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Showing posts from June, 2018
अगर कांग्रेस भी चाय,पकौड़े और धर्म की राजनीति करती तो न IIT होती, न AIIMS होता, न परमाणु होता, न ISRO होता, न सेना मजबूत होती, न हरित क्रांति होती और न स्वेत क्रांति आती, न बिजली आती, न सड़कें बनती, न कंप्यूटर आता, न डैम बनते, न शौध संस्थान होते इसलिए कहो दिल से कांग्रेस फिर से
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जो अपने अंहकार मे चूर होकर भारत माता तक को कटहरे मे खड़ा करके पूछ रहे है 70 सालों मे क्या हुआ? 70 सालों मे जो हुआ,वो न हुआ होता तो आज न तो यह देश आज़ाद होता,न ही देश का चाय बनाने वाला PM होता! होता तो सिर्फ किसी गोरे अंग्रेज़ का ग़ुलाम होता आए बडे😏 “ कल की भूतनी शमशान मे आधा”
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कौन ईश्वर कृपा से लाभान्वित हो सकता है ? जैसे स्वाति के जल से मोती बनाने वाली सीपें ही लाभान्वित होती है । अमृत उसी को जीवन दे सकता है जिसका मुँह खुला हो , प्रकाश का लाभ आँखों वाले ही उठा सकते है । इन पात्रताओं के अभाव में प्रकाश कितना भी अधिक हो , अमृत या स्वाति का जल किसी का भी लाभ नहींउठाया जा सकता । ठीक यही बात देव उपासना के संबन्ध में लागू होती है । देवता और मन्त्रों का लाभ वे उठा पाते है जिन्होंने ने व्यक्तित्व को भीतर और बाहर से आचार-विचार से परिष्कृत बनाने की साधना कर ली है । औषध का लाभ तभी होता जब उसे बताये हुए अनुपात और समय पर लिया जाए । हमें मंत्र और देवता , भगवान और भक्ति के पीछे पड़ने से पहले आत्मशोधन की प्रक्रिया करनी पड़ेगी । इसलिए पहले आत्मउपासना फिर देव उपासना । आकाश में से बादल कितना ही जल क्यों न बरसाये , उसमें से जिसके पास जितना बड़ा पात्र होगा उसे उतना ही मिलेगा । आंगन में रखे पात्र में उतना ही जल रहेगा जितनी उसमें जगह होगी । इसलिए पात्रता नितांत आवश्यक है और पात्रता आत्मशोधन करके ही बढाई जा सकती है ।
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भाई इसने पिछले 4 सालों में किया ही क्या है जो इसकी जान को ख़तरा है ? कुछ भी ? ना कश्मीर में धारा 370 हटाई, ना पाक को 56"का सीना दिखाया, ना चीन को आँखें लाल कर के दिखाई, ना ही राम मंदिर बनाया, ना ही नक्सलियों को उजाड़ा, बेरोजगार युवा , मरता किसान अब इसका क्या बिगाड़ेगा ?
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मोदी जी बड़ा भाषण दे रहे थे कबीर जी की जीवनी पर? क्या उनकी एक शिक्षा भी उतारी है अपने जीवन मे? उनका यह दोहा नही पढ़ा? “तिनका कबहुँ ना निन्दिए जो पांवन तर होए कबहुँ उडी आँखन पडे तो पीर घनेरी होए” मतलब तिनके की भी निंदा नही करनी चाहिए पर आपको तो निंदा के अलावा और कुछ आता ही नही!
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आना जाना तो बना रहेगा ! फिर फिर वही तो दोहरेगा ! क़िस्से कहानी कशिश में तू बार बार बेहोश घूमेगा ! आना जाना बना रहेगा फिर फिर वही तो दोहरेगा क़िस्से कहानी कशिश में तू बार बार बेहोश घूमेगा कर्म धर्म जुर्म का कारोबार कोल्हू जा बैल बन जुड़ेगा अंधेरी गलियों में भटकेगा फ़र्ज़ के नाम पे क़र्ज़ ढोएगा रिश्तों के बाज़ार में रोएगा ! कुछ मिले तो भी क्या टिकेगा ? ताश के पत्तों का घर गिरेगा ! बिखरा बिखरा तू तड़पेगा ! अपने पराये के जंगल जलेगा यारा तू अपने से कब मिलेगा चल सरिता के संग संग बहेंगे कभी तो समंदर ज़रूर मिलेगा !
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जीएसटी का फायदा "भविष्य" में दिखेगा नोटबंदी का फायदा "भविष्य," में दिखेगा पीएम की विदेश यात्राओं का फायदा "भविष्य" में दिखेगा किसानों को फायदा "भविष्य," में दिखेगा आतंकवाद "भविष्य" में खत्म हो जाएगा नौकरीयां "भविष्य" में बरसेंगी साहब जनता "वर्तमान" में जीना ही छोड़ दे क्या..?😲
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“भगवान राम की कृपा रही तो भव्य राम मंदिर बन कर रहेगा” पीएम बना दिया. सीएम बना दिया. राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति बना दिए. और कितनी ‘कृपा’ चाहिए भाई???
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इससे बेहतर पोस्ट मैंने कभी नहीं पढ़ा.. मानवता का अप्रतिम उदाहरण। कल बाज़ार में फल खरीदने गया, तो देखा कि एक फल की रेहड़ी की छत से एक छोटा सा बोर्ड लटक रहा था, उस पर मोटे अक्षरों से लिखा हुआ था... "घर मे कोई नहीं है, मेरी बूढ़ी माँ बीमार है, मुझे थोड़ी थोड़ी देर में उन्हें खाना, दवा और टॉयलट कराने के लिए घर जाना पड़ता है, अगर आपको जल्दी है तो अपनी मर्ज़ी से फल तौल लें, रेट साथ में लिखे हैं। पैसे कोने पर गत्ते के नीचे रख दें, धन्यवाद!!" अगर आपके पास पैसे नहीं हो तो मेरी तरफ से ले लेना, इजाज़त है..!! मैंने इधर उधर देखा, पास पड़े तराजू में दो किलो सेब तोले दर्जन भर केले लिये, बैग में डाले, प्राइस लिस्ट से कीमत देखी, पैसे निकाल कर गत्ते को उठाया, वहाँ सौ-पचास और दस-दस के नोट पड़े थे, मैंने भी पैसे उसमें रख कर उसे ढंक दिया। बैग उठाया और अपने फ्लैट पे आ गया, रात को खाना खाने के बाद मैं उधर से निकला, तो देखा एक कमज़ोर सा आदमी, दाढ़ी आधी काली आधी सफेद, मैले से कुर्ते पजामे में रेहड़ी को धक्का लगा कर बस जाने ही वाला था, वो मुझे देखकर मुस्कुराया और बोला "साहब! फल तो खत्म हो गए।" उसका नाम पूछा तो बोला: "सीताराम" फिर हम सामने वाले ढाबे पर बैठ गए। चाय आयी, वो कहने लगा, "पिछले तीन साल से मेरी माता बिस्तर पर हैं, कुछ पागल सी भी हो गईं है और अब तो फ़ालिज भी हो गया है, मेरी कोई संतान नहीं है, बीवी मर गयी है, सिर्फ मैं हूँ और मेरी माँ..!! माँ की देखभाल करने वाला कोई नहीं है, इसलिए मुझे ही हर वक़्त माँ का ख्याल रखना पड़ता है"... एक दिन मैंने माँ के पाँव दबाते हुए बड़ी नरमी से कहा, "..