बच्चों का भविष्य सबसे बड़ा मजहब होता है

जय श्री मदन जी🙏🙏 👦🏻एक बेटे ने पिता से पूछा- पापा.. ये 'सफल जीवन' क्या होता है ??🤔 👴🏼पिता, बेटे को पतंग 🔶🔷 उड़ाने ले गए। बेटा पिता को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहा था...🤔 थोड़ी देर बाद बेटा बोला- पापा.. 😌ये धागे की वजह से पतंग और ऊपर नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें !! ये और ऊपर चली जाएगी....🙂 👴🏼😌😮पिता ने धागा तोड़ दिया .. पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आयी और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई...💢♨ तब पिता ने बेटे को जीवन का दर्शन समझाया...😎 बेटा.. 'जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं.. हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं जैसे : -घर-⛪ -परिवार-👨‍👨‍👧‍👦 -अनुशासन-🏃🏼 -माता-पिता-👪 -समाज👵🏻 और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं...😏 वास्तव में यही वो धागे होते हैं जो हमें उस ऊंचाई पर बना के रखते हैं..😮 'इन धागों के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे परन्तु बाद में हमारा वो ही हश्र होगा जो बिन धागे की पतंग का हुआ...'🙂 "अतः जीवन में यदि तुम ऊंचाइयों पर बने रहना चाहते हो तो, कभी भी इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना.."😀 "धागे और पतंग जैसे जुड़ाव के सफल संतुलन से मिली हुई ऊंचाई को ही 'सफल जीवन' कहते हैं.." 💐🙏🏻

*संसार में 4 तरह के लोग :* *तथागत बुद्ध ने कहा कि मै इस संसार मे 4 तरह के लोग देखता हूँ* *(1) अँधेरे से अँधेरे की ओर:* ऐसा व्यक्ति जिसके जीवन में अँध:कार है। यानि गरीबी है, परेशानी है, व्याकुलता है। फिर भी वह क्रोध जगाता है, द्वेष जगाता है। तथा अपने दुःख का जिम्मेदार दुसरो को ठहराता है, और मन ही मन दुसरो को गाली देता है। दुःख को भुलाने के लिए नशापान करता है। ऐसा व्यक्ति आज तो दुखी है ही, लेकिन आगे के लिये भी दुःख के बीज ही बो रहा है। यानि अँधेरे से अँधेरे की तरफ बढ़ रहा है। *(2) अँधेरे से प्रकाश की ओर:* ऐसे व्यक्ति के जीवन में अँधेरा तो है, लेकिन भीतर प्रज्ञा जाग रही है। वो ये सोचता है, की यह जो कुछ भी मेरे साथ हो रहा है, वो किसी पूर्व दुष्कर्म के कारन हो रहा है, किसी दूसरे को क्या दोष दूँ? ये तो बेचारे माध्यम बन गए है। तो अपना वर्तमान कर्म सुधारता है, ओरो के प्रति मैत्री, करुणा, सद्भावना जगाता है। किसी के प्रति क्रोध नही, द्वेष नही। तो आगे के लिये उसका जीवन प्रकाश ही प्रकाश है। *(3) प्रकाश से अँधेरे की ओर:* ऐसा व्यक्ति प्रकाश में है, यानि धन है, प्रतिष्ठा है, पर अहंकार है, सबसे घृणा करता है। देखो मै कितना बुद्धिमान हूँ, कितना मेहनती, ऐसा मानता है। तो दुःख के बीज बो रहा है। भविष्य में अँधेरा ही अँधेरा होगा। *(4) प्रकाश से प्रकाश की ओर:* ऐसा व्यक्ति प्रकाश में है, पर साथ साथ प्रज्ञा भी है। वो ये सोचता की यह जो कुछ प्राप्त हुआ किसी पूर्व पुण्यकर्म से हुआ। सदा रहने वाला नही। तो लोगो की सेवा करता है, उनमे सामर्थ्य के अनुसार सहर्ष बाँटता है। ओरो के प्रति मंगल कामना करता है। तो उसका आगे आने वाला जीवन प्रकाश ही प्रकाश होगा।

