सूफी परम्परा में गुरु को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 1.पीर ख़िरका-- यानि जिस गुरु से शिष्य दीक्षा ग्रहण करता है, वह पीर ख़िरका कहलाता है।पीर ख़िरका आजीवन वही रहता है, वह कभी नही बदलता। 2. पीर सोहबत-- जिस गुरु के सान्निध्य में शिष्य रहता है ,उसे पीर सोहबत कहते हैं।किसी भी कारण से यदि शिष्य अपने गुरु से दूर हो और अन्य गुरु की सोहबत में रहता हो,तो वह गुरु पीर सोहबत कहलाता है। 3. पीर तालीम-- जिस गुरु से शिष्य को ध्यान की दीक्षा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिलता है,वह पीर तालीम कहलाते हैं। एक शिष्य के पीर सोहबत और पीर तालीम कई हो सकते हैं, लेकिंपिर ख़िरका एक ही रहेगा।

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