माँ!! तेरी सेवा करने को तो बड़ा जी चाहता है पर जेब खाली है और तू मुझे कमरे से बाहर निकलने नहीं देती, कहती है, तू जाता है तो जी घबराने लगता है, तू ही बता मै क्या करूँ?" न ही मेरे पास कोई जमा पूंजी है।.. ये सुन कर माँ ने हाँफते-काँपते उठने की कोशिश की। मैंने तकिये की टेक लगवाई, उन्होंने झुर्रियों वाला चेहरा उठाया अपने कमज़ोर हाथों को ऊपर उठाया, मन ही मन राम जी की स्तुति की फिर बोली.. "तू रेहड़ी वहीं छोड़ आया कर, हमारी किस्मत का हमें जो कुछ भी है, इसी कमरे में बैठकर मिलेगा।" मैंने कहा, "माँ क्या बात करती हो, वहाँ छोड़ आऊँगा तो कोई चोर उचक्का सब कुछ ले जायेगा, आजकल कौन लिहाज़ करता है? और बिना मालिक के कौन फल खरीदने आएगा?" कहने लगीं.. "तू राम का नाम लेने के बाद बाद रेहड़ी को फलों से भरकर छोड़ कर आजा बस, ज्यादा बक-बक नहीं कर, शाम को खाली रेहड़ी ले आया कर, अगर तेरा रुपया गया तो मुझे बोलियो!" ढाई साल हो गए हैं भाईसाहब सुबह रेहड़ी लगा आता हूँ ...शाम को ले जाता हूँ, लोग पैसे रख जाते हैं.. ..फल ले जाते हैं, एक धेला भी ऊपर नीचे नहीं होता, बल्कि कुछ तो ज्यादा भी रख जाते हैं, कभी कोई माँ के लिए फूल रख जाता है, कभी कोई और चीज़!! परसों एक बच्ची पुलाव बना कर रख गयी, साथ में एक पर्ची भी थी "अम्मा के लिए!" एक डॉक्टर अपना कार्ड छोड़ गए पीछे लिखा था, 'माँ की तबियत नाज़ुक हो तो मुझे कॉल कर लेना, मैं आ जाऊँगा, कोई ख़जूर रख जाता है, रोजाना कुछ न कुछ मेरे हक के साथ मौजूद होता है। न माँ हिलने देती है न मेरे राम कुछ कमी रहने देते हैं, माँ कहती है, तेरे फल मेरा राम अपने फरिश्तों से बिकवा देता है। आखिर में, इतना ही कहूँगा की अपने मां -बाप की सेवा करो, और देखो दुनिया की कामयाबियाँ कैसे हमारे कदम चूमती हैं।... 💐💐🙏🙏 अगर मेरे द्वारा इस पोस्ट की पुनरावृति हुई है तो क्षमा चाहता हूं... परंतु पोस्ट इतनी अच्छी है कि प्रेषित करने से स्वयं को रोक नहीं पाया हूं।
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एक बात की समानता तो है "कबीर"जी और "मोदी"जी में "काशी और मगहर" जब कबीर जी जीवित थे तो काशी में थे,और जिन्दगी के अन्तिम समय मगहर में आए। मोदी जी को सत्ता पाना था तो काशी में आये, और सत्ता से हमेशा के लिए जाना है तो मगहर आ रहे हैं। ये प्रकृति का नियम है " हर शुरुआत की अंत होती है।
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सबसे ज्यादा रेप “मध्य प्रदेश” में सबसे ज्यादा शराब की तस्करी “गुजरात” में सबसे ज्यादा आदिवासियों का शोषण “छत्तीसगढ़” में सबसे ज्यादा दलितों पर अत्याचार “राजस्थान” में सबसे ज्यादा लूटपाट “झारखंड” में . और इन सब राज्यों में सरकार ?? देश बदलने का झूठा दावा करने वाली BJP की...
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BJP को कॉंग्रेस की बुराइयाँ गिनाने की बजाय उनको दूर करके,जनता का दुख समझना चाहिए था परंतु इन्होंने तो आते ही अपने बैको को भरना शुरू कर दिया,कॉंग्रेस की बुराइयाँ गिनाने मे ही साढ़े 4 साल बरबाद कर दिए ! अब बताओ साढ़े 4 साल से कष्ट भोग रही जनता कॉंग्रेस की कमीयां का क्या आचार डाले ?
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मंत्री महोदय लाख कोशिश कर लो इतिहास मिटाने की न हेडगेवार गाँधी बन सकते है और न सावरकर, गोडसे नेहरू सुभाष का स्थान ले सकते है RSS और भाजपाईयो का आजादी की लङाई से अबतक क्या योगदान है वो एक पन्ना मे खाली रह जायेगा जितना नाचना उछलना है उछल फिर घर वापसी पक्की है https://t.co/qCf5JdqpF5
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2014 :- भक्त पहले मोदी के भरोसे थे, की मोदी जी राम मंदिर बनवाएंगे ?? उनसे नहीं हुआ 2017 :- फिर भक्तों ने सोचा योगी राम मंदिर बनवाएंगे?? उनसे भी नहीं हो सका अब योगी जी बोल रहे है, राम की कृपा होगी तब बनेगा राम मंदिर 2019 नजदीक है भक्तों श्री राम को भी जीता के देख लो एक बार ।
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लोभ देने से नौकर बिगड़े धोखा देने से यारी नोटबंदी से जनता बिगड़े GST से व्यापारी BJPको वोट देने से देश बिगड़े ये बात जनहित में जारी क्या मोदी सरकार सिर्फ मो॰को आधारकार्ड से लिंक कराने के लिए बनाई थी ? एक दिन मूर्ख बनाने के लिए “अप्रैल फूल” पांच साल मुर्ख बनाने के लिए “कमल का फूल”
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#110965June 22, 2018Processing₹5,990.00 for 1 itemView#105664June 18, 2018Processing₹5,999.00 for 1 item