🍀🌼🍀🌼🍀🌼🍀🌼🍀 *टूट* जाता है *गरीबी* मे वो *रिश्ता* जो खास होता है, हजारो यार बनते है जब *पैसा* पास होता है। 🍀🌼🍀🌼🍀🌼🍀🌼 ‬ रोज़ *याद* न कर पाऊँ तो *खुदग़रज़* ना समझ लेना, 🍀🌼🍀🌼🍀🌼🍀🌼🍀 दरअसल छोटी सी *जिन्दगी* है। और *परेशानियां* बहुत हैं..!! 🍀🌼🍀🍀🌼🍀🌼🍀🌼🍀 मैं *भूला* नहीं हूँ *किसी* को... मेरे बहुत *अच्छे दोस्त है ज़माने में* .. 🍀🌼🍀🌼🍀🌼🌼🌼🍀 बस *जिंदगी उलझी पड़ी* है .. *दो वक़्त की रोटी कमाने में।.*. . 🌹Good morning 🌹

😀😀😀😀😀😀😀😃😃😃 अनमोल वचनः हम सबकी जिंदगी हंसने और मुस्कराने के लिए बनी है रोयेंगे तो मुश्किलें बढ़ेंगी और घबराएंगे तो दुःखों के पहाड़ टूटेंगे..इसलिए जीवन में अपनी सभी मुश्किलों का सामना मुस्कुराते हुए करें !!! 💐जय श्री मदन जी💐 🙏सुप्रभात🙏 🌹आपका दिन शुभ हो🌹 😀हँसते रहिये हंसाते रहिये सदा मुस्कुराते रहिये 😀 😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀

Where Is Ram Mandir ?? Where Is Clean Ganga ?? Where Are Smart Cities ?? Where Is Black Money ?? Where Are 15 lakhs ?? Where Is Women Safety ?? Where Is Good Education ?? #WhereAreTheJobs

"रघुकुल रीत सदा चली आयी प्राण जाए पर वचन ना जाई" अर्थात भगवान श्रीराम के वंश रघुकुल व स्वयं भगवान श्रीराम का यही प्रण व लोगो को संदेश था कि जो वादा करो उसे प्राणों की कीमत पर भी पूरा करो;असत भाषण से दूर रहो। पता नही आज के कथित रामभक्त इस संदेश का कितना पालन करते है?

🌿🌻🌸🌿🌻🌸🌿🌻🌸🌿 इस संसार में हर किसी को, अपने "ज्ञान" का "घमंड" हैं… परन्तु… किसी को भी अपने …"घमंड" का "ज्ञान" नहीं हैं ! 🙏जय श्री मदन जी🙏 🌷सुप्रभात🌷 🌿🌻🌸🌿🌻🌸🌿🌻🌸🌿

फर्क होता है खुदा और फ़क़ीर में, फर्क होता है किस्मत और लकीर में.. अगर कुछ चाहो और न मिले तो समझ लेना.. कि कुछ और अच्छा लिखा है तक़दीर में।

मैथिलीशरण गुप्त की रचना- तप्त हृदय को, सरस स्नेह से जो सहला दे, मित्र वही है। रूखे मन को, सराबोर कर जो नहला दे, मित्र वही है। प्रिय वियोग, संतप्त चित्त को जो बहला दे, मित्र वही है। अश्रु बूँद की, एक झलक से जो दहला दे, मित्र वही है। मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामना 🌹🌹🌹

*धोबी की कपड़ों से कोई दुश्मनी नही होती, वो कपड़ों को पत्थर पे मारता है* *डंडा भी मरता है पर उन्हें बड़ी साफ जगह पे बिछाता है जानते हो क्यूँ* *क्योंकि उसे कपड़ो से मेल निकालनी होती है जब मेल निकल जाती है तो कपड़ों को बड़े प्यार से तह लगाकर रखता है* *ठीक इसी तरह सतगुरु भी हमे नाम देते है, जप भई जप, सेवा, सत्संग, सुमिरण कर,* *संतो की सेवा कर,* *थोड़ा कष्ट तो होगा,* *पर तेरे अंदर से मेल निकल जायेगी,* *एक नेक इंसान बन जायेगा, सभी को अच्छा लगने लगेगा,* *सतगुरु की आँख का तारा बन जायेगा,* *सतगुरु का प्यारा गुरुमुख बन जायेगा,* *गुरु का नाम जपते रहो, तेरा सब काम हो जाएगा,* *काम करेगा जप प्रभाव, और नाम तेरा हो जायेगा.....!!* 🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

