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Showing posts from May, 2019

आखिर एक स्त्री चाहती क्या है? विगत सवा सौ सालों में मनोविज्ञान भी इस प्रश्न का उत्तर नही दे सका—आखिर एक स्त्री चाहती क्या है?—ओशो ने एक छोटी-सी कहानी के माध्यम से हंसाते हुए समझा दिया-- “पुराने समय की बात है। एक विद्वान को फांसी लगनी थी। राजा ने कहाः बताओ कि आखिर औरत चाहती क्या है? जान बख्श देंगे, यदि सही उत्तर मिल जाये। विद्वान ने कहाः हुजूर, मोहलत मिले तो पता कर के बता सकता हूँ। एक साल की मोहलत मिल गई। बहुत घूमा, कहीं से भी संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। आखिर में किसी ने कहा कि दूर एक चुड़ैल रहती है, वही बता सकती है। चुड़ैल ने कहा कि एक शर्त है। यदि तुम मुझसे शादी कर लो तो जवाब बताउंगी। उसने सोच-विचार किया। जान बचाने के लिए शादी की सहमति दे दी। शादी होने के बाद चुड़ैल ने कहाः चूंकि तुमने मेरी बात मान ली है, तो मैंने तुम्हें खुश करने के लिए फैसला किया है कि 12 घंटे मैं चुड़ैल और 12 घन्टे खूबसूरत परी बनके रहूंगी। अब तुम ये बताओ कि दिन में चुड़ैल रहूँ या रात को? विद्वान वाकई में बुद्धिमान था। उसने सोचा यदि वह दिन में चुड़ैल हुई तो दिन नहीं कटेगा, रात में हुई तो रात नहीं कटेगी। अंततः वह बोलाः जब तुम्हारा दिल करे परी बन जाना, जब दिल करे चुड़ैल बन जाना। यह बात सुनकर चुड़ैल ने प्रसन्न होकर कहाः चूंकि तुमने मुझे अपनी मर्ज़ी से जीने की छूट दी है, इसलिये मैं 24 घंटे, हमेशा ही परी बन के रहूंगी। यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है। स्त्री अपनी मर्जी का करना चाहती है। यदि स्त्री को अपनी मर्ज़ी का करने देंगे तो वो परी बनी रहेगी वरना चुड़ैल हो जाएगी। यही बात पुरुष पर लागू होती है। अपनी स्वतंत्रता से जियेगा तो देवता, वरना राक्षस बन जाएगा। अतः मुद्दा स्त्री या पुरुष का नहीं है। संक्षेप में सारे जीवन का सारसूत्र है--मुक्ति में आनंद, दिव्यता, सौंदर्य है, और बंधन में है दुख, संताप, कुरूपता।"

'प्यार को निरंतर, दयालु ध्यान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। किसी दूसरे व्यक्ति- बच्चे, साथी, छात्र, या अजनबी पर ईमानदारी से ध्यान देने से हमें समझ और दया बनाने में मदद मिलती है। ' प्रकृति को करीब से देखने पर भी वही रिश्ता बन सकता है। अमलतास के फूलों के साथ!

'Love can be defined as sustained, compassionate attention. Paying sincere attention to another person- a child, partner, student, or stranger- helps us to build understanding and kindness.' Looking closely at nature can also build the same relationship.Myna with amaltas flowers!

हमारे देश ने अपनी दिशा तय कर ली है अब इन्हें नौकरी, सेना की शहादत, किसानों की आत्महत्या बढ़ती भुखमरी पे नही। बल्कि हमारा देश अब हिंदू को ख़तरे से बाहर निकालने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा है। सच हमारी जनता नही जानना चाहती। इस लिए जो हो रहा है होने दो जल्द ही परिणाम सामने होगा।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे को देश भक्त बताने वाले लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में पहुँच गये और हम सब मूकदर्शक बन कर देखते रहें ये वक़्त देश की जनता के लिये आत्मअवलोकन का है।

निराश ना होना , हताश ना होना , जंग थोड़ी लम्बी है , पर जंग अभी बाक़ी है ।

*मोह खत्म होते ही,, खोने का डर भी निकल जाता है...!* *चाहे दौलत हो, वस्तु हो या प्रेम हो फिर चाहे रिश्ता हो या जिंदगी*.

कितने कम लफ्जों मे जिंदगी को बयान करूँ, लो तुम्हारा नाम लेकर किस्सा तमाम करूँ !!