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मनुष्य एक लम्बी तीर्थयात्रा पर है। यहां कोई भी नया नहीं है। हम सभी यहां बहुत पुराने तीर्थयात्री हैं। तुमने मानव चेतना के सारे विकास को देखा है। तुम उसके हिस्से रहे हो। तुम हमेशा से यहां मौजूद रहे हो--अलग-अलग रूपों में, अलग-अलग शरीरों में, अलग-अलग कार्य करते हुए, लेकिन तुम यहां मौजूद रहे हो। और तुम यहां हमेशा मौजूद रहने वाले हो। अस्तित्व से चले जाने का कोई मार्ग नहीं है। अस्तित्व से कुछ भी समाप्त नहीं किया जा सकता और न ही अस्तित्व में कुछ जोड़ा जा सकता है। अस्तित्व हमेशा से ठीक ऐसा ही रहा है। यह अंतर्दृष्टि तुम्हें समयातीत ले जाती है--और समयातीत होना दुखों के पार होना है। कालातीत को जानना आनंद के जगत में प्रवेश करना है। तुम पुरातन हो, कालातीत हो, अनंत हो। इसलिए छोटी-छोटी बातों के लिए डरने की कोई जरूरत नहीं है, सांसारिक बातों की नाहक चिंता लेने की कोई जरूरत नहीं है। वे आती-जाती रहती हैं। तुम सदा बने रहते हो। ध्यान रहे कि जो सदा है, वह न तो कभी आता है, न ही कभी जाता है। वह अनंत है, और वह तुम्हारे भीतर ऐसे ही है जैसे कि सभी के भीतर है। यदि तुम श्रद्धा कर सको, कुछ न कुछ हमेशा होता रहेगा और तुम्हारे विकास में मदद करेगा। तुम्हें उपलब्ध रहेगा। विशेष समय पर जिस किसी भी चीज की जरूरत होगी वह तुम्हें उपलब्ध करवाया जाएगा, उसके पहले नहीं। तुम्हें तब ही मिलेगा जब तुम्हें उसकी जरूरत होगी, और वहां एक क्षण की भी देरी नहीं होगी। जब तुम्हें जरूरत होगी तुम्हें मिल जाएगा, तत्काल, उसी समय! श्रद्धा की यह खूबसूरतीहै। धीरे-धीरे तुम यह सीखते हो कि कैसे अस्तित्व तुम्हें हर चीज उपलब्ध करवा रहाहै, कैसे अस्तित्व तुम्हारा ध्यान रखताहै। तुम ऐसे अस्तित्व में नहीं जी रहे हो जो उपेक्षा से भराहै। वह तुम्हारी उपेक्षा नहीं करता। तुम नाहक चिंता से भरे रहते हो; तुम्हें हर चीज उपलब्ध करवायी जातीहै। एक बार श्रद्धा की दक्षता तुम सीख लेते हो, सारी चिंताएं विदा हो जाती हैं।
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Very important msg एक विशेष जानकारी फ्री राजस्थान में उदयपुर शहर से बीस किमी दूर उमरड़ा एक गांव है ,वहां पर एक पैसिफिक नाम का होस्पिटल है जहां पर हर तरह की बीमारी का निशुल्क ईलाज व आपरेशन किया जा रहा है ,चाहे इलाज एक रूपये से दस लाख रूपये तक का ही क्यों ना हो ,पूर्णरूप से निशुल्क है ,वहां मरीज़ के साथ मरीज की देखभाल करने वालो को रहने व खाने पीने की व्यवस्था भी निशुल्क है । कृपया आपके पास जितने भी ग्रुप हो उनमे शैयर करे ताकि सभी बीमार भाई बहनों को सही व निशुल्क इलाज का भरपूर फायदा पहुंचे। और जानकारी के लिये इस 8384969595 वाटसप नम्बर पर सम्पर्क करें। सभी को जानकारी देना भी एक बहुत बड़ा धर्म का कार्य है ,कृपया इस धर्म के कार्य को करके पुण्य कमाएँ । पेसिफिक होस्पिटल में हर तरह की बिमारी का निशुल्क इलाज व आपरेशन किया जा रहा है , अधिक से अधिक बीमार भाई बहन लाभ लेवे। वहां एक रूपये से करोड़ रूपये तक का इलाज पूरा निशुल्क है ,आपरेशन भी निशुल्क है ! 〰〰〰〰〰〰 पुर्ण जानकारी नीचे पढ़ें पेसिफेिक इंस्टीट्युट आफ मेडिकल सांईसेज 〰〰〰〰〰〰 Pacific institute of Medical Sciences {मेडिकल काउन्सिल आफ इण्डिया के द्वारा मान्यता प्राप्त} 〰〰〰〰〰〰 विश्व प्रसिद्ध चिकित्सकों द्वारा अन्तराष्ट्रिय स्तर की चिकित्सा सेवाएँ 〰〰〰〰〰〰 अम्बुआ रोड़ ,गांव उमरड़ा, तहसिल गिर्वा, उदयपुर 313015(राजस्थान) 〰〰〰〰〰〰 भर्ती, जांच, चिकित्सा, आपरेशन, जेनेरिक दवाईंयाँ निशुल्क उपलब्ध हैं। 〰〰〰〰〰〰 *आधुनिकतम उपकरण *विश्वसनीय जाँच *दवाईंया निशुल्क *सभी आपरेशन निशुल्क *सभी तरह की जाँचे निशुल्क 〰〰〰〰〰 *ओपीडी सुविधा *चिकित्सा सुविधा, *वार्ड/आंतरिक सुविधा, *माईनर /मेजर ओटी *फिजियोथेरेपी *प्रयोगशालाएं *ईसीजी सेवांए *फार्मेसी सेवाएँ 〰〰〰〰〰〰 {24 घण्टे इमरजेन्सी सेवांए प्रतिदिन 8 से 10 आपरेशन रविवार छोड़कर} 〰〰〰〰〰〰 :~होस्पिटल के सम्पर्क नम्बर:~ 09352054115 09352011351 09352011352 〰〰〰〰〰〰 कृपया सभी ग्रुपों में शैयर किजिए । 〰〰〰〰〰〰
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*कोई हमारी गलतियां निकालता है तो* *हमें खुश होना चाहिए..* *क्योंकि* *कोई तो है जो हमें पूर्ण दोष रहित बनाने के लिए* *अपना दिमाग और* *समय दे रहा है ।*सुप्रभात* 🌹🌹🙏🙏🏻🌹🌹
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*कायस्थों के अस्तित्व और स्वाभिमान को प्रदर्शित करने वाली कविता जो किसी ने भेजी थी, अच्छी लगी तो सोचा सबसे share करूँ :- सूर्य रश्मियाँ जब भी बोझिल हुईं अंधेरी रातों से, सदा मिली है ताकत इनको कागज कलम दवातों से, तुम वंशज हो चित्रगुप्त के जग में शान तुम्हारी है, कागज कलम दवात सदा से ही पहचान तुम्हारी है, सकल श्रृष्टि के निर्माता तुम ब्रम्हा जी के प्यारे हो, प्रखर प्रवर्तक बुद्धि लिए माँ शक्ति के भी दुलारे हो, धर्मराज बन स्वयं न्याय की रेखा रखने वाले हो, सारे जग के ही कर्मों का लेखा रखने वाले हो, सम्मानित हो पूज्यनीय हो थाह दिखाने वाले हो, अन्धकार में भी प्रकाश की राह दिखाने वाले हो, दुनिया भर में निज संस्कृति का गान कराने वाले हो, बुद्धिमान को बुद्धिमता का भान कराने वाले हो, तुम भारत के गौरव हो तुम राष्ट्र के खातिर डटे रहे, जातिवाद में नहीं पटे पर राष्ट्रवाद पर अटे रहे, श्वेत चन्द्र आभास तुम्हीं हो सूरज का प्रकाश तुम्हीं हो, धरती व आकाश तुम्हीं हो गौरवमयी इतिहास तुम्हीं