तू शामिल है... हर ज़र्रे में, हर रूह में हर रंग में, हर रूप में, हर आह में, हर आस में हर जिक्र में, हर प्यास में, हर सुबह में, हर शाम में हर धड़कन में, हर सांस में, मै शामिल हूँ..... तेरी कायनात में, तेरी कुदरत में तेरी मर्ज़ी में, तेरी फिक्र में, तेरी आरजू मे, तेरी निगाहों में तेरी चाहत में, तेरी पनाहों में, तेरी उल्फत में, तेरी मुहब्बत में तेरी कहानी में, तेरी जिंदगानी में, अब बता तू कहाँ नहीं है.. मै कहाँ नहीं हूँ.. बस अब ना तू खुद में बाकी है ना मैं खुद में.....जय श्री मदन जी

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