अपने डॉक्टर खुद बने ============= साभार - डा. आर. पी. सक्सेना, 1 = केवल सेंधा नमक प्रयोग करें, थायराईड, बी पी और पेट ठीक होगा। 2 = केवल स्टील का कुकर ही प्रयोग करें, अल्युमिनियम में मिले हुए लेड से होने वाले नुकसानों से बचेंगे 3 = कोई भी रिफाइंड तेल ना खाकर केवल तिल, मूंगफली, सरसों और नारियल का प्रयोग करें। रिफाइंड में बहुत केमिकल होते हैं जो शरीर में कई तरह की बीमारियाँ पैदा करते हैं । 4 = सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर, मसल कर ज़हरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करें। 5 = रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है, प्रदूषित हवा बाहर करें। 6 = काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं। खाने में भी अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी। 7 = देसी गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं। अनेक रोग दूर होंगे, वजन नहीं बढ़ता। 8 = ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें, सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा। 9 = ज्यादा से ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं। आयरन की कमी किसी को नहीं होगी। 10 = भोजन का समय निश्चित करें, पेट ठीक रहेगा। भोजन के बीच बात न करें, भोजन ज्यादा पोषण देगा। 11 = नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें। पोषक विटामिन और फाइबर मिलेंगें। 12 = सुबह के खाने के साथ देशी गाय के दूध का बना ताजा दही लें, पेट ठीक रहेगा। 13 = चीनी कम से कम प्रयोग करें, ज्यादा उम्र में हड्डियां ठीक रहेंगी। 14 = चीनी की जगह बिना मसले का गुड़ या देशी शक्कर लें। 15 = छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करें, फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते। 16 = चाय के समय, आयुर्वेदिक पेय की आदत बनाएं व निरोग रहेंगे। 17 = एक डस्टबिन रसोई में और एक बाहर रखें, सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें। 18 = रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों का तेल लगाएं, सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगें। 19 = करेले, मैथी और मूली यानि कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध रहेगा। 20 = पानी मटके वाले से ज्यादा ठंडा न पिएं, पाचन व दांत ठीक रहेंगे। 21 = प्लास्टिक और अल्युमिनियम रसोई से हटाएं, दोनों केन्सर कारक हैं। 22 = माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग कैंसर कारक है। 23 = खाने की ठंडी चीजें कम से कम खाएँ, पेट और दांत को खराब करती हैं। 24 = बाहर का खाना बहुत हानिकारक है, खाने से सम्बंधित ग्रुप से जुड़कर सब घर पर ही बनाएं। 25 = तली चीजें छोड़ें, वजन, पेट, एसिडिटी ठीक रहेंगी। 26 = मैदा, बेसन, छौले, राजमां और उड़द कम खाएँ, गैस की समस्या से बचेंगे। 27 = अदरक, अजवायन का प्रयोग बढ़ाएं, गैस और शरीर के दर्द कम होंगे। 28 = बिना कलौंजी वाला अचार हानिकारक होता है। 29 = पानी का फिल्टर R O वाला हानिकारक है। U V वाला ही प्रयोग करें, सस्ता भी और बढ़िया भी। 30 = रसोई में ही बहुत से कॉस्मेटिक्स हैं, इस प्रकार के ग्रुप से जानकारी लें। 31 = रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें, सुबह कपड़े से छान कर इस जल से आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छानने के बाद जो पाउडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें। रात को पी जाएं। पेट साफ होगा, कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा। 32 = सुबह रसोई में चप्पल न पहनें, शुद्धता भी, एक्यू प्रेशर भी। 33 = रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं, एसिडिटी खतम। 34 = एक्यूप्रेशर वाले पिरामिड प्लेटफार्म पर खड़े होकर खाना बनाने की आदत बना लें तो भी सब बीमारियां शरीर से निकल जायेंगी। 35 = चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी। 36 = रसोई के मसालों से बनी चाय मसाला स्वास्थ्यवर्धक है। 37 = सर्दियों में नाखून के बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा। 38 = सर्दी में बाहर जाते समय 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए, सर्दी से नुकसान नहीं होगा। 39 = रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी, नमक, फिटकरी रख कर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा। 40 = कभी - कभी नमक - हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें, दांतों का कोई रोग टिक नहीं सकता। 41 = बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा। 42 = सुबह के खाने के साथ घर का जमाया देशी गाय का ताजा दही जरूर शामिल करें, प्रोबायोटिक का काम करेगा। ****************************** *हृदय की बीमारी के आयुर्वेदिक इलाज* हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे, उनका नाम था महाऋषि वागवट जी !! उन्होने एक पुस्तक लिखी थी, जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!! (Astang Hridayam) इस पुस्तक मे उन्होने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे ! यह उनमे से ही एक सूत्र है !! वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है ! मतलब दिल की नलियों मे Blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त (Blood) मे Acidity (अम्लता) बढ़ी हुई है ! अम्लता आप समझते है, जिसको अँग्रेजी में Acidity भी कहते हैं और यह अम्लता दो तरह की होती है ! एक होती है पेट कि अम्लता ! और एक होती है रक्त (Blood) की अम्लता ! आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है, खट्टी खट्टी डकार आ रही है, मुंह से पानी निकल रहा है और अगर ये अम्लता (Acidity) और बढ़ जाये तो इसे Hyperacidity कहते हैं ! फिर यही पेट की अम्लता बढ़ते - बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता (Blood Acidity) होती है और जब Blood मे Acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियों में से निकल नहीं पाता और नलियों में Blockage कर देता है और तभी Heart Attack होता है ! इसके बिना Heart Attack नहीं होता और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !! *एसीडिटी का इलाज क्या है*?? वागबट जी आगे लिखते है कि जब रक्त (Blood) में अम्लता (Acidity) बढ़ गई है ! तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करें जो क्षारीय है ! आप जानते है दो तरह की चीजे होती है ! अम्लीय (Acidic) और क्षारीय (Alkaline) अब अम्ल और क्षार (Acid and Alkaline) को मिला दें तो क्या होता है ? हम सब जानते हैं Neutral होता है !! तो वागबट जी लिखते हैं कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय (Alkaline) चीजे खाओ ! तो रक्त की अम्लता (Acidity) Neutral हो जाएगी, और जब रक्त मे अम्लता Neutral हो गई तो Heart Attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं होगी । ये है सारी कहानी !! अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये ?? आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है ! जिन्हें अगर आप खायें तो कभी Heart Attack न आयेगा और अगर आ गया तो दुबारा नहीं आएगा ! आपके घर में जो सबसे ज्यादा क्षारीय चीज है वह है लौकी, जिसे हम दुधी भी कहते है और English मे इसे Bottle Gourd भी कहते हैं जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है ! इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है इसलिये आप हर रोज़ लौकी का रस निकाल कर पियें या अगर खा सकते है तो कच्ची लौकी खायें । वागवतट जी के अनुसार रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है, इसलिए आप लौकी के रस का सेवन करें ! *कितना मात्रा में सेवन करें* रोज 200 से 300 ग्राम लौकी का रस ग्राम पियें ! कब पिये ? सुबह खाली पेट (Toilet) शौच जाने के बाद पी सकते है. या फिर नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं! इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय भी बना सकते हैं ! जिसके लिए इसमें 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लें क्योंकि तुलसी बहुत क्षारीय है ! इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते भी मिला सकते है, क्योंकि पुदीना भी बहुत क्षारीय होता है। इसके साथ आप इसमें काला नमक या सेंधा नमक भी जरूर डाले ! ये भी बहुत क्षारीय है। याद रखे नमक काला या सेंधा ही डालें, दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डालें ! ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है। तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे 2 से 3 महीने आपकी सारी Heart की Blockage ठीक कर देगा। 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा और फिर आपको कोई आपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी ! घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे और जो पैसे बच जायें उसे अगर इच्छा हो किसी गौशाला मे दान कर दें क्योंकि डाक्टर को देने से अच्छा है किसी गौशाला दान दे ! हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !! ************************************ *हल्दी का पानी* पानी में हल्दी मिलाकर पीने से यह 7 फायदें होते है .... 1. गुनगुना हल्दी वाला पानी पीने से दिमाग तेज होता है। सुबह के समय हल्दी का गुनगुना पानी पीने से दिमाग तेज और उर्जावान बनता है। 2. आप यदि रोज़ हल्दी का पानी पीते हैं तो इससे खून में होने वाली गंदगी साफ होती है और खून जमता भी नहीं है, यह खून साफ करता है और दिल को बीमारियों से भी बचाता है। 3. लीवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नही है क्योंकि हल्दी का पानी टाॅक्सिस लीवर के सेल्स को फिर से ठीक करता है। इसके अलावा हल्दी और पानी के मिले हुए गुण लीवर को संक्रमण से भी बचाते हैं। 4. हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को हल्दी वाला पानी पीना चाहिए क्योंकि हल्दी खून को गाढ़ा होने से बचाती है जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है. 5. जब हल्दी के पानी में शहद और नींबू मिलाया जाता है तब यह शरीर के अंदर जमे हुए विषैले पदार्थों को निकाल देता है, जिसे पीने से शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नहीं पड़ता है। हल्दी में फ्री रेडिकल्स होते हैं जो सेहत और सौंदर्य को बढ़ाते हैं. 6. शरीर में किसी भी तरह की सूजन हो और वह किसी दवाई से ना ठीक हो रही हो तो आप हल्दी वाला पानी का सेवन करें। हल्दी में करक्यूमिन तत्व होता है जो सूजन और जोड़ों में होने वाले असहय दर्द को ठीक कर देता है। सूजन की अचूक दवा है हल्दी का पानी। 7. कैंसर खत्म करती है हल्दी। हल्दी कैंसर से लड़ती है और उसे बढ़ने से भी रोक देती है क्योंकि हल्दी एंटी - कैंसर युक्त होती है और यदि आप सप्ताह में तीन दिन हल्दी वाला पानी पीएगें तो आपको भविष्य में कैंसर से हमेशा बचे रहेगें। हमारे वेदों के अनुसार स्वस्थ रहने के १५ नियम हैं..... १ - खाना खाने के १.३० घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए। २ - पानी घूँट घूँट करके पीना है जिससे अपनी मुँह की लार पानी के साथ मिलकर पेट में जा सके, पेट में Acid बनता है और मुँह में छार, दोनो पेट में बराबर मिल जाए तो कोई रोग पास नहीं आएगा। ३ - पानी कभी भी ठंडा (फ़्रिज़ का) नहीं पीना है। ४ - सुबह उठते ही बिना क़ुल्ला किए २ ग्लास पानी पीना चाहिए, रात भर जो अपने मुँह में लार है वो अमूल्य है उसको पेट में ही जाना ही चाहिए । ५ - खाना, जितने आपके मुँह में दाँत है उतनी बार ही चबाना है । ६ - खाना ज़मीन में पलोथी मुद्रा में बैठकर या उखड़ूँ बैठकर ही खाना चाहिए। ७ - खाने के मेन्यू में एक दूसरे के विरोधी भोजन एक साथ ना करे जैसे दूध के साथ दही, प्याज़ के साथ दूध, दही के साथ उड़द की दlल । ८ - समुद्री नमक की जगह सेंधl नमक या काला नमक खाना चाहिए। ९ - रीफ़ाइन तेल, डालडा ज़हर है, इसकी जगह अपने इलाक़े के अनुसार सरसों, तिल, मूँगफली या नारियल का तेल उपयोग में लाए । सोयाबीन के कोई भी प्रोडक्ट खाने में ना ले इसके प्रोडक्ट को केवल सुअर पचा सकते है। आदमी में इसके पचाने के एंज़िम नहीं बनते हैं । १० - दोपहर के भोजन के बाद कम से कम ३० मिनट आराम करना चाहिए और शाम के भोजन बाद ५०० क़दम पैदल चलना चाहिए। ११ - घर में चीनी (शुगर) का उपयोग नहीं होना चाहिए क्योंकि चीनी को सफ़ेद करने में १७ तरह के ज़हर (केमिकल ) मिलाने पड़ते है इसकी जगह गुड़ का उपयोग करना चाहिए और आज कल गुड़ बनाने में कॉस्टिक सोडा (ज़हर) मिलाकर गुड को सफ़ेद किया जाता है इसलिए सफ़ेद गुड़ ना खाए। प्राकृतिक गुड़ ही खाये। प्राकृतिक गुड़ चाकलेट कलर का होता है। १२ - सोते समय आपका सिर पूर्व या दक्षिण की तरफ़ होना चाहिए। १३ - घर में कोई भी अलूमिनियम के बर्तन या कुकर नहीं होना चाहिए। हमारे बर्तन मिट्टी, पीतल लोहा और काँसा के होने चाहिए। १४ - दोपहर का भोजन ११ बजे तक अवश्य और शाम का भोजन सूर्यास्त तक हो जाना चाहिए । १५ - सुबह भोर के समय तक आपको देशी गाय के दूध से बनी छाछ (सेंधl नमक और ज़ीरा बिना भुना हुआ मिलाकर) पीना चाहिए । यदि आपने ये नियम अपने जीवन में लागू कर लिए तो आपको डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और देश के ८ लाख करोड़ की बचत होगी । यदि आप बीमार है तो ये नियमों का पालन करने से आपके शरीर के सभी रोग (BP, शुगर ) अगले ३ माह से लेकर १२ माह में ख़त्म हो जाएँगे। ******************************************* *सर्दियों में उठायें मेथी दानों से भरपूर लाभ* मेथीदाना उष्ण, वात व कफनाशक, पित्तवर्धक, पाचनशक्ति व बलवर्धक एवं ह्रदय के लिए हितकर है | यह पुष्टिकारक, शक्ति, स्फूर्तिदायक टॉनिक की तरह कार्य करता है | सुबह–शाम इसे पानी के साथ निगलने से पेट को निरोग बनाता है, कब्ज व गैस को दूर करता है | इसकी मूँग के साथ सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं | यह मधुमेह के रोगियों के लिए खूब लाभदायी हैं | अपनी आयु के जितने वर्ष व्यतीत हो चुके हैं, उतनी संख्या में मेथीदाने रोज धीरे – धीरे चबाना या चूसने से वृद्धावस्था में पैदा होने वाली व्याधियों, जैसे घुटनों व जोड़ों का दर्द, भूख न लगना, हाथों का सुन्न पड़ जाना, सायटिका, मांसपेशियों का खिंचाव, बार - बार मूत्र आना, चक्कर आना आदि में लाभ होता है | गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भुने मेथी दानों का चूर्ण आटे के साथ मिला के लड्डू बना के खाना लाभकारी है | *मेथी दाने से शक्तिवर्धक पेय* दो चम्मच मेथीदाने एक गिलास पानी में ४ – ५ घंटे भिगोकर रखें फिर इतना उबालें कि पानी चौथाई रह जाय, इसे छानकर २ चम्मच शहद मिला के पियें । *औषधीय प्रयोग* 1. कब्ज : २० ग्राम मेथीदाने को २०० ग्राम ताजे पानी में भिगो दें. ५-६ घंटे बाद मसल के पीने से मल साफ़ आने लगता है. भूख अच्छी लगने लगती है और पाचन भी ठीक होने लगता है | 2. जोड़ों का दर्द : १०० ग्राम मेथीदाने अधकच्चे भून के दरदरा कूट लें | इसमें २५ ग्राम काला नमक मिलाकर रख लें | २ चम्मच यह मिश्रण सुबह- शाम गुनगुने पानी से फाँकने से जोड़ों, कमर व घुटनों का दर्द, आमवात (गठिया) का दर्द आदि में लाभ होता है | इससे पेट में गैस भी नहीं बनेगी | 3. पेट के रोगों में : १ से ३ ग्राम मेथी दानों का चूर्ण सुबह, दोपहर व शाम को पानी के साथ लेने से अपच, दस्त, भूख न लगना, अफरा, दर्द आदि तकलीफों में बहुत लाभ होता है | 4. दुर्बलता : १ चम्मच मेथीदानों को घी में भून के सुबह - शाम लेने से रोगजन्य शारीरिक एवं तंत्रिका दुर्बलता दूर होती है | 5. मासिक धर्म में रुकावट : ४ चम्मच मेथीदाने १ गिलास पानी में उबालें | आधा पानी रह जाने पर छानकर गर्म–गर्म ही लेने से मासिक धर्म खुल के होने लगता है | 6. अंगों की जकड़न : भुनी मेथी के आटे में गुड़ की चाशनी मिला के लड्डू बना लें | १–१ लड्डू रोज सुबह खाने से वायु के कारण जकड़े हुए अंग १ सप्ताह में ठीक हो जाते हैं तथा हाथ–पैरों में होने वाला दर्द भी दूर होता है | 7. विशेष : सर्दियों में मेथीपाक, मेथी के लड्डू, मेथीदानों व मूँग–दाल की सब्जी आदि के रूप में इसका सेवन खूब लाभदायी हैं | *IMPORTANT* HEART ATTACK और गर्म पानी पीना! यह भोजन के बाद गर्म पानी पीने के बारे में ही नहीं Heart Attack के बारे में भी एक अच्छा लेख है। चीनी और जापानी अपने भोजन के बाद गर्म चाय पीते हैं, ठंडा पानी नहीं। अब हमें भी उनकी यह आदत अपना लेनी चाहिए। जो लोग भोजन के बाद ठंडा पानी पीना पसन्द करते हैं यह लेख उनके लिए ही है। भोजन के साथ कोई ठंडा पेय या पानी पीना बहुत हानिकारक है क्योंकि ठंडा पानी आपके भोजन के तैलीय पदार्थों को जो आपने अभी अभी खाये हैं ठोस रूप में बदल देता है। इससे पाचन बहुत धीमा हो जाता है। जब यह अम्ल के साथ क्रिया करता है तो यह टूट जाता है और जल्दी ही यह ठोस भोजन से भी अधिक तेज़ी से आँतों द्वारा सोख लिया जाता है। यह आँतों में एकत्र हो जाता है। फिर जल्दी ही यह चरबी में बदल जाता है और कैंसर के पैदा होने का कारण बनता है। इसलिए सबसे अच्छा यह है कि भोजन के बाद गर्म सूप या गुनगुना पानी पिया जाये। एक गिलास गुनगुना पानी सोने से ठीक पहले पीना चाहिए। इससे खून के थक्के नहीं बनेंगे और आप हृदयाघात से बचे रहेंगे। एक हृदय रोग विशेषज्ञ का कहना है कि यदि इस संदेश को पढ़ने वाला प्रत्येक व्यक्ति इसे १० लोगों को भेज दे, तो वह कम से कम एक जान बचा सकता है।