"जिस तरह हवा हमें दिखाई नहीं देती लेकिन जब वह जोर से चलती है तो बड़े से बड़े पेड़ को जड़ से उखाड़ देती है.... ठीक उसी तरह सतगुरु की रहमत भी हमे दिखाई नहीं देती.. लेकिन यदि हमें उनपर पूर्ण विश्वास है तो हमारा बड़े से बड़ा काम वो पलभर में कर देते हैं... इसलिए स्वासं -स्वासं में उन्हें याद रखो वो हमें दिखाई नहीं देते पर वो हरपल हमारे साथ.

🌹मित्रता दिवस पर विशेष🌹 “इस संसार में मित्रता शुद्धतम् प्रेम है, मित्रता प्रेम का सर्वोच्च रूप है जहां कुछ भी मांगा नहीं जाता, कोई शर्त नहीं होती, जहां बस दिया जाता है।” “गुरू हमेशा एक मित्र होता है लेकिन उसकी मित्रता में बिलकुल अलग सी सुगंध होती है। इसमें मित्रता कम मित्रत्व अधिक होता है। करुणा इसका आंतरिक हिस्सा होती है। वह तुम्हें प्रेम करता है क्योंकि और कुछ वह कर नहीं सकता। वह अपने अनुभव तुम्हारे साथ बांटता है क्योंकि वह देख पाता है कि तुम उसे खोज रहे हो, तुम उसके लिये प्यासे हो। वह अपने शुद्ध जल के झरने तुम्हारे लिये उपलब्ध करवाता है। वह आनंदित होता है और अनुग्रहीत होता है यदि तुम उसके प्रेम के, मित्रता के, सत्य के उपहार स्वीकार करते हो।”

ईमानदार बिकते नहीं बल्कि और हिम्मत के साथ बेइमानो को जवाब देते हैं, किसी की नौकरी छीनी जा सकती है मगर उसकी ज़ुबान नहीं बंद की जा सकती ~

त्रिपुरा के मुख्य मंत्री बिप्लब देव 25 नवंबर 1971 में बांग्लादेश में पैदा हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा कब दे रहे हो ?

पतंजलि के मालिक और बाबा रामदेव के खासमखास मित्र "आचार्य बालकृष्ण" के पास भी “जन्म प्रमाण पत्र” नहीं है! भारतीय नागरिकता नहीं है! मतलब वो भी घुसपैठिया हैं?? फिर देश मे अरबों रुपये का व्यापार कैसे कर रहे?? गोदी मीडिया कभी इनसे भी सवाल करोगे?? भक्तों दिमाग हो तो सोचो??

🙏🏻*भजन सिमरन ही वो कमाई है* *जितनी इकट्ठा करोगें* *तुम्हारी ही रहेगी ना कोई छीन सकता है,* *ना ही चुरा सकता है ,* *और ना ही कोई ठग सकता है* *और ये वो कमाई है जो उस मालिक के दरवार में चलती है* *वहां न झूठ चलता है ना फरेब चलता है वहां बस नाम की दौलत चलती है* *हो सकता हो जितना ज्यादा ज्यादा बटोर लो पता नही फिर ये मौका मिले न मिले* *पता नही फिर वो माधो मिले न मिले* *"बहुत जन्म बिछड़े थे माधो* *यह जन्म तुम्हारे लेखे"*🙏🏼

