मनुष्य एक लम्बी तीर्थयात्रा पर है। यहां कोई भी नया नहीं है। हम सभी यहां बहुत पुराने तीर्थयात्री हैं। तुमने मानव चेतना के सारे विकास को देखा है। तुम उसके हिस्से रहे हो। तुम हमेशा से यहां मौजूद रहे हो--अलग-अलग रूपों में, अलग-अलग शरीरों में, अलग-अलग कार्य करते हुए, लेकिन तुम यहां मौजूद रहे हो। और तुम यहां हमेशा मौजूद रहने वाले हो। अस्तित्व से चले जाने का कोई मार्ग नहीं है। अस्तित्व से कुछ भी समाप्त नहीं किया जा सकता और न ही अस्तित्व में कुछ जोड़ा जा सकता है। अस्तित्व हमेशा से ठीक ऐसा ही रहा है। यह अंतर्दृष्टि तुम्हें समयातीत ले जाती है--और समयातीत होना दुखों के पार होना है। कालातीत को जानना आनंद के जगत में प्रवेश करना है। तुम पुरातन हो, कालातीत हो, अनंत हो। इसलिए छोटी-छोटी बातों के लिए डरने की कोई जरूरत नहीं है, सांसारिक बातों की नाहक चिंता लेने की कोई जरूरत नहीं है। वे आती-जाती रहती हैं। तुम सदा बने रहते हो। ध्यान रहे कि जो सदा है, वह न तो कभी आता है, न ही कभी जाता है। वह अनंत है, और वह तुम्हारे भीतर ऐसे ही है जैसे कि सभी के भीतर है। यदि तुम श्रद्धा कर सको, कुछ न कुछ हमेशा होता रहेगा और तुम्हारे विकास में मदद करेगा। तुम्हें उपलब्ध रहेगा। विशेष समय पर जिस किसी भी चीज की जरूरत होगी वह तुम्हें उपलब्ध करवाया जाएगा, उसके पहले नहीं। तुम्हें तब ही मिलेगा जब तुम्हें उसकी जरूरत होगी, और वहां एक क्षण की भी देरी नहीं होगी। जब तुम्हें जरूरत होगी तुम्हें मिल जाएगा, तत्काल, उसी समय! श्रद्धा की यह खूबसूरतीहै। धीरे-धीरे तुम यह सीखते हो कि कैसे अस्तित्व तुम्हें हर चीज उपलब्ध करवा रहाहै, कैसे अस्तित्व तुम्हारा ध्यान रखताहै। तुम ऐसे अस्तित्व में नहीं जी रहे हो जो उपेक्षा से भराहै। वह तुम्हारी उपेक्षा नहीं करता। तुम नाहक चिंता से भरे रहते हो; तुम्हें हर चीज उपलब्ध करवायी जातीहै। एक बार श्रद्धा की दक्षता तुम सीख लेते हो, सारी चिंताएं विदा हो जाती हैं।

Comments

Popular posts from this blog

मुफ़्त खोरी