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Showing posts from July, 2019
✒📩गुरु की चिट्ठी 📩✒ एक गृहस्थ भक्त अपनी जीविका का आधा भाग घर में दो दिन के खर्च के लिए पत्नी को देकर अपने गुरुदेव के पास गया। दो दिन बाद उसने अपने गुरुदेव को निवेदन किया के अभी मुझे घर जाना है। मैं धर्मपत्नी को दो ही दिन का घर खर्च दे पाया हूं । घर खर्च खत्म होने पर मेरी पत्नी व बच्चे कहाँ से खायेंगे। गुरुदेव के बहुत समझाने पर भी वो नहीं रुका। तो उन्होंने उसे एक चिट्ठी लिख कर दी। और कहा कि रास्ते में मेरे एक भक्त को देते जाना। वह चिट्ठी लेकर भक्त के पास गया। उस चिट्ठी में लिखा था कि जैसे ही मेरा यह भक्त तुम्हें ये खत दे तुम इसको 6 महीने के लिए मौन साधना की सुविधा वाली जगह में बंद कर देना। उस गुरु भक्त ने वैसे ही किया। वह गृहस्थी शिष्य 6 महीने तक अन्दर गुरु पद्धत्ति नियम, साधना करता रहा परंतु कभी कभी इस सोच में भी पड़ जाता कि मेरी पत्नी का क्या हुआ, बच्चों का क्या हुआ होगा ?? उधर उसकी पत्नी समझ गयी कि शायद पतिदेव वापस नहीं लौटेंगे।तो उसने किसी के यहाँ खेती बाड़ी का काम शुरू कर दिया। खेती करते करते उसे हीरे जवाहरात का एक मटका मिला। उसने ईमानदारी से वह मटका खेत के मालिक को दे दिया। उसकी ईमानदारी से खुश होकर खेत के मालिक ने उसके लिए एक अच्छा मकान बनवा दिया व आजीविका हेतु ज़मीन जायदात भी दे दी ।अब वह अपनी ज़मीन पर खेती कर के खुशहाल जीवन व्यतीत करने लगी। जब वह शिष्य 6 महिने बाद घर लौटा तो देखकर हैरान हो गया और मन ही मन गुरुदेव के करुणा कृपा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने लगा कि सद्गुरु ने मुझे यहाँ अहंकार मुक्त कर दिया । मै समझता था कि मैं नहीं कमाकर दूंगा तो मेरी पत्नी और बच्चों का क्या होगा ?? करनेवाला तो सब परमात्मा है। लेकिन झूठे अहंकार के कारण मनुष्य समझता है कि मैं करनेवाला हूं। वह अपने गुरूदेव के पास पहुंचा और उनके चरणों में पड़ गया। गुरुदेव ने उसे समझाते हुए कहा बेटा हर जीव का अपना अपना प्रारब्ध होता है और उसके अनुसार उसका जीवन यापन होता है। मैं भगवान के भजन में लग जाऊंगा तो मेरे घरवालों का क्या होगा ?? मैं सब का पालन पोषण करता हूँ मेरे बाद उनका क्या होगा यह अहंकार मात्र है। वास्तव में जिस परमात्मा ने यह शरीर दिया है उसका भरण पोषण भी वही परमात्मा करता है। प्रारब्ध पहले रच्यो पीछे भयो शरीर ।। तुलसी चिंता क्या करे भज ले श्री रघुवीर।। 🌹सर्वे भवन्तु सुखिनः🌹 🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉 🙏🏻🌹जय जय गुरु जी🌹🙏🏻 🙏🏻🌻शुक्राना गुरु जी🌻🙏🏻 🙏🏻सब का भला करो गुरूजी🙏🏻
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*प्रकृति के नियम* *हम जो खाना खाते हैं, 24 घण्टे के अंदर हमारे शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए, वरना हम बीमार हो जायेंगे ।* *हम जो पानी पीते हैं, 04 घण्टे के अंदर शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए, वरना हम बीमार हो जायेंगे ।* *हम जो हवा, सांस के रूप में लेते हैं, कुछ सेकंड में ही वापस बाहर निकल जानी चाहिए, वरना हम मर ही जायेंगे ।* *लेकिन नकारात्मक बातें, जैसे कि घृणा, गुस्सा, ईर्ष्या, असुरक्षा ....* *आदि, जिनको हम अपने अंदर दिन, महीने और सालों तक रखे ही रहते हैं, बाहर नहीं निकाल पाते हैं। यदि ऐसे नकारात्मक विचारों को समय-समय पर अपने अंदर से नहीं निकालेंगे तो एक दिन निश्चित ही हम मानसिक रोगी बन जाएंगे।* *निर्णय आपका क्योंकि शरीर आपका है।...*