एक विद्वान व्यक्ति को एक बार धर्म और आध्यात्मिकता के बीच के अंतर को समझाने के लिए कहा गया था। उनकी प्रतिक्रिया गहरा थी: Not धर्म सिर्फ एक नहीं है, कई हैं। Is अध्यात्म एक है। ▪ धर्म उन लोगों के लिए है जो सोते हैं। ▪ अध्यात्म उन लोगों के लिए है जो जागृत हैं। For धर्म उन लोगों के लिए है जिन्हें किसी को यह बताने की जरूरत है कि क्या करना है और क्या निर्देशित करना चाहते हैं। Is अध्यात्म उन लोगों के लिए है जो अपनी आंतरिक आवाज पर ध्यान देते हैं। ▪ धर्म में हठधर्मिता का एक नियम है। ▪ अध्यात्म हमें आमंत्रित करता है कि हम भीतर का पता लगाएं और सार्वभौमिक नियमों के अनुरूप बनें। ▪ धर्म खतरे और भयभीत करता है। Gives आध्यात्मिकता आंतरिक शांति देती है। Eaks धर्म पाप और अपराध की बात करता है। ▪ आध्यात्मिकता हमें मुक्ति के मार्ग पर ले जाती है! ▪ धर्म हर उस चीज को दबा देता है, जिसे वह गलत मानता है। ▪ आध्यात्मिकता हर चीज को पार कर जाती है, यह हमें हमारे सत्य के करीब लाती है! ▪ धर्म आक्रमण करता है। ▪स्पिरिटैलिटी हमें खोजने में मदद करती है। ▪ धर्म किसी भी सवाल को बर्दाश्त नहीं करता है। ▪स्पिरिचुअलिटी प्रश्नों की खोज को प्रोत्साहित करती है। Human धर्म मानव है। यह पुरुषों द्वारा बनाए गए नियमों वाला संगठन है। Rules अध्यात्म ईश्वरीय है, मानवीय नियमों के बिना .... हमें कारणहीन बनाता है! ▪ धर्म हमारे और उनके बीच विभाजित है। ▪स्पिरिटैलिटी एकजुट करती है। The धर्म एक पवित्र पुस्तक की अवधारणाओं का अनुसरण करता है। ▪ आध्यात्मिकता सभी पुस्तकों में पवित्रता की तलाश करती है। ▪ धर्म भय पर भोजन करता है। And आध्यात्मिकता विश्वास और विश्वास पर खिलाती है। ▪ धर्म हमें बाहरी वास्तविकता में जीने के लिए बनाता है। ▪ अध्यात्म आंतरिक चेतना में रहता है। ▪ धर्म अनुष्ठान करने से संबंधित है। ▪ अध्यात्म का आन्तरिक स्व से संबंध है। E धर्म आंतरिक अहंकार को खिलाता है। ▪ अध्यात्म स्वयं से परे पार करने के लिए ड्राइव करता है। ▪ धर्म हमें एक भगवान का पालन करने के लिए दुनिया को त्याग देता है। ▪ आध्यात्मिकता हमें अपने मौजूदा जीवन का त्याग किए बिना, ईश्वर में रहती है। A धर्म एक पंथ है। Is आध्यात्मिकता आंतरिक ध्यान है। Ills धर्म हमें स्वर्ग में महिमा के सपनों से भरता है। Makes आध्यात्मिकता हमें पृथ्वी पर महिमा और स्वर्ग को जीने के लिए प्रेरित करती है। In धर्म अतीत और भविष्य में रहता है। Lives अध्यात्म वर्तमान में रहता है। ▪ धर्म हमारी स्मृति में क्लोइस्ट बनाता है। ▪ आध्यात्मिकता हमारी चेतना को मुक्त करती है। 🌹 हम मनुष्य नहीं हैं, जो आध्यात्मिक अनुभव से गुजरते हैं। हम आध्यात्मिक प्राणी हैं, जो एक मानवीय अनुभव से गुजरते हैं। 🙏🌹🙏

A learned man was once asked to explain the difference between Religion and Spirituality. His response was profound: ▪ Religion is not just one, there are many. ▪ Spirituality is one. ▪ Religion is for those who sleep. ▪ Spirituality is for those who are awake. ▪ Religion is for those who need someone to tell them what to do and want to be guided. ▪ Spirituality is for those who pay attention to their inner voice. ▪ Religion has a set of dogmatic rules. ▪ Spirituality invites us to explore within and get attuned to the Universal Rules. ▪ Religion threatens and frightens. ▪ Spirituality gives inner peace. ▪ Religion speaks of sin and guilt. ▪ Spirituality leads us on the path of emancipation!   ▪ Religion represses everything which it considers false. ▪ Spirituality transcends everything, it brings us closer to our Truth! ▪ Religion invents. ▪Spirituality helps us to discover. ▪ Religion does not tolerate any question. ▪Spirituality encourages searching questions. ▪ Religion is human. It is an organization with rules made by men. ▪ Spirituality is Divine, without human rules....leads us to the Causeless Cause! ▪ Religion divides between us and them. ▪Spirituality unites. ▪ Religion follows the concepts of a sacred book. ▪ Spirituality seeks the sacred in all books. ▪ Religion feeds on fear. ▪ Spirituality feeds on trust and faith. ▪ Religion makes us to live in External Reality. ▪ Spirituality lives in Inner Consciousness. ▪ Religion deals with performing rituals. ▪ Spirituality has to do with the Inner Self. ▪ Religion feeds on internal ego. ▪ Spirituality drives to transcend beyond self. ▪ Religion makes us renounce the world to follow a God. ▪ Spirituality makes us live in God, without renouncing our existing lives. ▪ Religion is a cult. ▪ Spirituality is inner meditation. ▪ Religion fills us with dreams of glory in paradise. ▪ Spirituality makes us live the glory and paradise on earth. ▪ Religion lives in the past and in the future. ▪ Spirituality lives in the present. ▪ Religion creates cloisters in our memory. ▪ Spirituality liberates our Consciousness. 🌹 We are not human beings, who go through a spiritual experience. We are spiritual beings, who go through a human experience. 🙏🌹🙏

तू शामिल है... हर ज़र्रे में, हर रूह में हर रंग में, हर रूप में, हर आह में, हर आस में हर जिक्र में, हर प्यास में, हर सुबह में, हर शाम में हर धड़कन में, हर सांस में, मै शामिल हूँ..... तेरी कायनात में, तेरी कुदरत में तेरी मर्ज़ी में, तेरी फिक्र में, तेरी आरजू मे, तेरी निगाहों में तेरी चाहत में, तेरी पनाहों में, तेरी उल्फत में, तेरी मुहब्बत में तेरी कहानी में, तेरी जिंदगानी में, अब बता तू कहाँ नहीं है.. मै कहाँ नहीं हूँ.. बस अब ना तू खुद में बाकी है ना मैं खुद में.....जय श्री मदन जी

#आज_की_कहानी : एक पुरानी सी इमारत में वैद्यजी का मकान था। पिछले हिस्से में रहते थे और अगले हिस्से में दवाख़ाना खोल रखा था। उनकी पत्नी की आदत थी कि दवाख़ाना खोलने से पहले उस दिन के लिए आवश्यक सामान एक चिठ्ठी में लिख कर दे देती थी। वैद्यजी गद्दी पर बैठकर पहले भगवान का नाम लेते फिर वह चिठ्ठी खोलते। पत्नी ने जो बातें लिखी होतीं, उनके भाव देखते , फिर उनका हिसाब करते। फिर परमात्मा से प्रार्थना करते कि हे भगवान ! मैं केवल तेरे ही आदेश के अनुसार तेरी भक्ति छोड़कर यहाँ दुनियादारी के चक्कर में आ बैठा हूँ। वैद्यजी कभी अपने मुँह से किसी रोगी से फ़ीस नहीं माँगते थे। कोई देता था, कोई नहीं देता था किन्तु एक बात निश्चित थी कि ज्यों ही उस दिन के आवश्यक सामान ख़रीदने योग्य पैसे पूरे हो जाते थे, उसके बाद वह किसी से भी दवा के पैसे नहीं लेते थे चाहे रोगी कितना ही धनवान क्यों न हो। एक दिन वैद्यजी ने दवाख़ाना खोला। गद्दी पर बैठकर परमात्मा का स्मरण करके पैसे का हिसाब लगाने के लिए आवश्यक सामान वाली चिट्ठी खोली तो वह चिठ्ठी को एकटक देखते ही रह गए। एक बार तो उनका मन भटक गया। उन्हें अपनी आँखों के सामने तारे चमकते हुए नज़र आए किन्तु शीघ्र ही उन्होंने अपनी तंत्रिकाओं पर नियंत्रण पा लिया। आटे-दाल-चावल आदि के बाद पत्नी ने लिखा था, *"बेटी का विवाह 20 तारीख़ को है, उसके दहेज का सामान।"* कुछ देर सोचते रहे फिर बाकी चीजों की क़ीमत लिखने के बाद दहेज के सामने लिखा, '' *यह काम परमात्मा का है, परमात्मा जाने।*'' एक-दो रोगी आए थे। उन्हें वैद्यजी दवाई दे रहे थे। इसी दौरान एक बड़ी सी कार उनके दवाखाने के सामने आकर रुकी। वैद्यजी ने कोई खास तवज्जो नहीं दी क्योंकि कई कारों वाले उनके पास आते रहते थे। दोनों मरीज दवाई लेकर चले गए। वह सूटेड-बूटेड साहब कार से बाहर निकले और नमस्ते करके बेंच पर बैठ गए। वैद्यजी ने कहा कि अगर आपको अपने लिए दवा लेनी है तो इधर स्टूल पर आएँ ताकि आपकी नाड़ी देख लूँ और अगर किसी रोगी की दवाई लेकर जाना है तो बीमारी की स्थिति का वर्णन करें। वह साहब कहने लगे "वैद्यजी! आपने मुझे पहचाना नहीं। मेरा नाम कृष्णलाल है लेकिन आप मुझे पहचान भी कैसे सकते हैं? क्योंकि मैं 15-16 साल बाद आपके दवाखाने पर आया हूँ। आप को पिछली मुलाकात का हाल सुनाता हूँ, फिर आपको सारी बात याद आ जाएगी। जब मैं पहली बार यहाँ आया था तो मैं खुद नहीं आया था अपितु ईश्वर मुझे आप के पास ले आया था क्योंकि ईश्वर ने मुझ पर कृपा की थी और वह मेरा घर आबाद करना चाहता था। हुआ इस तरह था कि मैं कार से अपने पैतृक घर जा रहा था। बिल्कुल आपके दवाखाने के सामने हमारी कार पंक्चर हो गई। ड्राईवर कार का पहिया उतार कर पंक्चर लगवाने चला गया। आपने देखा कि गर्मी में मैं कार के पास खड़ा था तो आप मेरे पास आए और दवाखाने की ओर इशारा किया और कहा कि इधर आकर कुर्सी पर बैठ जाएँ। अंधा क्या चाहे दो आँखें और कुर्सी पर आकर बैठ गया। ड्राइवर ने कुछ ज्यादा ही देर लगा दी थी। एक छोटी-सी बच्ची भी यहाँ आपकी मेज़ के पास खड़ी थी और बार-बार कह रही थी, '' चलो न बाबा, मुझे भूख लगी है। आप उससे कह रहे थे कि बेटी थोड़ा धीरज धरो, चलते हैं। मैं यह सोच कर कि इतनी देर से आप के पास बैठा था और मेरे ही कारण आप खाना खाने भी नहीं जा रहे थे। मुझे कोई दवाई खरीद लेनी चाहिए ताकि आप मेरे बैठने का भार महसूस न करें। मैंने कहा वैद्यजी मैं पिछले 5-6 साल से इंग्लैंड में रहकर कारोबार कर रहा हूँ। इंग्लैंड जाने से पहले मेरी शादी हो गई थी लेकिन अब तक बच्चे के सुख से वंचित हूँ। यहाँ भी इलाज कराया और वहाँ इंग्लैंड में भी लेकिन किस्मत ने निराशा के सिवा और कुछ नहीं दिया।" आपने कहा था, "मेरे भाई! भगवान से निराश न होओ। याद रखो कि उसके कोष में किसी चीज़ की कोई कमी नहीं है। आस-औलाद, धन-इज्जत, सुख-दुःख, जीवन-मृत्यु सब कुछ उसी के हाथ में है। यह किसी वैद्य या डॉक्टर के हाथ में नहीं होता और न ही किसी दवा में होता है। जो कुछ होना होता है वह सब भगवान के आदेश से होता है। औलाद देनी है तो उसी ने देनी है। मुझे याद है आप बातें करते जा रहे थे और साथ-साथ पुड़िया भी बनाते जा रहे थे। सभी दवा आपने दो भागों में विभाजित कर दो अलग-अलग लिफ़ाफ़ों में डाली थीं और फिर मुझसे पूछकर आप ने एक लिफ़ाफ़े पर मेरा और दूसरे पर मेरी पत्नी का नाम लिखकर दवा उपयोग करने का तरीका बताया था। मैंने तब बेदिली से वह दवाई ले ली थी क्योंकि मैं सिर्फ कुछ पैसे आप को देना चाहता था। लेकिन जब दवा लेने के बाद मैंने पैसे पूछे तो आपने कहा था, बस ठीक है। मैंने जोर डाला, तो आपने कहा कि आज का खाता बंद हो गया है। मैंने कहा मुझे आपकी बात समझ नहीं आई। इसी दौरान वहां एक और आदमी आया उसने हमारी चर्चा सुनकर मुझे बताया कि खाता बंद होने का मतलब यह है कि आज के घरेलू खर्च के लिए जितनी राशि वैद्यजी ने भगवान से माँगी थी वह ईश्वर ने उन्हें दे दी है। अधिक पैसे वे नहीं ले सकते। मैं कुछ हैरान हुआ और कुछ दिल में लज्जित भी कि मेरे विचार कितने निम्न थे और यह सरलचित्त वैद्य कितना महान है। मैंने जब घर जा कर पत्नी को औषधि दिखाई और सारी बात बताई तो उसके मुँह से निकला वो इंसान नहीं कोई देवता है और उसकी दी हुई दवा ही हमारे मन की मुराद पूरी करने का कारण बनेंगी। आज मेरे घर में दो फूल खिले हुए हैं। हम दोनों पति-पत्नी हर समय आपके लिए प्रार्थना करते रहते हैं। इतने साल तक कारोबार ने फ़ुरसत ही न दी कि स्वयं आकर आपसे धन्यवाद के दो शब्द ही कह जाता। इतने बरसों बाद आज भारत आया हूँ और कार केवल यहीं रोकी है। वैद्यजी हमारा सारा परिवार इंग्लैंड में सेटल हो चुका है। केवल मेरी एक विधवा बहन अपनी बेटी के साथ भारत में रहती है। हमारी भान्जी की शादी इस महीने की 21 तारीख को होनी है। न जाने क्यों जब-जब मैं अपनी भान्जी के भात के लिए कोई सामान खरीदता था तो मेरी आँखों के सामने आपकी वह छोटी-सी बेटी भी आ जाती थी और हर सामान मैं दोहरा खरीद लेता था। मैं आपके विचारों को जानता था कि संभवतः आप वह सामान न लें किन्तु मुझे लगता था कि मेरी अपनी सगी भान्जी के साथ जो चेहरा मुझे बार-बार दिख रहा है वह भी मेरी भान्जी ही है। मुझे लगता था कि ईश्वर ने इस भान्जी के विवाह में भी मुझे भात भरने की ज़िम्मेदारी दी है। वैद्यजी की आँखें आश्चर्य से खुली की खुली रह गईं और बहुत धीमी आवाज़ में बोले, '' कृष्णलाल जी, आप जो कुछ कह रहे हैं मुझे समझ नहीं आ रहा कि ईश्वर की यह क्या माया है। आप मेरी श्रीमती के हाथ की लिखी हुई यह चिठ्ठी देखिये।" और वैद्यजी ने चिट्ठी खोलकर कृष्णलाल जी को पकड़ा दी। वहाँ उपस्थित सभी यह देखकर हैरान रह गए कि ''दहेज का सामान'' के सामने लिखा हुआ था '' यह काम परमात्मा का है, परमात्मा जाने।'' काँपती-सी आवाज़ में वैद्यजी बोले, "कृष्णलाल जी, विश्वास कीजिये कि आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि पत्नी ने चिठ्ठी पर आवश्यकता लिखी हो और भगवान ने उसी दिन उसकी व्यवस्था न कर दी हो। आपकी बातें सुनकर तो लगता है कि भगवान को पता होता है कि किस दिन मेरी श्रीमती क्या लिखने वाली हैं अन्यथा आपसे इतने दिन पहले ही सामान ख़रीदना आरम्भ न करवा दिया होता परमात्मा ने। वाह भगवान वाह! तू महान है तू दयावान है। मैं हैरान हूँ कि वह कैसे अपने रंग दिखाता है।" वैद्यजी ने आगे कहा,सँभाला है, एक ही पाठ पढ़ा है कि सुबह परमात्मा का आभार करो, शाम को अच्छा दिन गुज़रने का आभार करो, खाते समय उसका आभार करो, सोते समय उसका आभार करो। अगर यह पोस्ट आप लोगों को अच्छा लगा हो तो ज्यादा से ज्यादा शेयर कर अपने प्रिय जनों तक पहुंचाने का कष्ट करे।