हो, खड्गों की टंकार तुम्हीं हो पावन गंगा धार तुम्हीं हो, जलता इक अंगार तुम्हीं हो ठाकरे की हुँकार तुम्ही हो, *स्वतंत्रता की आश तुम्हीं थे दुनिया भर में ख़ास तुम्हीं थे,* *आजाद हिन्द करवाने वाले नेता वीर सुभाष तुम्हीं थे,* *पुष्पों के मकरंद तुम्हीं हो कवि चेतन के छंद तुम्हीं हो,* *ये भगवा स्वछन्द तुम्हीं हो स्वामी विवेकानन्द तुम्हीं हो,* मोहक चन्दन बाग़ तुम्हीं हो होली वाली फाग तुम्हीं हो, हास्य और अनुराग तुम्हीं हो तानसेन के राग तुम्हीं हो, राष्ट्रपति के भी सुर तुम थे, संविधान के भी उर तुम थे, धूल चटा दे जो दुश्मन को, शाश्त्री लाल बहादुर तुम थे, प्रेमचन्द गोदान तुम्हीं थे महादेवी पहचान तुम्हीं थे, वृन्दावन सी शान तुम्हीं थे संपूर्णानंद की जान तुम्हीं थे, *सोनू की आवाज तुम्हीं हो बच्चन का अंदाज तुम्हीं हो,* *ध्यानचंद की हॉकी हो तुम बॉलीवुड का ताज तुम्हीं हो,* *ऊँच नीच पे कहर तुम्हीं थे गीत गजल की बहर तुम्हीं थे,* *सोई सरकार जगाने वाली जयप्रकाश की लहर तुम्हीं थे,* अपना अतीत अपना गौरव कहीं और ना खो जाए, बुद्धिजीवियों की बिसात बिल्कुल बौनी ना हो जाए, आपस की बस खींचतान में हम पिछड़े ना रह जायें, औरों के घर को सीच सींच न मकाँ हमारे ढह जायें, कुशाग्र बुद्धि वालों के कलमें कहीं सुप्त न हो जायें, बदले बदले इस मिजाज में हम विलुप्त न हो जायें, इसीलिये हे कायस्थ बन्धुओं शक्ति की पहचान करो, तुम वंशज हो चित्रगुप्त के मिलकर के आह्वान करो, एक सूत्र में बंधो कलम की धारें आज मिला दो तुम, सागर की गहराई में पतवारें आज मिला दो तुम, स्वयं तरक्की करो साथ में सबका ही उत्थान करो, जितना भी हो सके देश के लोगों का कल्याण करो, अपने हित के लिए लड़ो पर धर्म एक है ध्यान रहे, हिन्दू हिन्दू भाई भाई हिन्दू अपनी पहचान रहे, अपना गौरव नहीं रहा है केवल बस तलवारों से, आर्याव्रत था विश्वगुरु कृपाण कलम की धारों से, *कलम चलाओं धर्म सनातन की तुम पूर्ण सुरक्षा में,* *वक्त पड़े तो शीश कटा देना भारत की रक्षा में,* *(नोट- पसंद आने पर देश और दुनिया भर के अन्य कायस्थ बंधुओं तक पहुंचायें )
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प्रेम पशु-पक्षियों की आँखों में भी पढ़ा जा सकता है तो फिर प्रेम मनुष्य के हृदय में क्यों नहीं होना चाहिए। मनुष्य के हृदय में तो अथाह सागर है प्रेम का। आवश्यकता है उसे ग्रहण करने की, जीवन में अपनाने की। प्रेम ईश्वर की पूजा माना गया है। प्रेम ग्रहणीय है। प्रेम की आराधना करने वाला ही नैसर्गिक आनंद की अनुभूति करता है और वही इसका अधिकारी भी है। प्रेम सहज एवं स्वाभाविक है, बीज रूप है तथा व्यक्तित्व की आधारशिला है। ईश्वर की खोज करने वाला प्यार की खोज क्यों नहीं कर सकता। जबकि प्रेम साकार परमात्मा है। इसके अन्वेषण हेतु कोई बड़ा तप और त्याग नहीं करना पड़ता है। मात्र अपने विवेक को जागृत करना है। यह तो प्रकृति का सामान्य गुण धर्म है। प्रेम का मार्ग ही तो हम मनुष्यों को परमात्मा तक ले जाता है फिर क्यों नहीं हम प्रेम स्वरूप बन सकते हैं? क्यों फँसते जाते हैं सांसारिक द्वेष, छल-कपट में? प्रेम भी ईश्वर की तरह ही एक है। किंतु प्रेम के भी ईश्वर की तरह अनेक रूप हैं। एक माँ का अपनी संतान के प्रति जो मोह है वह प्रेम ही तो है। अपने परिवार एवं संबंधियों के प्रति जो मोह है वह भी प्रेम का ही एक रूप है। किंतु ये प्रेम स्वार्थी प्रेम कहलाता है। इस तरह के प्रेम से हम प्रेम स्वरूप नहीं बन पाएँगे, निःस्वार्थ प्रेम ही हम मनुष्यों को प्रेम स्वरूप बनाता है। निःस्वार्थ प्रेम हमें देश के प्रति, अपनी मातृभूमि के प्रति, हमारे हृदय में उमड़ते हुए हमें प्रेम स्वरूप बना देता है। ऐसे ईश्वर प्रेम के प्रतीक निःस्वार्थ, निश्छल और निष्कपट प्रेम ही भगवान का वरदान है।
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ईश्वर एक है किंतु उसके रूप अनेक हैं। कहीं हम राम के रूप में ईश्वर को जानते हैं तो कहीं कृष्ण रूप में, कहीं भगवान शिव के रूप में। आज हम क्यों मानते हैं ईश्वर को? क्यों वह पूजनीय है? इसका सिर्फ एक ही कारण है, और वह है प्रेम और सिर्फ प्रेम, क्योंकि ईश्वर के अनेक रूप होते हुए भी वह अपने बंदों से एक सा प्रेम करता है और दुःख-सुख तो मनुष्य सिर्फ अपने कर्मों के अनुसार ही भोगता है। जिस प्रकार हम ईश्वर को प्रेम स्वरूप मानते हैं, ठीक उसी प्रकार मनुष्य भी प्रेम स्वरूप बन सकता है। जिस प्रकार ईश्वर निराकार है और हम उसे देख नहीं सकते, किंतु उसका अहसास हमें होता है। जब हम किसी संकट में पड़ जाते हैं या हमें कोई सताता है, तब हम ईश्वर की प्रार्थना करते हैं। यही वो अटूट विश्वास है जो हमें अहसास कराता है, यकीन दिलाता है कि ईश्वर है और ईश्वर के प्रति हमारी आस्था बढ़ती जाती है। प्रेम ही तो है, जो हमें आपस में बाँधे हुए है और हमें अपनों से बिछड़ने पर जो कष्ट होता है। वो सिर्फ प्रेम के ही कारण होता है, क्योंकि हम उनसे प्रेम करते हैं, इसलिए बिछड़ने पर कष्ट का अहसास होता है। इसके विपरीत जब हम वापस लौटते हैं तो हृदय में एक उत्साह, एक खुशी का अहसास होता है। यह प्रेम ही तो है जो हमारे हृदय में मौलिक रूप से उपस्थित होता है। ईश्वर की इस सृष्टि में अगर प्रेम न होता तो सृष्टि के संचालन की कल्पना निराधार और निर्मूल ही होती। यदि हृदय में प्रेम है तो मनुष्य प्रेम स्वरूप बन सकता है। किंतु प्रेम रहित हृदय पाषाणवत एवं नीरस है। पत्थर में प्रेम की कल्पना नहीं की जा सकती है। मनुष्य ईश्वर की अंतिम व सर्वोत्कृष्ट कृति है। प्रतीत होता है मानों ईश्वर ने मनुष्य को बनाने में अपनी संपूर्ण शक्ति लगा दी हो।