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*प्रकृति के नियम* *हम जो खाना खाते हैं, 24 घण्टे के अंदर हमारे शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए, वरना हम बीमार हो जायेंगे ।* *हम जो पानी पीते हैं, 04 घण्टे के अंदर शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए, वरना हम बीमार हो जायेंगे ।* *हम जो हवा, सांस के रूप में लेते हैं, कुछ सेकंड में ही वापस बाहर निकल जानी चाहिए, वरना हम मर ही जायेंगे ।* *लेकिन नकारात्मक बातें, जैसे कि घृणा, गुस्सा, ईर्ष्या, असुरक्षा ....* *आदि, जिनको हम अपने अंदर दिन, महीने और सालों तक रखे ही रहते हैं, बाहर नहीं निकाल पाते हैं। यदि ऐसे नकारात्मक विचारों को समय-समय पर अपने अंदर से नहीं निकालेंगे तो एक दिन निश्चित ही हम मानसिक रोगी बन जाएंगे।* *निर्णय आपका क्योंकि शरीर आपका है।...*
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*सृष्टि का एक नियम हैं* जो *बांटोंगे* वही आपके पास *बेहिसाब* होगा फिर वह चाहे *धन* हो , *अन्न* हो *सम्मान* हो *अपमान* हो *नफरत* हो या *मोहब्बत* *जय श्री मदन ज़ी *
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* भगवान की गणना * एक बार एक मंदिर के पास दो व्यक्ति बैठे थे और चिट चैट कर रहे थे। अंधेरा और बादल छा रहा था। तब तक एक और व्यक्ति वहां आया और पूछा कि क्या वह उनके साथ जुड़ सकता है। उन्होंने कहा 'आनंद के साथ ओह'। वे दोस्त के रूप में बात कर रहे थे। फिर बारिश होने लगी। वे फंस गए थे। तीसरे आदमी को भूख लगी और उसने अन्य दो को बताया। ओह, हम भी भूखे हैं, उन्होंने कहा। उसके पास 3 रोटियां हैं और मेरे पास 5 रोटियां हैं - हम सभी को साझा करें - दूसरे आदमी ने कहा। फिर एक सवाल यह आया कि इन तीनों में से 8 रोटियों को कैसे साझा किया जाए। पहले व्यक्ति ने सुझाव दिया कि चलो प्रत्येक रोटी में से तीन टुकड़े करें। फिर 3x8 हमारे पास 24 टुकड़े होंगे। फिर हम तीनों के 8 टुकड़े हो सकते हैं। सभी को आइडिया पसंद आया। उन्होंने 24 टुकड़े किए और प्रत्येक के 8 टुकड़े खाए और अपनी भूख को संतुष्ट किया और सभी सो गए। सुबह तीसरे व्यक्ति ने दो व्यक्तियों को उनके साथ समय बिताने की अनुमति देने के लिए धन्यवाद दिया और रोटियां साझा करने और मददगार होने के लिए उनके प्रति आभारी महसूस किया। खुशी के मारे उसने उन्हें 8 सोने के सिक्के दिए और अपना रास्ता छोड़ दिया। उसके जाने के बाद, पहले व्यक्ति ने कहा कि ठीक है, चलो प्रत्येक को 4 सिक्के साझा करते हैं और चलते हैं। दूसरे व्यक्ति ने कहा जब से मैंने 5 रोटियां साझा की हैं मुझे 5 सोने के सिक्के मिलने चाहिए और आपने 3 रोटियां दीं आपको केवल 3 सोने के सिक्के मिलने चाहिए। धीरे-धीरे तर्क बड़े होते गए और एक बड़ी लड़ाई में समाप्त हो