*हमारे मन में अगर किसी को भी दुख देने का जरा सा भी भाव है , तो हम अपने लिए बीज बो रहे हो.* *क्योंकि हमारे मन में जो दुख देने का बीज है , वह हमारे ही मन की भूमि में गिरेगा.* *किसी दूसरे के मन की भूमि में नहीं गिर सकता.* *बीज तो हमारे भीतर है , वृक्ष भी हमारे भीतर ही होगा.* *फल भी हमें ही भोगना होगा....!!*

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