🙏🙏🏻👌👍👌🙏🏻🙏 यदि आप “दक्षिण कोरिया” की सीमा अवैध रूप से पार करते हैं तो, आपको 12 वर्ष के लिये सश्रम कारागार में डाल दिया जायेगा.... !! अगर आप “ईरान” की सीमा अवैध रूप से पार करते हैं तो आपको अनिश्चितकाल तक हिरासत में ले लिया जायेगा....!! अगर आप “अफ़गानिस्तान” की सीमा अवैध रूप से पार करते हैं तो आपको देखते ही गोली मार दी जायेगी जायेगी....!! यदि आप "चीनी" सीमा अवैध रूप से पार करते हैं तो, आपका अपहरण कर लिया जायेगा और आप फिर कभी नहीं मिलेंगे.... !! यदि आप "क्यूबा" की सीमा अवैध रूप से पार करते है तो... आपको एक राजनीतिक षडयंत्र के जुर्म में जेल में डाल दिया जायेगा....!! यदि आप "ब्रिटिश" बॉर्डर अवैध रूप से पार करते हैं तो, आपको गिरफ्तार किया जायेगा, मुकदमा चलेगा, जेल भेजा जायेगा और अपने सजा पूरी करने के बाद निर्वासित....!! और यदि आप पड़ोसी देश से हैं और आप "भारतीय" सीमा को अवैध रूप से पार करते पाए गए, तो आपको मिलेगा १. एक राशन कार्ड २. एक पासपोर्ट, ३. एक ड्राइविंग लाइसेंस, ४. मतदाता पहचान कार्ड, ५. क्रेडिट कार्ड, ६. सरकारी रियायती किराए पर आवास, ७. ऋण, घर खरीदने के लिए, ८. मुफ्त शिक्षा, ९. मुफ्त स्वास्थ्य देखभाल, १०. नई दिल्ली में एक "लाबीस्ट" ११. एक टेलीविजन. १२. और विशेषज्ञ मानव अधिकार, कार्यकर्ताओं के एक समूह के साथ, धर्मनिरपेक्षता की डफली बजाने का अधिकार..... १३. और बाकी आप जो कहें..... INDIAN'S को मारने की आजादी, बंम फोड़ने की आजादी.....😪😪😪😪😪😪😪 "😣😣😣😣😣

*तुलसी कौन थी?* ```तुलसी(पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी.बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी.जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया। जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था. वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी. एक बार देवताओ और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा``` - स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है आप जब तक युद्ध में रहेगे में पूजा में बैठ कर``` आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करुगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते, मैं अपना संकल्प नही छोडूगी। जलंधर तो युद्ध में चले गये,और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी, उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके, सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास गये। सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि – वृंदा मेरी परम भक्त है में उसके साथ छल नहीं कर सकता । फिर देवता बोले - भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते है। भगवान ने जलंधर का ही रूप रखा और वृंदा के महल में पँहुच गये जैसे ही वृंदा ने अपने पति को देखा, वे तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिए,जैसे ही उनका संकल्प टूटा, युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया,उनका सिर वृंदा के महल में गिरा जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पडा है तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है? उन्होंने पूँछा - आप कौन हो जिसका स्पर्श मैने किया, तब भगवान अपने रूप में आ गये पर वे कुछ ना बोल सके,वृंदा सारी बात समझ गई, उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया आप पत्थर के हो जाओ, और भगवान तुंरत पत्थर के हो गये। सभी देवता हाहाकार करने लगे लक्ष्मी जी रोने लगे और प्रार्थना करने लगे यब वृंदा जी ने भगवान को वापस वैसा ही कर दिया और अपने पति का सिर लेकर वे सती हो गयी। उनकी राख से एक पौधा निकला तब भगवान विष्णु जी ने कहा –आज से इनका नाम तुलसी है, और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा और में बिना तुलसी जी के भोग``` ```स्वीकार नहीं करुगा। तब से तुलसी जी कि पूजा सभी करने लगे। और तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास में``` ```किया जाता है.देव-उठावनी एकादशी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है !```