गए। वे न्याय के लिए ग्राम प्रधान के पास गए। हेड ने कहा, मेरे साथ सिक्के छोड़ दो और मैं सोचूंगा और अगले दिन फैसला दूंगा। रात में भगवान ग्राम प्रधान के सपने में दिखाई देते हैं और उनसे पूछते हैं कि वह सुबह क्या न्याय देने जा रहे हैं। ग्राम प्रधान ने कहा, 5: 3 के दूसरे व्यक्ति का रुख उसके लिए तर्कसंगत प्रतीत होता है। इसके लिए भगवान हँसे और कहा, 'आपने ध्यान से उनके कथन का विश्लेषण नहीं किया है।' भगवान ने कहा, मेरे न्याय के अनुसार पहले व्यक्ति को केवल एक सोने का सिक्का मिलना चाहिए और दूसरे व्यक्ति को 7 सोने के सिक्के मिलना चाहिए !! ग्राम प्रधान हैरान थे। भगवान ने समझाया, पहले व्यक्ति को कोई संदेह नहीं था कि उसकी तीन रोटियों में से नौ टुकड़े हो गए, लेकिन खुद 8 टुकड़े खा गए और केवल एक टुकड़ा साझा किया। दूसरे व्यक्ति ने 15 टुकड़े किए और साझा करने के लिए 7 टुकड़े दिए। इसलिए: 1: 7 साझाकरण मेरी गणना और मेरा न्याय है। अगले दिन विलेज हेड ने तदनुसार न्याय दिया और औचित्य समझाया। * सवाल-जवाब * उपरोक्त कहानी से हमें यह समझने की आवश्यकता है- * जिस तरह से परमेश्वर चीजों को देखता है, हम उसी चीजों को देखने के तरीके से बहुत भिन्न होते हैं *। हम बहुत कम होने के बावजूद दूसरों के साथ साझा करने के लिए कितने इच्छुक हैं, यह वही है जो भगवान देखता है। किसी के पास रु ३०० से रु .३०० का दान, ३० करोड़ रु। से किसी के ३ लाख रूपए के दान से अधिक मूल्यवान है। अधिक स्वामित्व महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन हमारे पास जो कुछ भी है उससे अधिक साझा करना महत्वपूर्ण है
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🌹 यह नहीं भूलना चाहिए कि हम कोशिश के लिए उत्तरदायी हैं, न कि परिणाम के लिए 🌹
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GOD महान है और इस असीमित ब्रह्मांड में HIMSELF को पूरी तरह से LIFE के रूप में भर दिया है, जो वास्तव में सभी प्रकार के जीवन का स्रोत है। अदृश्य होने के नाते, YOG / ध्यान में केवल अपने गुण के साथ दिखाई देता है, अगर कुछ शरीर समाधि सफल होता है; भगवान / जीवन ने सभी दृश्य जीवन के माध्यम से वास्तव में HIMSELF प्रस्तुत किया है। हर शरीर के अंदर सभी आत्माओं को प्रस्तुत करना सभी जीवन का प्रत्यक्ष है - भगवान / जीवन। वी के अंदर से सभी दिशाएं देख सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से मौजूद आत्मा को सभी महानता दी है। और इसलिए आत्मा को परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं। आत्मा हमारे मन के लिए जिम्मेदार है। आत्मा भी पूरे ब्रह्मांड में एक भगवान की तरह शरीर में एक है। आत्मा भी अपने आप में अपने कर्म-फल से जुड़ा हुआ है, एक शरीर / जीवन से दूसरे शरीर में जा रहा है। ओम नमो शिवाय।