*((नानक दुखिया सब संसार))* *एक दिन एक छोटी सी लड़की अपने पिता को दुख व्यक्त करते-करते अपने जीवन को कोसते हुए यह बता रही थी कि उसका जीवन बहुत ही मुश्किल दौर से गुज़र रहा है।साथ ही उसके जीवन में एक दुख जाता है तो दूसरा चला आता है और वह इन मुश्किलों से लड़ लड़ कर अब थक चुकी है।वह करे तो क्या करे।उसके पिता प्रोफेशन से एक खानसामे (Chef) थे।अपनी बेटी के इन शब्दों को सुनने के बाद वह अपनी बेटी को रसोईघर ले गये और 3 अलग अलग कढाई में पानी डाल कर तेज आग पर रख दिया।जैसे ही पानी गरम हो कर उबलने लगा,पिता नें एक कढाई में एक आलू डाला,दुसरे में एक अंडा और तीसरी कड़ाई में कुछ कॉफ़ी बीन्स डाल दिए।वह लड़की बिना कोई प्रश्न किये अपने पिता के इस काम को ध्यान से देख रही थी।कुछ 15-20 मिनट के बाद उन्होंने आग बंद कर दिया और एक कटोरे में आलू को रखा,दुसरे में अंडे को और कॉफ़ी बीन्स वाले पानी को कप में।पिता ने बेटी की तरफ उन तीनों कटोरों को एक साथ दिखाते हुए बेटी से कहा कि पास से देखो इन तीनों चीजों को–बेटी ने आलू को देखा जो उबलने के कारण मुलायम हो गया था।उसके बाद अंडा को देखा जो उबलने के बाद अन्दर से थोड़ा कठोर हो गया था और आखरी में जब कॉफ़ी बीन्स को देखा तो उस पानी से बहुत ही अच्छी खुशबु आ रही थी।पिता ने बेटी से पुछा ?क्या तुमको पता चला इसका मतलब क्या है ?तब उसके पिता ने समझाते हुए कहा इन तीनों चीजों ने जो मुश्किल झेली वह एक समान थी लेकिन तीनों के रिएक्शन अलग अलग हैं।हमारी ज़िन्दगी भी ऐसी ही है कष्ट और मुसीबतें हम सबको आती हैं लेकिन इन दुखों और कष्टों को सहने का रिएक्शन हम सबका अलग अलग होता है।कोई दुःख और तकलीफ देखकर इतना हताश और मायूस होकर इस उबले आलू की तरह नरम हो जाता है और अपने दुःखों और मुसीबतों का ढिंढोरा पीटना शुरू कर देता है।दूसरे वो होते हैं जो दुःख और मुसीबतों को भले ही किसी को नहीं बतायें लेकिन अंदर से इतने टूट जाते है जैसे उबले अंडे का हाल होता है।और तीसरे वो होते हैं जो दुखों और मुसीबतों से ना तो बाहर से घबराते हैं और ना ही अंदर से टूट कर उदास होते हैं। बल्कि ऐसे लोग दुखों और मुसीबतों को मालिक की मौज समझ कर बड़ी ख़ुशी से स्वीकार करते हैं।और ऐसे लोग मालिक से अपने दुःख की शिकायत नहीं करते बल्कि इन्हें सहने की शक्ति मांगते है।और ऐसे लोग ही दुःख और मुसीबतों में मुस्कुरा कर दूसरों के लिए सबक और मिसाल बन कर कॉफी बीन्स की तरह खुशबू फैलाते रहते हैं।इस कहानी से सीख लेते हुए हमें भी दुख और मुसीबत में ईश्वर को कोसना नहीं चाहिए बल्कि उस की रज़ा में राज़ी रह कर दुख की घड़ी में भी मुस्करा कर उस का सामना करना चाहिए और हर पल ईश्वर का शुकराना करना चाहिए !!*

राडार बादलों के पार नहीं देख पाते, जिस इंटरव्यू में यह कहा उसी में फरमाया कि 1988 में अडवानीजी की फोटो डिजिटल कैमरे से खींच कर ईमेल से दिल्ली भेजी। भारत में ईमेल की शुरुआत 1995 में हुई थी।यदि मैं गलत नहीं हूँ, तो इसके कुछ ही साल पहले डि़जि़टल कैमरा बाजार में आय़ा था, दाम था दस हजार डॉलर से ज्यादा। एक अन्य इंटरव्यू में कहे गये सत्य के अनुसार मान्यवर उन दिनों भिक्षाटन से जीवन यापन करते थे। दस-बारह हजार डॉलर की राशि ऐसे व्यक्ति के लिए कुछ ज्यादा नहीं क्या, और फिर 1988 में डिजिटल कैमरा उपलब्ध भी था ? मोदीजी की नीतियों की आलोचना-प्रशंसा अपनी जगह, लेकिन जिसे उनका फेंकूपन कहा जाता है, वह क्या बहुत चिंताजनक नहीं हो चला है? उनके राडार ज्ञान पर वायुसेना के अफसरों के मन में क्या आया होगा? डिजि़टल कैमरा और ईमेल संबंधी उनके ज्ञान पर आपके मन में क्या आ रहा है? मोदीजी चूंकि प्रधानमंत्री हैं, और उनके प्रशंसक निश्चय ही चाहेंगे कि चुनाव के बाद भी रहें, ऐसे में उनका स्वास्थ्य राष्ट्रीय चिंता और चिंतन का विषय होना चाहिए। मन में जब जो आए, बिना विचारे बोल देना...यह स्वभाव किस तरह की मनोदशा की सूचना देता है?