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सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को चलाने वाली सत्ता के विषय में हर इन्सान को जिज्ञासा रहती है। हमारे ग्रन्थ मानते हैं कि ईश्वर इस ब्रह्माण्ड का संचालन करता है। वही इसे बनाने और मिटाने वाला है। यानी जन्मदाता, पोषक और संहारक वही ईश्वर है। इसके विपरीत कुछ लोग इस ईश्वरीय सत्ता को चुनौती देते हुए उसके अस्तित्व को ही नकार देते हैं। वे मानते हैं कि ईश्वर नाम की कोई शक्ति नहीं है जो संसार को चलाती है। अलबत्ता 'कोई शक्ति सृष्टि को चलाती है' इसे मानने में उन्हें गुरेज नहीं होता। संसार में मनुष्य जब जन्म लेता है तब से उसके मन में यह भाव बार-बार भरा जाता है कि उसे ईश्वर ने इस धरा पर भेजा है। इसलिए सदा उससे डरना चाहिए और उसकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। यानी ऐसा कहने और मानने वाले लोग परमपिता परमात्मा की सत्ता को स्वीकार करते हैं। अपने अच्छे-बुरे हर समय का उत्तरदायी उसे ही मानते हैं। अपने सभी कर्म उसे ही समर्पित करते हैं। यदि उस ईश्वरीय सत्ता के अस्तित्व को हम स्वीकार कर लेते हैं तब कुछ ऐसे अनसुलझे प्रश्न मन को मथते रहते हैं। जैसे क्या ईश्वर है? यदि ईश्वर है तो उसका स्वरूप कैसा है? उसका रूप स्त्री का है या पुरुष का? किसने इस संसार की रचना की और क्यों की? इस संसार को चलाने वाला कौन है? यह संसार नष्ट क्यों हो जाता है? हम कह सकते हैं कि ईश्वर है। जिस प्रकार लकड़ी को देखकर अग्नि का बोध नहीं होता, उसी तरह ब्रह्माण्ड को देखकर भी परमात्मा के होने का रहस्य समझ में नहीं आता। वह इस सृष्टि के कण-कण में विराजमान हैं। हर जीव में, प्रकृति की हर वस्तु में वह विद्यमान है। उसे मनुष्य इन भौतिक चर्म चक्षुओं से नहीं देख सकते। उसे देखने के लिए साधना करनी पड़ती है, तब वह दिखाई देता है। उसका स्वरूप दिखाई नहीं देता। कुछ लोग उसे निराकार मानते हैं और कुछ उसे साकार मानकर, उसकी मूर्ति बनाकर उसकी पूजा क��
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ईश्वर — यह एक शक्ति है। भगवान — यह एक व्यक्ति विशेष है जिन्होंने ईश्वर को जान लिया है। ईश्वर — सम्पूर्ण स्वरुप, आद्य शक्ति या शिवा की अनंत व्यापक स्थिति को ही ईश्वर कहते है। भगवान — उस संपूर्ण स्वरुप की अनंत व्यापकता का जिन्होंने अनुभव किया, उसमें ही खो गए, वह सभी भव्य आत्माएँ भगवान है। ईश्वर — यह वह शक्ति है जो अजन्मा-अमर-अविनाशी है, यानि काल से पूर्व भी यह शक्ति विद्यमान थी और काल के पश्चात् भी विद्यमान रहती है। भगवान — जन्म मरण के परिभ्रमण में, उसकी व्यार्थता जानकार जो अजर अमर होने की यात्रा पर निकल पड़े और अविनाशी शक्ति का अनुभव किया वह भगवान है। ईश्वर — क्षेत्र की अपेक्षा से ईश्वर असीम है, अनंत है। भगवान — क्षेत्र की अपेक्षा से भगवान एक सीमित शरीर व आयुष्य में होते है। तभी हम उनकी जन्म-जयंती, निर्वाण-जयंती, आदि मनाते हैं। ईश्वर — रूप आदि (वर्ण, गंध व स्पर्श) की अपेक्षा से ईश्वर निराकार है। भगवान — रूप आदि की अपेक्षा से भगवान साकार है। ईश्वर — आद्य शक्ति व शिव ईश्वरीय शक्ति की अभिव्यक्ति को उजागर करने के प्रतीक है। भगवान — हिंदू परम्परा से श्री राम, कृष्ण, आदि भगवान कहलाते है। जिन परम्परा से अष्ट कर्मों को क्षय करके अनंत में खोने वाले सभी तीर्थंकर, केवली, आदि भगवान कहलाते हैं। बौद्ध परम्परा से गौतम बुद्ध आदि भगवान कहलाते हैं। ईसाई परम्परा से जीसस आदि भगवान कहलाते हैं तो सिख परम्परा से नानक देव आदि भगवान कहलाते हैं। ईश्वर — ईश्वर की उपस्थिति का कारण है कि वह अपनी लीला का सर्जन-संचालन-विसर्जन करते है। भगवान — भगवान की उपस्थिति का कारण है कि अपने उत्पाद-व्यय-ध्रुव स्वभाव को जानकार परिभ्रमण का अंत लाते हैं। ईश्वर — सकल विश्व का कण-कण इस शक्ति से निकला है। भगवान — भगवान एक विशेष व्यक्ति हैं जो अपने भीतर रहे ईश्वर का अनुभव करने में सफल हु�
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☘💥🌸☘💥🌸☘💥🌸☘ कभी-कभी जो बेहतरीन कार्य आप कर सकते हैं, वह यह है कि आप कुछ भी न करें... न कुछ सोचें... न विचारें... न कल्पना करें और न ही किसी से प्रभावित हों। आप सिर्फ सांस ले और इस बात का मन में दृढ विश्वास रखें कि जो कुछ भी होगा...वह कल्याणकारी होगा। 🙏जय श्री मदन जी🙏 🌸 सुप्रभात 🌸 💐 आपका दिन शुभ हो 💐 ☘💥🌸☘💥🌸☘💥🌸☘
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💥☘🌸💥☘🌸💥☘🌸💥 महल,गाड़ी, सोना ,चांदी हीरे,मोती सब शरीर को चाहिए। आत्मा को शांति, सुख ,प्यार आनंद और शक्ति चाहिए !!! 🙏🏻जय श्री मदन जी🙏🏻 🌹 सुप्रभात 🌹 💥☘🌸💥☘🌸💥☘🌸💥
