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ईश्वर — यह एक शक्ति है।
भगवान — यह एक व्यक्ति विशेष है जिन्होंने ईश्वर को जान लिया है।
ईश्वर — सम्पूर्ण स्वरुप, आद्य शक्ति या शिवा की अनंत व्यापक स्थिति को ही ईश्वर कहते है।
भगवान — उस संपूर्ण स्वरुप की अनंत व्यापकता का जिन्होंने अनुभव किया, उसमें ही खो गए, वह सभी भव्य आत्माएँ भगवान है।
ईश्वर — यह वह शक्ति है जो अजन्मा-अमर-अविनाशी है, यानि काल से पूर्व भी यह शक्ति विद्यमान थी और काल के पश्चात् भी विद्यमान रहती है।
भगवान — जन्म मरण के परिभ्रमण में, उसकी व्यार्थता जानकार जो अजर अमर होने की यात्रा पर निकल पड़े और अविनाशी शक्ति का अनुभव किया वह भगवान है।
ईश्वर — क्षेत्र की अपेक्षा से ईश्वर असीम है, अनंत है।
भगवान — क्षेत्र की अपेक्षा से भगवान एक सीमित शरीर व आयुष्य में होते है। तभी हम उनकी जन्म-जयंती, निर्वाण-जयंती, आदि मनाते हैं।
ईश्वर — रूप आदि (वर्ण, गंध व स्पर्श) की अपेक्षा से ईश्वर निराकार है।
भगवान — रूप आदि की अपेक्षा से भगवान साकार है।
ईश्वर — आद्य शक्ति व शिव ईश्वरीय शक्ति की अभिव्यक्ति को उजागर करने के प्रतीक है।
भगवान — हिंदू परम्परा से श्री राम, कृष्ण, आदि भगवान कहलाते है। जिन परम्परा से अष्ट कर्मों को क्षय करके अनंत में खोने वाले सभी तीर्थंकर, केवली, आदि भगवान कहलाते हैं। बौद्ध परम्परा से गौतम बुद्ध आदि भगवान कहलाते हैं। ईसाई परम्परा से जीसस आदि भगवान कहलाते हैं तो सिख परम्परा से नानक देव आदि भगवान कहलाते हैं।
ईश्वर — ईश्वर की उपस्थिति का कारण है कि वह अपनी लीला का सर्जन-संचालन-विसर्जन करते है।
भगवान — भगवान की उपस्थिति का कारण है कि अपने उत्पाद-व्यय-ध्रुव स्वभाव को जानकार परिभ्रमण का अंत लाते हैं।
ईश्वर — सकल विश्व का कण-कण इस शक्ति से निकला है।
भगवान — भगवान एक विशेष व्यक्ति हैं जो अपने भीतर रहे ईश्वर का अनुभव करने में सफल हु�
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