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Showing posts from July, 2018
वो तुम्हे गाय की तरफ धकेल कर तुम्हारी बच्चियों को आश्रम व अनाथालयों में नोच रहे हैं... सही कहते हैं वो "हिंदू ख़तरे में हैं" !! 😢😢😢
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*जब कुछ नहीं रहा पास तो रख ली तन्हाई संभाल कर मैंने..* *ये वो सल्तनत है जिसके बादशाह भी हम, वज़ीर भी हम, फकीर भी हम...*💐💐
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🌷 *राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर*🌷 ♨ *।। कोई अर्थ नहीं।।* ♨ नित जीवन के संघर्षों से जब टूट चुका हो अन्तर्मन, तब सुख के मिले समन्दर का *रह जाता कोई अर्थ नहीं*।। जब फसल सूख कर जल के बिन तिनका -तिनका बन गिर जाये, फिर होने वाली वर्षा का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन यदि दुःख में साथ न दें अपना, फिर सुख में उन सम्बन्धों का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* छोटी-छोटी खुशियों के क्षण निकले जाते हैं रोज़ जहाँ, फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* मन कटुवाणी से आहत हो भीतर तक छलनी हो जाये, फिर बाद कहे प्रिय वचनों का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* सुख-साधन चाहे जितने हों पर काया रोगों का घर हो, फिर उन अगनित सुविधाओं का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* :::बहुत सुंदर मार्मिक ह्रदयस्पर्शी कविता
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🙏 *सुविचार* 🙏 ✍ एक बुजुर्ग औरत मर गई, यमराज लेने आये। औरत ने यमराज से पूछा, आप मुझे स्वर्ग ले जायेगें या नरक। यमराज बोले दोनों में से कहीं नहीं। तुमनें इस जन्म में बहुत ही अच्छे कर्म किये हैं, इसलिये मैं तुम्हें सिधे प्रभु के धाम ले जा रहा हूं। बुजुर्ग औरत खुश हो गई, बोली धन्यवाद, पर मेरी आपसे एक विनती है। मैनें यहां धरती पर सबसे बहुत स्वर्ग - नरक के बारे में सुना है मैं एक बार इन दोनों जगाहो को देखना चाहती हूं। यमराज बोले तुम्हारे कर्म अच्छे हैं, इसलिये मैं तुम्हारी ये इच्छा पूरी करता हूं। चलो हम स्वर्ग और नरक के रसते से होते हुए प्रभु के धाम चलेगें। दोनों चल पडें, सबसे पहले नरक आया। नरक में बुजुर्ग औरत ने जो़र जो़र से लोगो के रोने कि आवाज़ सुनी। वहां नरक में सभी लोग दुबले पतले और बीमार दिखाई दे रहे थे। औरत ने एक आदमी से पूछा यहां आप सब लोगों कि ऐसी हालत क्यों है। आदमी बोला तो और कैसी हालत होगी, मरने के बाद जबसे यहां आये हैं, हमने एक दिन भी खाना नहीं खाया। भूख से हमारी आतमायें तड़प रही हैं बुजुर्ग औरत कि नज़र एक वीशाल पतिले पर पडी़, जो कि लोगों के कद से करीब 300 फूट ऊंचा होगा, उस पतिले के ऊपर एक वीशाल चम्मच लटका हुआ था। उस पतिले में से बहुत ही शानदार खुशबु आ रही थी। बुजुर्ग औरत ने उस आदमी से पूछा इस पतिले में कया है। आदमी मायूस होकर बोला ये पतिला बहुत ही स्वादीशट खीर से हर समय भरा रहता है। बुजुर्ग औरत ने हैरानी से पूछा, इसमें खीर है तो आप लोग पेट भरके ये खीर खाते क्यों नहीं, भूख से क्यों तड़प रहें हैं। आदमी रो रो कर बोलने लगा, कैसे खायें ये पतिला 300 फीट ऊंचा है हममें से कोई भी उस पतिले तक नहीं पहुँच पाता। बुजुर्ग औरत को उन पर तरस आ गया सोचने लगी बेचारे, खीर का पतिला होते हुए भी भूख से बेहाल हैं। शायद ईश्वर नें इन्हें ये ही दंड दिया होगा यमराज बुजुर्ग औरत से बोले चलो हमें देर हो रही है। दोनों चल पडे़, कुछ दूर चलने पर स्वरग आया। वहां पर बुजुर्ग औरत को सबकी हंसने,खिलखिलाने कि आवाज़ सुनाई दी। सब लोग बहुत खुश दिखाई दे रहे थे। उनको खुश देखकर बुजुर्ग औरत भी बहुत खुश हो गई। पर वहां स्वरग में भी बुजुर्ग औरत कि नज़र वैसे ही 300 फूट उचें पतिले पर पडी़ जैसा नरक में था, उसके ऊपर भी वैसा ही चम्मच लटका हुआ था। बुजुर्ग औरत ने वहां लोगो से पूछा इस पतिले में कया है।' स्वर्ग के लोग बोले के इसमें बहुत टेस्टी खीर है। बुजुर्ग औरत हैरान हो गई उनसे बोली पर ये पतिला तो 300 फीट ऊंचा है आप लोग तो इस तक पहुँच ही नहीं पाते होगें उस हिसाब से तो आप लोगों को खाना मिलता ही नहीं होगा, आप लोग भूख से बेहाल होगें पर मुझे तो आप सभी इतने खुश लग रहे हो, ऐसे कैसे लोग बोले हम तो सभी लोग इस पतिले में से पेट भर के खीर खाते हैं औरत बोली पर कैसे,पतिला तो बहुत ऊंचा है। लोग बोले तो क्या हो गया पतिला ऊंचा है तो यहां पर कितने सारे पेड़ हैं, ईश्वर ने ये पेड़ पौधे, नदी, झरने हम मनुष्यों के उपयोग के लिये तो बनाईं हैं हमनें इन पेडो़ कि लकडी़ ली, उसको काटा, फिर लकड़ीयों के तुकडो़ को जोड़ के वीशाल सिढी़ का निर्माण किया उस लकडी़ की सिढी़ के सहारे हम पतिले तक पहुंचते हैं और सब मिलकर खीर का आंनद लेते हैं बुजुर्ग औरत यमराज कि तरफ देखने लगी यमराज मुसकाये बोले *ईशवर ने स्वर्ग और नरक मनुष्यों के हाथों में ही सौंप रखा है,चाहें तो अपने लिये नरक बना लें, चाहे तो अपने लिये स्वरग, ईशवर ने सबको एक समान हालातो में डाला हैं* *उसके लिए उसके सभी बच्चें एक समान हैं, वो किसी से भेदभाव नहीं करता* *वहां नरक में भी पेेड़ पौधे सब थे, पर वो लोग खुद ही आलसी हैं, उन्हें खीर हाथ में चाहीये,वो कोई कर्म नहीं करना चाहते, कोई मेहनत नहीं करना चाहते, इसलिये भूख से बेहाल हैं* *कयोकिं ये ही तो ईश्वर कि बनाई इस दुनिया का नियम है,जो कर्म करेगा, मेहनत करेगा, उसी को मीठा फल खाने को मिलेगा* दोस्तों ये ही आज का सुविचार है, स्वरग और नरक आपके हाथ में है मेहनत करें, अच्छे कर्म करें और अपने जीवन को स्वरग बनाएं। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🙏🙏जय श्री मदन जी🙏🙏 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
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• क्षमताएँ और शक्तियाँ , प्रामाणिक सत्य का मार्ग नहीं हैं । √ ऐसी ही घटना रामकृष्ण के समय में भी हुई .... उनका एक शिष्य था --- विवेकानन्द ; जिसे अब पहिली बार सटोरी घटी तो उसने अपने अन्दर एक दिव्य शक्ति का अनुभव किया । और रामकृष्ण के आश्रम में ही कालू नाम का एक साधारण सा भोला-भाला व्यक्ति था । वह इतना अधिक सीधा सादाऔर बच्चे की तरह भोला था कि विवेकानंद उसका हमेशा उपहास उड़ाते हुए उसे बहुत तंग किया करते थे । विवेकानंद बहुत अधिक विद्वान और तर्कनिष्ठ थे , जब कि यह कालू एक साधारण-सा देहाती था । और वह पूजा पाठ किया करता था । उसकी कोठरी या कमरा ही एक पूरा मंदिर था , जिसमें सैकड़ों देवी-देवताओं की मूर्तियाँ थी -- और भारत में तुम जितने भी देवताओं की मूर्तियां चाहो , उन्हें खरीद सकते हो । कोई भी पत्थर देवता बन जाता है । तुम उस पर बस लाल-नारंगी रंग पोत दो और वह देवता बन सकता है । इसलिए उसके छोटे से कमरे में तीन सौ देवी-देवताओं की मूर्तियाँ थी । यहाँ तक कि उसके सोने के लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं बचा था । और तीन सौ देवताओं की वह प्रतिदिन पूजा-पाठ किया करता था , जिसमें उसे छ: से लेकर आठ घण्टे तक लग जाते थे , और शाम तक पूजा पाठ समाप्त करने के बाद ही वह भोजन किया करता था । विवेकानंद उससे हमेशा कहते रहते थे -- तू मूर्ख है , तू किस मूढ़ता में पड़ा है । तू इन सभी मूर्तियों को गंगा जी में विसर्जित कर दे । लेकिन कालू इतना अधिक सीधा सादा था कि वह उत्तर देता था --- मैं इन मूर्तियों से प्रेम करता हूँ । बहुत सुन्दर हैं , और मैंने इन शालिग्राम जैसे पत्थरों को गंगा जी से ही तो प्राप्त किया है , स्वयं गंगा जी ने ही इन्हें मुझे भेंट किया है । अब मैं इन्हें वापस गंगा जी में कैसे फेंकसकता हूँ ? नहीं , मैं ऐसा नहीं कर सकता । जिस दिन विवेकानंद को पहिली सटोरी लगी , वह कालू के कमरे के ही निकट वाले दूसरे कमरे में बैठे हुए थे । पहिली शक्ति मिलते ही उनके मन में तेजी से यह विचार आया कि कालू जरूर ही इस समय पूजा पाठ कर रहा होगा । इसलिए केवल खेल-खेल में उन्हें एक विचार सूझा और अपने कमरे में बैठे हुए ही उन्होंने वह विचार कालू के मन में प्रक्षेपित करते हुए आदेश दिया -- " कालू , अब तुम अपने देवताओं की सभी मूर्तियों को ले जाकर गंगाजी में फेंक दो । " उन्होंने वहाँ उन शक्ति का अनुभव किया था , इसलिए वह यह विचार प्रक्षेपित कर सके और वह कालू द्वारा प्राप्त किया गया । रामकृष्ण बाहर बैठे हुए थे । उन्होंने अपने अंतर्ज्ञान से उस खेल को देखा --- जो कुछ विवेकानंद ने खेला था । उन्होंने जरूर ही उस विचार को प्रक्षेपित होते हुए देखा था । लेकिन उन्होंने प्रतीक्षा की । तभी कालू एक बड़ा बंडल लिए बाहर निकला । वह सभी देवताओं की मूर्तियों को एक बड़े थैले में ले जा रहा था । रामकृष्ण ने उसे रोकते हुए कहा , " रुको , तुम कहाँ जा रहे हो । " कालू ने उत्तर दिया , " मेरे मन में अचानक एक विचार आयाकि यह सभी कुछ मूढ़ता है , इसलिए मैं सभी मूर्तियों को फेंकने जा रहा हूँ मैं खतम ही हो गया । " रामकृष्ण ने कहा , " तुम ठहरो । मैं विवेकानंद को बुलाता हूँ । "विवेकानंद को बुलाया गया और रामकृष्ण ने चीखते हुए क्रोधित होकर उनसे कहा , " क्या शक्ति के प्रयोग करने का यही तरीका है ? " और उन्होंने कालू ने कहा , " तू अपने कमरे में वापस जा और अपने देवताओं को वापस वहीं रख दे , जहाँ से उन्हें उठाया था । यह तेरा विचार न होकर विवेकानंद का विचार है । " तब कालू ने कहा , "मैंने ऐसा अनुभव किया जैसे कोई व्यक्ति मुझ पर पत्थर जैसी चोट कर रहा था और मैं कुछ भी समझ ही नहीं सका कि क्या कुछ घट रहा है । और उस विचार ने जैसे मुझे पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया और भय से बुरी तरह काँपने लगा -- मैं क्या कर रहा था , मुझे कुछ भी पता नहीं , लेकिन मैं लगभग किसी के द्वारा नियन्त्रित होकर ही वह सब कुछ कर रहा था । " रामकृष्ण , विवेकानंद से इतने अधिक रुष्ट हो गये कि उन्होंने उनसे कहा , " अब मैं तुम्हारी कुंजी , अपने पास रखूँगा । तुम इस कुंजी को अपनी मृत्यु के तीन दिनों पहिले ही प्राप्त कर सकोगे , तुम्हें अब कभी भी कोई सटोरी नहीं घटेगी । " और यह सब कुछ ऐसे ही हुआ । विवेकानंद को फिर कोई दूसरी सटोरी नहीं लगी । वह वर्षों तक रोते और बिलखते रहे , पर फिर भी वह उसे पा न सके । उन्होंने कठोर प्रयास किए । जब रामकृष्ण शरीर छोड़ रहे थे , तो उन्होंने रोते बिलखते हुए कहा , " कृपया , मुझे कुंजी वापस दे दीजिए । " और रामकृष्ण ने कहा -- " तुम उसे मरने के ठीक तीन दिन पहिले ही प्राप्त कर सकोगे , क्योंकि तुम खतरनाक बनते दिखाई देते हो । ऐसी शक्ति का प्रयोग इस तरह से नहीं कियाजाता । तुम अभी भी परिपूर्ण शुद्ध नहीं हो । तुम प्रतीक्षा करो । तुम रोते बिलखते रहो , और ध्यान भी करते रहो । " और विवेकानंद के मरने के ठीक तीन दिन पहिले उन्हें दूसरी सटोरी लगी । तभी उन्होंने जाना कि उनकी मृत्यु आ पहुँची है और केवल तीन दिन ही बचे हैं । स्मरण रहे , तुम शक्ति को अधिकार और नियन्त्रण में कर सकते हो , पर परमात्मा को नहीं -- लेकिन ऐसी शक्ति आध्यात्मिक नहीं हो सकती । परमात्मा को तुम अपने अधिकार में नहीं रख सकते , तुम्हें ही , ........ परमात्मा के अधिकार में रहना होगा । 🌱 ओशो अंतर्यात्रा के पथ पर सहभागिता और सहअस्तित्व का असीम अनुभव से संकलित । ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
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बधाई हो.... विश्व मे भारत और प्रदेश मे उत्तर प्रदेश बीफ़ निर्यात में पहला स्थान हासिल कर लिया है। हिन्दू खतरे में है चिल्लाने वालो, अब कौनसे बिल में छुप गए हो?? 🤔🤔
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💐💐💐💐💐💐💐 *किसी ने कहा - जब हर कण कण मे भगवान है तो तुम मंदिर क्यूँ जाते हैं।* *बहुत सुंदर जवाब* *हवा तो धुप में भी चलती है पर आनंद* *छाँव मे बैठ कर मिलता है* *वैसे ही भगवान सब तरफ है पर* *आनंद मंदिर मे ही आता है।।* 🐚☀🐚 *स्नेह वंदन* 😊🍀🙏 *जय श्री मदन जी 🙏🍀😊 *आपका दिन मंगलमय हो*..... 🙏🏻
