शब्द भी एक तरह का भोजन है। किस समय कौनसा शब्द परोसना है वो आ जाये तो दुनिया मे उससे बढ़िया रसोइया कोई नही है। शब्द का भी अपना एक स्वाद है, बोलने से पहले स्वयं चख लीजिये। अगर खुद को अच्छा नही लगे तो दूसरों को कैसे अच्छा लगेगा। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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