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Today is *COUPLE'S DAY* Always Respect, Care n Love this *Relationship*. This is a *Beautiful Gift* Given By *God* *पति-पत्नी* एक बनाया गया *रिश्ता*... पहले कभी एक दूसरे को *देखा* भी नहीं था... अब सारी *जिंदगी* एक दूसरे के साथ। पहले *अपरिचित*, फिर धीरे-धीरे होता *परिचय*। धीरे-धीरे होने वाला *स्पर्श*, फिर *नोकझोंक*....*झगड़े*...बोलचाल *बंद*। कभी *जिद*, कभी *अहम* का भाव......... फिर धीरे-धीरे बनती जाती *प्रेम पुष्पों* की *माला* फिर *एकजीवता*, *तृप्तता*। वैवाहिक जीवन *परिपक्व* होने में *समय* लगता है। धीरे-धीरे जीवन में *स्वाद और मिठास* आती है... ठीक वैसे ही जैसे *अचार* जैसे-जैसे *पुराना* होता जाता है, उसका *स्वाद* बढ़ता जाता है....... *पति पत्नी* एक दूसरे को अच्छी प्रकार *जानने समझने* लगते हैं, *वृक्ष* बढ़ता जाता है,* *बेलें फूटती* जातीं हैं, *फूल*आते हैं, *फल* आते हैं, रिश्ता और *मजबूत* होता जाता है, धीरे-धीरे बिना एक दूसरे के *अच्छा* ही नहीं लगता। *उम्र* बढ़ती जाती है, दोनों एक दूसरे पर अधिक *आश्रित* होते जाते हैं, एक दूसरे के बगैर *खालीपन* महसूस होने लगता है। फिर धीरे-धीरे मन में एक *भय का निर्माण* होने लगता है, "ये चली गईं तो मैं कैसे जिऊँगा"...?? "ये चले गए तो मैं कैसे जीऊँगी"...?? अपने मन में *घुमड़ते इन सवालों* के बीच जैसे, खुद का *स्वतंत्र अस्तित्व* दोनों भूल जाते हैं। कैसा अनोखा *रिश्ता*... कौन कहाँ का और एक बनाया गया रिश्ता। *"पति-पत्नी"* "Happy couples day" सभी शादीशुदा जोड़ो को 🌙💖🌙
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🌸☘🌻🌸☘🌻🌸☘🌻🌸 मोह में हम बुराईयॉं और नफरत में हम अच्छाईयॉ नहीं देख पाते हैं,इसलिए हम इंसाफ नहीं कर पाते हैं,हम मोह और नफरत से दूर रहें !!! 🙏जय श्री मदन जी🙏 🌸☘🌻🌸☘🌻🌸☘🌻🌸
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_एक आम आदमी सुबह जागने के बाद सबसे पहले टॉयलेट जाता है,बाहर आ कर साबुन से हाथ धोता है,दाँत ब्रश करता है,नहाता है,कपड़े पहनकर तैयार होता है,अखबार पढता है,नाश्ता करता है,घर से काम के लिए निकल जाता है,बाहर निकल कर रिक्शा करता है,फिर लोकल बस या ट्रेन में या अपनी सवारी से ऑफिस पहुँचता है।_ _वहाँ पूरा दिन काम करता है,साथियों के साथ चाय पीता है,शाम को वापिस घर के लिए निकलता है;_ _घर के रास्ते में,बच्चों के लिए टॉफी,बीवी के लिए मिठाई वगैरह लेता है,मोबाइल में रिचार्ज करवाता है,और अनेक छोटे मोटे काम निपटाते हुए घर पहुँचता है।_ अब आप बताइये कि उसे दिन भर में कहीं कोई *हिन्दू* या *मुसलमान* मिला? क्या उसने दिन भर में किसी *हिन्दू* या *मुसलमान* पर कोई अत्याचार किया? _उसको जो दिन भर में मिले वो थे.._ अख़बार वाले भैया, दूध वाले भैया, रिक्शा वाले भैया, बस कंडक्टर, ऑफिस के मित्र, आंगतुक, पान वाले भैया, चाय वाले भैया, टॉफी की दुकान वाले भैया, मिठाई की दूकान वाले भैया; जब ये सब लोग भैया और मित्र हैं,तो इनमें *हिन्दू* या *मुसलमान* कहाँ है? "क्या दिन भर में उसने किसी से पूछा कि भाई,तू *हिन्दू* है या *मुसलमान*?" अगर तू *हिन्दू* या *मुसलमान* है तो मैं तेरी बस में सफ़र नहीं करूँगा; तेरे हाथ की चाय नहीं पियूँगा; तेरी दुकान से टॉफी नहीं खरीदूंगा। क्या उसने साबुन,दूध,आटा,नमक,कपड़े,जूते,अखबार,टॉफी,मिठाई खरीदते समय किसी से ये सवाल किया था कि,ये सब बनाने और उगाने वाले *हिन्दू* हैं या *मुसलमान*? "जब हमारी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में मिलने वाले लोग *हिन्दू* या *मुसलमान* नहीं होते,तो फिर क्या वजह है कि *चुनाव* आते ही हम *हिन्दू* या *मुसलमान* हो जाते हैं?" _*समाज के तीन जहर*_ 👇👇👇 _1-टीवी की बेमतलब की बहस_ _2-राजनेताओं के जहरीले बोल_ _और 3- कुछ कम्बख्त लोगो के सोशल मीडिया के भड़काऊ मैसेज_ _इनसे दूर रहे तो शायद बहुत हद तक समस्या तो हल हो ही जायेगी।_ _सिर्फ पढ़े लिखे लोग शेयर करें,पढ़ा लिखा समझकर ही आपको भेजा है।_ _*पसंद आये तो शेयर करें एवं देश की जनता को मजबूत करें।*_🙏🏻
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😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀 आज हर इंसान के पास ई-मेल तो है,लेकिन इंसान के इंसान के साथ कोई मेल नही है !!! 🙏जय श्री मदन जी🙏 😀😀😀😀😀😀😀😀😀😀
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🌸🌿🌸🌿🌸🌿🌸 किसी दिन एक मटका और गुलदस्ता साथ में खरीदा हो और घर में लाते ही ५० रूपये का मटका अगर फूट जाए तो हमे इस बात का दुख होता है, क्योंकि मटका इतनी जल्दी फूट जायेगा ऐसी हमे कल्पना भी नहीं थी। पर गुलदस्ते के फूल जो २०० रूपये के है वो शाम तक मुरझा जाए तो भी हम दु:खी नहीं होते क्योंकि ऐसा होने वाला ही है ये हमे पता ही था। मटके की इतनी जल्दी फूटने की हमे अपेक्षा ही नहीं थी, तो फूटने पर दुख का कारण बना, पर फूलो से अपेक्षा नहीं थी इसलिये वे दु:ख का कारण नहीं बनें। इसका मतलब साफ़ है कि जिसके लिए जितनी अपेक्षा ज्यादा उसकी तरफ से उतना दु:ख ज्यादा और जिस के लिए जितनी अपेक्षा कम उस के लिए उतना ही दु:ख भी कम। *प्रसन्नता का सरल नियम* *न अपेक्षा,न उपेक्षा।* *आनंद ही आनंद* 🌸🌿🌸🌿🌸🌿🌸
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"झाँक रहे है इधर उधर सब। अपने ललकारे कौन ? ? ढ़ूंढ़ रहे दुनियाँ में कमियां । अपने मन में ताके कौन ? सबके भीतर दर्द छुपा है । उसको अब ललकारे कौन ? दुनियाँ सुधरे सब चिल्लाते । खुद को आज सुधारे कौन ? पर उपदेश कुशल बहुतेरे । खुद पर आज विचारे कौन ? हम सुधरें तो जग सुधरेगा यह सीधी बात उतारे कौन ?"