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भगवान शिव के 108 नाम ---- १- ॐ भोलेनाथ नमः २-ॐ कैलाश पति नमः ३-ॐ भूतनाथ नमः ४-ॐ नंदराज नमः ५-ॐ नन्दी की सवारी नमः ६-ॐ ज्योतिलिंग नमः ७-ॐ महाकाल नमः ८-ॐ रुद्रनाथ नमः ९-ॐ भीमशंकर नमः १०-ॐ नटराज नमः ११-ॐ प्रलेयन्कार नमः १२-ॐ चंद्रमोली नमः १३-ॐ डमरूधारी नमः १४-ॐ चंद्रधारी नमः १५-ॐ मलिकार्जुन नमः १६-ॐ भीमेश्वर नमः १७-ॐ विषधारी नमः १८-ॐ बम भोले नमः १९-ॐ ओंकार स्वामी नमः २०-ॐ ओंकारेश्वर नमः २१-ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः २२-ॐ विश्वनाथ नमः २३-ॐ अनादिदेव नमः २४-ॐ उमापति नमः २५-ॐ गोरापति नमः २६-ॐ गणपिता नमः २७-ॐ भोले बाबा नमः २८-ॐ शिवजी नमः २९-ॐ शम्भु नमः ३०-ॐ नीलकंठ नमः ३१-ॐ महाकालेश्वर नमः ३२-ॐ त्रिपुरारी नमः ३३-ॐ त्रिलोकनाथ नमः ३४-ॐ त्रिनेत्रधारी नमः ३५-ॐ बर्फानी बाबा नमः ३६-ॐ जगतपिता नमः ३७-ॐ मृत्युन्जन नमः ३८-ॐ नागधारी नमः ३९- ॐ रामेश्वर नमः ४०-ॐ लंकेश्वर नमः ४१-ॐ अमरनाथ नमः ४२-ॐ केदारनाथ नमः ४३-ॐ मंगलेश्वर नमः ४४-ॐ अर्धनारीश्वर नमः ४५-ॐ नागार्जुन नमः ४६-ॐ जटाधारी नमः ४७-ॐ नीलेश्वर नमः ४८-ॐ गलसर्पमाला नमः ४९- ॐ दीनानाथ नमः ५०-ॐ सोमनाथ नमः ५१-ॐ जोगी नमः ५२-ॐ भंडारी बाबा नमः ५३-ॐ बमलेहरी नमः ५४-ॐ गोरीशंकर नमः ५५-ॐ शिवाकांत नमः ५६-ॐ महेश्वराए नमः ५७-ॐ महेश नमः ५८-ॐ ओलोकानाथ नमः ५४-ॐ आदिनाथ नमः ६०-ॐ देवदेवेश्वर नमः ६१-ॐ प्राणनाथ नमः ६२-ॐ शिवम् नमः ६३-ॐ महादानी नमः ६४-ॐ शिवदानी नमः ६५-ॐ संकटहारी नमः ६६-ॐ महेश्वर नमः ६७-ॐ रुंडमालाधारी नमः ६८-ॐ जगपालनकर्ता नमः ६९-ॐ पशुपति नमः ७०-ॐ संगमेश्वर नमः ७१-ॐ दक्षेश्वर नमः ७२-ॐ घ्रेनश्वर नमः ७३-ॐ मणिमहेश नमः ७४-ॐ अनादी नमः ७५-ॐ अमर नमः ७६-ॐ आशुतोष महाराज नमः ७७-ॐ विलवकेश्वर नमः ७८-ॐ अचलेश्वर नमः ७९-ॐ अभयंकर नमः ८०-ॐ पातालेश्वर नमः ८१-ॐ धूधेश्वर नमः ८२-ॐ सर्पधारी नमः ८३-ॐ त्रिलोकिनरेश नमः ८४-ॐ हठ योगी नमः ८५-ॐ विश्लेश्वर नमः ८६- ॐ नागाधिराज नमः ८७- ॐ सर्वेश्वर नमः ८८-ॐ उमाकांत नमः ८९-ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः ९०-ॐ त्रिकालदर्शी नमः ९१-ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः ९२-ॐ महादेव नमः ९३-ॐ गढ़शंकर नमः ९४-ॐ मुक्तेश्वर नमः ९५-ॐ नटेषर नमः ९६-ॐ गिरजापति नमः ९७- ॐ भद्रेश्वर नमः ९८-ॐ त्रिपुनाशक नमः ९९-ॐ निर्जेश्वर नमः १०० -ॐ किरातेश्वर नमः १०१-ॐ जागेश्वर नमः १०२-ॐ अबधूतपति नमः १०३ -ॐ भीलपति नमः १०४-ॐ जितनाथ नमः १०५-ॐ वृषेश्वर नमः १०६-ॐ भूतेश्वर नमः १०७-ॐ बैजूनाथ नमः १०८-ॐ नागेश्वर नमः
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⚛ ऊँची सोच का धनी ⚛ ---------------------------- एक संत के पास बहरा आदमी सत्संग सुनने आता था। उसे कान तो थे पर वे नाड़ियों से जुड़े नहीं थे। एकदम बहरा, एक शब्द भी सुन नहीं सकता था। किसी ने संतश्री से कहा - "बाबाजी ! वे जो वृद्ध बैठे हैं, वे कथा सुनते-सुनते हँसते तो हैं पर वे बहरे हैं।" बहरे मुख्यतः दो बार हँसते हैं – एक तो कथा सुनते-सुनते जब सभी हँसते हैं तब और दूसरा, अनुमान करके बात समझते हैं तब अकेले हँसते हैं। बाबा जी ने कहा - "जब बहरा है तो कथा सुनने क्यों आता है ? रोज एकदम समय पर पहुँच जाता है। चालू कथा से उठकर चला जाय ऐसा भी नहीं है, घंटों बैठा रहता है।" बाबाजी सोचने लगे - "बहरा होगा तो कथा सुनता नहीं होगा और कथा नहीं सुनता होगा तो रस नहीं आता होगा। रस नहीं आता होगा तो यहाँ बैठना भी नहीं चाहिए, उठकर चले जाना चाहिए। यह जाता भी नहीं है !'' बाबाजी ने उस वृद्ध को बुलाया और उसके कान के पास ऊँची आवाज में कहा - "कथा सुनाई पड़ती है ?" उसने कहा - "क्या बोले महाराज ?" बाबाजी ने आवाज और ऊँची करके पूछा - "मैं जो कहता हूँ, क्या वह सुनाई पड़ता है ? उसने कहा - "क्या बोले महाराज ?" बाबाजी समझ गये कि यह नितांत बहरा है। बाबाजी ने सेवक से कागज कलम मँगाया और लिखकर पूछा। वृद्ध ने कहा - "मेरे कान पूरी तरह से खराब हैं। मैं एक भी शब्द नहीं सुन सकता हूँ।" कागज कलम से प्रश्नोत्तर शुरू हो गया। "फिर तुम सत्संग में क्यों आते हो ?" "बाबाजी ! सुन तो नहीं सकता हूँ लेकिन यह तो समझता हूँ कि ईश्वरप्राप्त महापुरुष जब बोलते हैं तो पहले परमात्मा में डुबकी मारते हैं। संसारी आदमी बोलता है तो उसकी वाणी मन व बुद्धि को छूकर आती है लेकिन ज्ञानी संत जब बोलते हैं तो उनकी वाणी आत्मा को छूकर आती हैं। मैं आपकी अमृतवाणी तो नहीं सुन पाता हूँ पर उसके आंदोलन मेरे शरीर को स्पर्श करते हैं। दूसरी बात, आपकी अमृतवाणी सुनने के लिए जो पुण्यात्मा लोग आते हैं उनके बीच बैठने का पुण्य भी मुझे प्राप्त होता है।" बाबा जी ने देखा कि ये तो ऊँची समझ के धनी हैं। उन्होंने कहा - " दो बार हँसना, आपको अधिकार है किंतु मैं यह जानना चाहता हूँ कि आप रोज सत्संग में समय पर पहुँच जाते हैं और आगे बैठते हैं, ऐसा क्यों ?" वृद्ध बोला - "मैं परिवार में सबसे बड़ा हूँ। बड़े जैसा करते हैं वैसा ही छोटे भी करते हैं। मैं सत्संग में आने लगा तो मेरा बड़ा लड़का भी इधर आने लगा। शुरुआत में कभी-कभी मैं बहाना बना के उसे ले आता था। मैं उसे ले आया तो वह अपनी पत्नी को यहाँ ले आया, पत्नी बच्चों को ले आयी – सारा कुटुम्ब सत्संग में आने लगा, कुटुम्ब को संस्कार मिल गये।" परमेश्वर चर्चा, आत्मज्ञान का सत्संग ऐसा है कि यह समझ में नहीं आये तो क्या, सुनाई नहीं देता हो तो भी इसमें शामिल होने मात्र से इतना पुण्य होता है कि व्यक्ति के जन्मों-जन्मों के पाप-ताप मिटने एवं एकाग्रतापूर्वक सुनकर इसका मनन-निदिध्यासन करे उसके परम कल्याण में संशय ही क्या ! 🙏🏻
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#राम के वजूद को ना मानने वाले को अगर मै 'राम-राम जी' कहूँगा तो वो बेशक राम को ना माने लेकिन मेरे धर्म के संस्कारो का सम्मान करेगा लेकिन अगर मै उसी को जय श्रीराम कह कर पीटूंगा तो वो मेरे राम से घृणा करने लगेगा मै एक सच्चा हिंदू हूँ और कोशिश करूँगा कि कोई मेरे धर्म से नफ़रत ना करे
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*nice lines* *🌷किराये का मकान🌷* *जब हम "किराए का मकान" लेते है तो "मकान मालिक" कुछ शर्तें रखता है !* *1. मकान का किराया समय पर देना होगा।* *2. मकान में गंदगी नही फैलाना।* *3. मकान मालिक जब चाहे मकान को खाली करवा सकता है !!* *उसी प्रकार परमात्मा जी (मालिक) ने भी हमें जब ये शरीर दिया था यही शर्ते हमारे लिये देकर भेजा हैः* *1. किराया है। (भजन -सिमरन)* *2. गन्दगी (बुरे विचार और बुरी भावनाये) नही फैलानी।* *3. जब मर्जी होगी परमात्मा अपनी आत्मा को वापिस बुला लेगा !! मतलब ये है कि ये जीवन हमे बहुत थोड़े समय के लिए मिला है, इसे लड़ाई -झगड़े करके या द्वेष भावना रखकर नही, बल्कि प्रभु जी के नाम का सिमरन करते हुए बिताना चाहिए !* *हे मेरे प्रभु जी !इतनी कृपा करना कि आपकी आज्ञा में रहे और भजन -सुमिरन करते रहे!!* *"ए जन्म मानुखा जो मिलिया।* *गुरु किरपा दा प्रशाद समझ।* *बे कदरी ना कर स्वासा दी।* *जप नाम जीवन दा राज समझ !!"* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹SS ✈
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विकास इतनी तेज़ गति से दौड़ रहा है की कुत्ते को भी भागने का मौका नही मिला ! आगरा में सोते हुए कुत्ते के ऊपर ही बनवा दी सड़क, मामला दर्ज
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आँख भी बरसी बहुत बादल के साथ, अब के सावन की झड़ी अच्छी लगी..! #अहमद_फ़राज़ #MonsoonTime
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*गुरु ही सांस है* *गुरु ही आस है* *गुरु ही प्यास हैै* *गुरु ही ज्ञान है* *गुरु ही ससांर है* *गुरु ही प्यार है* *गुरु ही गीत है* *गुरु ही संगीत है* *गुरु ही लहर है* *गुरु ही भीतर है* *गुरु ही बाहर है* *गुरु ही बहार है* *गुरु ही प्राण है* *गुरु ही जान है* *गुरु ही संबल है* *गुरु ही आलंबन है* *गुरु ही दर्पण है* *गुरु ही धर्म है* *गुरु ही कर्म है* *गुरु ही मर्म है* *गुरु ही नर्म है* *गुरु ही प्राण है* *गुरु ही जहान है* *गुरु ही समाधान है* *गुरु ही आराधना है* *गुरु ही उपासना है* *गुरु ही सगुन है* *गुरु ही निर्गुण है* *गुरु ही आदि है* *गुरु ही अन्त हैै* *गुरु ही अनन्त है* *गुरु ही विलय है* *गुरु ही प्रलय है* *गुरु ही आधि है* *गुरु ही व्याधि है* *गुरु ही समाधि है* *गुरु ही जप है* *गुरु ही तप है* *गुरु ही ताप है* *गुरु ही यज्ञः है* *गुरु ही हवन है* *गुरु ही समिध है* *गुरु ही समिधा है* *गुरु ही आरती है* *गुरु ही भजन है* *गुरु ही भोजन है* *गुरु ही साज है* *गुरु ही वाद्य है* *गुरु ही वन्दना है* *गुरु ही आलाप है* *गुरु ही प्यारा है* *गुरु ही न्यारा है* *गुरु ही दुलारा हैै* *गुरु ही मनन है* *गुरु ही चिंतन है* *गुरु ही वंदन है* *गुरु ही चन्दन है* *गुरु ही अभिनन्दन है* *गुरु ही नंदन है* *गुरु ही गरिमा है* *गुरु ही महिमा है* *गुरु ही चेतना है* *गुरु ही भावना है* *गुरु ही गहना है* *गुरु ही पाहुना है* *गुरु ही अमृत है* *गुरु ही खुशबू है* *गुरु ही मंजिल है* *गुरु ही सकल जहाँ है* *गुरु समष्टि है* *गुरु ही व्यष्टि है* *गुरु ही सृष्टी है* *गुरु ही सपना है* *गुरु ही अपना है* 🙏🏽🌺🌹🌷🙏🏽गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏🏽🌺🌹🌷🙏🏽
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*मनमोहन सिंह का रिकार्ड:* - ए. राजा - जेल कलमाडी - जेल कनिमोझी - जेल रामलिंगा राजू - जेल सहाराश्री - जेल संजय चंद्रा - जेल विनोद गोयनका - जेल ... *ओर अब एक अपने pm का रिकार्ड:* - विजय माल्या - फुर्र ललित मोदी - फुर्र संजय भंडारी - फुर्र जतीन मेहता - फुर्र छोटा मोदी - फुर्र मेहुल भाई - फुर्र चौकसी - फुर्र *सारा देश मेहनत करें, मजा मारे गुजराती* ------------------------- प्रधानमंत्री -- गुजराती भाजपा राष्ट्रीय चीफ -- गुजराती RBI चीफ -- गुजराती CBI चीफ -- गुजराती चीफ जस्टिस -- गुजराती सारे बड़े सरकारी ठेके -- गुजराती बैंक का पैसा लूट रहे -- गुजराती जपते रहों मोदी-मोदी* #मूर्ख एक चीज याद रखिए "जस्टिज काटजू" ने कहा था की 90% भारतीय मूर्ख हैं, और ये बात सच भी है... हमारी मूर्खता का पैमाना ये है की एक आदमी लाखों का सूट-बूट पहनकर कहता है की मैं गरीब हूं और हम उसे गरीब मान लेते हैं.. CBI, NIA जैसी एजेंसियां जिस आदमी के हाथों की कठपुतली हैं वह आदमी कह रहा है की मुझे सताया जा रहा है और हम मान लेते हैं.. जो संसद मे पूर्ण बहुमत में है, बीस से ज्यादा राज्यों मे सरकार है, वह कहता है मुझे काम नही करने दिया जा रहा है और हम मान लेते हैं.. जो भ्रष्टाचार मे जेल में रह चुके लोगों को टिकट देता है फिर कहता है मै भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहा हूं और हम मान लेते हैं.. जिसके शासन मे सबसे ज्यादा हमारे सैनिक शहीद हुए हैं वह कहता है दुश्मन हमसे कांप रहा है और हम मान लेते हैं.. जिसके समय में सबसे ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है और वह कहता है हमने किसानों की आय दुगुना कर दी है और हम मान लेते हैं.. जिसके समय में पढे लिखे नौजवानों को पकौड़ा तलने के लिए कहा जाता है और हम उसे रोजगार मान लेते हैं.. जिसके राज्य मे सबसे ज्यादा बलात्कार हो रहे हैं और वह कहता है हम "बेटी बचाओ अभियान" चला रहे हैं और हम मान लेते हैं.. जो सुंदर भविष्य का सपना दिखाकर सत्ता मे आया हो और चार सौ साल पहले के भूतकाल में हमे घुमा रहा हो और फिर भी हम खुश हैं.. मित्रों ये सब हमारी मूर्खता की वजह से ही तो हो रहा है...☺
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रक्षा मंत्री जी वो क्या डिल है जिसको छीपा रहे हो।।। क्यों राफेल डील की कीमत नहीं बता रहे हो, क्यों HAL को निकालकर अम्बानी को बिठा रहे हो राफेल की कीमत किसने तय की क्यो छिपा रहे हो सिक्योरिटी क्लियरेंस ली या नहीं या तो बता दो।।।। वो क्या डील है जिसको छीपा रहे हो,,,!!!