प्रम जी अब एकदम कुछ ज्यादा बहुत ज्यादा ही होता जा रहा है । आपके लिये ईवीएम १९८४ में आई और हमने कोईसवाल नहीं उठाये हमने सुन लिया इगनोर मार दिया। सोचा निकल गया होगा मुँह से , चुनाव के तनाव हैं । बीच में बहुत सी अन्य बातें भी फैंकते रहे , चलो कोई बात नहीं। फिर आपने कहा कि मैंने सेना को फ़्रीहैंड दिया पाकिस्तान से डील करने को लेकिन हर इंटरव्यू में आप बतातें हैं कि पूरी पूरी रात आप सब कार्यवाहियों का निर्देशन करते रहे । जनरल ,एयरमांर्शल , एडमिरल आदि सब किसी काम के नहीं वे तो बस वैसा ही फालो करते हैं जो आप बोलते रहते हैं । ऊरी फिल्म में सब कुछ डोभाल व आप ही करते दिखाये जाते हैं , हमने चुपचाप देख ली। फिर बादलों से रेडार के निष्क्रिय होने का ज्ञान दिया जबकि आप रोज़ ही विमान से आते जाते हैं बादलों के बीच ही आपके विमान की सेफ़ लैंडिंग व टेकऑफ होता है ।बादलों के बीच ही रेडार आपके विमान पर सुरक्षा की नज़र बनाये रखता है । खुद आपके भक्तों नें इस पर आपको ट्वीट किया कि ज्यादा हो गया इस बार। आपके अंधभक्त जो समझते और कहते भी हैं कि आप कुछ ग़लत न कर सकते है और ना ही बोल सकते है, उन्होनें आईटी सैल के ज्ञान को पुन: प्रसारित करना शुरु कर दिया है कि बादलों व बरसात में जब टीवी सिग्नल डिस्टर्ब हो जाते हैं तो रेडार में क्यों नही हो सकते ? लिहाज़ा जय जय मोदी। डिश एंटेना और रेडार टेक्नोलोजी को एक जैसा समझने वाले मूढमति भक्तों को तो आप रोकेंगें क्या जब आप स्वयं उस महाज्ञान के रचियता हैं। तो प्रम जी आज से उड़ना बंद करिये बादलों में न जाने कब क्या घटित हो जाये और रेडार का फेल्योर आपको इमरान खान के घर उतार दे और आपको फिर से हलवा खाना पड जाये इस्लामाबाद में ! अब आपने पत्तलकारों से १९८८ में डिजिटल कैमरा से खींचें फोटो को ई मेल से भेजने की बात कह दी जब भारत में ईमेल शुरु ही नहीं हुआ था और डिजीटल कैमरा भी भारतीय बाज़ार में नहीं आया था । आप तो सदैव भीख माँग कर जीवन गुज़ार रहे थे तो उस वक्त का नया नया डिजीटल कैमरा अमेरिका जापान में दस हजार डॉलर में आता था तब भारत का भिखारी इतना महँगा कैमरा रंखता था ? सब कुछ ठीक तो है प्रम जी ? तबियत तो ठीक है? या चुनाव की फेक फॉंक में सब कुछ उलट पुलट हो गया है ? या गोदी मीडिया के पत्तलकार जिस अज्ञानभरी आस्था से आपको सुनते रहते हैं बगैर कुछ ढंग का पूछे, आप समझते हैं कि दर्शक श्रोता भी आपके भक्तो की भाँति बस करबद्ध होकर जयजयकार करते रहें । पर प्रम जी दुनिया भी इन सब बातों को अपने अपने दूतावासों व टीवी चैनलों के माध्यम से सुनती है । उन्होनें नेहरू, इंदिरा, मनमोहनसिंह जैसों को भी देखा है सुना है ! अब बस करिये बहुत सचमुच बहुत हो चुका है । भारत के प्रम ने कभी भी खुद को इतनी हँसी का पात्र नहीं बनाया है । फैंकने की भी सब सीमायें पार कर चुके हैं आप। यह तो कांग्रेस की सबसे बडी ग़लती रही कि प्राथमिक शिक्षा को इतना बोगस , समाज देश से कटा हुआ कर दिया कि पूरी युवापीढी के पचास करोड नागरिक मतदाता महाअज्ञानी लेकिन अहंकारी बन गये वरना यही पीढी आपको उठाकर फैंक देती। पर याद रखिये भारतीय नागरिक और राष्ट्रबोध अभी ज़िंदा है!

Happy mothers Day Mothers Day Articles: शर्त लगी थी पूरी दुनिया को एक शब्द में लिखने की।उसने पूरी किताब खोज ली और मैंने सिर्फ "माँ"लिख दिया । Happy mothers day🙏😃😃 THE 6 UNIQUE MOTHERS 👑 1) ParmaatMa 2) BrahMa 3) MamMa 4) DraMa 5) KarMa 6) AtMa (swayam ki Palna) Baba Yaad❣ 💫💜✨💜✨👸🏼✨💜✨💜💫 🌹*HAPPY MOTHER'S DAY*🌹 ✨No combination of any alphabets in any language can adequately describe a MOTHER!✨ ✨But 'MOTHER' is a description of the WHOLE WORLD and ETHER (the heavens)!✨ 💎MOTHER is our...💎 *M* entor *O* nly true Guide *T* rusted Friend *H* onest Advisor *E* ver helping Companion *R* eal Guru ‼ *MOTHER is our very own* *personal God on earth* ‼ _Salute to our Marvelous_ 👼🏻 _MOTHERS_ 👼🏻 TODAY ONWARDS LET'S always endeavour to bring a smile on our mother's face... 💐🌼🌺जय श्री मदन जी 🌸🌻🌷 💫💜✨💜✨👸🏼✨💜✨💜💫 👆🏼हजार के नोटों से तो बस अब जरूरत पूरी होती है... मजा तो " माँ " से मांगे एक रूपये के सिक्के में था।Happy Mother Day😘 "............."माँ"............." माँ- दुःख में सुख का एहसास है, माँ - हरपल मेरे आस पास है । माँ- घर की आत्मा है, माँ- साक्षात् परमात्मा है । माँ- आरती, अज़ान है, माँ- गीता और कुरआन है । माँ- ठण्ड में गुनगुनी धूप है, माँ- उस रब का ही एक रूप है । माँ- तपती धूप में साया है, माँ- आदि शक्ति महामाया है । माँ- जीवन में प्रकाश है, माँ- निराशा में आस है । माँ- महीनों में सावन है, माँ- गंगा सी पावन है । माँ- वृक्षों में पीपल है, माँ- फलों में श्रीफल है । माँ- देवियों में गायत्री है, माँ- मनुज देह में सावित्री है । माँ- ईश् वंदना का गायन है, माँ- चलती फिरती रामायन है । माँ- रत्नों की माला है, माँ- अँधेरे में उजाला है, माँ- बंदन और रोली है, माँ- रक्षासूत्र की मौली है । माँ- ममता का प्याला है, माँ- शीत में दुशाला है । माँ- गुड सी मीठी बोली है, माँ- ईद, दिवाली, होली है । माँ- इस जहाँ में हमें लाई है, माँ- की याद हमें अति की आई है । माँ- मैरी, फातिमा और दुर्गा माई है, माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है । माँ- ब्रह्माण्ड के कण कण में समाई है । "अंत में मैं बस ये इक पुण्य का काम करता हूँ, दुनिया की सभी माँओं को दंडवत प्रणाम करता हूँ । Happy mother's Day जिस के होने से मैं खुद को मुक्कमल मानता हूँ,,, मेरे रब के बाद,,, मैं बस मेरी माँ को जानता हूँ।😇😇 फना कर दो अपनी सारी ज दुनिया मे यही एक प्यार है जिसमे बफाई नही होती...!! Happy Mothers Day.-माँ- माँ एक ऐसा शब्द हैं, जिसे सिर्फ़ बोलने से ही अपने हृदय में प्यार और ख़ुशी की लहर आ जाती हैं...और ऐसे पावन दिवस पर हर माँ को मेरा प्रणाम...🙏🙌 हैपी Mothers डे...💝 माँ संवेदना है ======== माँ… माँ संवेदना है, भावना है, अहसास है माँ… माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है, माँ… माँ रोते हुए बच्चे का खुशनुमा पालना है, माँ… माँ मरूथल में नदी या मीठा सा झरना है, माँ… माँ लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है, माँ… माँ पूजा की थाली है, मंत्रों का जाप है, माँ… माँ आँखों का सिसकता हुआ किनारा है, माँ… माँ गालों पर पप्पी है, ममता की धारा है, माँ… माँ झुलसते दिलों में कोयल की बोली है, माँ… माँ मेहँदी है, कुमकुम है, सिंदूर है, रोली है, माँ… माँ कलम है, दवात है, स्याही है, माँ… माँ परमात्मा की स्वयँ एक गवाही है, माँ… माँ त्याग है, तपस्या है, सेवा है, माँ… माँ अनुष्ठान है, साधना है, जीवन का हवन है, माँ… माँ काशी है, काबा है और चारों धाम है, माँ… माँ चिंता है, याद है, हिचकी है, माँ… माँ बच्चे की चोट पर सिसकी है, माँ… माँ चूल्हा-धुंआ-रोटी और हाथों का छाला है, माँ… माँ ज़िंदगी की कडवाहट में अमृत का प्याला है, माँ… माँ पृथ्वी है, जगत है, धूरी है, माँ बिना इस सृष्टी की कल्पना अधूरी है, तो माँ की ये कथा अनादि है, ये अध्याय नही है… …और माँ का जीवन में कोई पर्याय नहीं है, तो माँ का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता, और माँ जैसा दुनिया में कुछ हो नहीं सकता, माँ में समर्पण है माँ परिवार का दर्पण है माँ हैं तो अनुभूति है माँ संस्कारों क़ी विभूति है माँ है तो श्रद्धा विशवास है माँ बस सुख का अहसास है माँ जग्दात्री दुर्गा कल्याणी है माँ करती जो उसने ठानी है माँ प्रेम त्याग क़ी मूर्ति है माँ हर क्षति क़ी पूर्ति है माँ सिखाती ,स्वाभिमान से रहना माँ जानती हर दुःख सुख सहना माँ बचपन क़ी एक याद है माँ प्रार्थना फरियाद है ममता है माँ में समता है सब सह लेने कि क्षमता है माँ एक सुनहरी धूप है माँ से ही मेरा स्वरूप है माँ से मेरी पहचान है माँ से ही कबीर ,रसखान है माँ है तो काशी काबा क्याbj माँ खुद गंगा का घाट है माँ से ही चिंतन मनन है मेरा माँ तो सपनो का हाट है क्या कहूँ क्या है मेरी माँ माँ है तो मेरी सांस है 🙏🏽वंदनीय गुरुमाँ के चरणों मेरे कोटि कोटि वंदन🙏🏽 माँ दिल की दुआ है, माँ दर्द की दवा है . माँ सर्दी में गरमाहट, माँ धूप में ठंडी हवा है. माँ भोर का लाली है। माँ चादर हरियाली है, माँ रातों की लोरी है, माँ बच्चों की कमज़ोरी है. माँ ही सभ्यता है , माँ ही संस्कृति है माँ ही सृष्टि की अनमोल कृति है. माँ रेगिस्तान में शीतल जल की धार है माँ साहस का संदेश, माँ भाषा, माँ संस्कार है. माँ बंसी की धुन है, माँ जीवन का संगीत है, माँ ख़ुशियों का राग, माँ प्रेम का गीत है. माँ नज़र का टीका , माँ जीने का सलीक़ा है. माँ मंदिर की ज्योति , माँ प्रेरणा की स्रोत है. माँ रूह का सुकून है , माँ ग़ुरूर, माँ विश्वास है. माँ इस धरती पर ही जन्नत का अहसास है. A 16 year old boy asks his Mom: "Mom, what are you going to get me for my 18th birthday ??. . The Mother answers, "son that's still a long way" . . The boy turns 17 & one day he faints. His Mom takes him to the hospital & the doctor said "Madam your child has a bad heart". Being the child On the stretcher the child Says, "did he tell you I'm going to die? . Mom Starts crying" The boy finally recovers on his 18th Birthday, he comes home& on his bed was a letter his mom had left him. The letter said "Son if you are reading this its because everything went well. Remember the day you asked me what was i giving you on your 18th birthday & didn't know what to Answer you?? "I gave you my heart" take care of it and happy Birth day Son" The mother was dead coz she had to give up her heart to her son Nothing is bigger than MOM's Heart... If you are touched plz broadcast this *if you don't love your MOTHER just ignore this but remember God is watching That's why MoM spelled upside down is WoW ! Lovely message *❤ Parents expectation from their child?* ____________________________ *Mother:* I fought with death when I was giving birth to you. I spent sleepless nights when you were sick and crying. I never ate without feeding you first. I bore so many pains to bring you to the stage that you are in today. _How will you repay me my child_? *Child:* When I grow up, I will find a good job and earn lots of money for you so you can enjoy the pleasures of this world. *Mother:* Your father is doing this already and I do not expect this from you too. By the time you are earning I will be old and will not be in need of any worldly luxuries. *Son:* I will find a pious lady and marry her so she can cook for you and take care of you. *Mother:* That is not her duty my son and neither should you marry for that reason. It is not compulsory on her to do any service to me, neither do I expect this from her. Your marriage should be for you, a companion and a comfort for you as you go through this journey of life. *Child:* Tell me mother how can I repay you then? *Mother:* (With tears in her eyes) Visit or call me often. A mother only requires this much from you while she is alive. Then when I die give me your shoulder and bury me. Whenever you perform prayers, supplicate for me. Give out in charity for me. Remember your every good deed will benefit me in the hereafter so be good and kind always. Fulfill the rights of all those around you. _The sleepless nights and pains I took to bring you up was not a favour to you but was for my creator. He blessed me with you as a beautiful gift and as a means for me to attain His pleasure. Your every good deed becomes my repayment._ Will you do it my child...? *Child*: (Cannot speak and had tears in his eyes) _Beautiful message for all the amazing Mothers out there._ Sharing is caring... One day I had a fight with my Mom and shouted at her and did not have my lunch. I went out with my friends, and had food. Later, when I came back, I hesitated to face my Mom so I went to my room and started watching TV. Then my Dad came to me and asked me why didn’t I have lunch. I told him that I had food with my friends and didn't want to have food cooked by Mom as I fought with her. He listened to what I said and then said to me , 'You know, I sometimes don’t like what your Mom says or what she does but have you seen me shouting at her or fighting with her ?' I said, 'No.' He said, 'If you or me or your sister fight with your Mom then we can go out with our friends or colleagues and have food, chill out and come back whenever we want. But have you ever thought of your Mom after you shout at her...? She will sit there and think for the whole day why you shouted at her and she will not have food for the whole day... So think before you shout at her or fight with her, you have a whole world outside waiting to hangout with you but for her you, your sister and I are her world 🌎... When any one of us shout at her, then her whole world gets wrecked. For you it’s just a matter of few seconds of anger so if you can suppress it for sometime, you can make her world a happy one... Wishing *HAPPINESS* To all Great ladies ... whom we call *MOTHER,*