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*हम एेसी चीज़ों से भाग खड़े होते हैं , जो हमें तनाव देती हैं वो हमें डराती हैं और हम उनसे डरते हैं* । हम अपनी क्षमताओं और सामर्थ्य से अनभिज्ञ बने रहते हैं । हमें विश्वास नहीं रहता कि हम इन चुनौतियों को स्वीकार कर सकते हैं और इनसे पार पा सकते हैं । *हमारे पास अनगिणत सामर्थ्य है , इनमें से प्रमुख है हमारी भावना , ज्ञाण और व्यवहार की शक्ति* । हम जो चुनौतियों का सामना करते हैं , उनके पीछे हमारी शक्तियों की आधारशिला है । तब हम जीवन में तनाव में गिरकर भी तनाव मुक्त होते हैं और हम चुनौतियों से बेहतर ढंग से जूझ लेते हैं । *ध्यान रहे मानवीय मन सदा सकारात्मक और सुखद वातावरण में बने रहना चाहता है , ऐश्वर्य और भोग के बीच जीना चाहता है । ऐसा जीवन ठहर - सा जाता है और हममें निर्बलता की भ्रांति पनपती है* । " सुप्रभात जी "
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*विकल्प मिलेंगे बहुत मार्ग भटकाने के लिए,संकल्प एक ही काफी है मंजिल तक जाने के लिए...*
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स्त्रियाँ , कुछ भी ज़ाया नहीं जाने देतीं। वो सहेजती हैं। संभालती हैं। ढकती हैं। बाँधती हैं। उम्मीद के आख़िरी छोर तक। कभी तुरपाई कर के। कभी टाँका लगा के। कभी धूप दिखा के। कभी हवा झला के। कभी छाँटकर। कभी बीनकर। कभी तोड़कर। कभी जोड़कर। देखा होगा ना ? अपने ही घर में उन्हें खाली डब्बे जोड़ते हुए। बची थैलियाँ मोड़ते हुए। सबेरे की रोटी शाम को खाते हुए। बासी सब्जी में तड़का लगाते हुए। दीवारों की सीलन तस्वीरों से छुपाते हुए। बचे हुए से अपनी थाली सजाते हुए। फ़टे हुए कपड़े हों। टूटा हुआ बटन हो। फंफून्दी लगा अचार हो। सीले हुए पापड़ हों। घुन लगी दाल हो। गला हुआ फल हो। मुरझाई हुई सब्जी हो। या फिर तकलीफ़ देता " रिश्ता " वो सहेजती हैं। संभालती हैं। ढकती हैं। बाँधती हैं। उम्मीद के आख़िरी छोर तक...
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अगर कोई पढ़ालिखा,ईमानदार,मेहनती, अनुभवी व्यक्ति चुनाव हारता है तो चिंता उस हारने वाले को नही बल्कि चिंता उन्हें होनी चाहिए जिन्होंने उस व्यक्ति के बदले किसी अनपढ़,बेईमान,निकम्मे,जाती-धर्म,पैसे और करोड़ो के विज्ञपनों को देखकर अपना क़ीमती वोट देकर चुना है या चुनेगें।
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*गुरू पूर्णिमा 16जुलाई को है* *आईये स्वागत करे* 🙏🏻❄💕🐾❄🙏🏻 *कहते है माँ सब दे सकती है* *पर भाग्य नही दे सकती* *पिता सब दे सकता है* *भाग्य के लेखा को नही बदल सकता* 🙏🏻❄💕🐾❄🙏🏻 *प्यार सब देते है पर* *निभाता कोई ---कोई है* *वैसे ही ,,,,,,* *भाग्य मेरा सदगुरू बदल देता है* 🙏🏻❄💕🐾❄🙏🏻 *जो न लिखा लेखे मे वो दे देता है वक्त को भी थमा देता है* *सुखी जमी को हरा - भरा बना देता है* 🙏🏻❄💕🐾❄🙏🏻 *जो घर आँगन सुना है वहाँ फूल खिला देता है* *वो मेरा सतगुरू है --वो मेरा सतगुरू है* 🙇🏼♀❄💕🐾❄🙇🏼♀ *कोटि कोटि इन्हें वंदन है* *कोटि कोटि इन्हें वंदन है।* 🙇🏼♀❄💕🐾❄🙇🏼♀
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वह इश्क़ ए जुनूं क्या जिसमें तरकीब ना हो ख़ुद को मिटाने की वह सजदा ही क्या जिसमें याद हो सर उठाने की
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*भाव बिना बाज़ार में वस्तु मिले न मोल,तो भाव बिना मदन ' कैसे मिले,जो हैं अनमोल...🙏*
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तू ही मालिक, तू इबादत, तू ही रूह, तू इस दिल की जन्नत.....