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न मस्जिद को जानते हैं ,न शिवालों को जानते हैं, जो भूखे पेट हैं वो सिर्फ निवालों को जानते हैं...!
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*गुरू पूर्णिमा 27 जुलाई को है* *आईये स्वागत करे* 🙏🏻❄💕🐾❄🙏🏻 *कहते है माँ सब दे सकती है* *पर भाग्य नही दे सकती* *पिता सब दे सकता है* *भाग्य के लेखा को नही बदल सकता* 🙏🏻❄💕🐾❄🙏🏻 *प्यार सब देते है पर* *निभाता कोई ---कोई है* *वैसे ही ,,,,,,* *भाग्य मेरा सदगुरू बदल देता है* 🙏🏻❄💕🐾❄🙏🏻 *जो न लिखा लेखे मे वो दे देता है वक्त को भी थमा देता है* *सुखी जमी को हरा - भरा बना देता है* 🙏🏻❄💕🐾❄🙏🏻 *जो घर आँगन सुना है वहाँ फूल खिला देता है* *वो मेरा सदगुरू है --वो मेरा सतगुरू है* 🙇🏼♀❄💕🐾❄🙇🏼♀ *कोटि कोटि इन्हें वंदन है* *कोटि कोटि इन्हें वंदन है।* 🙇🏼♀❄💕🐾❄🙇🏼♀
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PM ने आजतक 1 भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की, गोदी #media इस पर ऐसे चुप है जैसे सवालों का जवाब न देना मोदी जी का जन्म सिद्ध अधिकार है ~ #गोदी_मीडिया
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एक साल में GST में 57 बार सुधार... क्योंकि देश में है अनपढ़ सरकार!! क्यों भक्तों सही कहा ना?? 😬😬
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🥀🌻🍁🥀🌻🍁🥀🌻🍁 *संसार में केवल मनुष्य* *ही एकमात्र ऐसा प्राणी है,* *जिसका जहर* *और* *मिठास* *उसके दांतों में नही,* *बातों में है.* *jai shri madan Ji*☺ 🥀🌻🍁🥀🌻🍁🥀🌻🍁
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🌹🎋🍃🌹🎋🍃🌹🎋🍃🌹 *गांव में रहने वाले लोगों की नजर* *शहर पर होती है* *शहर में रहने वाले की नजर विदेश* *पर होती है* *विदेश में रहने रहने वाले की नजर ग्रहों* *चांद तारों पर है* *फिर भी कोई सुखी नही है* *सुखी वह है जिनकी नजर* *अपने परिवार पर है* 🌹🎋🍃🌹🎋🍃🌹🎋🍃🌹 *परिवार से बढ़ कर कोई धन नही।।* *आपका परिवार सदा खुश रहे।।* 🙏🏻🙏jay shri madan Ji🙏🏻🙏🏻
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*चाय सिर्फ़ चाय ही नहीं होती...* जब कोई पूछता है "चाय पियेंगे..?" तो बस नहीं पूछता वो तुमसे दूध ,चीनी और चायपत्ती को उबालकर बनी हुई एक कप चाय के लिए। वो पूछता हैं... क्या आप बांटना चाहेंगे कुछ चीनी सी मीठी यादें कुछ चायपत्ती सी कड़वी दुःख भरी बातें..? वो पूछता है.. क्या आप चाहेंगे बाँटना मुझसे अपने कुछ अनुभव ,मुझसे कुछ आशाएं कुछ नयी उम्मीदें..? उस एक प्याली चाय के साथ वो बाँटना चाहता हैं.. अपनी जिंदगी के वो पल तुमसे जो "अनकही" है अब तक वो दास्ताँ जो "अनसुनी" है अब तक वो कहना चाहता है.. तुमसे ..तमाम किस्से जो सुना नहीं पाया अपनों को कभी.. एक प्याली चाय के साथ को अपने उन टूटें और खत्म हुए ख्वाबों को एक और बार जी लेना चाहता है। वो उस गर्म चाय के प्याली के साथ उठते हुए धुओँ के साथ कुछ पल को अपनी सारी फ़िक्र उड़ा देना चाहत इस दो कप चाय के साथ शायद इतनी बातें दो अजनबी कर लेते हैं जितनी कहा सुनी तो अपनों के बीच भी नहीं हो पाती। तो बस जब पुछे कोई अगली बार तुमसे "चाय पियेंगे..?" तो हाँ कहकर बाँट लेना उसके साथ अपनी चीनी सी मीठी यादें और चायपत्ती सी कड़वी दुखभरी बातें..!! चाय सिर्फ़ चाय ही नहीं होती.....☕🌹💦☕🌹💦
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एक पुरानी कहानी तुमसे कहूं—झेन कथा है। एक झेन सदगुरु के बगीचे में कद्दू लगे थे। सुबह—सुबह गुरु बाहर आया तो देखा, कद्दूओ में बड़ा झगड़ा और विवाद मचा है। कद्दू ही ठहरे! उसने कहा : 'अरे कद्दूओ यह क्या कर रहे हो? आपस में लड़ते हो !' वहा दो दल हो गए थे कद्दूओं में और मारधाड़ की नौबत थी। झेन गुरु ने कहा 'कद्दूओ, एक—दूसरे को प्रेम करो।' उन्होंने कहा 'यह हो ही नहीं सकता। दुश्मन को प्रेम करें? यह हो कैसे सकता है !' तो झेन गुरु ने कहा, 'फिर ऐसा करो, ध्यान करो। ' कदुओं ने कहा. 'हम कद्दू हैं, हम ध्यान कैसे करें ?' तो झेन गुरु ने 'कहा : 'देखो—भीतर मंदिर में बौद्ध भिक्षुओं की कतार ध्यान करने बैठी थी—देखो ये कद्दू इतने कद्दू ध्यान कर रहे हैं।' बौद्ध भिक्षुओं के सिर तो घुटे होते हैं, कदुओं जैसे ही लगते हैं। ’तुम भी इसी भांति बैठ जाओ।' पहले तो कद्दू हंसे, लेकिन सोचा 'गुरु ने कभी कहा भी नहीं; मान ही लें, थोड़ी देर बैठ जाएं।' जैसा गुरु ने कहा वैसे ही बैठ गए—सिद्धासन में पैर मोड़ कर आंखें बंद करके, रीढ़ सीधी करके। ऐसे बैठने से थोड़ी देर में शांत होने लगे। सिर्फ बैठने से आदमी शांत हो जाता है। इसलिए झेन गुरु तो ध्यान का नाम ही रख दिये हैं. झाझेन। झाझेन का अर्थ होता है. खाली बैठे रहना, कुछ करना न। कद्दू बैठे—बैठे शांत होने लगे, बड़े हैरान हुए, बड़े चकित भी हुए! ऐसी शांति कभी जानी न थी। चारों तरफ एक अपूर्व आनंद का भाव लहरें लेने लगा। फिर गुरु आया और उसने कहा : 'अब एक काम और करो, अपने— अपने सिर पर हाथ रखो।’ हाथ सिर पर रखा तो और चकित हो गए। एक विचित्र अनुभव आया कि वहा तो किसी बेल से जुड़े हैं। और जब सिर उठा कर देखा तो वह बेल एक ही है, वहां दो बेलें न थीं, एक ही बेल में लगे सब कद्दू थे। कदुओं ने कहा : 'हम भी कैसे मूर्ख! हम तो एक ही के हिस्से हैं, हम तो सब एक ही हैं, एक ही रस बहता है हमसे—और हम लड़ते थे।’ तो गुरु ने कहा. 'अब प्रेम करो। अब तुमने जान ?? कि एक ही हो, कोई पराया नहीं। एक का ही विस्तार है।’ वह जहां से कदुओं ने पकड़ा अपने सिर पर, उसी को योगी सातवां चक्र कहते हैं : सहस्रार। हिंदू वहीं चोटी बढ़ाते हैं। चोटी का मतलब ही यही है कि वहा से हम एक ही बेल से जुड़े हैं। एक ही परमात्मा है। एक ही सत्ता, एक अस्तित्व, एक ही सागर लहरें ले रहा है। वह जो पास में तुम्हारे लहर दिखाई पड़ती है, भिन्न नहीं, अभिन्न है; तुमसे अलग नहीं, गहरे में तुमसे जुड़ी है। सारी लहरें संयुक्त हैं। तुमने कभी एक बात खयाल की? तुमने कभी सागर में ऐसा देखा कि एक ही लहर उठी हो और सारा सागर शांत हो? नहीं, ऐसा नहीं होता। तुमने कभी ऐसा देखा, वृक्ष का एक ही पत्ता हिलता हो और सारा वृक्ष मौन खड़ा हो, हवाएं न हों? जब हिलता है तो पूरा वृक्ष हिलता है। और जब सागर में लहरें उठती हैं तो अनंत उठती हैं, एक लहर नहीं उठती। क्योंकि एक लहर तो हो ही नहीँ सकती। तुम सोच सकते हो कि एक मनुष्य हो सकता है पृथ्वी पर? असंभव है। एक तो हो ही नहीं सकता। हम तो एक ही सागर की लहरें हैं, अनेक होने में हम प्रगट हो रहे हैं। जिस दिन यह अनुभव होता है, उस दिन प्रेम का जन्म होता है। प्रेम का अर्थ है : अभिन्न का बोध हुआ, अद्वैत का बोध हुआ। शरीर तो अलग— अलग दिखाई पड ही रहे हैं, कद्दू तो अलग— अलग हैं ही, लहरें तो ऊपर से अलग—अलग दिखाई पड़ ही रही हैं— भीतर से आत्मा एक है। प्रेम का अर्थ है. जब तुम्हें किसी में और अपने बीच एकता का अनुभव हुआ। और ऐसा नहीं है कि तुम्हें जब यह एकता का अनुभव होगा तो एक और तुम्हारे बीच ही होगा; यह अनुभव ऐसा है कि हुआ कि तुम्हें तत्क्षण पता चलेगा कि सभी एक हैं। भ्रांति टूटी तो वृक्ष, पहाड़—पर्वत, नदी—नाले, आदमी—पुरुष, पशु —पक्षी, चांद—तारे सभी में एक ही कंप रहा है। उस एक के कंपन को जानने का नाम प्रेम है। प्रेम प्रार्थना है।
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कई बार बड़े बुजुर्गों के मुँह से कुछ ऐसी बातें सुनने को मिलती हैं – “मुसीबत में कोई साथ नहीं देता”, “जब परेशानियाँ आती हैं तो अपने भी पराये हो जाते हैं”। ऐसी कुछ बातें हम अक्सर अपने दादा दादी या माता पिता या अन्य बड़े लोगों से सुनते आए हैं। ये बातें 100% सत्य हैं और आपने खुद अपने जीवन में ऐसे कुछ अनुभव देखे होंगे। अगर मैं कहूँ कि आपके दोस्त आपको कभी सफल होता नहीं देखना चाहते – तो आपको कैसा लगेगा? हो सकता है कुछ लोगों को ये बात बुरी भी लगे लेकिन ये सच है। आपके वो दोस्त जिनसे आपकी बहुत गहरी दोस्ती है वो कभी नहीं चाहेंगे कि आप सफल हों। आपने वो “3 इडियट” मूवी देखी होगी उसमें एक डायलॉग है – “दोस्त जब फेल होता है तो दुःख होता है लेकिन जब दोस्त टॉप करता है तो और ज्यादा दुःख होता है”। कभी आजमा के देखिये ये डायलॉग आप पर भी फिट बैठेगा। सच कहूं तो इसमें आपके दोस्तों की भी गलती नहीं है, ये एक इंसानी प्रवृर्ति ही है। जब तक हम अपने दोस्तों के जैसे ही हैं, तब तक सब कुछ ठीक रहता है। मतलब अगर आपके दोस्त आपके बराबर ही पैसे कमा रहे हैं, या क्लास में आपके नंबर दोस्त के कम या दोस्तों जैसे ही आते हैं या आपका रहन सहन दोस्तों के जैसा ही है, तब तक सबकुछ बढ़िया चल रहा होता है लेकिन जैसे ही आप बंदिशों को तोड़कर आगे बढ़ते हैं, आपके दोस्त आपको ईर्ष्या की नजर से देखने लगते हैं। क्यूंकि आपके दोस्त असफल हैं इसलिए वो आपको भी सफल होता नहीं देखना चाहते। अगर आप कामयाब हो जाते हैं तो आपके दोस्त खुद को छोटा मानने लगते हैं। आपकी सफलता उनके चेहरे पे एक थप्पड़ की तरह होती है। उनको लगता है जैसे उनके अंदर कमियां हैं और अपनी कमियां वो सुधारना नहीं चाहते बस इसलिए वो आपको भी सफल होते देखना नहीं चाहते। कभी आजमा के देखना, जब आप किसी बड़े मुकाम के लिए कोई काम कर रहे हों और उस वक्त किसी दोस्त की मदद की जरूरत पड़े और आपके गहरे मित्र भी अापकी मदद ना करें तो समझ जाना वो दोस्त नहीं चाहते कि आप कामयाब हों। मैं फिर कहना चाहता हूँ कि इसमें आपके दोस्तों की गलती नहीं है| सभी लोग ऐसे ही होते हैं – अाप भी और मैं भी| जब कोई इंसान हमसे अागे निकलता है तो दुख होता ही है| अंग्रेजी की एक बहुत सुंदर कहावत है – “it’s lonely at the top”- मतलब शिखर पर इंसान हमेशा अकेला होता है याद रखना जब आप भी अपनी कामयाबी के शिखर पर होगे तो अकेले होगे लेकिन डगमगाना नहीं है। आपको मुसीबतों से घबराना नहीं है, खड़े रहना है, अडिग रहना है, पूरी मजबूती से, पूरी दृढ़ता से…….