1. आर्थिक जनगणना का परिचय Q1। भारत में पहली आर्थिक जनगणना कब हुई थी उत्तर:। 1977 Q2। भारत में हाल ही में आर्थिक संबंध कब बनाए गए थे। उत्तर:। 2013 Q3। हाल की आर्थिक जनगणना में, किस आर्थिक इकाई को कवर नहीं किया गया था? उत्तर:। कृषि Q4। किस मंत्रालय ने आर्थिक जनगणना की योजना को प्रायोजित किया उत्तर:। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MOSPI) क्यू 5। आर्थिक जनगणना का उद्देश्य क्या है उत्तर:। आर्थिक इकाइयों के डेटा संग्रह के लिए Q6। जब आर्थिक जनगणना ने एक योजना शुरू की आर्थिक जनगणना और सर्वेक्षण उत्तर:। 1976 क्यू 7। अब तक भारत में कितनी आर्थिक जनगणना की जाती है उत्तर:। 6 प्रश्न 8। कौन सा क्षेत्र 7 वीं आर्थिक जनगणना में शामिल है उत्तर:। सभी प्रतिष्ठान और हाउस होल्ड प्रश्न 9। जो आर्थिक जनगणना में नागरिकों से आर्थिक जानकारी एकत्र करेंगे उत्तर:। ूगणकों प्रश्न 10। कौन सा क्षेत्र पहले आर्थिक जनगणना में शामिल था उत्तर:। A & B दोनों 2. गणना प्रक्रिया Q1। गणना क्या है उत्तर:। A और B दोनों Q2। एक गणना सर्वेक्षण क्या है उत्तर:। एक आबादी में हर इकाई, हर कोई या सब कुछ का एक अध्ययन। Q3। पोस्ट एन्यूमरेशन सर्वे क्या है उत्तर:। जनगणना के बाद महीने में एक सर्वेक्षण। Q4। एन्यूमरेशन ब्लॉक क्या है? उत्तर:। क्षेत्र अर्थात; वे शहर या कस्बे जिन्हें सर्वेक्षण में शामिल किया जाना है छोटे क्षेत्रों में विभाजित क्यू 5। जनगणना क्या है? उत्तर:। एक पूरी, एक संग्रह में सभी वस्तुओं की लिस्टिंग का आदेश दिया Q6। एक नमूना क्या है उत्तर:। आमतौर पर गणित और कंप्यूटर विज्ञान में इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द एक सेट के सभी तत्वों की सूची क्यू 7। Enum एक _________ है। उत्तर:। मानों के समूह के लिए एक प्रतीकात्मक नाम प्रश्न 8। विभिन्न संचार कौशल हैं उत्तर:। ए और बी प्रश्न 9। सामाजिक धारणा क्या है उत्तर:। दूसरों की प्रतिक्रियाओं और समझ के बारे में जागरूक होने के कारण वे जैसा करते हैं, वैसा ही प्रतिक्रिया देते हैं प्रश्न 10। सहानुभूति क्या है? उत्तर:। भावनाओं या दूसरों के दृष्टिकोण को समझने या साझा करने की क्षमता 3. जनगणना, हाउस होल्ड्स और प्रतिष्ठान Q1। क्या हाउस और इस्टैब्लिशमेंट लिस्टिंग शेड्यूल मेन इकोनॉमिक में है जनगणना? उत्तर:। हाँ Q2। स्थापना एक एकल स्थान में स्थित एक इकाई है। क्या यह कथन सही है? उत्तर:। हाँ Q3। कृषि प्रतिष्ठान क्या है? उत्तर:। घरेलू वस्तुओं का उत्पादन Q4। आप एक घरेलू को कैसे परिभाषित करते हैं उत्तर:। लोग आम तौर पर एक साथ रहते हैं और आम रसोई से भोजन लेते हैं क्यू 5। क्या एक विदेशी नागरिक को घर का सदस्य माना जाता है? उत्तर:। नहीं Q6। क्या सैन्य और अर्धसैनिक बलों के बैरक को लोगों ने घरेलू माना है? उत्तर:। नहीं क्यू 7। क्या जेल में अंडर ट्रायल कैदी घरेलू सर्वेक्षण में शामिल हैं? उत्तर:। नहीं प्रश्न 8। क्या घरेलू खुले या सड़क के किनारे रहने वाले, घरेलू लिस्टिंग में गिने गए फुटपाथ हैं आर्थिक जनगणना? उत्तर:। नहीं प्रश्न 9। क्या अनाथालय, नारी निकेतन घरों में सूचीबद्ध हैं? उत्तर:। नहीं प्रश्न 10। जनगणना शहर 5000 व्यक्तियों से ऊपर की आबादी वाला क्षेत्र है। बयान है सही बात? उत्तर:। हाँ 4. सॉफ्ट स्किल Q1। संचार के निम्नलिखित रूपों में से कौन सा सबसे बुनियादी रूप है संचार ?. उत्तर:। लिखित संचार Q2। संचार एक दो-तरफ़ा प्रक्रिया है, जिसमें प्रेषक एक __________ को भेजता है प्राप्तकर्ता.. उत्तर:। संदेश Q3। व्यवहार कौशल में बहुत सारे गुण हैं जैसे उत्तर:। सब Q4। मात्रात्मक डेटा में तथ्य और आंकड़े और संख्याएं शामिल होती हैं उत्तर:। सच क्यू 5। गंभीर सोच, अनुनय, निगरानी प्रेरक कौशल का एक हिस्सा है? उत्तर:। सच Q6। एक समूह में व्यक्तियों और लोगों के साथ कैसे व्यवहार करें? उत्तर:। सब क्यू 7। _________ सुनने का पहला चरण है .. उत्तर:। श्रवण प्रश्न 8। सामाजिक कौशल की विशेषताएं हैं -। उत्तर:। सब प्रश्न 9। एक अच्छे एन्यूमरेटर को इन संचार कौशलों को अपनाना चाहिए उत्तर:। सब प्रश्न 10। क्या सर्वेक्षण के दौरान स्थानीय भाषा का ज्ञान किसी भी भूमिका निभाता है? उत्तर:। हां, स्थानीय भाषा जाने बिना एन्युमरेटर लोगों से बात नहीं कर सकता है। 5. अनुसूचित EC7.0 Q1। आर्थिक सर्वेक्षण कौन करेगा? उत्तर:। गणनाकार Q2। हम आर्थिक जनगणना में क्या शामिल करते हैं उत्तर:। हर घर की आर्थिक गतिविधि Q3। यूएफएस का संक्षिप्त रूप उत्तर:। शहरी फ्रेम सर्वेक्षण Q4। UFS ब्लॉक कहां __________ बनाए गए हैं? उत्तर:। शहरी क्यू 5। यदि यूएफएस ब्लॉक शहरी में बनाए जाते हैं, तो ग्रामीण में बनाई गई समकक्ष इकाई क्या है क्षेत्र। उत्तर:। एन्यूमरेशन गांव Q6। IV इकाई का क्या अर्थ है? उत्तर:। अन्वेषक इकाई क्यू 7। IV यूनिट _____ और ____ के बीच मौजूद है? उत्तर:। विलेज के भीतर विलीज और ब्लॉक प्रश्न 8। गणना ब्लॉक क्या है? उत्तर:। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के वितरण की सबसे छोटी इकाई प्रश्न 9। गणन ब्लॉक का दौरा करने के लिए कौन आवश्यक है? उत्तर:। B & C दोनों प्रश्न 10। आर्थिक जनगणना घर क्या है? उत्तर:। सड़क / सीढ़ी से अलग मुख्य द्वार 6. मोबाइल ऐप Q1। क्या हम ये सर्वे बिना मोबाइल के भी कर सकते हैं। उत्तर:। असत्य Q2। मोबाइल डाउनलोड करने के लिए आपके पास Android का कौन सा संस्करण होना चाहिए आवेदन। उत्तर:। एंड्रॉइड 5.0 Q3। कौन Cencus हाउस नंबर की पहचान करने के लिए उत्तर:। स्व - उत्पन्न Q4। भौगोलिक क्षेत्र के लिए आपको कौन सी मूलभूत जानकारी भरने की आवश्यकता है? उत्तर:। पिन कोड और UFS ब्लॉक को छोड़कर - सभी डेटा पहले से भरे होंगे क्यू 5। कैसे आप अपने क्षेत्र में घर की संख्या देने के लिए उत्तर:। ऑटो आबाद है Q6। प्रतिष्ठान के स्वामित्व के ड्रॉप डाउन में क्या विकल्प उपलब्ध हैं उत्तर:। आवासीय और वाणिज्यिक क्यू 7। फल विक्रेता, एक ऑटो-रिक्शा (खुद) चलाकर, साइकिल पर कपड़े बेचते हुए, खाद्य गाड़ी का उदाहरण हैं -----------------। उत्तर:। फिक्स्ड स्ट्रक्चर आउटसाइड हाउस के बिना प्रश्न 8। ट्यूशन, बेचने के लिए घर पर कपड़ों की सिलाई, बेचने के लिए अचार बनाना इसका उदाहरण ----------------। उत्तर:। हाउस के अंदर प्रश्न 9। आर्थिक गतिविधि की प्रकृति को कितने भागों में विभाजित किया गया है। उत्तर:। 6 प्रश्न 10। आर्थिक गतिविधि की प्रकृति को कितने भागों में विभाजित किया गया है। उत्तर:। 1) प्राथमिक, 2) विनिर्माण, 3) बिजली, गैस और पानी की आपूर्ति, 4) निर्माण, 5) ट्रेडिंग, 6) सेवाएं