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✍️✍️IAS मूड का बहाना ना बनाएँ ......👇👇 आप एक घने जंगल से होकर गुजर रहे है, अचानक शेर की दहाड़ सुनाई देती है। आप यह कहने का साहस जुटा सकते हो कि आज मूड नहीं है इसलिए नहीं दौडूगा। आपको तैरना नहीं आता और आप पानी में डूब रहे हैं, तो आप यह कहने का साहस कर सकते है कि" बचाओ बचाओ " चिल्लाने का मूड नहीं है क्या आप बत्रा धाम घूमने के लिए मूड की इजाज़त लेते हो? क्या आप शुक्रवार को हिट मूवी का first show देखने के लिए मूड का सहारा लेते हो? क्या आप अपनी गर्ल फ्रेंड से बात करने के लिए मूड का सहारा लेते हो नहीं ना तो फिर पढ़ाई में हर बार मूड की हेल्प क्यों? आप कोशिश कर देख लीजिए जब भी आप अपने मूड से पूछेंगे, तो कम से कम आधे दिन आपका मन कहेंगा पढ़ने का मन नहीं है, जो असफलता की नींव तैयार करने में मदद करेगा, इसलिए कभी जरूरी काम के लिए मूड की तबीयत ना पूछें। मैंने कई छात्रों से सुना है ,मैं IAS बनना तो चाहता हूँ, पर पढ़ने में मन नहीं लगता क्या करूँ अगर आपने आईएएस बनने का संकल्प किया है तो इसका मतलब तो यह हुआ ना आपने सबसे कठिन कामों को करने का फैसला किया है। दोस्तों जैसे मन्दिर में पूजा -पाठ करने के लिए पुजारी कभी मूड का सहारा नहीं लेते, शीत ऋतु में बर्फ जैसे ठंडे पानी में सूर्योदय से पहले नहाकर बैठ जाता है, वह यह काम साल के 365 दिन बिना मूड का सहारा लिए हर रोज़ करता है, उसी तरह आपको बिना बहाना बनाएँ अपने काम को लगन से हर रोज़ करना ही करना है। इसलिए मित्रों जो काम जरूरी है, उसके लिए मूड का सवाल भी पैदा नहीं होता। मूड के आज से ही दास नहीं मालिक बन जाईये फिर देखिए आपकी मंसूरी की राह कितनी सुगम तथा आसान हो जाती हैं ...