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*पतन का कारण* _श्रीकृष्ण ने एक रात को स्वप्न में देखा कि, एक गाय अपने नवजात बछड़े को प्रेम से चाट रही है। चाटते-चाटते वह गाय, उस बछड़े की कोमल खाल को छील देती है । उसके शरीर से रक्त निकलने लगता है । और वह बेहोश होकर, नीचे गिर जाता है। श्रीकृष्ण प्रातः यह स्वप्न,जब अपने पिता वसूदेव को बताते हैं । तो, वसुदेवजी कहते हैं कि :-_ ```यह स्वप्न, पंचमकाल (कलियुग) का लक्षण है ।``` *कलियुग में माता-पिता, अपनी संतान को,इतना प्रेम करेंगे, उन्हें सुविधाओं का इतना व्यसनी बना देंगे कि, वे उनमें डूबकर, अपनी ही हानि कर बैठेंगे। सुविधा, भोगी और कुमार्ग - गामी बनकर विभिन्न अज्ञानताओं में फंसकर अपने होश गँवा देंगे।* ```आजकल हो भी यही रहा है। माता पिता अपने बच्चों को, मोबाइल, बाइक, कार, कपड़े, फैशन की सामग्री और पैसे उपलब्ध करा देते हैं । बच्चों का चिंतन, इतना विषाक्त हो जाता है कि, वो माता-पिता से झूठ बोलना, बातें छिपाना,बड़ों का अपमान करना आदि सीख जाते हैं ।``` ☝🏼 *याद रखियेगा !* 👇🏽 *संस्कार दिये बिना सुविधायें देना, पतन का कारण है।* *सुविधाएं अगर आप ने बच्चों को नहीं दिए तो हो सकता है वह थोड़ी देर के लिए रोए।* *पर संस्कार नहीं दिए तो वे जिंदगी भर रोएंगे।*
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मैं हर उस धर्म, उस विचार, उस सोच को ठोकर मारता हूं जो इंसान से इंसान को अलग करने की भावना रखता है !! बटवारे की सोच इंसान को खोकला बना देती है!!
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Dear Sir I am sending confirmation mail sent by Roi.net Pvt LTD My all documents has already submitted to your Branch Manager dated 09-07-2018. But Manager not allow me for open Over Draft Account I heard through some persons that Manager want to take chance his own person in palace of me. So I request you to kindly take necessary steps so that bank allow me for open over draft account as soon as possible Thanks
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ये शान-ओ-शौक़त-ए-आलम, सदा किसी की नहीं...! चिराग़ सबके बुझेंगे, हवा किसी की नहीं...!
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*GOOD MORNING* *प्रकृति का कालचक्र नियम देखिए* *1~ बचपन:- समय है, शक्ति है,* *लेकिन पैसा नहीं है ..* *2~ युवावस्था:- शक्ति है, पैसा है,* *लेकिन समय नहीं है ..* *3~ बुढ़ापा:- पैसा है, समय है,* *लेकिन शक्ति नहीं है .*. *प्रकृति का कोई जबाब नहीं* *इसलिए प्रतिदिन हर्ष ..* *उल्लास .. और खुशी* *में जीवन बिताएं।* 🐾☀🐾 " All is well.!" ¸.•*""*•.¸ 🌹💐🌹 *""सदा मुस्कुराते रहिये""* 🌹 *हँसते रहिये हंसाते रहिये*🌹
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मैं एक हिंदू हूँ मुझे हिंदू होने पर गर्व है, मुझे #गाय से प्रेम है पर मैं गाय के नाम पर मनुष्य की हत्या कभी बर्दाश्त नहीं करुंगा। यह जघन्य अपराध और पाप कर्म है। अगर तस्करी का शक है तो पकड़ कर पुलिस के हवाले करें। कानून अपने हाथ में लेने वाले आतंकी हैं ~ #StopMobLynchingInIndia
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विपक्ष “झूठ” बोलता है या “सरकार” झूठी है, लेकिन ये “देश” झूठा नहीं है, हाँ “ख़ामोश” ज़रूर है, मगर 2019 में बोलेगा “डंके की चोट” पे बोलेगा.
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🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 *🔥सबसे ऊँची प्रार्थना🔥* *एक व्यक्ति जो मृत्यु के करीब था, मृत्यु से पहले अपने बेटे को चाँदी के सिक्कों से भरा थैला देता है और बताता है की "जब भी इस थैले से चाँदी के सिक्के खत्म हो जाएँ तो मैं तुम्हें एक प्रार्थना बताता हूँ, उसे दोहराने से चाँदी के सिक्के फिर से भरने लग जाएँगे । उसने बेटे के कान में चार शब्दों की प्रार्थना कही और वह मर गया । अब बेटा चाँदी के सिक्कों से भरा थैला पाकर आनंदित हो उठा और उसे खर्च करने में लग गया । वह थैला इतना बड़ा था की उसे खर्च करने में कई साल बीत गए, इस बीच वह प्रार्थना भूल गया । जब थैला खत्म होने को आया तब उसे याद आया कि "अरे! वह चार शब्दों की प्रार्थना क्या थी ।" उसने बहुत याद किया, उसे याद ही नहीं आया ।अब वह लोगों से पूँछने लगा । पहले पड़ोसी से पूछता है की "ऐसी कोई प्रार्थना तुम जानते हो क्या, जिसमें चार शब्द हैं । पड़ोसी ने कहा, "हाँ, एक चार शब्दों की प्रार्थना मुझे मालूम है, "ईश्वर मेरी मदद करो ।" उसने सुना और उसे लगा की ये वे शब्द नहीं थे, कुछ अलग थे । कुछ सुना होता है तो हमें जाना-पहचाना सा लगता है । फिर भी उसने वह शब्द बहुत बार दोहराए, लेकिन चाँदी के सिक्के नहीं बढ़े तो वह बहुत दुःखी हुआ । फिर एक फादर से मिला, उन्होंने बताया की "ईश्वर तुम महान हो" ये चार शब्दों की प्रार्थना हो सकती है, मगर इसके दोहराने से भी थैला नहीं भरा । वह एक नेता से मिला, उसने कहा "ईश्वर को वोट दो" यह प्रार्थना भी कारगर साबित नहीं हुई । वह बहुत उदास हुआ उसने सभी से मिलकर देखा मगर उसे वह प्रार्थना नहीं मिली, जो पिताजी ने बताई थी । वह उदास होकर घर में बैठा हुआ था तब एक भिखारी उसके दरवाजे पर आया । उसने कहा, "सुबह से कुछ नहीं खाया, खाने के लिए कुछ हो तो दो ।" उस लड़के ने बचा हुआ खाना भिखारी को दे दिया । उस भिखारी ने खाना खाकर बर्तन वापस लौटाया और ईश्वर से प्रार्थना की, *"हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद ।" अचानक वह चौंक पड़ा और चिल्लाया की "अरे! यही तो वह चार शब्द थे ।" उसने वे शब्द दोहराने शुरू किए-"हे ईश्वर तुम्हारा धन्यवाद"........और उसके सिक्के बढ़ते गए... बढ़ते गए... इस तरह उसका पूरा थैला भर गया ।इससे समझें की जब उसने किसी की मदद की तब उसे वह मंत्र फिर से मिल गया । "हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद ।" यही उच्च प्रार्थना है क्योंकि जिस चीज के प्रति हम धन्यवाद देते हैं, वह चीज बढ़ती है । अगर पैसे के लिए धन्यवाद देते हैं तो पैसा बढ़ता है, प्रेम के लिए धन्यवाद देते हैं तो प्रेम बढ़ता है । ईश्वर या गुरूजी के प्रति धन्यवाद के भाव निकलते हैं की ऐसा ज्ञान सुनने तथा पढ़ने का मौका हमें प्राप्त हुआ है । बिना किसी प्रयास से यह ज्ञान हमारे जीवन में उतर रहा है वर्ना ऐसे अनेक लोग हैं, जो झूठी मान्यताओं में जीते हैं और उन्हीं मान्यताओं में ही मरते हैं । मरते वक्त भी उन्हें सत्य का पता नहीं चलता । उसी अंधेरे में जीते हैं, मरते हैं ।* *ऊपर दी गई कहानी से समझें की "हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद" ये चार शब्द, शब्द नहीं प्रार्थना की शक्ति हैं । अगर यह चार शब्द दोहराना किसी के लिए कठिन है तो इसे तीन शब्दों में कह सकते हैं, "ईश्वर तुम्हार धन्यवाद ।" ये तीन शब्द भी ज्यादा लग रहे हों तो दो शब्द कहें, "ईश्वर धन्यवाद !" और दो शब्द भी ज्यादा लग रहे हों तो सिर्फ एक ही शब्द कह सकते हैं, "धन्यवाद ।" आइए, हम सब मिलकर एक साथ धन्यवाद दें उस ईश्वर को, जिसने हमें मनुष्य जन्म दिया और उसमें दी दो बातें - पहली "साँस का चलना" दूसरी "सत्य की प्यास ।" यही प्यास हमें खोजी से भक्त बनाएगी । भक्ति और प्रार्थना से होगा आनंद, परम आनंद, तेज आनंद ।* *सभी को धन्यवाद*🌼🌸🌼 🐄🐄🐄🐄🙏🐄🐄🐄🐄
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-गोरक्षक बनकर मारो -बेरोजगारी से मारो -मंदिर के नाम पर मारो -नोट बंदी से मारो -कर्ज से किसान मारो -बच्चा चोर कह कर मारो -मुसलमान कह कर मारो -दलित कह कर मारो -गौरी मारो -लोया मारो -गोली मरो -बच्ची को मंदिर में मारो -संसद मे जूता मारो कुर्सी मारो परंतु संसद मे आँख मत मारो यारों_
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🌺🌺🌺💞 *🌹 तन और मन की सुंदरता..*🌹 *कहा जाता है कि अगर हमारी "आँखें" चेहरे की जगह "आत्मा या मन की "सुंदरता" देख पातीं, तो ये दुनिया कुछ अलग होती।* हमारे "रिश्ते" और "व्यवहार" सभी अलग होते, और सुंदरता की "परिभाषा भी अलग होती। लेकिन ये ईश्वर ने नही किया, हम सिर्फ तन की सुंदरता को देखते रहे किसी का मन कितना पवित्र, निर्मल,ममतामयी हैं नही देख पाए। एक दिन विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात अपने कमरे में बैठे हुए शीशे में अपना चेहरा देख रहे थे। वह बहुत गौर से खुद को निहार रहे थे। उसी समय उनका एक प्रिय शिष्य उनके कमरे में आ गया। शिष्य ने उन्हें इस प्रकार अपना चेहरा निहारते पाया, तो वह बड़ा आश्चर्यचकित हुआ। शिष्य कुछ बोला नहीं, सिर्फ मुस्कराने लगा। सुकरात ने शिष्य की मुस्कुराहट देखी,तो वह उसकी दुविधा भांप गए। शिष्य कोई सवाल करे उससे पूर्व ही सुकरात बोल उठे-मैं जान गया कि तुम क्यों हंस रहे हो? शायद तुम सोच रहे हो कि मुझ जैसा कुरूप व्यक्ति आखिर शीशे में अपना मुंह क्यों देख रहा है? शिष्य कुछ बोला नहीं। उसकी गलती पकड़ी जा चुकी थी। वह लज्जित हो गया और नजर नीची किए खड़ा रहा। सुकरात ने फिर कहा- शायद तुम नहीं जानते कि मैं यह शीशा क्यों देखता हूं। शिष्य ने कहा-नहीं। इस पर सुकरात बोले-मैं कुरूप हूं, इसलिए रोज शीशा देखता हूं। शिष्य को यह बात थोड़ी अटपटी लगी। उसने प्रश्न किया-पर ऐसा क्यों? सुकरात कहने लगे-मैं ऐसा इसलिए करता हूं ताकि इसे देखकर मुझे अपनी कुरूपता का अहसास हो जाए। मैं अपने असली रूप को पहचानता हूं। *इसलिए हर रोज कोशिश करता हूं कि ऐसे अच्छे काम करूं, जिससे मेरी यह कुरूपता ढक जाए।* शिष्य ने जिज्ञासा प्रकट की- तो क्या सुंदर लोगों को कभी शीशा नहीं देखना चाहिए? सुकरात ने समझाया- सुंदर लोगों को भी आईना अवश्य देखना चाहिए ताकि *उन्हें ध्यान रहे कि वे जितने सुंदर है, उतने ही सुंदर काम भी करें, वरना उनके बुरे काम उनकी सुंदरता कम कर देंगे।* "असल में, हम समाज के द्वारा की गयी सुंदरता की परिभाषा को नहीं बदल सकते, *लेकिन अपनी सोच, और अपने लियें सुंदरता की परिभाषा को अवश्य बदल सकते हैं।* कहा गया है कि “मन” और “वचन” की जितनी “महत्ता” है उतनी “काया” (शरीर) की नहीं. यदि होती, तो वेश्याएं “पूजी” जातीं. सुंदरता या कुरूपता तो कुदरत की देन है. जरूरी नहीं कि जिसका शरीर सुंदर हो उसका मन भी सुंदर होगा. या फिर जो इंसान कुरूप है उसका मन भी कुरूप होगा. बाहरी सुंदरता से कहीं ज्यादा आंतरिक सुंदरता, आपका प्रभाव समाज और लोगों पर छोड़ती है. *आप कैसे हो सुंदर या कुरूप ये अहमियत नही है, आपकी सोच और व्यक्तित्व आपकी अहमियत रखता है । ईश्वर ने यदि रंग नही दिया तो कोई बात नही आप अपनी मन की सुंदरता, कला, प्रतिभा से विश्व मे अपना लोहा सकते हो।* 🌹🌹🌹
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✍🏻✍🏻 "खुशी" थोड़े "वक़्त" के लिए "सब्र" देती है...!! ✍🏻✍🏻 लेकिन "सब्र" हमेशा के लिए "खुशी" देता है...!!
