मोदी जी बड़ा भाषण दे रहे थे कबीर जी की जीवनी पर? क्या उनकी एक शिक्षा भी उतारी है अपने जीवन मे? उनका यह दोहा नही पढ़ा? “तिनका कबहुँ ना निन्दिए जो पांवन तर होए कबहुँ उडी आँखन पडे तो पीर घनेरी होए” मतलब तिनके की भी निंदा नही करनी चाहिए पर आपको तो निंदा के अलावा और कुछ आता ही नही!

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