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"इसलिये राजा महाराजा करते थे सोमरस का सेवन, आप भी सच जानकर हैरान हो जाओगे
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नमस्कार दोस्तो, आशा है आप सब स्वस्थ होंगे। प्राचीन काल मे राजा सोमरस का इस्तेमाल किया करते थे। हमारे शास्त्रों और प्राचीन किताबों में सोमरस का उल्लेख किया गया है। आखिर ये सोमरस क्या होता था और क्यों इसका इस्तेमाल इतने जोर सौर से किया जाता था। क्या ये सोमरस आखिर आजकल की शराब का ही एक नाम था? चलिए आज हम आपको इसके बारे में ही बताते हैं। दोस्तो अगर आपने अभी तक हमे फॉलो नहीं किया है तो अभी कर लीजिए ताकि हम आपको सारी जानकारी समय से पहुंचा सके।
फ़ोटो : गूगल खोज
कुछ लोग सोमरस को शराब बताते हैं। कहते हैं कि राजा महाराजा सोमरस का सेवन नशे के लिये करते थे। इससे पहले की हम आपको कुछ आगे बताये इससे पहले आप ये लाईने जरूर पढ़ें जो हमारे प्राचीन धर्म ग्रंथों में लिखी मिलती हैं, यह निचोड़ा हुआ शुद्ध दही मिलाया हुआ सोमरस, सोमपान की प्रबल इच्छा रखने वाले इंद्रदेव को प्राप्त हो। इसके अलावा ऋग्वेद में लिखा मिलता है कि हे वायुदेव, यह निचोड़ा हुआ सोमरस तीखा होने के कारण गाय के दुध में मिलाकर तैयार किया गया है आइये और इसका पान कीजिये। जब इस सोमरस का सेवन करने के लिए हमारे ग्रंथो में देवताओं का आवाहन किया गया हो तो ये एक शराब अर्थात मदिरा कैसे हो सकता है।
फ़ोटो : गूगल खोज
चलिये इसके लिए आपको कुछ तर्क देकर समझाने की कोशिश करते हैं। पुराने जमाने मे शराब के लिए मदिरा शब्द का इस्तेमाल किया गया है। जबकि सोमरस का अर्थ है शीतल अर्थात वो पेय जो हमारे मन और मष्तिष्क को शांति और शीतलता प्रदान करें। ऐसी मान्यता है कि अफगानिस्तान और हिमालय की पहाड़ियों पर बिना पत्तियों का एक सोम नाम का पौधा मिलता था। इस पौधे से एक रस बनाया जाता था जिसमे गाय का दूध और शहद मिलाकर तैयार किया जाता था। यह एक ऐसा पेय था जिसमे बहुत ज्यादा बल
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