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✍🏻✍🏻 मेरी "महफ़िल" में अभी "नज़्म" की "इरशाद" बाक़ी है...!! ✍🏻✍🏻 कोई "थोड़ा" ही "भीगा" है अभी पूरी "बरसात" बाक़ी है...!!
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शादी की सुहागसेज पर बैठी एक स्त्री का पति जब भोजन का थाल लेकर अंदर आया तो पूरा कमरा उस स्वादिष्ट भोजन की खुशबू से भर गया। रोमांचित उस स्त्री ने अपने पति से निवेदन किया कि मांजी को भी यहीं बुला लेते तो हम तीनों साथ बैठकर भोजन करते। पति ने कहा छोड़ो उन्हें वो खाकर सो गई होंगी आओ हम साथ में भोजन करते है प्यार से, उस स्त्री ने पुनः अपने पति से कहा कि नहीं मैंने उन्हें खाते हुए नहीं देखा है, तो पति ने जवाब दिया कि क्यों तुम जिद कर रही हो शादी के कार्यों से थक गयी होंगी इसलिए सो गई होंगी, नींद टूटेगी तो खुद भोजन कर लेंगी। तुम आओ हम प्यार से खाना खाते हैं। उस स्त्री ने तुरंत तलाक लेने का फैसला कर लिया और तलाक लेकर उसने दूसरी शादी कर ली और इधर उसके पहले पति ने भी दूसरी शादी कर ली। दोनों अलग- अलग सुखी घर गृहस्ती बसा कर खुशी खुशी रहने लगे। इधर उस स्त्री के दो बच्चे हुए जो बहुत ही सुशील और आज्ञाकारी थे। जब वह स्त्री ६० वर्ष की हुई तो वह बेटों को बोली में चारो धाम की यात्रा करना चाहती हूँ ताकि तुम्हारे सुखमय जीवन के लिए प्रार्थना कर सकूँ। बेटे तुरंत अपनी माँ को लेकर चारों धाम की यात्रा पर निकल गये। एक जगह तीनों माँ बेटे भोजन के लिए रुके और बेटे भोजन परोस कर मां से खाने की विनती करने लगे। उसी समय उस स्त्री की नजर सामने एक फटेहाल, भूखे और गंदे से एक वृद्ध पुरुष पर पड़ी जो इस स्त्री के भोजन और बेटों की तरफ बहुत ही कातर नजर से देख रहा था। उस स्त्री को उस पर दया आ गईं और बेटों को बोली जाओ पहले उस वृद्ध को नहलाओ और उसे वस्त्र दो फिर हम सब मिलकर भोजन करेंगे। बेटे जब उस वृद्ध को नहलाकर कपड़े पहनाकर उसे उस स्त्री के सामने लाये तो वह स्त्री आश्चर्यचकित रह गयी वह वृद्ध वही था जिससे उसने शादी की सुहागरात को ही तलाक ले लिया था। उसने उससे पूछा कि क्या हो गया जो तुम्हारी हालत इतनी दयनीय हो गई तो उस वृद्ध ने नजर झुका के कहा कि सब कुछ होते ही मेरे बच्चे मुझे भोजन नहीं देते थे, मेरा तिरस्कार करते थे, मुझे घर से बाहर निकाल दिया। उस स्त्री ने उस वृद्ध से कहा कि इस बात का अंदाजा तो मुझे तुम्हारे साथ सुहागरात को ही लग गया था जब तुमने पहले अपनी बूढ़ी माँ को भोजन कराने के बजाय उस स्वादिष्ट भोजन की थाल लेकर मेरे कमरे में आ गए और मेरे बार-बार कहने के बावजूद भी आप ने अपनी माँ का तिरस्कार किया। उसी का फल आज आप भोग रहे हैं। जैसा व्यहवार हम अपने बुजुर्गों के साथ करेंगे उसी देखा-देख कर हमारे बच्चों में भी यह गुण आता है कि शायद यही परंपरा होती है। सदैव माँ बाप की सेवा ही हमारा दायित्व बनता है। जिस घर में माँ बाप हँसते है, वहीं प्रभु बसते हैं आप सभी का दिन शुभ हो जय श्री मदन जी🙏🏻🙏🏻🌹🙏🏻🙏🏻
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*सबसे बड़ा झूठ* *दुनिया का सबसे बड़ा झूठ जानते हो क्या है? हम रोज अच्छी बातें पढ़ते हैं*, *कुछ लोग तो सत्संग भी सुनते हैं*, *महापुरुषों के विचार पढ़ते हैं और अच्छे लोगों से मिलकर ज्ञान की बातें भी सीखते हैं*। *लेकिन क्या इन सब से हमारे जीवन में बदलाव आएगा*? *हम सोचते हैं कि किसी महापुरुष की बातें सुनने से या अच्छी किताबें पढ़ने से हमारे जीवन में बदलाव आ जायेगा तो इससे बड़ा झूठ और इससे बड़ा भ्रम दुनिया में कोई दूसरा नहीं है*। *कोई आएगा और हमें कुछ बातें बताएगा और हम बदल जायेंगे*, *ये एक भ्रम ही तो है* *अगर किसी के कहने से दुनिया बदल जाती तो भगवान को बार बार धरती पर जन्म क्यों लेना पड़ता*? *एक राम ही काफी थे*.. *एक कृष्ण ही काफी थे*.. *या एक महावीर ही काफी थे*.. *या एक बुद्ध ही काफी थे*.. *लेकिन सच तो ये है कि आपको खुद अपने आप को बदलना है*। *आप क्या पढ़ते हो*? *क्या देखते हो ? क्या सुनते हो*? *इससे कोई फर्क नहीं पड़ता*। *फर्क पड़ता है कि आप किस बात को अपने जीवन में उतारते हो* *आप जिस बात को अपनाओगे वैसे ही हो जाओगे*। *बुद्ध में और आप में कोई फर्क नहीं है। जो ईश्वर महात्मा बुद्ध के अंदर था वही आपमें है* *वही प्राण है और वही चेतना* *सब कुछ समान* *हमको बनाने वाला भी एक ही है*। *उस बनाने वाले ने कोई कसर नहीं छोड़ी*। *सब कुछ आपको देकर भेजा है*। *बस एक चीज़ का फर्क है – बुद्ध ने कुछ बातों को अपना लिया और हमने सिर्फ एक कान से सुना और दूसरे से निकाल दिया इसलिए आज भी भटक रहे हैं*। *बस इतना ही फर्क है आपमें और बुद्ध में*। *बुद्ध ने खुद को पहचाना और सत्य को अपना लिया और हम सिर्फ सुनकर या पढ़कर ही बदलाव खोजते रहे*। *घर में चाहे कितने भी इन्वर्टर या जेनेटर लगवा लो, लेकिन जब तक आप स्विच ऑन नहीं करेंगे बल्व नहीं जलेगा ठीक उसी तरह आप कितनी भी ज्ञान की बातें पढ़ लो या सुन लो जब आपके अंदर का स्विच ऑन नहीं होगा, आप वैसे ही रहेंगे जैसे कल थे*। *कल से निकलिए, आज में जियो*। *पुराने विचारों को त्याग कर नए विचारों को अपनाइये*। *खुद को पहचानिये, तभी आपमें बदलाव आएगा*।
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*तू मूझे संभालता है, ये तेरा उपकार है मेरे दाता* *वरना तेरी मेहरबानी के लायक मेरी हस्ती कहाँ,* *रोज़ गलती करता हू, तू छुपाता है अपनी बरकत से,* *मै मजबूर अपनी आदत से, तू मशहूर अपनी रेहमत से!* *तू वैसा ही है जैसा मैं चाहता हूँ..I* *बस.. मुझे वैसा बना दे जैसा तू चाहता है* 🌹 *शुभ प्रभात* 🌹
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When was the last time Arun Jaitleyji won an election? Jo candidate ek so called Tsunami wave main bhi election haar jaaye unko kya kehte hain? #genuinekoschan
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मृत्युभोज --- से ऊर्जा नष्ट होती है महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है कि ..... मृत्युभोज खाने वाले की ऊर्जा नष्ट हो जाती है। जिस परिवार में मृत्यु जैसी विपदा आई हो उसके साथ इस संकट की घड़ी में जरूर खडे़ हों और तन, मन, धन से सहयोग करें लेकिन......बारहवीं या तेरहवीं पर मृतक भोज का पुरजोर बहिष्कार करें। महाभारत का युद्ध होने को था, अतः श्री कृष्ण ने दुर्योधन के घर जा कर युद्ध न करने के लिए संधि करने का आग्रह किया । दुर्योधन द्वारा आग्रह ठुकराए जाने पर श्री कृष्ण को कष्ट हुआ और वह चल पड़े, तो दुर्योधन द्वारा श्री कृष्ण से भोजन करने के आग्रह पर कृष्ण ने कहा कि 🍁 ’’सम्प्रीति भोज्यानि आपदा भोज्यानि वा पुनैः’’ अर्थात् "जब खिलाने वाले का मन प्रसन्न हो, खाने वाले का मन प्रसन्न हो, तभी भोजन करना चाहिए। 🍁 लेकिन जब खिलाने वाले एवं खाने वालों के दिल में दर्द हो, वेदना हो, तो ऐसी स्थिति में कदापि भोजन नहीं करना चाहिए।" 🍁 हिन्दू धर्म में मुख्य 16 संस्कार बनाए गए है, जिसमें प्रथम संस्कार गर्भाधान एवं अन्तिम तथा 16वाँ संस्कार अन्त्येष्टि है। इस प्रकार जब सत्रहवाँ संस्कार बनाया ही नहीं गया तो सत्रहवाँ संस्कार 'तेरहवीं का भोज' कहाँ से आ टपका। किसी भी धर्म ग्रन्थ में मृत्युभोज का विधान नहीं है। बल्कि महाभारत के अनुशासन पर्व में लिखा है कि मृत्युभोज खाने वाले की ऊर्जा नष्ट हो जाती है। लेकिन हमारे समाज का तो ईश्वर ही मालिक है। इसीलिए महर्षि दयानन्द सरस्वती, पं0 श्रीराम शर्मा, स्वामी विवेकानन्द जैसे महान मनीषियों ने मृत्युभोज का जोरदार ढंग से विरोध किया है। जिस भोजन बनाने का कृत्य.... रो रोकर हो रहा हो.... जैसे लकड़ी फाड़ी जाती तो रोकर.... आटा गूँथा जाता तो रोकर.... एवं पूड़ी बनाई जाती है तो रो रोकर.... यानि हर कृत्य आँसुओं से भीगा हुआ। ऐसे आँसुओं से भीगे निकृष्ट भोजन अर्थात बारहवीं एवं तेरहवीं के भोज का पूर्ण रूपेण बहिष्कार कर समाज को एक सही दिशा दें। जानवरों से भी सीखें, जिसका साथी बिछुड़ जाने पर वह उस दिन चारा नहीं खाता है। जबकि 84 लाख योनियों में श्रेष्ठ मानव, जवान आदमी की मृत्यु पर हलुवा पूड़ी पकवान खाकर शोक मनाने का ढ़ोंग रचता है। इससे बढ़कर निन्दनीय कोई दूसरा कृत्य हो नहीं सकता। यदि आप इस बात से सहमत हों, तो आप आज से संकल्प लें कि आप किसी के मृत्यु भोज को ग्रहण नहीं करेंगे और मृत्युभोज प्रथा को रोकने का हर संभव प्रयास करेंगे हमारे इस प्रयास से यह कुप्रथा धीरे धीरे एक दिन अवश्य ही पूर्णत: बंद हो जायेगी 🍁 ग्रुप के सभी सम्मानित सदस्यों से परम आग्रह है कि इस पोस्ट को अधिक से अधिक ग्रुप में शेयर करें। मृत्युभोज समाज में फैली कुरीति है व समाज के लिये अभिशाप है । 🙏🏻
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अविश्वास प्रस्ताव लाने मे हार जीत का सवाल ही नही है वो तो पहले ही साफ था बहुमत के लिए 268 चाहिए था और BJP के पास 273 विपक्ष का मेन मकसद था मोदी सरकार को आइना दिखाकर उनके चेहरों के दाग दिखाना उसमे विपक्ष बख़ूबी सफल रहा अब BJP माने या ना माने पंरतु राहुल ने मोदी को पसीना ला दिया!
