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प्रम जी अब एकदम कुछ ज्यादा बहुत ज्यादा ही होता जा रहा है । आपके लिये ईवीएम १९८४ में आई और हमने कोईसवाल नहीं उठाये हमने सुन लिया इगनोर मार दिया। सोचा निकल गया होगा मुँह से , चुनाव के तनाव हैं । बीच में बहुत सी अन्य बातें भी फैंकते रहे , चलो कोई बात नहीं। फिर आपने कहा कि मैंने सेना को फ़्रीहैंड दिया पाकिस्तान से डील करने को लेकिन हर इंटरव्यू में आप बतातें हैं कि पूरी पूरी रात आप सब कार्यवाहियों का निर्देशन करते रहे । जनरल ,एयरमांर्शल , एडमिरल आदि सब किसी काम के नहीं वे तो बस वैसा ही फालो करते हैं जो आप बोलते रहते हैं । ऊरी फिल्म में सब कुछ डोभाल व आप ही करते दिखाये जाते हैं , हमने चुपचाप देख ली।
फिर बादलों से रेडार के निष्क्रिय होने का ज्ञान दिया जबकि आप रोज़ ही विमान से आते जाते हैं बादलों के बीच ही आपके विमान की सेफ़ लैंडिंग व टेकऑफ होता है ।बादलों के बीच ही रेडार आपके विमान पर सुरक्षा की नज़र बनाये रखता है । खुद आपके भक्तों नें इस पर आपको ट्वीट किया कि ज्यादा हो गया इस बार।
आपके अंधभक्त जो समझते और कहते भी हैं कि आप कुछ ग़लत न कर सकते है और ना ही बोल सकते है, उन्होनें आईटी सैल के ज्ञान को पुन: प्रसारित करना शुरु कर दिया है कि बादलों व बरसात में जब टीवी सिग्नल डिस्टर्ब हो जाते हैं तो रेडार में क्यों नही हो सकते ? लिहाज़ा जय जय मोदी। डिश एंटेना और रेडार टेक्नोलोजी को एक जैसा समझने वाले मूढमति भक्तों को तो आप रोकेंगें क्या जब आप स्वयं उस महाज्ञान के रचियता हैं। तो प्रम जी आज से उड़ना बंद करिये बादलों में न जाने कब क्या घटित हो जाये और रेडार का फेल्योर आपको इमरान खान के घर उतार दे और आपको फिर से हलवा खाना पड जाये इस्लामाबाद में !
अब आपने पत्तलकारों से १९८८ में डिजिटल कैमरा से खींचें फोटो को ई मेल से भेजने की बात कह दी जब भारत में ईमेल शुरु ही नहीं हुआ था और डिजीटल कैमरा भी भारतीय बाज़ार में नहीं आया था । आप तो सदैव भीख माँग कर जीवन गुज़ार रहे थे तो उस वक्त का नया नया डिजीटल कैमरा अमेरिका जापान में दस हजार डॉलर में आता था तब भारत का भिखारी इतना महँगा कैमरा रंखता था ?
सब कुछ ठीक तो है प्रम जी ?
तबियत तो ठीक है?
या चुनाव की फेक फॉंक में सब कुछ उलट पुलट हो गया है ?
या गोदी मीडिया के पत्तलकार जिस अज्ञानभरी आस्था से आपको सुनते रहते हैं बगैर कुछ ढंग का पूछे, आप समझते हैं कि दर्शक श्रोता भी आपके भक्तो की भाँति बस करबद्ध होकर जयजयकार करते रहें ।
पर प्रम जी दुनिया भी इन सब बातों को अपने अपने दूतावासों व टीवी चैनलों के माध्यम से सुनती है । उन्होनें नेहरू, इंदिरा, मनमोहनसिंह जैसों को भी देखा है सुना है ! अब बस करिये बहुत सचमुच बहुत हो चुका है । भारत के प्रम ने कभी भी खुद को इतनी हँसी का पात्र नहीं बनाया है । फैंकने की भी सब सीमायें पार कर चुके हैं आप।
यह तो कांग्रेस की सबसे बडी ग़लती रही कि प्राथमिक शिक्षा को इतना बोगस , समाज देश से कटा हुआ कर दिया कि पूरी युवापीढी के पचास करोड नागरिक मतदाता महाअज्ञानी लेकिन अहंकारी बन गये वरना यही पीढी आपको उठाकर फैंक देती।
पर याद रखिये भारतीय नागरिक और राष्ट्रबोध अभी ज़िंदा है!
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