मैं क्या बतलाऊँ कौन हूँ ??? मैं कभी जीत हूँ तो कभी हार भी हूँ मैं मैं कभी जीवन हूँ तो कभी मृत्यु भी हूँ मैं मैं कभी अच्छा हूँ तो कभी बदनाम भी हूँ मैं मैं कभी आगाज़ हूँ तो कभी अंजाम भी हूँ मैं मैं कभी पुत्र हूँ कभी माता हूँ, तो कभी बाप भी हूँ मैं मैं कभी पर्वत, मैं कभी खाई हूँ,तो खुद की परछाई भी हूँ मैं मैं कभी भेद खोलता सत्य हूँ, तो कभी रहस्य छुपाता मौन हूँ मैं, मैं कभी दुष्ट पापी मूढ़मति आत्मा हूँ तो परम सत्य परमात्मा भी हूँ मैं मैं क्या अब अपना परिचय दूं ? मैं क्या बतलाऊँ कौन हूँ ??? मैं मैं की जिसको हवा लगी उसको दवा न दुआ लगी।

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