इंसान को दुःख, गम, होता ही है । कहते हैं जो ईश्वर तक पहुँच जाते है उन्हें न जीने की ख़ुशी होती है न मरने का गम होता है इसी लिए उन्हें सम भाव रहना आ जाता है । उसी भक्त को स्मदृष्टा कहते हैं । जय श्री मदन

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