*गुरु का आदेश* एक शिष्य था समर्थ गुरु रामदास जी का जो भिक्षा लेने के लिए गांव में गया और घर-घर भिक्षा की मांग करने लगा। *समर्थ गुरु की जय ! भिक्षा देहिं....* *समर्थ गुरु की जय ! भिक्षा देहिं....* एक घर के भीतर से जोर से दरवाजा खुला ओर एक बड़ी-बड़ी दाढ़ी वाला तान्त्रिक बाहर निकला और चिल्लाते हुए बोला - मेरे दरवाजे पर आकर किसी दूसरे का गुणगान करता है। कौन है ये समर्थ?? शिष्य ने गर्व से कहा-- *मेरे गुरु समर्थ रामदास जी... जो सर्व समर्थ है।* तांत्रिक ने सुना तो क्रोध में आकर बोला कि इतना दुःसाहस कि मेरे दरवाजे पर आकर किसी और का गुणगान करे .. तो देखता हूँ कितना सामर्थ्य है तेरे गुरु में ! *मेरा श्राप है कि तू कल का उगता सूरज नही देख पाएगा अर्थात् तेरी मृत्यु हो जाएगी।* शिष्य ने सुना तो देखता ही रह गया और आस-पास के भी गांव वाले कहने लगे कि इस तांत्रिक का दिया हुआ श्राप कभी भी व्यर्थ नही जाता.. बेचारा युवावस्था में ही अपनी जान गवा बैठा.... शिष्य उदास चेहरा लिए वापस आश्रम की ओर चल दिया और सोचते-सोचते जा रहा था कि आज मेरा अंतिम दिन है, लगता है मेरा समय खत्म हो गया है। आश्रम में जैसे ही पहुँचा। गुरु सामर्थ्य रामदास जी हँसते हुए बोले -- *ले आया भिक्षा?* बेचार शिष्य क्या बोले---! गुरुदेव हँसते हुए बोले कि भिक्षा ले आया। *शिष्य--* जी गुरुदेव! भिक्षा में मैं अपनी मौत ले आया हूँ ! और सारी घटना सुना दी और एक कोने में चुप-चाप बैठ गया। गुरुदेव बोले अच्छा चल भोजन कर ले। *शिष्य--* गुरुदेव! आप भोजन करने की बात कर रहे है और यहाँ मेरा प्राण सूख रहा है। भोजन तो दूर एक दाना भी मुँह में न जा पाएगा। *गुरुदेव बोले---* अभी तो पूरी रात बाकी है अभी से चिंता क्यों कर रहा है, चल ठीक है जैसी तुम्हारी इच्छा। ओर यह कहकर गुरुदेव भोजन करने चले गए। फिर सोने की बारी आई तब गुरुदेव शिष्य को बुलाकर आदेश किया - *हमारे चरण दबा दे!* शिष्य मायूस होकर बोला! जी गुरुदेव जो कुछ क्षण बचे है जीवन के, वे क्षण मैं आपकी सेवा कर ही प्राण त्याग करूँ यहिं अच्छा होगा। ओर फिर गुरुदेव के चरण दबाने की सेवा शुरू की। *गुरुदेव बोले--* चाहे जो भी हो जाय चरण छोड़ कर कहीं मत जाना । *शिष्य--* जी गुरुदेव कही नही जाऊँगा। *गुरुदेव ने अपने शब्दों को तीन बार दोहराया कि *चरण मत छोड़ना, चाहे जो हो जाए।* यह कह कर गुरुदेव सो गए। शिष्य पूरी भावना से चरण दबाने लगा। रात्रि का पहला पहर बीतने को था अब तांत्रिक अपनी श्राप को पूरा करने के लिए एक देवी को भेजा जो धन से सोने-चांदी से, हीरे-मोती से भरी थाली हाथ में लिए थी। शिष्य चरण दबा रहा था। तभी दरवाजे पर वो देवी प्रकट हुई और कहने लगी - कि इधर आओ ओर ये थाली ले लो। शिष्य भी बोला-- जी मुझे लेने में कोई परेशानी नही है लेकिन क्षमा करें! मैं वहाँ पर आकर नही ले सकता। अगर आपको देना ही है तो यहाँ पर आकर रख दीजिए। तो वह देवी कहने लगी कि-- नही !! नही!! तुम्हे यहाँ आना होगा। देखो कितना सारा माल है। शिष्य बोला-- नही। अगर देना है तो यही आकर रख दो। *तांत्रिक ने अपना पहला पासा असफल देख दूसरा पासा फेंका रात्रि का दूसरा पहर बीतने को था तब तांत्रिक ने भेजा....* शिष्य समर्थ गुरु रामदास जी के चरण दबाने की सेवा कर रहा था तब रात्रि का दूसरा पहर बीता और तांत्रिक ने इस बार उस शिष्य की माँ का रूप बनाकर एक नारी को भेजा। शिष्य गुरु के चरण दबा रहा था तभी दरवाजे पर आवाज आई -- बेटा! तुम कैसे हो? शिष्य ने अपनी माँ को देखा तो सोचने लगा अच्छा हुआ जो माँ के दर्शन हो गए, मरते वक्त माँ से भी मिल ले। वह औरत जो माँ के रूप को धारण किये हुए थी बोली - आओ बेटा गले से लगा लो! बहुत दिन हो गए तुमसे मिले। शिष्य बोला-- क्षमा करना मां! लेकिन मैं वहाँ नही आ सकता क्योंकि अभी गुरुचरण की सेवा कर रहा हूँ। मुझे भी आपसे गले लगना है इसलिए आप यही आ कर बैठ जाओ। फिर उस औरत ने देखा कि चाल काम नही आ रहा है तो वापिस चली गई। रात्रि का तीसरा पहर बीता ओर इस बार तांत्रिक ने यमदूत रूप वाला राक्षस भेजा। राक्षस पहुँच कर उस शिष्य से बोला कि चल तुझे लेने आया हूँ तेरी मृत्यु आ गई है। उठ ओर चल... शिष्य भी झल्लाकर बोला-- काल हो या महाकाल मैं नही आने वाला ! अगर मेरी मृत्यु आई है तो यही आकर मेरे प्राण ले लो,लेकिन मैं गुरु के चरण नही छोडूंगा! फिर राक्षस भी उसका दृढ़। निश्चय देख कर वापिस चला गया। सुबह हुई चिड़ियां अपनी घोसले से निकलकर चिचिहाने लगी। सूरज भी उदय हो गया। गुरुदेव रामदास जी नींद से उठे और शिष्य से पूछा कि - सुबह हो गई क्या ? शिष्य बोला-- जी! गुरुदेव सुबह हो गई गुरुदेव - अरे! तुम्हारी तो मृत्यु होने वाली थी न, तुमने ही तो कहा था कि तांत्रिक का श्राप कभी व्यर्थ नही जाता। लेकिन तुम तो जीवित हो...!! गुरुदेव ने मुस्कराते हुए ऐसा बोला। शिष्य भी सोचते हुए कहने लगा - जी गुरुदेव, लग तो रहा हूँ कि जीवित ही हूँ। अब शिष्य को समझ में आई कि गुरुदेव ने क्यों कहा था कि --- *चाहे जो भी हो जाए चरण मत छोड़ना।* शिष्य गुरुदेव के चरण पकड़कर खूब रोने लगा बार बार मन ही मन यही सोच रहा था - *जिसके सिर उपर आप जैसे गुरु का हाथ हो तो उसे काल भी कुछ नही कर सकता है। *मतलब कि गुरु की आज्ञा पर जो शिष्य चलता है उससे तो स्वयं मौत भी आने से एक बार नही अनेक बार सोचती है।* *करता करें न कर सके, गुरु करे सो होय* *तीन-लोक,नौ खण्ड में गुरु से बड़ा न कोय* पूर्ण सद्गुरु में ही सामर्थ्य है कि वो प्रकृति के नियम को बदल सकते है जो ईश्वर भी नही बदल सकते, क्योंकि ईश्वर भी प्रकृति के नियम से बंधे होते है लेकिन पूर्ण सद्गुरु नही।

आज हमने किसी को इसके जानकारी के बारे उत्सुक देखा अगर उन्हें यह कामयाब कर सके तो एक प्रयास सफल होगा मैने भी दोस्तों से पाया--- रक्त कैंसर ...... ब्रेन कैंसर ...... स्तन कैंसर ...... कोलन कैंसर ...... लिवर कैंसर ...... फेफड़े का कैंसर ...... प्रोस्टेट कैंसर ...... डिम्बग्रंथि के कैंसर ...... प्रिय दोस्तों! कैंसर के लिए कई दवाइयाँ मिली हैं !! कृपया इसे फॉरवर्ड किए बिना मिटाएं नहीं। मैं इस अधिकतम को आगे बढ़ा रहा हूं और 130 मिलियन भारतीयों तक पहुंच रहा हूं और यदि कोई है तो 'करक्यूमिनोइड्स' एक ऐसी दवा है जो कई कैंसर को ठीक करती है। यह "बंगलौर कैंसर कैंसर हर्बलिस्ट" में "सस्ती कीमत" पर उपलब्ध है। जागरूकता पैदा करें। यह किसी की उतनी ही मदद कर सकता है जितना आप कर सकते हैं, आगे बढ़ सकते हैं, दया की कोई कीमत नहीं है। कैंसर हर्बलिस्ट, बैंगलोर पता: 6, डी.जी.जी. रोड, गांधी मार्केट, बसनगुडी, बैंगलोर - 560004 मील का पत्थर: विद्यार्थी भवन होटल के पास फोन: 080-41218877 080-26601127 8884588835 Cancerherbalist@gmail.com 🙏 🙏 अनुरोध: जितनी जल्दी हो सके आगे बढ़ें

*देवरहा बाबा कौन थे?* भारत के उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में एक योगी, सिद्ध महापुरुष एवं सन्तपुरुष थे देवरहा बाबा. डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद, महामना मदन मोहन मालवीय, पुरुषोत्तमदास टंडन, जैसी विभूतियों ने पूज्य देवरहा बाबा के समय-समय पर दर्शन कर अपने को कृतार्थ अनुभव किया था. पूज्य महर्षि पातंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग में पारंगत थे. देवरहा बाबा का जन्म अज्ञात है. यहाँ तक कि उनकी सही उम्र का आकलन भी नहीं है. वह यूपी के देवरिया जिले के रहने वाले थे. मंगलवार, 19 जून सन् 1990 को योगिनी एकादशी के दिन अपना प्राण त्यागने वाले इस बाबा के जन्म के बारे में संशय है. कहा जाता है कि वह करीब 900 साल तक जिन्दा थे. (बाबा के संपूर्ण जीवन के बारे में अलग-अलग मत है, कुछ लोग उनका जीवन 250 साल तो कुछ लोग 500 साल मानते हैं.) श्रद्धालुओं के कथनानुसार बाबा अपने पास आने वाले प्रत्येक व्यक्ति से बड़े प्रेम से मिलते थे और सबको कुछ न कुछ प्रसाद अवश्य देते थे. प्रसाद देने के लिए बाबा अपना हाथ ऐसे ही मचान के खाली भाग में रखते थे और उनके हाथ में फल, मेवे या कुछ अन्य खाद्य पदार्थ आ जाते थे जबकि मचान पर ऐसी कोई भी वस्तु नहीं रहती थी. श्रद्धालुओं को कौतुहल होता था कि आखिर यह प्रसाद बाबा के हाथ में कहाँ से और कैसे आता है. जनश्रूति के मुताबिक, वह खेचरी मुद्रा की वजह से आवागमन से कहीं भी कभी भी चले जाते थे. उनके आस-पास उगने वाले बबूल के पेड़ों में कांटे नहीं होते थे. चारों तरफ सुंगध ही सुंगध होता था. लोगों में विश्वास है कि बाबा जल पर चलते भी थे और अपने किसी भी गंतव्य स्थान पर जाने के लिए उन्होंने कभी भी सवारी नहीं की और ना ही उन्हें कभी किसी सवारी से कहीं जाते हुए देखा गया. बाबा हर साल कुंभ के समय प्रयाग आते थे. मार्कण्डेय सिंह के मुताबिक, वह किसी महिला के गर्भ से नहीं बल्कि पानी से अवतरित हुए थे. यमुना के किनारे वृन्दावन में वह 30 मिनट तक पानी में बिना सांस लिए रह सकते थे. उनको जानवरों की भाषा समझ में आती थी. खतरनाक जंगली जानवारों को वह पल भर में काबू कर लेते थे. लोगों का मानना है कि बाबा को सब पता रहता था कि कब, कौन, कहाँ उनके बारे में चर्चा हुई. वह अवतारी व्यक्ति थे. उनका जीवन बहुत सरल और सौम्य था. वह फोटो कैमरे और टीवी जैसी चीजों को देख अचंभित रह जाते थे. वह उनसे अपनी फोटो लेने के लिए कहते थे, लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि उनका फोटो नहीं बनता था. वह नहीं चाहते तो रिवाल्वर से गोली नहीं चलती थी. उनका निर्जीव वस्तुओं पर नियंत्रण था.