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*छत पे सोये बरसों बीते* *तारों से मुलाक़ात किये* *और चाँद से किये गुफ़्तगू* *सबा से कोई बात किये।* *न कोई सप्तऋिषी की बातें* *न कोई ध्रुव तारे की* *न ही श्रवण की काँवर और* *न चन्दा के उजियारे की।* *देखी न आकाश गंगा ही* *न वो चलते तारे* *न वो आपस की बातें* *न हँसते खेलते सारे।* *न कोई टूटा तारा देखा* *न कोई मन्नत माँगी* *न कोई देखी उड़न तश्तरी* *न कोई जन्नत माँगी।* *अब न बारिश आने से भी* *बिस्तर सिमटा कोई* *न ही बादल की गर्जन से* *माँ से लिपटा कोई।* *अब न गर्मी से बचने को* *बिस्तर कभी भिगोया है* *हल्की बारिश में न कोई* *चादर तान के सोया है।* *अब तो तपती जून में भी न* *पुर की हवा चलाई है* *न ही दादी माँ ने कथा* *कहानी कोई सुनाई है।* *अब न सुबह परिन्दों ने* *गा गा कर हमें जगाया है* *न ही कोयल ने पंचम में* *अपना राग सुनाया है।* *बिजली की इस चकाचौंध ने* *सबका मन भरमाया है* *बन्द कमरों में सोकर सबने* *अपना काम चलाया है।* *तरस रही है रात बेचारी* *आँचल में सौग़ात लिये* *कभी अकेले आओ छत पे* *पहले से जज़्बात लिये!!!* 🌹😌🌹😌🌹😌🌹🤷♀
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🍁🍁🍁 *अच्छा इँसान मतलबी नही होता,* *बस दूर हो जाता हैं* *उन लोगो से* *जिन्हें उसकी कदर* *नही होती.....!!* *सुप्रभात*🌞🌞🌻🌻
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1,, परमशक्ति रचैता है ,, परमात्मा रचना है 2,,परमशक्ति पूरी सृष्टि की मालिक है ,,जबकि परमात्मा को परमशक्ति एक दुनिया के लिए नियुक्त करती है । ,3 परमशक्ति किसी को कुछ भी इक्षा मात्र से दे सकती है ,,किसी से इजाजत की जरूरत नहीं है ।।।जबकि परमात्मा को परमशक्ति से विनती करनी पड़ती है किसी को कुछ देने के लिए।। 4 ,,परमशक्ति पूर्ण है ,,परमात्मा पूर्ण नहीं ।। परमशक्ति किसी की पूजा नहीं करते ,जबकि परमात्मा परमशक्ति की पूजा करते है ।। 5 ,परमशक्ति सर्वज्ञ ,सर्वव्यापक ,सर्वशक्तिमान है ,, परमात्मा के अंदर ये गुण नहीं है,,,।।।
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🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰 अनमोल वचनः कई बार हम देखते हैं कि झूठा तो जीत रहा है और सच्चा हार रहा है... परन्तु झूठ कभी नही जीतता, क्योंकि झूठ की जीत भी झूठी ही होती है। असली जीत होती है... मन की स्थाई शान्ति और खुशी। जबकि झूठ के बल पर जीतने वाला तो सदा डर और तनाव से घिरा रहता है। 🙏ॐ शांति 🙏 🌸 सुप्रभात 🌸 💐आपका दिन शुभ हो 💐 🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰🇲🇰
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मील पथर मैं मील पथर मेरे पैर जढ और आँखें खुली कई मेरे पास से गुज़रें कई वापिस नहीं आए कई सेंक्ढ़े बार दुहराएँ अपनी ही लाश ढो रहे हैं कुछ हँसते कुछ रो रहे हैं कई गरम सीत गाड़ी में कई ग़रमी में बी ठंडे संतों के रूप में चोर गुज़रते कभी चोरों को संत बनते देखता साइकल से झंडे वाली गाढ़ी का सफ़र देखा है झंडे वाली गाड़ी से गुमनामी का हशार देखा है लोक सोचते मैं बेजान पथर हूँ मी उनकी कई कुल जानता हूँ तरसेम 6-7-18
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प्रश्न - मन मे उठ्ते बुरे भावो को किस प्रकार रोका जाए ? यदि रोकना है, तो रोकना हीं नहीं। रोका कि वो आये। उनके लिए निषेध सदा निमंत्रण है। और दमन से उनकी शक्ति कम नहीं होती,वरन और बढ़ती है। क्योंकि दमन से वे मन की और भी गहराइयों मे चले जाते है। और न ही उन भावो को बुरा कहना। क्योंकि बुरा कहते ही उनसे शत्रुता और संघर्ष शुरू हो जाता है। और स्वयं मे, स्वयं से संघर्ष संताप का जनक है। ऐसे संघर्ष से शक्ति भर अकारण अपव्यय होती है और व्यक्ति