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राडार बादलों के पार नहीं देख पाते, जिस इंटरव्यू में यह कहा उसी में फरमाया कि 1988 में अडवानीजी की फोटो डिजिटल कैमरे से खींच कर ईमेल से दिल्ली भेजी। भारत में ईमेल की शुरुआत 1995 में हुई थी।यदि मैं गलत नहीं हूँ, तो इसके कुछ ही साल पहले डि़जि़टल कैमरा बाजार में आय़ा था, दाम था दस हजार डॉलर से ज्यादा।
एक अन्य इंटरव्यू में कहे गये सत्य के अनुसार मान्यवर उन दिनों भिक्षाटन से जीवन यापन करते थे। दस-बारह हजार डॉलर की राशि ऐसे व्यक्ति के लिए कुछ ज्यादा नहीं क्या, और फिर 1988 में डिजिटल कैमरा उपलब्ध भी था ?
मोदीजी की नीतियों की आलोचना-प्रशंसा अपनी जगह, लेकिन जिसे उनका फेंकूपन कहा जाता है, वह क्या बहुत चिंताजनक नहीं हो चला है?
उनके राडार ज्ञान पर वायुसेना के अफसरों के मन में क्या आया होगा?
डिजि़टल कैमरा और ईमेल संबंधी उनके ज्ञान पर आपके मन में क्या आ रहा है?
मोदीजी चूंकि प्रधानमंत्री हैं, और उनके प्रशंसक निश्चय ही चाहेंगे कि चुनाव के बाद भी रहें, ऐसे में उनका स्वास्थ्य राष्ट्रीय चिंता और चिंतन का विषय होना चाहिए।
मन में जब जो आए, बिना विचारे बोल देना...यह स्वभाव किस तरह की मनोदशा की सूचना देता है?
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