🍃🌾😊 कुछ पलों के लिये जीवन जैसा है उसे वैसे ही जीकर देखिये। केवल जियें.. कोई संघर्ष न करें। कोई छीना झपटी न करें। बस देखते रहिए क्या हो रहा है। जो हो रहा है उसे वैसे ही होने दें। अपनी ओर से किसी भी प्रकार का कोई अवरोध पैदा न करें। जीवन के साथ बहें। अपने आप को पूरी तरह परमात्मा हाथ में छोड़ दें फिर देखिये कैसे आपका जीवन आनन्द से भर जाता है। आप अहोभाव से भर जाते हैं। जय श्री मदन जी 🙏

🐮 *मांस का मूल्य* 💰 मगध सम्राट बिंन्दुसार ने एक बार अपनी सभा मे पूछा : देश की खाद्य समस्या को सुलझाने के लिए *सबसे सस्ती वस्तु क्या है ?* मंत्री परिषद् तथा अन्य सदस्य सोच में पड़ गये ! चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा आदि तो बहुत श्रम के बाद मिलते हैं और वह भी तब, जब प्रकृति का प्रकोप न हो, ऎसी हालत में अन्न तो सस्ता हो ही नहीं सकता ! तब शिकार का शौक पालने वाले एक सामंत ने कहा : राजन, *सबसे सस्ता खाद्य पदार्थ मांस है,* इसे पाने मे मेहनत कम लगती है और पौष्टिक वस्तु खाने को मिल जाती है । सभी ने इस बात का समर्थन किया, लेकिन प्रधान मंत्री चाणक्य चुप थे । तब सम्राट ने उनसे पूछा : आपका इस बारे में क्या मत है ? चाणक्य ने कहा : मैं अपने विचार कल आपके समक्ष रखूंगा ! रात होने पर प्रधानमंत्री उस सामंत के महल पहुंचे, सामन्त ने द्वार खोला, इतनी रात गये प्रधानमंत्री को देखकर घबरा गया । प्रधानमंत्री ने कहा : शाम को महाराज एकाएक बीमार हो गये हैं, राजवैद्य ने कहा है कि किसी बड़े आदमी के हृदय का दो तोला मांस मिल जाए तो राजा के प्राण बच सकते हैं, इसलिए मैं आपके पास आपके हृदय 💓 का सिर्फ दो तोला मांस लेने आया हूं । इसके लिए आप एक लाख स्वर्ण मुद्रायें ले लें । यह सुनते ही सामंत के चेहरे का रंग उड़ गया, उसने प्रधानमंत्री के पैर पकड़ कर माफी मांगी और *उल्टे एक लाख स्वर्ण मुद्रायें देकर कहा कि इस धन से वह किसी और सामन्त के हृदय का मांस खरीद लें ।* प्रधानमंत्री बारी-बारी सभी सामंतों, सेनाधिकारियों के यहां पहुंचे और *सभी से उनके हृदय का दो तोला मांस मांगा, लेकिन कोई भी राजी न हुआ, उल्टे सभी ने अपने बचाव के लिये प्रधानमंत्री को एक लाख, दो लाख, पांच लाख तक स्वर्ण मुद्रायें दीं ।* इस प्रकार करीब दो करोड़ स्वर्ण मुद्राओं का संग्रह कर प्रधानमंत्री सवेरा होने से पहले वापस अपने महल पहुंचे और समय पर राजसभा में प्रधानमंत्री ने राजा के समक्ष दो करोड़ स्वर्ण मुद्रायें रख दीं । सम्राट ने पूछा : यह सब क्या है ? तब प्रधानमंत्री ने बताया कि दो तोला मांस खरिदने के लिए *इतनी धनराशि इकट्ठी हो गई फिर भी दो तोला मांस नही मिला ।* राजन ! अब आप स्वयं विचार करें कि मांस कितना सस्ता है ? जीवन अमूल्य है, हम यह न भूलें कि जिस तरह हमें अपनी जान प्यारी है, उसी तरह सभी जीवों को भी अपनी जान उतनी ही प्यारी है। लेकिन वो अपना जान बचाने मे असमर्थ है। और मनुष्य अपने प्राण बचाने हेतु हर सम्भव प्रयास कर सकता है । बोलकर, रिझाकर, डराकर, रिश्वत देकर आदि आदि । *पशु न तो बोल सकते हैं, न ही अपनी व्यथा बता सकते हैं ।* *तो क्या बस इसी कारण उनसे जीने का अधिकार छीन लिया जाय ।* *शुद्ध आहार, शाकाहार !* *मानव आहार, शाकाहार !* अगर ये लेख आपको अच्छा लगे तो हर व्यक्ति तक जरुर भेजे। 🌾💥🌾💥🌾💥💥💥

🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿 अनमोल वचनः ईश्वर की बनाई यह दुनिया बेशकीमती खजानों से भरी पड़ी है... और एक भी चौकीदार नहीं है। व्यवस्था ऐसी की गई है कि... इस दुनियां में अरबों मनुष्यों का आवागमन प्रतिवर्ष होता है, किन्तु इस दुनियां से जाते समय कोई भी सुई बराबर वस्तु भी नही ले जा सकता ... !! 🙏जय श्री मदन जी 🙏 💐आपका दिन शुभ हो 🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿

🌸☘🌸☘🌸☘🌸☘🌸☘ अनमोल वचनः जब चिंता कोई सताये, सुमिरन करों.. जब व्याकुल मन घबराये, सुमिरन करों.. कोई रास्ता नज़र न आये, सुमिरन करों.. अगर बात समझ में न आये, सुमिरन करों.. सुमिरन करों.. 🙏🏻जय श्री मदन जी 🙏🏻 🌸☘🌸☘🌸☘🌸☘🌸☘

*भोग बुरे नहीं हैं अपितु उनकी आसक्ति बुरी है। भोगों को इस प्रकार भोगो कि समय आने पर इन्हें छोड़ा भी जा सके। श्री कृष्ण से बड़ा अनासक्त कोई नहीं हुआ। द्वारिका में राजसी सुखों में रहे तो वहीं जरुरत पड़ने पर अर्जुन का रथ भी हाँकने लगे। कभी सुदामा के चरणों में बैठ गए तो कभी विदुर की झोंपड़ी में डेरा डाल दिया।* *जब तक द्वारिका की सत्ता पर आसीन रहे पूरी प्रजा को पुत्रवत पाला पर जब स्थिति, कुल और धर्म दोनों में से किसी एक को चुनने की आ गई तो बिना कुलासक्ति के धर्म को चुन लिया। विवाह किये तो इतिहास ही रच ड़ाला और त्यागने का समय आया तो ऐसे त्याग दिया जैसे उनसे कभी कोई सम्बन्ध ही ना रहा हो।* *यह अनासक्ति ही भगवान् श्री कृष्ण की प्रसन्नता का कारण बनी। इस दुनिया में जो भी अनासक्त भाव से कर्म में लिप्त रहते हैं उन्हें आनंद प्राप्ति से कोई नहीं रोक सकता।* *जय श्री कृष्ण*🙏🙏 *आज का दिन शुभ मंगलमय हो।* ।।।। जय श्री मदन जी ।।।।

*नेक इंसान बनने के लिए* *उतनी ही कोशिश किया करें।* *जितना खूबसूरत दिखने* *के लिए करते हैं।।*

🙏🏻 *यह कहानी अवश्य पढ़ें और चिंतन करें।* एक शख्स सुबह सवेरे उठा साफ़ कपड़े पहने और सत्संग घर की तरफ चल दिया ताकि सतसंग का आनंद प्राप्त कर सके. चलते चलते रास्ते में ठोकर खाकर गिर पड़ा. कपड़े कीचड़ से सन गए वापस घर आया. कपड़े बदलकर वापस सत्संग की तरफ रवाना हुआ फिर ठीक उसी जगह ठोकर खा कर गिर पड़ा और वापस घर आकर कपड़े बदले. फिर सत्संग की तरफ रवाना हो गया. जब तीसरी बार उस जगह पर पहुंचा तो क्या देखता है की एक शख्स चिराग हाथ में लिए खड़ा है और उसे अपने पीछे पीछे चलने को कह रहा है. इस तरह वो शख्स उसे सत्संग घर के दरवाज़े तक ले आया. पहले वाले शख्स ने उससे कहा आप भी अंदर आकर सतसंग सुन लें. लेकिन वो शख्स चिराग हाथ में थामे खड़ा रहा और सत्संग घर में दाखिल नही हुआ. दो तीन बार इनकार करने पर उसने पूछा आप अंदर क्यों नही आ रहे है ...? दूसरे वाले शख्स ने जवाब दिया "इसलिए क्योंकि मैं काल हूँ, ये सुनकर पहले वाले शख्स की हैरत का ठिकाना न रहा। काल ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा मैं ही था जिसने आपको ज़मीन पर गिराया था. जब आपने घर जाकर कपड़े बदले और दुबारा सत्संग घर की तरफ रवाना हुए तो भगवान ने आपके सारे पाप क्षमा कर दिए. जब मैंने आपको दूसरी बार गिराया और आपने घर जाकर फिर कपड़े बदले और फिर दुबारा जाने लगे तो भगवान ने आपके पूरे परिवार के गुनाह क्षमा कर दिए. *मैं डर गया की अगर अबकी बार मैंने आपको गिराया और आप फिर कपड़े बदलकर चले गए तो कहीं ऐसा न हो वह आपके सारे गांव के लोगो के पाप क्षमा कर दे.* इसलिए मैं यहाँ तक आपको खुद पहुंचाने आया हूँ. अब हम देखे कि उस शख्स ने दो बार गिरने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और तीसरी बार फिर पहुँच गया और एक हम हैं यदि हमारे घर पर कोई मेहमान आ जाए या हमें कोई काम आ जाए तो उसके लिए हम सत्संग छोड़ देते हैं, भजन जाप छोड़ देते हैं। क्यों....??? क्योंकि हम जीव अपने भगवान से ज्यादा दुनिया की चीजों और रिश्तेदारों से ज्यादा प्यार करते हैं। उनसे ज्यादा मोह हैं। इसके विपरीत वह शख्स दो बार कीचड़ में गिरने के बाद भी तीसरी बार फिर घर जाकर कपड़े बदलकर सत्संग घर चला गया। क्यों...??? क्योंकि उसे अपने दिल में भगवान के लिए बहुत प्यार था। वह किसी कीमत पर भी अपनी बंदगीं का नियम टूटने नहीं देना चाहता था। इसीलिए काल ने स्वयं उस शख्स को मंजिल तक पहुँचाया, जिसने कि उसे दो बार कीचड़ में गिराया और मालिक की बंदगी में रूकावट डाल रहा था, बाधा पहुँचा रहा था ! इसी तरह हम जीव भी जब हम भजन-सिमरन पर बैठे तब हमारा मन चाहे कितनी ही चालाकी करे या कितना ही बाधित करे, हमें हार नहीं माननी चाहिए और मन का डट कर मुकाबला करना चाहिए। एक न एक दिन हमारा मन स्वयं हमें भजन सिमरन के लिए उठायेगा और उसमें रस भी लेगा। बस हमें भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और न ही किसी काम के लिए भजन सिमरन में ढील देनी हैं। वह मालिक आप ही हमारे काम सिद्ध और सफल करेगा। इसीलिए हमें भी मन से हार नहीं माननी चाहिए और निरंतर अभ्यास करते रहना चाहिए जी... 🙏🏻

सृष्टि का आधार चुनौती है। चुनौती से शिकायत है, तो जीवन दुःख है। चुनौती का स्वीकार है, तो जीवन उत्सव है। चुनौती को बाधा समझो, तो जीवन का ह्रास है। चुनौती को सोपान समझो, तो जीवन का विकास है।