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क्या PM #राफेल पर जवाब दिए? #किसानों की आत्महत्याओं पर बोले? #नोटबंदी की नाकामयाबी पर बोले? #बेरोजगारी पर जवाब दिया? #महिला सुरक्षा पर बोले? #महँगाई पर बोले? #काला_धन पर बोले? #Moblynching पर बोले? एक भी सवाल के जवाब नहीं दिए,हमेशा कि तरह सिर्फ जुमले फेंके। #NoConfidenceMotion
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वही हिन्दू खतरे में है, जिनके भगवान #मोदी हैं, मैं भी #हिन्दू हूँ और मेरा धर्म सुरक्षित है ~
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🥀🌹👏👏🥀🌹 *“समय जिसका साथ देता है वो बड़ों बड़ों को मात देता है।"* *अमीर के घर पे बैठा 'कौवा' भी* *सबको 'मोर' लगता है ..* *और..* *गरीब का भूखा बच्चा भी* *सबको 'चोर' लगता है..*😔😔 : *इंसान की अच्छाई पर,* *सब खामोश रहते हैं...* *चर्चा अगर उसकी बुराई पर हो,* *तो गूँगे भी बोल पड़ते हैं..!!!*
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*मन से ज्यादा" ऊपजाउ" जगह और* *कोई नही हैं !* *क्योकी यहाँ जो कुछ "बोया" जाये* ,. *बढता ज़रूर हैं !!* *फिर चाहे वो "प्यार" हो.......* *या "विचार" .................||.
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मन की बात जबरजस्ती सुनाना और फेंकना इतना पसंद है, खुद बोलने के 3 घंटे 33 मिनट और कांग्रेस को बोलने के लिए सिर्फ़ 38 मिनट दिया है ? फिर भी पसीना छोड़ रहे है साहब ।
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बढ़ती उम्र पर जॉर्ज कार्लिन की सलाह (अद्भुत संदेश - अंत तक जरूर पढ़ें नहीं तो आप अपने जीवन का एक दिन गवाँ देंगे।) कैसे बने रहें - चिरयुवा 1.संख्याओं को दूर फेंक आइए। जैसे- उम्र, वजन, और लंबाई। इसकी चिंता डॉक्टर को करने दीजिये । 2. केवल हँसमुख लोगों से दोस्ती रखिए। खड़ूस और चिड़चिड़े लोग तो आपको नीचे गिरा देंगे। 3. हमेशा कुछ सीखते रहिए। इनके बारे में कुछ और जानने की कोशिश करिए - कम्प्यूटर, शिल्प, बागवानी, आदि कुछ भी। चाहे रेडियो ही। दिमाग को निष्क्रिय न रहने दें। खाली दिमाग शैतान का घर होता है और उस शैतान के परिवार का नाम है - अल्झाइमर मनोरोग। 4. सरल व साधारण चीजों का आनंद लीजिए। 5. खूब हँसा कीजिए - देर तक और ऊँची आवाज़ में। 6. आँसू तो आते ही हैं। उन्हें आने दीजिए, रो लीजिए, दुःख भी महसूस कर लीजिए और फिर आगे बढ़ जाइए। केवल एक व्यक्ति है जो पूरी जिंदगी हमारे साथ रहता है - वो हैं हम खुद। इसलिए जबतक जीवन है तबतक 'जिन्दा' रहिए। 7. अपने इर्द-गिर्द वो सब रखिए जो आपको प्यारा लगता हो - चाहे आपका परिवार, पालतू जानवर, स्मृतिचिह्न-उपहार, संगीत, पौधे, कोई शौक या कुछ भी। आपका घर ही आपका आश्रय है। 8. अपनी सेहत को संजोइए। यदि यह ठीक है तो बचाकर रखिए, अस्थिर है तो सुधार करिए, और यदि असाध्य है तो कोई मदद लीजिए। 9. अपराध-बोध की ओर मत जाइए। जाना ही है तो किसी मॉल में घूम लीजिए, पड़ोसी राज्यों की सैर कर लीजिए या विदेश घूम आइए। लेकिन वहाँ कतई नहीं जहाँ खुद के बारे में खराब लगने लगे। 10. जिन्हें आप प्यार करते हैं उनसे हर मौके पर बताइए कि आप उन्हें चाहते हैं; और हमेशा याद रखिए कि जीवन की माप उन साँसों की संख्या से नहीं होती जो हम लेते और छोड़ते हैं बल्कि उन लम्हों से होती है जो हमारी सांस लेकर चले जाते हैं कोई फर्क नहीं पड़ता जो आप इस संदेश को कम से कम आठ लोगों तक न भेजें, लेकिन भेजिए जरूर। हमें प्रतिदिन का जीवन भरपूर तरीके से जीने की आवश्यकता है। जीवन की यात्रा का अर्थ यह नहीं कि अच्छे से बचाकर रखा हुआ आपका शरीर सुरक्षित तरीके से श्मशान या कब्रगाह तक पहुँच जाय। बल्कि आड़े-तिरछे फिसलते हुए, पूरी तरह से इस्तेमाल होकर, सधकर, चूर-चूर होकर यह चिल्लाते हुए पहुँचो - वाह यार, क्या यात्रा थी! 😊😄 ENJOY YOUR JOURNEY 👍🏻
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We all know why Modi Sarkar is against the RTI, because it reveals some unpleasant truths about the PM. For e.g. spending 4500 crores for self publicity and zero spending for development of 4 villages he adopted in Varanasi. #WahModijiWah https://t.co/wsH4E17EvL
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*जो “प्राप्त” है वो ही “पर्याप्त” है ।* *इन दो शब्दों में सुख बेहिसाब हैं।।* *जो इंसान “खुद” के लिये जीता है* *उसका एक दिन “मरण” होता है* *पर जो इंसान”दूसरों”के लिये जीता है* *उसका हमेशा “स्मरण” होता है ।।* 🌸🌿🍀🌸🌿🍀🌼🌸🌿🍀 *"कोशिश"* *आखिरी सांस तक करनी चाहिए,* *या तो "लक्ष्य" हासिल होगा* *या "अनुभव"* *"चीजें दोनों ही अच्छी है।"* 🍀 *Good Morning* 🍀
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रोज का 1.5GB डेटा और हिंदू-मुश्लिम की डिबेट युवाओं को बेरोजगारी का एहसास नही होने दे रही है...! #MonsoonSession
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इधर आज ही सुप्रीम कोर्ट ने भीड़तंत्र को नकारा है; उधर झारखंड में एक नामी समाजसेवी पर खुले आम क़ातिलाना हमला हुआ है. केंद्र-राज्य में सत्ताधारी भाजपा अब किस मुँह से कहेगी कि वो न्यायपालिका व लोकतंत्र का सम्मान करती है. देश को अराजकता के इस दौर से बचाने के लिए सब को आगे आना होगा.
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PM कांग्रेस से मुसलमानों की पार्टी होने के बारे में पूछ रहे हैं! लोकतंत्र मे घटिया राजनीति का इससे बुरा दौर कभी नही आएगा जब देश का पीएम देश को हिंदू मुसलमान में बाँटने में लगा हुआ है.. चार साल का काम गिनाने के बजाय देश को दंगों की आग में झोकने की ओर ले जाना कौन सा राष्ट्रवाद है!!
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*एक बार कागज का एक टुकड़ा हवा के वेग से उड़ा और पर्वत के शिखर पर जा पहुँचा।पर्वत ने उसका आत्मीय स्वागत किया और कहा-भाई !* *यहाँ कैसे पधारे ? कागज.ने कहा-अपने दम पर।जैसे ही कागज ने अकड़ कर कहा अपने दम पर.और तभी हवा का एक दूसरा झोंका आया और कागज को उड़ा ले गया।अगले ही पल वह कागज नाली में गिरकर गल-सड़ गया।जो दशा एक कागज की है वही दशा हमारी है।* *पुण्य की अनुकूल वायु का वेग.आता है तो हमें शिखर पर पहुँचा देता है और पाप का झोंका आता है तो रसातल पर पहुँचा देता है।* *किसका मान ? किसका गुमान ? सन्त कहते हैं कि जीवन की सच्चाई को समझो।संसार के सारे संयोग हमारे अधीन नहीं हैं।कर्म के अधीन हैं और कर्म कब कैसी करवट बदल ले , कोई भरोसा नहीं।इसलिए कर्मों के अधीन परिस्थितियों का.कैसा गुमान ?* 🙏जय श्री मदन जी🙏
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बीजेपी विकास कि छलांग कुछ इस तरह ले रही है। और इसके बाद रिजल्ट आपके सामने है। पर मोदी भक्त विकास विकास को ही कह कर विकास पैदा कर रहे।
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👌👌👌👌👌👌 *"प" शब्द इन्सान को बहुत प्रिय है हम जिंदगी भर प के पीछे भागते रहते है ।* *जो मिलता है वह भी प से..* *और जो नहीं मिलता वह भी प से...* *प 👨 पति* *प 👩 पत्नि* *प 👦 पुत्र* *प 👧 पुत्री* *प 👪 परिवार* *प 💞प्रेम* *प 💵 पैसा* *प 💺 पद* *प 🚨 प्रतिष्ठा* *प 👏 प्रशंसा* *प 👨❤💋👨 प्यार* *प 🍻 पार्टी* *प*📋 *परीक्षा* *प 🏅पब्लिसिटी* *इन सब प के पीछे पड़ते-पड़ते हम प से पाप भी करते है ।* *फिर हमारा प से पतन होता है..* *और अंत मे बचता है सिर्फ प से पछतावा...* *पाप के प के पीछे पड़ने से अच्छा है हम प से परमेश्वर के पीछे पड़े... और प से पुण्य कमाये..* *अतं मे प से प्रणाम..* 🙏🙏🙏
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पेड़ो के बारे मे महत्वपूर्ण जानकारी। . ♡. पेड़ कभी भी ज्यादा उम्र की वजह से नही मरते. . ♡. हर साल 5 अऱब पेड़ लगाए जा रहे है लेकिन हर साल 10 अऱब पेड़ काटे भी जा रहे हैं. . ♡. एक पेड़ दिन में इतनी ऑक्सीजन देता है कि 4 आदमी जिंदा रह सकें. . ♡.देशों की बात करें, तो दुनिया में सबसे ज्यादा पेड़ रूस में है उसके बाद कनाडा में उसके बाद ब्राज़ील में फिर अमेरिका में और उसके बाद भारत में केवल 35 अऱब पेड़ बचे हैं. . ♡.दुनिया की बात करें, तो 1 इंसान के लिए 422 पेड़ बचे है. लेकिन अगर भारत की बात करें,तो 1 हिंदुस्तानी के लिए सिर्फ 28 पेड़ बचे हैं. . ♡. पेड़ो की कतार धूल-मिट्टी के स्तर को 75% तक कम कर देती है. और 50% तक शोर को कम करती हैं. . ♡. एक पेड़ इतनी ठंड पैदा करता है जितनी 1 A.C 10 कमरों में 20 घंटो तक चलने पर करता है. जो इलाका पेड़ो से घिरा होता है वह दूसरे इलाकों की तुलना में 9 डिग्री ठंडा रहता हैं. . ♡. पेड़ अपनी 10% खुराक मिट्टी से और 90% खुराक हवा से लेते है. एक पेड़ में एक साल में2,000 लीटर पानी धरती से चूस लेता हैं. . ♡. एक एकड़ में लगे हुए पेड़ 1 साल में इतनी Co2 यानि कार्बनडाईआक्साईड सोख लेते है जितनी एक कार 41,000 km चलने परछोड़ती हैं. . ♡. दुनिया की 20% oxygen अमेजन के जंगलो द्वारा पैदा की जाती हैं. ये जंगल 8 करोड़ 15 लाख एकड़ में फैले हुए हैं. . ♡. इंसानो की तरह पेड़ो को भी कैंसर होती है.कैंसर होने के बाद पेड़ कम ऑक्सीजन देने लगते हैं. . ♡. पेड़ की जड़े बहुत नीचे तक जा सकती है. दक्षिण अफ्रिका में एक अंजीर के पेड़ की जड़े 400 फीट नीचे तक पाई गई थी. . ♡. दुनिया का सबसे पुराना पेड़ स्वीडन के डलारना प्रांतमें है.टीजिक्कोनाम का यह पेड़ 9,550 साल पुराना है. इसकी लंबाई करीब 13 फीट हैं. . ♡.किसी एक पेड़ का नाम लेना मुश्किल है लेकिन तुलसी, पीपल, नीम और बरगद दूसरों के मुकाबले ज्यादा ऑक्सीजन पैदा करते हैं. 🙏पेड़ लगाए🙏
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बीजेपी नेता ने व्यापारी से पूछा: GST का क्या मतलब है व्यापारी ने जवाब दिया: G - गयी S - सरकार T - तुम्हारी
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धरती पर इंस्टीट्यूट नहीं, फाइल में है धरती पर स्मार्ट सिटी नहीं, फाइल में है धरती पर बुलेट ट्रेन नहीं, फाइल में है धरती पर शौचालय नहीं, फाइल में है धरती पर २ Cr नौकरियां नहीं, फाइल में है धरती पर विकास नहीं, फाइल में है धरती पर अच्छे दिन नहीं, फाइल में है 🤔🤔🤔
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🙏 #तुलना_छोड़ें# 🙏 एक फ़कीर से किसी ने पूछा कि तुम्हारे जीवन में इतना आनन्द क्यों है ? मेरे जीवन में क्यों नहीं ? उस फ़कीर ने कहा : मैं अपने होने से राजी हूँ और तुम अपने होने से राजी नहीं हो 1 फ़िर भी उसने कहा : कुछ तरक़ीब बताओ 1 फ़कीर ने कहा : तरक़ीब मैं कोई नहीं जानता 1 बाहर आओ मेरे साथ.. यह झाड़ छोटा है, वह झाड़ बड़ा है 1 मैंने कभी इन दोनों को परेशान नहीं देखा कि मैं छोटा हूँ, तुम बड़े हो 1 कोई विवाद नहीं सुना 1 तीस साल से मैं यहाँ रहता हूँ 1 छोटा अपने छोटे होने में खुश है, बड़ा अपने बड़े होने में खुश है; क्योंकि तुलना प्रविष्ट नहीं हुई 1 अभी उन्होंने तौला नहीं है 1 घास का एक पत्ता भी उसी आनन्द से डोलता है हवा में, जिस आनन्द से कोई देवदार का बड़ा वृक्ष डोलता है 1 घास का फूल भी उसी आनन्द से खिलता है, जिस आनन्द से ग़ुलाब का फूल खिलता है 1 कोई भेद नहीं है तुम्हारे लिए भेद है 1 तुम कहोगे : यह घास का फूल है, और यह ग़ुलाब का फ़ूल 1 लेकिन घास और ग़ुलाब के फ़ूल के लिए कोई तुलना नहीं, वे दोनों अपने आनन्द में मग्न हैं 1 जो तुलना छोड़ देता है, वह मग्न हो जाता है 1 जो मग्न हो जाता है, वह सफ़ल जीवन जीता है.. ✍✍
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*दुनिया में हजारों रिश्ते बनाओ लेकिन उन हजारों रिश्ते में से* *एक रिश्ता ऐसा बनाओ की* *जब हजारों आप के खिलाफ हो तब भी वह आपके साथ हो* *"किसी के लिए समर्पण करना मुश्किल नहीं है* *मुश्किल है उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के "समर्पण" की कद्र करे !"* 🍃 *आज से बेहतर कुछ नहीं* *क्योंकि* *कल कभी आता नहीं और* *आज कभी जाता नहीं।*🍃 🙏 *सुप्रभात*🙏