. *🌷किराये का घर🌷* *जब हम "किराए का मकान" लेते है तो "मकान मालिक" कुछ शर्तें रखता है !* *1. मकान का किराया समय पर देना होगा।* *2. मकान में गंदगी नही फैलाना।* *3. मकान मालिक जब चाहे मकान को खाली करवा सकता है !!* *उसी प्रकार परमात्मा जी (मालिक) ने भी हमें जब ये शरीर दिया था यही शर्ते हमारे लिये देकर भेजा हैः* *1. किराया है। (भजन -सिमरन)* *2. गन्दगी (बुरे विचार और बुरी भावनाये) नही फैलानी।* *3. जब मर्जी होगी परमात्मा अपनी आत्मा को वापिस बुला लेगा !! मतलब ये है कि ये जीवन हमे बहुत थोड़े समय के लिए मिला है, इसे लड़ाई -झगड़े करके या द्वेष भावना रखकर नही, बल्कि प्रभु जी के नाम का सिमरन करते हुए बिताना चाहिए !* *हे मेरे प्रभु जी !इतनी कृपा करना कि आपकी आज्ञा में रहे और भजन -सुमिरन करते रहे!!* *"ए जन्म मानुखा जो मिलिया।* *गुरु किरपा दा प्रशाद समझ।* *बे कदरी ना कर स्वासा दी।* *जप नाम जीवन दा राज समझ !!"* . *🙏🙏🙏*

क्या ये अघोषित आपातकाल है ? पत्रकारों को पत्रकारिता की इजाज़त नहीं, विपक्षी नेताओं को बोलने की इजाज़त नहीं। देखिये ममता बैनर्जी को सेंट स्टीफ़ेन्स कॉलेज में बोलने से क्यों रोका गया ? और क्या कहती है हमारी ख़ामोशी ? https://t.co/sf7GMtX4Ki

God God if you are in saints Who is there in the evils ? If you give birth Who gives death ? If happiness is your blessing Than who gives sorrows ? If you give respect Who gives disrepect ? If you put in problems Who saves me ? If you bless me with kingdoms Who enforces me to beg ?

पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री इमरान अगर अपने शपथ ग्रहण में बुलाते है, और अगर कोई जाता है तो वो आतंकी माना जायेगा?? चलो ठीक है पर जो बिन बुलाये बिरियानी खाने जाए और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को भेट में शॉल देकर आये उसे क्या कहेंगे आप ??? जवाब जरूर देना, फ़र्जी राष्ट्रवादियों ?

एबीपी के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने दिया इस्तीफा, पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भी दिया इस्तीफा, अभिसार शर्मा को छुट्टी पर भेजा गया। आखिर "मास्टर स्ट्रोक" से इतना ख़ौफ़ क्यों है..? ये कैसा लोकतंत्र बनाया जा रहा है जिसमे सच को कोई सुनना नहीं चाह रहा..?

कांग्रेस एक "बट" बृक्ष है, जिसे ऐसे तुक्ष हबा के झोंके नहीं "मिटा" सकते.

40 लाख फ़र्जी वोटर और घुसपैठिये थे तो ये काम भाजपा को पहले कर देना चाहिए था.. चुनावी देख के ये सब करना मतलब सिर्फ़ सत्ता की लालच और हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा चाहिए भाजपा को जो उन्हें मिल गया.. अब असल मुद्दों की बात चलेगी ही नही क्योकि हमारे देश का असली मुद्दा हिन्दू-मुस्लिम है

इन दिनों @abpnewstv पर मोदी सरकार का जो हथौडा चल रहा है वह परेशान करने वाला है।दिल्ली के सभी आज़ाद ख़्याल के पत्रकारों को एकजुट होना चाहिए वरना सभी एक-एक कर मारे जाएँगे।

BJP कहना है,ममता जी अपने राज्य मे हर छोटी मोटी घटना के लिए ज़िम्मेदार है! अगर ऐसा है तो योगी राज्य मे बलात्कार,गौरक्षा के नाम पर पीट 2 कर मार डालना,इतनी घिनौनी घटनाओं के लिए योगी ज़िम्मेदार क्यो नही ? गोधरा कांड के लिए मोदी क्यो नही ? मुज़फ़्फ़रपुर मे जो हुआ उसका ज़िम्मेदार कौन ?

