भाषा का चयन करें: अंग्रेजी हिंदी भाषा प्राधिकरण उपलब्धआरटीआई ऑनलाइन संस्करण 2.0 कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की पहल, भारत सरकार, गृह सेवा अनुरोध, पहला अपील देखें, स्थिति, मैनुअलएफक्यूफिडबैकऑनलाइन आरटीआई स्थिति फॉर्म नोट: * के साथ चिह्नित फ़ील्ड अनिवार्य हैं। पंजीकरण संख्या दर्ज करें बीबीआईपीए / ए / 2018/60050 नामकरण शंकर प्रसाद सिन्हाडेट फाइलिंग 10 / 05/2018 सार्वजनिक प्राधिकरण एसबीआई पटना सर्कलस्टैटसएपीएएल डीओएसओएसडीडी ऑफ एक्शन 077/06/2018 का खुलासा: - यह देखा गया है कि सीएसआई के संबंध में अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी सीपीआईओ द्वारा प्रदान की गई है, जो भौतिक रूप में उपलब्ध थी। अपीलकर्ता को सलाह दी जाती है कि इस अधिनियम के प्रावधान सीपीआईओ को केवल ऐसी जानकारी प्रदान करने के लिए निर्देशित करें जो पहले से मौजूद है और सार्वजनिक प्राधिकरण द्वारा बनाए गए रूप में। जानकारी बनाने या जानकारी की व्याख्या करने के लिए यह अधिनियम के दायरे से बाहर है। इसलिए, मामले में सीपीआईओ को कोई निर्देश नहीं दिया जा रहा है। नोडल अधिकारी विवरण: -टेलेफोन नंबर 0612220 9111 ईमेल ईमेल आईडीमैम्पे.lhopat@sbi.co.in होम | भारत का राष्ट्रीय पोर्टल | सीआईसी को शिकायत और दूसरी अपील | अकसर किये गए सवाल कॉपीराइट © 2013. सभी अधिकार सुरक्षित। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली द्वारा डिजाइन, विकसित और होस्ट किया गया
मुफ़्त खोरी
मुफ्तखोरी ------------ देश के राजनीतिक हलकों में यह शब्द पिछले तीन चार दिनों से गूंज रहा है। भाजपा के नेता, उनके समर्थक और कुछ दक्षिणपंथी झुकाव वाले पत्रकार साथी खास तौर पर इस शब्द को दिल्ली के वोटरों को अपमानित करने के लिये इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी और महिलाओं के लिये मुफ्त यात्रा के लालच में आम आदमी पार्टी को वोट दे दिया। मगर क्या यह वाकई मुफ्तखोरी है, इसे समझने के लिए जरा इन आंकड़ों पर गौर कीजिए। दिल्ली में 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने में सरकार हर साल 1720 करोड़ रुपये खर्च करती है, पानी मुफ्त देने का खर्च 400 करोड़ रुपये सालाना है और महिलाओं को मुफ्त यात्रा कराने का खर्च 140 करोड़ रुपये है। यानी इस कथित मुफ्तखोरी का कुल बजट 2260 करोड़ रुपये है। यानी दो करोड़ की आबादी वाली दिल्ली के हर व्यक्ति को सरकार सिर्फ 1130 रुपये की मुफ्तखोरी करा रही है। और इस मुफ्तखोरी को कुछ इस तरह प्रचारित किया जा रहा है कि सारा खजाना लुटाया जा रहा है। इसके बनिस्पत इस आंकड़े पर गौर कीजिए। एनडीए सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में कुल 6 लाख करोड़ की कर्जमाफी की थी। इसमें किसानों का...
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