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श्री मदन जी ने श्री मुख से ज्ञान दिया है कि परमशक्ति सम्पूर्ण सृष्टि की स्वामी है और गिनती में एक है परमात्मा हर धरती पर एक है , परमशक्ति की सर्वश्रेठ रचना है , परमशक्ति के साथ 16 गुण लगते है , परमात्मा के माध्यमसे परमशक्ति इन गुणों का प्रदर्शन करती है , परमशक्ति सब की इष्ट है ,गुरु है और पूजनीय है । परमात्मा परमशक्ति की पूजा करते है , परमशक्ति उनका मान सम्मान और पूजा करवाती है । परमशक्ति कर्मफल दाता है परमात्मा कर्मफल भोगती है
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1,, परमशक्ति रचैता है ,, परमात्मा रचना है 2,,परमशक्ति पूरी सृष्टि की मालिक है ,,जबकि परमात्मा को परमशक्ति एक दुनिया के लिए नियुक्त करती है । ,3 परमशक्ति किसी को कुछ भी इक्षा मात्र से दे सकती है ,,किसी से इजाजत की जरूरत नहीं है ।।।जबकि परमात्मा को परमशक्ति से विनती करनी पड़ती है किसी को कुछ देने के लिए।। 4 ,,परमशक्ति पूर्ण है ,,परमात्मा पूर्ण नहीं ।। परमशक्ति किसी की पूजा नहीं करते ,जबकि परमात्मा परमशक्ति की पूजा करते है ।। 5 ,परमशक्ति सर्वज्ञ ,सर्वव्यापक ,सर्वशक्तिमान है ,, परमात्मा के अंदर ये गुण नहीं है,,,।।।
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मोदी जी, -22 दिसंबर, 2013 को आपने कहा था “हर बच्चा जानता है कि कालाधन स्विस बैंक में रखा है”। -29 जून 2018 को आपके वित्तमंत्री ने कहा है “स्विस बैंक में रखे पैसे को कालाधन कहना मूर्खता है”। —अब आप ही बतायें इन दो बयानों में “मूर्खता” कौन सा बयान है..? लफ़्फ़ाज़ी जारी है।
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किस्मत: महाभारत के युद्ध के बाद : 18 दिन के युद्ध ने द्रोपदी की उम्र को 80 वर्ष जैसा कर दिया था शारीरिक रूप से भी और मानसिक रूप से भी। ...... युद्ध से पूर्व - प्रतिशोध की ज्वाला ने जलाया था और युद्ध के उपरांत - पश्चाताप की आग तपा रही थी । ना कुछ समझने की क्षमता बची थी ना सोचने की । कुरूक्षेत्र मेें चारों तरफ लाशों के ढेर थे । जिनके दाह संस्कार के लिए न लोग उपलब्ध थे न साधन । शहर में चारों तरफ विधवाओं का बाहुल्य था पुरुष इक्का-दुक्का ही दिखाई पड़ता था अनाथ बच्चे घूमते दिखाई पड़ते थे और उन सबकी वह महारानी द्रौपदी हस्तिनापुर केे महल मेंं निश्चेष्ट बैठी हुई शूूूून्य को ताक रही थी । तभी कृष्ण कक्ष में प्रवेश करते हैं ! " महारानी द्रौपदी की जय हो । " ............... द्रौपदी कृष्ण को देखते ही दौड़कर उनसे लिपट जाती है, कृष्ण उसके सर को सहलातेे रहते हैं और रोने देते हैं थोड़ी देर में उसे खुद से अलग करके समीप के पलंग पर बिठा देते हैं । द्रौपदी: " यह क्या हो गया सखा ऐसा तो मैंने नहीं सोचा था ।" कृष्ण : " नियति बहुत क्रूर होती है पांचाली वह हमारे सोचने के अनुरूप नहीं चलती हमारे कर्मों को परिणामों में बदल देती है तुम प्रतिशोध लेना चाहती थी और तुम सफल हुई द्रौपदी ! तुम्हारा प्रतिशोध पूरा हुआ । सिर्फ दुर्योधन और दुशासन ही नहीं सारे कौरव समाप्त हो गए तुम्हें तो प्रसन्न होना चाहिए !" द्रौपदी : " सखा तुम मेरे घावों को सहलाने आए हो या उन पर नमक छिड़कने के लिए ! कृष्ण : नहीं द्रौपदी मैं तो तुम्हें वास्तविकता से अवगत कराने के लिए आया हूं । हमारे कर्मों के परिणाम को हम दूर तक नहीं देख पाते हैं और जब वे समक्ष होते हैं तो हमारे हाथ मेें कुछ नहीं रहता । द्रौपदी : " तो क्या इस युद्ध के लिए पूर्ण रूप से मैं ही उत्तरदाई हूं कृष्ण ? कृष्ण : नहीं द्रौपदी तुम स्वयं को इतना महत्वपूर्ण मत समझो । लेकिन तुम अपने कर्मों में थोड़ी सी भी दूरदर्शिता रखती तो स्वयं इतना कष्ट कभी नहीं पाती। द्रौपदी : मैं क्या कर सकती थी कृष्ण ? कृष्ण : जब तुम्हारा स्वयंबर हुआ तब तुम कर्ण को अपमानित नहीं करती और उसे प्रतियोगिता में भाग लेने का एक अवसर देती तो शायद परिणाम कुछ और होते ! .....और उसके बाद तुमने अपने महल में दुर्योधन को अपमानित किया वह नहीं करती तो तुम्हारा चीर हरण नहीं होता तब भी शायद परिस्थितियां कुछ और होती ।.................अब तुम हस्तिनापुर की महारानी हो और इस समय हस्तिनापुर के पुनरुद्धार का कार्य तीव्र गति से करना होगा उठो और अपने कर्म लग जाओ यही प्रकृति का संकेत है हमारे शब्द भी हमारे कर्म होते हैं द्रोपदी और हमें अपने हर शब्द को बोलने से पहले तोलना बहुत जरूरी होता है अन्यथा उसके दुष्परिणाम सिर्फ स्वयं को ही नहीं अपने पूरे परिवेश को दुखी करते रहते हैं ।............हमारी किस्मत हमारे कर्मो से बनती है,और हमारे कर्म हमारी करनी पर निर्भर हैं।जैसे करनी वैसे कर्म बनते हैं।🙏🙏
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"इसलिये राजा महाराजा करते थे सोमरस का सेवन, आप भी सच जानकर हैरान हो जाओगे Inspire tv ALWAYS Author नमस्कार दोस्तो, आशा है आप सब स्वस्थ होंगे। प्राचीन काल मे राजा सोमरस का इस्तेमाल किया करते थे। हमारे शास्त्रों और प्राचीन किताबों में सोमरस का उल्लेख किया गया है। आखिर ये सोमरस क्या होता था और क्यों इसका इस्तेमाल इतने जोर सौर से किया जाता था। क्या ये सोमरस आखिर आजकल की शराब का ही एक नाम था? चलिए आज हम आपको इसके बारे में ही बताते हैं। दोस्तो अगर आपने अभी तक हमे फॉलो नहीं किया है तो अभी कर लीजिए ताकि हम आपको सारी जानकारी समय से पहुंचा सके। फ़ोटो : गूगल खोज कुछ लोग सोमरस को शराब बताते हैं। कहते हैं कि राजा महाराजा सोमरस का सेवन नशे के लिये करते थे। इससे पहले की हम आपको कुछ आगे बताये इससे पहले आप ये लाईने जरूर पढ़ें जो हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथों में लिखी मिलती हैं, यह निचोड़ा हुआ शुद्ध दही मिलाया हुआ सोमरस, सोमपान की प्रबल इच्छा रखने वाले इंद्रदेव को प्राप्त हो। इसके अलावा ऋग्वेद में लिखा मिलता है कि हे वायुदेव, यह निचोड़ा हुआ सोमरस तीखा होने के कारण गाय के दुध में मिलाकर तैयार किया गया है आइये और इसका पान कीजिये। जब इस सोमरस का सेवन करने के लिए हमारे ग्रंथो में देवताओं का आवाहन किया गया हो तो ये एक शराब अर्थात मदिरा कैसे हो सकता है। फ़ोटो : गूगल खोज चलिये इसके लिए आपको कुछ तर्क देकर समझाने की कोशिश करते हैं। पुराने जमाने मे शराब के लिए मदिरा शब्द का इस्तेमाल किया गया है। जबकि सोमरस का अर्थ है शीतल अर्थात वो पेय जो हमारे मन और मष्तिष्क को शांति और शीतलता प्रदान करें। ऐसी मान्यता है कि अफगानिस्तान और हिमालय की पहाड़ियों पर बिना पत्तियों का एक सोम नाम का पौधा मिलता था। इस पौधे से एक रस बनाया जाता था जिसमे गाय का दूध और शहद मिलाकर तैयार किया जाता था। यह एक ऐसा पेय था जिसमे बहुत ज्यादा बल
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अपने डॉक्टर खुद बने 1= नमक केवल सेन्धा प्रयोग करें।थायराइड, बी पी, पेट ठीक होगा। 2=कुकर स्टील का ही काम में लें। एल्युमिनियम में मिले lead से होने वाले नुकसानों से बचेंगे 3=तेल कोई भी रिफाइंड न खाकर केवल तिल, सरसों, मूंगफली, नारियल प्रयोग करें। रिफाइंड में बहुत केमिकल होते हैं जो शरीर में कई तरह की बीमारियाँ पैदा करते हैं । 4=सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर, मसल कर ज़हरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करें। 5= रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है, प्रदूषित हवा बाहर करें। 6= काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं।खाने में अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी। 7= देसी गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं।अनेक रोग दूर होंगे, वजन नहीं बढ़ता। 8=ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें, सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा। 9=ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं। आयरन की कमी किसी को नहीं होगी। 10=भोजन का समय निश्चित करें, पेट ठीक रहेगा। भोजन के बीच बात न करें, भोजन ज्यादा पोषण देगा। 11=नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें। पोषक विटामिन, फाइबर मिलेंगें। 12=सुबह के खाने के साथ देशी गाय के दूध का बना ताजा दही लें, पेट ठीक रहेगा। 13=चीनी कम से कम प्रयोग करें, ज्यादा उम्र में हड्डियां ठीक रहेंगी। 14=चीनी की जगह बिना मसले का गुड़ या देशी शक्कर लें। 15= छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करें, फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते। 16= चाय के समय, आयुर्वेदिक पेय की आदत बनाएं व निरोग रहेंगे. 17- डस्ट बिन एक रसोई में एक बाहर रखें, सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें। 18- रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों तेल लगाएं, सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगें। 19- करेले, मैथी, मूली याने कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध रहेगा। 20- पानी मटके वाले से ज्यादा ठंडा न पिएं, पाचन व दांत ठीक रहेंगे। 21- प्लास्टिक, एल्युमिनियम रसोई से हटाये, केन्सर कारक हैं। 22- माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग केन्सर कारक है। 23- खाने की ठंडी चीजें कम से कम खाएँ, पेट और दांत को खराब करती हैं। 24- बाहर का खाना बहुत हानिकारक है, खाने से सम्बंधित ग्रुप से जुड़कर सब घर पर ही बनाएं। 25- तली चीजें छोड़ें, वजन, पेट, एसिडिटी ठीक रहेंगी। 26- मैदा, बेसन, छौले, राजमां, उड़द कम खाएँ, गैस की समस्या से बचेंगे। 27- अदरक, अजवायन का प्रयोग बढ़ाएं, गैस और शरीर के दर्द कम होंगे। 28- बिना कलौंजी वाला अचार हानिकारक होता है। 29- पानी का फिल्टर R O वाला हानिकारक है। U V वाला ही प्रयोग करें, सस्ता भी और बढ़िया भी। 30- रसोई में ही बहुत से कॉस्मेटिक्स हैं, इस प्रकार के ग्रुप से जानकारी लें। 31- रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें, सुबह कपड़े से छान कर इस जल से आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छान कर जो पाउडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें। रात को पी जाएं। पेट साफ होगा, कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा। 32- सुबह रसोई में चप्पल न पहनें, शुद्धता भी, एक्यू प्रेशर भी। 33- रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं, एसिडिटी खतम। 34- एक्यूप्रेशर वाले पिरामिड प्लेटफार्म पर खड़े होकर खाना बनाने की आदत बना लें तो भी सब बीमारी शरीर से निकल जायेगी। 35- चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी। 36- रसोई के मसालों से बना चाय मसाला स्वास्थ्यवर्धक है। 37- सर्दियों में नाखून बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा। 38- सर्दी में बाहर जाते समय 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए, सर्दी से नुकसान नहीं होगा. 39. रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी, नमक, फिटकरी रख कर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा 40- कभी-कभी नमक-हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें, दांतों का कोई रोग टिक नहीं सकता। 41- बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा। 