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*"मकान सारे कच्चे थे" हरिवंश राय बच्चन* گهر سڀ ڪچا هئا ----- هريونش راءِ بچن मकान चाहे कच्चे थे लेकिन रिश्ते सारे सच्चे थे… شايد گهر سڀ ڪچا هئا پر رشتا سڀ سچا هئا चारपाई पर बैठते थे पास पास रहते थे… کٽ تي وِهندا هُئاسين ويجهو ويجهو رهندا هئاسين सोफे और डबल बेड आ गए दूरियां हमारी बढा गए…. جڏھن سوفا ۽ ڊبل بيڊ اچي ويا وڇوٽيون اسان جون وڌنڌيون ويون छतों पर अब न सोते हैं कहानी किस्से अब न होते हैं.. اڄ ڇتين تي نٿا سمهون ڪهاڻيون ڪِسا بہ نٿا چئون आंगन में वृक्ष थे सांझा करते सुख दुख थे… اڱر ٻاهر وڻ هوندا هئا سک دک ونڊيا ويندا هئا दरवाजा खुला रहता था राही भी आ बैठता था… دروازا کُلا رهندا هئا ايندڙ ويندڙ بہ اندر اچي وهندا هئا कौवे भी कांवते थे मेहमान आते जाते थे… ڪانوَ ڪان ڪان ڪندا هئا مهمان ايندا ويندا هئا … इक साइकिल ही पास थी फिर भी मेल जोल की आस थी … سائيڪل هڪ ئي هوندي هئي پوءِ بہ ميل ميلاپ جي آس رهندي هئي … रिश्ते निभाते थे रूठते मनाते थे… رشتا نباهيندا هئاسين رٺل کي منائيندا هئاسين … पैसा चाहे कम था माथे पे ना गम था… پوءِ ناڻو بلاشڪ گهٽ ھو پر مٿي تي ڪو گم نہ هو मकान चाहे कच्चे थे रिश्ते सारे सच्चे थे… گهر بلاشڪ ڪچا هئا پر رشتا سڀ سچا هئا … अब शायद कुछ पा लिया है पर लगता है कि बहुत कुछ गंवा दिया है... شايد هاڻ گهڻو ڪجهہ ڪمايو آ پر لڳي ٿو گهڻو ڪجهہ وڃايو آ … जीवन की भाग-दौड़ में – क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है? हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है। جيون جي ڍُڪ ڊوڙ ۾ - ڇو وقت ساڻ رنگيني گم ٿيندي آهي؟ کلندڙ ٽپندڙ زندگي عام ٿي ويندي آهي ؟ एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम और आज कई बार बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है!! هڪ صبح ھو جڏھن کلندا اُٿندا هئاسين ۽ اڄ ڪيتريون شام ويلون بنا مسڪرائيندي گذري وينديون آهن !! कितने दूर निकल गए, रिश्तो को निभाते निभाते... ڪيترو تہ پري لنگهي آيا آهيون رشتن کي نباهيندي نباهيندي … खुद को खो दिया हमने, अपनों को पाते पाते... پنهنجي ”پاڻُ “ کي وڃائي ڇڏيو آ پنهنجن کي پائيندي پائيندي … मकान चाहे कच्चे थे... रिश्ते सारे सच्चे थे… گهر بلاشڪ ڪچا هئا … پر رشتا سڀ سچا هئا …
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🌺🌿🌻🌺🌿🌻🌺🌿🌻🌺 वह व्यक्ति बुद्धिमान है जो उन वस्तुओं के लिए दुःख नहीं मनाता जो उसके पास नहीं हैं, लेकिन उनके लिए आनन्द मनाता है जो उसके पास हैं। 🙏जय श्री मदन जी🙏 🌺🌿🌻🌺🌿🌻🌺🌿🌻🌺
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धीरे धीरे पढिये पसंद आएगा... 1👌मुसीबत में अगर मदद मांगो तो सोच कर मागना क्योंकि मुसीबत थोड़ी देर की होती है और एहसान जिंदगी भर का..... 2👌कल एक इन्सान रोटी मांगकर ले गया और करोड़ों कि दुआयें दे गया, पता ही नहीँ चला की, गरीब वो था की मैं.... 3👌जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है.. 4👌बचपन भी कमाल का था खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें या ज़मीन पर, आँख बिस्तर पर ही खुलती थी... 5👌खोए हुए हम खुद हैं, और ढूंढते भगवान को हैं... 6👌अहंकार दिखा के किसी रिश्ते को तोड़ने से अच्छा है कि माफ़ी मांगकर वो रिश्ता निभाया जाये.... 7👌जिन्दगी तेरी भी अजब परिभाषा है.. सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है... 8👌खुशीयाँ तकदीर में होनी चाहिये, तस्वीर मे तो हर कोई मुस्कुराता है... 9👌ज़िंदगी भी वीडियो गेम सी हो गयी है एक लेवल क्रॉस करो तो अगला लेवल और मुश्किल आ जाता हैं..... 10👌इतनी चाहत तो लाखों रुपये पाने की भी नही होती, जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है....... 11👌हमेशा छोटी छोटी गलतियों से बचने की कोशिश किया करो, क्योंकि इन्सान पहाड़ो से नहीं पत्थरों से ठोकर खाता है.. मनुष्य का अपना क्या है ? जन्म :- दुसरो ने दिया नाम :- दुसरो ने रखा शिक्षा :- दुसरो ने दी रोजगार :- दुसरो ने दिया और शमशान :- दुसरे ले जाएंगे तो व्यर्थ में घमंड किस बात पर करते है लोग 👏 दिल को छुआ हो अपने best friend को जरुर शेयर करे मे हू तो मुझे भी शेयर करे😊
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समय समय पर ईश्वर का शुक्र अदा करना चाहिए किसी निर्माणाधीन भवन की सातवीं मंजिल से ठेकेदार ने नीचे काम करने वाले मजदूर को आवाज दी ! निर्माण कार्य की तेज आवाज के कारण मजदूर कुछ सुन न सका कि उसका ठेकेदार उसे आवाज दे रहा है ! ठेकेदार ने उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए एक 1 रुपये का सिक्का नीचे फैंका, जो ठीक मजदूर के सामने जा कर गिरा ! मजदूर ने सिक्का उठाया और अपनी जेब में रख लिया, और फिर अपने काम मे लग गया ! अब उसका ध्यान खींचने के लिए सुपर वाईजर ने पुन: एक 5 रुपये का सिक्का नीचे फैंका ! फिर 10 रु. का सिक्का फेंका उस मजदूर ने फिर वही किया और सिक्के जेब मे रख कर अपने काम मे लग गया ! ये देख अब ठेकेदार ने एक छोटा सा पत्थर का टुकड़ा लिया , और मजदूर के उपर फैंका जो सीधा मजदूर के सिर पर लगा ! अब मजदूर ने ऊपर देखा और ठेकेदार से बात चालू हो गयी ! ऐसी ही घटना हमारी जिन्दगी मे भी घटती रहती है... ईश्वर हमसे संपर्क करना, मिलना चाहता है, लेकिन हम दुनियादारी के कामों में इतने व्यस्त रहते हैं, कि हम ईश्वर को याद नहीं करते ! ईश्वर हमें छोटी छोटी खुशियों के रूप मे उपहार देता रहता है, लेकिन हम उसे याद नहीं करते, और वो खुशियां और उपहार कहाँ से आये ये ना देखते हुए, उनका उपयोग कर लेते है, और ईश्वर को याद ही नहीं करते! ईश्वर हमें और भी खुशियों रूपी उपहार भेजता है, लेकिन उसे भी हम हमारा भाग्य समझ कर रख लेते हैं, ईश्वर का धन्यवाद नहीं करते, उसे भूल जाते हैं ! तब ईश्वर हम पर एक छोटा सा पत्थर फैंकते हैं, जिसे हम कठिनाई, तकलीफ या दुख कहते हैं, फिर हम तुरन्त उसके निराकरण के लिए ईश्वर की ओर देखते है, याद करते हैं ! यही जिन्दगी मे हो रहा है. यदि हम हमारी छोटी से छोटी ख़ुशी भी ईश्वर के साथ उसका धन्यवाद देते हुए बाँटें, तो हमें ईश्वरके द्वारा फैंके हुए पत्थर का इन्तजार ही नहीं करना पड़ेगा...!!!!! 👐🌿जय श्री मदन जी
