चार घंटे पैदल चलकर 24घंटे पहले हुई मौत को दबा देते हैं। अगले दिन अचानक घड़ियाली आँसू बहा देते हैं। धन्य हैं नर के भेष में छिपे ऐसे भेड़िए जो हर जगह अपनी औकात दिखा देते हैं। सवाल सबके जेहन मे उठ रहे हैं। मन ही मन मसोस कर रह जा रहे हैं।। "बस सही समय पर चोट होगी" जयहिंद।

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