42- सुबह के खाने के साथ घर का जमाया देशी गाय के ताजा दही जरूर शामिल करें, प्रोबायोटिक का काम करेगा. ---------------------------------- *हृदय की बीमारी आयुर्वेदिक इलाज* हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे, उनका नाम था महाऋषि वागवट जी !! उन्होने एक पुस्तक लिखी थी, जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!! (Astang hrudayam) इस पुस्तक मे उन्होने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे ! यह उनमे से ही एक सूत्र है !! वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है ! मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity (अम्लता) बढ़ी हुई है ! अम्लता आप समझते है ! जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !! अम्लता दो तरह की होती है ! एक होती है पेट कि अम्लता ! और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता. आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है. खट्टी खट्टी डकार आ रही है ! मुंह से पानी निकाल रहा है और अगर ये अम्लता (acidity) और बढ़ जाये तो hyperacidity होगी ! और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता (blood acidity) होती hai और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता और नलिया मे blockage कर देता है ! तभी heart attack होता है ! इसके बिना heart attack नहीं होता और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !! *इलाज क्या है ??* वागबट जी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidity) बढ़ गई है ! तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है ! आप जानते है दो तरह की चीजे होती है ! अम्लीय और क्षारीय !! acidic and alkaline अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ? acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है ? neutral होता है सब जानते है !! तो वागबट जी लिखते है कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय (alkaline) चीजे खाओ ! तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी और रक्त मे अम्लता neutral हो गई ! तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं ! ये है सारी कहानी !! अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये? आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है ! जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए और अगर आ गया है ! तो दुबारा न आए ! सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी ! जिसे दुधी भी कहते है ! English मे इसे कहते है bottle gourd ! जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है ! इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो या कच्ची लौकी खायो ! वागवतट जी कहते है रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी मे ही है ! तो आप लौकी के रस का सेवन करे ! *कितना सेवन करे* रोज 200 से 300 ग्राम पियो ! कब पिये ? सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद) पी सकते है. या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है ! इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है ! इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो तुलसी बहुत क्षारीय है ! इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है. पुदीना बहुत क्षारीय है. इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ! ये भी बहुत क्षारीय है ! लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले ! वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले ! ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है. तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे 2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा. 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा ! कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी ! घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे और पैसे बच जाये तो किसी गौशाला मे दान कर दे ! डाक्टर को देने से अच्छा है किसी गौशाला दान दे ! हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !! *हल्दी का पानी* पानी में हल्दी मिलाकर पीने से होते है यह 7 फायदें..... 1. गुनगुना हल्दी वाला पानी पीने से दिमाग तेज होता है. सुबह के समय हल्दी का गुनगुना पानी पीने से दिमाग तेज और उर्जावान बनता है. 2. रोज यदि आप हल्दी का पानी पीते हैं तो इससे खून में होने वाली गंदगी साफ होती है और खून जमता भी नहीं है. यह खून साफ करता है और दिल को बीमारियों से भी बचाता है. 3. लीवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नही है. हल्दी के पानी में टाॅक्सिस लीवर के सेल्स को फिर से ठीक करता है. हल्दी और पानी के मिले हुए गुण लीवर को संक्रमण से भी बचाते हैं. 4. हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को हल्दी वाला पानी पीना चाहिए. हल्दी खून को गाढ़ा होने से बचाती है. जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है. 5. जब हल्दी के पानी में शहद और नींबू मिलाया जाता है तब यह शरीर के अंदर जमे हुए विषैले पदार्थों को निकाल देता है जिसे पीने से शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नहीं पड़ता है. हल्दी में फ्री रेडिकल्स होते हैं जो सेहत और सौंदर्य को बढ़ाते हैं. 6. शरीर में किसी भी तरह की सजून हो और वह किसी दवाई से ना ठीक हो रही हो तो आप हल्दी वाला पानी का सेवन करें. हल्दी में करक्यूमिन तत्व होता है जो सूजन और जोड़ों में होने वाले असहय दर्द को ठीक कर देता है. सूजन की अचूक दवा है हल्दी का पानी. 7. कैंसर खत्म करती है हल्दी. हल्दी कैंसर से लड़ती है और उसे बढ़ने से भी रोक देती है. हल्दी एंटी-कैंसर युक्त होती है. यदि आप सप्ताह में तीन दिन हल्दी वाला पानी पीएगें तो आपको भविष्य में कैंसर से हमेशा बचे रहेगें. 🕉🕉🕉🕉🕉🕉 हमारे वेदों के अनुसार स्वस्थ रहने के १५ नियम १- खाना खाने के १.३० घंटे बाद पानी पीना है . २- पानी घूँट घूँट करके पीना है जिससे अपनी मुँह की लार पानी के साथ मिलकर पेट में जा सके, पेट में acid बनता है और मुँह में छार, दोनो पेट में बराबर मिल जाए तो कोई रोग पास नहीं आएगा. ३- पानी कभी भी ठंडा (फ़्रीज़ का) नहीं पीना है। ४- सुबह उठते ही बिना क़ुल्ला किए २ ग्लास पानी पीना है ,रात भर जो अपने मुँह में लार है वो अमूल्य है उसको पेट में ही जाना ही चाहिए । ५- खाना, जितने आपके मुँह में दाँत है उतनी बार ही चबाना है । ६ -खाना ज़मीन में पलोथी मुद्रा या उखड़ूँ बैठकर ही भोजन करे । ७ -खाने के मेन्यू में एक दूसरे के विरोधी भोजन एक साथ ना करे जैसे दूध के साथ दही, प्याज़ के साथ दूध, दही के साथ उड़द दlल . ८ -समुद्री नमक की जगह सेंधl नमक या काला नमक खाना चाहिए. ९- रीफ़ाइन तेल, डालडा ज़हर है इसकी जगह अपने इलाक़े के अनुसार सरसों, तिल, मूँगफली, नारियल का तेल उपयोग में लाए । सोयाबीन के कोई भी प्रोडक्ट खाने में ना ले इसके प्रोडक्ट को केवल सुअर पचा सकते है , आदमी में इसके पचाने के एंज़िम नहीं बनते है । १०- दोपहर के भोजन के बाद कम से कम ३० मिनट आराम करना चाहिए और शाम के भोजन बाद ५०० क़दम पैदल चलना चाहिए. ११- घर में चीनी (शुगर ) का उपयोग नहीं होना चाहिए क्योंकि चीनी को सफ़ेद करने में १७ तरह के ज़हर (केमिकल ) मिलाने पड़ते है इसकी जगह गुड़ का उपयोग करना चाहिए और आजकल गुड बनाने में कॉस्टिक सोडा (ज़हर) मिलाकर गुड को सफ़ेद किया जाता है इसलिए सफ़ेद गुड ना खाए । प्राकृतिक गुड ही खाये । और प्राकृतिक गुड चोकलेट कलर का होता है। १२ - सोते समय आपका सिर पूर्व या दक्षिण की तरफ़ होना चाहिए। १३- घर में कोई भी अलूमिनियम के बर्तन, कुकर नहीं होना चाहिए। हमारे बर्तन मिट्टी, पीतल लोहा, काँसा के होने चाहिए . १४ -दोपहर का भोजन ११ बजे तक अवम शाम का भोजन सूर्यास्त तक हो जाना चाहिए . १५- सुबह भोर के समय तक आपको देशी गाय के दूध से बनी छाछ (सेंधl नमक और ज़ीरा बिना भुना हुआ मिलाकर) पीना चाहिए । यदि आपने ये नियम अपने जीवन में लागू कर लिए तो आपको डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और देश के ८ लाख करोड़ की बचत होगी । यदि आप बीमार है तो ये नियमों का पालन करने से आपके शरीर के सभी रोग (BP, शुगर ) अगले ३ माह से लेकर १२ माह में ख़त्म हो जाएँगे। *सर्दियों में उठायें मेथी दानों से भरपूर लाभ* ➡ मेथीदाना उष्ण, वात व कफनाशक, पित्तवर्धक, पाचनशक्ति व बलवर्धक एवं ह्रदय के लिए हितकर है | यह पुष्टिकारक, शक्ति, स्फूर्तिदायक टॉनिक की तरह कार्य करता है | सुबह–शाम इसे पानी के साथ निगलने से पेट को निरोग बनाता है, कब्ज व गैस को दूर करता है | इसकी मूँग के साथ सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं | यह मधुमेह के रोगियों के लिए खूब लाभदायी हैं | ➡ अपनी आयु के जितने वर्ष व्यतीत हो चुके हैं, उतनी संख्या में मेथीदाने रोज धीरे–धीरे चबाना या चूसने से वृद्धावस्था में पैदा होने वाली व्याधियों, जैसे– घुटनों व जोड़ों का दर्द, भूख न लगना, हाथों का सुन्न पड़ जाना, सायटिका, मांसपेशियों का खिंचाव, बार-बार मूत्र आना, चक्कर आना आदि में लाभ होता है | गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भुने मेथी दानों का चूर्ण आटे के साथ मिला के लड्डू बना के खाना लाभकारी है | *शक्तिवर्धक पेय* दो चम्मच मेथीदाने एक गिलास पानी में ४–५ घंटे भिगोकर रखें फिर इतना उबालें कि पानी चौथाई रह जाय, इसे छानकर २ चम्मच शहद मिला के पियें *औषधीय प्रयोग* 1. कब्ज : २० ग्राम मेथीदाने को २०० ग्राम ताजे पानी में भिगो दें. ५-६ घंटे बाद मसल के पीने से मल साफ़ आने लगता है. भूख अच्छी लगने लगती है और पाचन भी ठीक होने लगता है | 2. जोड़ों का दर्द : १०० ग्राम मेथीदाने अधकच्चे भून के दरदरा कूट लें | इसमें २५ ग्राम काला नमक मिलाकर रख लें | २ चम्मच यह मिश्रण सुबह- शाम गुनगुने पानी से फाँकने से जोड़ों, कमर व घुटनों का दर्द, आमवात (गठिया) का दर्द आदि में लाभ होता है | इससे पेट में गैस भी नहीं बनेगी | 3. पेट के रोगों में : १ से ३ ग्राम मेथीदानों का चूर्ण सुबह, दोपहर व शाम को पानी के साथ लेने से अपच, दस्त, भूख न लगना, अफरा, दर्द आदि तकलीफों में बहुत लाभ होता है | 4. दुर्बलता : १ चम्मच मेथीदानों को घी में भून के सुबह–शाम लेने से रोगजन्य शारीरिक एवं तंत्रिका दुर्बलता दूर होती है | 5. मासिक धर्म में रुकावट : ४ चम्मच मेथीदाने १ गिलास पानी में उबालें | आधा पानी रह जाने पर छानकर गर्म–गर्म ही लेने से मासिक धर्म खुल के होने लगता है | 6. अंगों की जकड़न : भुनी मेथी के आटे में गुड़ की चाशनी मिला के लड्डू बना लें | १–१ लड्डू रोज सुबह खाने से वायु के कारण जकड़े हुए अंग १ सप्ताह में ठीक हो जाते हैं तथा हाथ–पैरों में होने वाला दर्द भी दूर होता है | 7. विशेष : सर्दियों में मेथीपाक, मेथी के लड्डू, मेथीदानों व मूँग–दाल की सब्जी आदि के रूप में इसका सेवन खूब लाभदायी हैं | *IMPORTANT* HEART ATTACK & गर्म पानी पीना यह भोजन के बाद गर्म पानी पीने के बारे में ही नहीं Heart Attack के बारे में भी एक अच्छा लेख है। चीनी और जापानी अपने भोजन के बाद गर्म चाय पीते हैं, ठंडा पानी नहीं। अब हमें भी उनकी यह आदत अपना लेनी चाहिए। जो लोग भोजन के बाद ठंडा पानी पीना पसन्द करते हैं यह लेख उनके लिए ही है। भोजन के साथ कोई ठंडा पेय या पानी पीना बहुत हानिकारक है क्योंकि ठंडा पानी आपके भोजन के तैलीय पदार्थों को जो आपने अभी अभी खाये हैं ठोस रूप में बदल देता है। इससे पाचन बहुत धीमा हो जाता है। जब यह अम्ल के साथ क्रिया करता है तो यह टूट जाता है और जल्दी ही यह ठोस भोजन से भी अधिक तेज़ी से आँतों द्वारा सोख लिया जाता है। यह आँतों में एकत्र हो जाता है। फिर जल्दी ही यह चरबी में बदल जाता है और कैंसर के पैदा होने का कारण बनता है। इसलिए सबसे अच्छा यह है कि भोजन के बाद गर्म सूप या गुनगुना पानी पिया जाये। एक गिलास गुनगुना पानी सोने से ठीक पहले पीना चाहिए। इससे खून के थक्के नहीं बनेंगे और आप हृदयाघात से बचे रहेंगे। एक हृदय रोग विशेषज्ञ का कहना है कि यदि इस संदेश को पढ़ने वाला प्रत्येक व्यक्ति इसे १० लोगों को भेज दे, तो वह कम से कम एक जान बचा सकता है। फ्री आयुर्वेदिक उपचार पाने के लिए नीचे दिए ग्रुप को जॉइन करना ना भूलें
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