*हे प्रभु!* मेरे *पैरों* में इतनी *शक्ति* देना कि *दौड़~दौड़* कर *आपके दरवाजे* आ सकूँ। मुझे एेसी *सद्बुद्धि* देना कि *सुबह-शाम* घुटने के बल बैठकर आपको *प्रणाम* कर सकूँ। १०० साल *जीऊँ* या पचास साल यह आपकी *मर्जी।* मेरी *अर्जी* तो सिर्फ इतनी है कि *जब तक जीऊँ, जिह्वा पर आपका नाम रहे, देने में मेरे हाथ कभी थके नहीं।* *मेरे मालिक!* *प्रेम* से भरी हुई *आँखें* देना, *श्रद्धा* से झुुका हुआ *सिर* देना, *सहयोग* करते हुए *हाथ* देना, *सत्पथ* पर चलते हुए *पाँव* देना और *सिमरण* करता हुआ *मन* देना। *हे प्रभु!* अपने *बच्चों* को अपनी *कृपादृष्टि* देना, *सद्बुद्धि* देना। *🙏🏻पल पल साथ रहना प्रभु 🙏🏻*🙏🏻🙏🏻

हजार ढूंढ लो वो उम्र भर नहीं मिलते उजड़ गए जो आँधियों में घर नहीं मिलते नसीब हो तो उम्र भर का साथ मिलता है किसी के ढूँढने से हम-सफ़र नहीं मिलते जो दुःख में सुख में साथ थे गले लगाने को यहाँ वहां कहीं भी वो शजर नहीं मिलते उड़ान होंसले से भर सको तो उड़ जाना घरों में बंद पंछियों को पर नहीं मिलते जो जी सको तो जी लो जिंदगी का हर लम्हा गुज़र गए जो पल वो लौट कर नहीं मिलते

*Beautiful Lines* 🌿🌺🌿 *घमंड न करना* *जिन्दगी मे* *तकदीर बदलती रहती है* *शीशा वही रहता है* *बस तस्वीर* *बदलती रहती है* *दुसरो को सुनाने के लिए अपनी "आवाज" ऊँची मत करो.* *बल्कि* *अपना "व्यक्तित्व" इतना ऊँचा बनाओ कि आपको सुनने के लिए "लोग" इंतज़ार करे* 🌿🌺🌿 Good morning 💐💐💐💐💐💐💐

ये है तथाकथित राष्ट्रवादी छात्र नेता. क्या ये अपनी माँ और बहनों से भी यही बोलते होंगे? कहाँ से आये है ये विशिष्ठ संस्कार?

मंदिर वही बनाएंगे कहना अच्छी बात है पर पहले कैरियर बना लो युवा भाइयों वरना इस सरकार में भीख मांगना भी रोजगार है🚩

*यह एक सर्वमान्य सत्य है कि प्रभु का 'नाम' अमूल्य रत्न है, अमृत है। निस्संदेह इस 'नाम' के अंतर्मुखी अभ्यास से जीव को भवसागर से छुटकारा मिल जाता है और प्रभु प्रियतम से मिलाप हो जाता है।🙏🆚* *लेकिन माया के मोह में फंसे लोग 'प्रभुनाम' की कीमत कौड़ी भर भी नहीं आंकते। वह इस बारे में ज़िक्र करने के लिए भी तैयार नहीं होते।🆚🌹*

प्रिय देशवासियों, आप पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दीजिए, उन्होंने पीएम बदला,, आप भी 2019 में बदल दीजिए 🙏

आदरणीय प्रधानमंत्री जी, पूर्व राष्ट्रपति श्री फखरुद्दीन अली अहमद जी के परिवार का नाम NCR सूची में नहीं है, सरकार पूर्व राष्ट्रपति के परिवार को घुसपैठिया मानती है जबकि वो भारत के 5वे राष्ट्रपति थे. क्या सरकार ये सही कर रही है ? सम्मानित पारिवार के साथ ऐसी हरकत दुर्भाग्यपूर्ण है ~