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. ध्यान से पढ़ना बहुत कुछ सीखने को मिलेगा *"वसीयत और नसीहत"* एक दौलतमंद इंसान ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा, *"बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, मेरी यह इक्छा जरूर पूरी करना ।* पिता के मरते ही नहलाने के बाद, बेटे ने पंडितजी से पिता की आखरी इक्छा बताई । *पंडितजी ने कहा: हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इज़ाज़त नही है।* पर बेटे की ज़िद थी कि पिता की आखरी इक्छ पूरी हो । बहस इतनी बढ़ गई की शहर के पंडितों को जमा किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला । *इसी माहौल में एक व्यक्ति आया, और आकर बेटे के हाथ में पिता का लिखा हुआ खत दिया, जिस में पिता की नसीहत लिखी थी* _*"मेरे प्यारे बेटे"*_ *देख रहे हो..? दौलत, बंगला, गाड़ी और बड़ी-बड़ी फैक्ट्री और फॉर्म हाउस के बाद भी, मैं एक फटा हुआ मोजा तक नहीं ले जा सकता ।* *एक रोज़ तुम्हें भी मृत्यु आएगी, आगाह हो जाओ, तुम्हें भी एक सफ़ेद कपडे में ही जाना पड़ेगा ।* *लिहाज़ा कोशिश करना,पैसों के लिए किसी को दुःख मत देना, ग़लत तरीक़े से पैसा ना कमाना, धन को धर्म के कार्य में ही लगाना ।* *सबको यह जानने का हक है कि शरीर छूटने के बाद सिर्फ कर्म ही साथ जाएंगे"। लेकिन फिर भी आदमी तब तक धन के पीछे भागता रहता है जब तक उसका निधन नहीं हो जाता।* *👉 1) जो आपसे दिल से बात करता है उसे कभी दिमाग से जवाब मत देना।* *👉 2) एक साल मे 50 मित्र बनाना आम बात है। 50 साल तक एक मित्र से मित्रता निभाना खास बात है।* *👉 3) एक वक्त था जब हम सोचते थे कि हमारा भी वक्त आएगा और एक ये वक्त है कि हम सोचते हैं कि वो भी क्या वक्त था।* *👉 4) एक मिनट मे जिन्दगी नहीं बदलती पर एक मिनट सोच कर लिखा फैसला पूरी जिन्दगी बदल देता है।* *👉 5) आप जीवन में कितने भी ऊॅचे क्यों न उठ जाएं, पर अपनी गरीबी और कठिनाई को कभी मत भूलिए।* *👉 6) वाणी में भी अजीब शक्ति होती है। कड़वा बोलने वाले का शहद भी नहीं बिकता और मीठा बोलने वाले की मिर्ची भी बिक जाती है।* *👉 7) जीवन में सबसे बड़ी खुशी उस काम को करने में है जिसे लोग कहते हैं कि तुम नही कर सकते हो।* *👉 8) इंसान एक दुकान है और जुबान उसका ताला। ताला खुलता है, तभी मालूम होता है कि दुकान सोने की है या कोयले की।* *👉 9) कामयाब होने के लिए जिन्दगी में कुछ ऐसा काम करो कि लोग आपका नाम Face book पे नही Google पे सर्च करें।* *👉 10) दुनिया विरोध करे तुम डरो मत, क्योंकि जिस पेङ पर फल लगते है दुनिया उसे ही पत्थर मारती है।* *👉 11) जीत और हार आपकी सोच पर ही निर्भर है। मान लो तो हार होगी और ठान लो तो जीत होगी।* *👉 12) दुनिया की सबसे सस्ती चीज है सलाह, एक से मांगो हजारो से मिलती है। सहयोग हजारों से मांगो एक से मिलता है।* *👉 13) मैने धन से कहा कि तुम एक कागज के टुकड़े हो। धन मुस्कराया और बोला बिल्कुल मैं एक कागज का टुकड़ा हूँ, लेकिन मैने आज तक जिंदगी में कूड़ेदान का मुंह नहीं देखा।* *👉 14) आंधियों ने लाख बढ़ाया हौसला धूल का, दो बूंद बारिश ने औकात बता दी।* *👉 15) जब एक रोटी के चार टुकड़े हों और खाने वाले पांच हों, तब मुझे भूख नहीं है, ऐसा कहने वाला कौन है.? सिर्फ "माँ"।* *👉 16) जब लोग आपकी नकल करने लगें तो समझ लेना चाहिए कि आप जीवन में सफल हो रहे हैं।* *👉 17) मत फेंक पत्थर पानी में, उसे भी कोई पीता है।* *मत रहो यूं उदास जिन्दगी में, तुम्हें देखकर भी कोई जीता है*।। अच्छा लगे तो औरों को भी भेजें 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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07/06/2018 हाल ही में: - यह देखा गया है कि सीएसआई के संबंध में अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी सीपीआईओ द्वारा प्रदान की गई है, जो भौतिक रूप में उपलब्ध थी। अपीलकर्ता को सलाह दी जाती है कि इस अधिनियम के प्रावधान सीपीआईओ को केवल ऐसी जानकारी प्रदान करने के लिए निर्देशित करें जो पहले से मौजूद है और सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा बनाए गए रूप में। जानकारी बनाने या जानकारी की व्याख्या करने के लिए यह अधिनियम के दायरे से बाहर है। इसलिए, इस मामले में सीपीआईओ को कोई निर्देश नहीं दिया जा रहा है।
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भाषा का चयन करें: अंग्रेजी हिंदी भाषा प्राधिकरण उपलब्धआरटीआई ऑनलाइन संस्करण 2.0 कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की पहल, भारत सरकार, गृह सेवा अनुरोध, पहला अपील देखें, स्थिति, मैनुअलएफक्यूफिडबैकऑनलाइन आरटीआई स्थिति फॉर्म नोट: * के साथ चिह्नित फ़ील्ड अनिवार्य हैं। पंजीकरण संख्या दर्ज करें बीबीआईपीए / ए / 2018/60050 नामकरण शंकर प्रसाद सिन्हाडेट फाइलिंग 10 / 05/2018 सार्वजनिक प्राधिकरण एसबीआई पटना सर्कलस्टैटसएपीएएल डीओएसओएसडीडी ऑफ एक्शन 077/06/2018 का खुलासा: - यह देखा गया है कि सीएसआई के संबंध में अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी सीपीआईओ द्वारा प्रदान की गई है, जो भौतिक रूप में उपलब्ध थी। अपीलकर्ता को सलाह दी जाती है कि इस अधिनियम के प्रावधान सीपीआईओ को केवल ऐसी जानकारी प्रदान करने के लिए निर्देशित करें जो पहले से मौजूद है और सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा बनाए गए रूप में। जानकारी बनाने या जानकारी की व्याख्या करने के लिए यह अधिनियम के दायरे से बाहर है। इसलिए, मामले में सीपीआईओ को कोई निर्देश नहीं दिया जा रहा है। नोडल अधिकारी विवरण: -टेलेफोन नंबर 0612220 9111 ईमेल ईमेल आईडीमैम्पे.lhopat@sbi.co.in ह...