निर्बल हो जाता है। फिर क्या करें ? पहली बात - जाने कि न कुछ बुरा है, न भला है। बस भाव है, उन पर मूल्यांकन न जोड़े। क्योंकि तभी तटस्थता संभव है। दूसरी बात - रोकें नहीं, देखें। कर्ता नहीं, द्रष्टा बने, क्योंकि तभी संघर्ष से विरत हो सकते हैं। तीसरी बात - जो है, है. उसे बदलना नहीं है, स्वीकार करना है। जो है, सब परमात्मा का है। इसलिए आप बीच मे न आये, तो अच्छा है। आपके बीच मे आने से हीं अशांति है और अशांति मे कोई रुपांतरण संभव नहीं। समग्र स्वीकृति का अर्थ है कि आप बीच से हट गए हैं। और आपके हटते ही क्रांति है। जैसे अंधेरे मे अचानक दिया जल उठे, बस ऐसे ही सब कुछ बदल जाता है। OshO 💕📿 मन के पार।
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A joker told the audience a wonderful joke and all the people started laughing... Joker repeated the same joke and only few people laughed..???? He again repeated the same joke but this time no one laughed...?????? Then he told these beautiful lines...; " when you cannot laugh on the same joke again and again... then why do you cry again and again on the same worry" So enjoy your every moment of life..!! Life is beautiful?????? Charlie Chaplin's - a good day to recollect his 3 heart-touching statements:- (1) Nothing permanent in this world, not even our troubles. (2) I like walking in the rain, because nobody can see my tears. (3) The most wasted day in life is the day in which we have not laughed. Keep smiling and pass this message to everyone whom you want to see smiling .
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एक जोकर ने दर्शकों को एक अद्भुत चुटकुला सुनाया और सभी लोग हंसने लगे ... जोकर ने वही मजाक दोहराया और केवल कुछ ही लोग हंसे .. ???? उसने फिर वही जोक दोहराया लेकिन इस बार कोई नहीं हंसा… ?????? फिर उसने ये खूबसूरत लाइनें बताईं ...; "जब आप एक ही मजाक पर बार-बार हंस नहीं सकते ... फिर आप फिर से उसी चिंता में क्यों रोते हैं " तो ज़िन्दगी के हर पल का आनंद लें .. !! ज़िन्दगी गुलज़ार है?????? चार्ली चैपलिन का - उनके दिल को छू लेने वाले बयानों को याद करने का एक अच्छा दिन: - (१) इस संसार में कुछ भी स्थायी नहीं, हमारी मुसीबतें भी नहीं। (२) मुझे बारिश में घूमना पसंद है, क्योंकि कोई भी मेरे आँसू नहीं देख सकता। (३) जीवन का सबसे व्यर्थ दिन वह दिन है जिसमें हम हँसे नहीं हैं। मुस्कुराते रहें और इस संदेश को उन सभी तक पहुंचाएं, जिन्हें आप मुस्कुराते हुए देखना चाहते हैं।
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A joker told the audience a wonderful joke and all the people started laughing... Joker repeated the same joke and only few people laughed..???? He again repeated the same joke but this time no one laughed...?????? Then he told these beautiful lines...; " when you cannot laugh on the same joke again and again... then why do you cry again and again on the same worry" So enjoy your every moment of life..!! Life is beautiful?????? Charlie Chaplin's - a good day to recollect his 3 heart-touching statements:- (1) Nothing permanent in this world, not even our troubles. (2) I like walking in the rain, because nobody can see my tears. (3) The most wasted day in life is the day in which we have not laughed. Keep smiling and pass this message to everyone whom you want to see smiling .
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