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*धोबी की कपड़ों से कोई दुश्मनी नही होती, वो कपड़ों को पत्थर पे मारता है*
*डंडा भी मरता है पर उन्हें बड़ी साफ जगह पे बिछाता है जानते हो क्यूँ*
*क्योंकि उसे कपड़ो से मेल निकालनी होती है जब मेल निकल जाती है तो कपड़ों को बड़े प्यार से तह लगाकर रखता है*
*ठीक इसी तरह सतगुरु भी हमे नाम देते है, जप भई जप, सेवा, सत्संग, सुमिरण कर,*
*संतो की सेवा कर,*
*थोड़ा कष्ट तो होगा,*
*पर तेरे अंदर से मेल निकल जायेगी,*
*एक नेक इंसान बन जायेगा, सभी को अच्छा लगने लगेगा,*
*सतगुरु की आँख का तारा बन जायेगा,*
*सतगुरु का प्यारा गुरुमुख बन जायेगा,*
*गुरु का नाम जपते रहो, तेरा सब काम हो जाएगा,*
*काम करेगा जप प्रभाव, और नाम तेरा हो जायेगा.....!!*
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