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आना जाना तो बना रहेगा !
फिर फिर वही तो दोहरेगा !
क़िस्से कहानी कशिश में
तू बार बार बेहोश घूमेगा !
आना जाना बना रहेगा
फिर फिर वही तो दोहरेगा
क़िस्से कहानी कशिश में
तू बार बार बेहोश घूमेगा
कर्म धर्म जुर्म का कारोबार
कोल्हू जा बैल बन जुड़ेगा
अंधेरी गलियों में भटकेगा
फ़र्ज़ के नाम पे क़र्ज़ ढोएगा
रिश्तों के बाज़ार में रोएगा !
कुछ मिले तो भी क्या टिकेगा ?
ताश के पत्तों का घर गिरेगा !
बिखरा बिखरा तू तड़पेगा !
अपने पराये के जंगल जलेगा
यारा तू अपने से कब मिलेगा
चल सरिता के संग संग बहेंगे
कभी तो समंदर ज़रूर मिलेगा !
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