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*हम एेसी चीज़ों से भाग खड़े होते हैं , जो हमें तनाव देती हैं वो हमें डराती हैं और हम उनसे डरते हैं* । हम अपनी क्षमताओं और सामर्थ्य से अनभिज्ञ बने रहते हैं । हमें विश्वास नहीं रहता कि हम इन चुनौतियों को स्वीकार कर सकते हैं और इनसे पार पा सकते हैं । *हमारे पास अनगिणत सामर्थ्य है , इनमें से प्रमुख है हमारी भावना , ज्ञाण और व्यवहार की शक्ति* ।
हम जो चुनौतियों का सामना करते हैं , उनके पीछे हमारी शक्तियों की आधारशिला है । तब हम जीवन में तनाव में गिरकर भी तनाव मुक्त होते हैं और हम चुनौतियों से बेहतर ढंग से जूझ लेते हैं । *ध्यान रहे मानवीय मन सदा सकारात्मक और सुखद वातावरण में बने रहना चाहता है , ऐश्वर्य और भोग के बीच जीना चाहता है । ऐसा जीवन ठहर - सा जाता है और हममें निर्बलता की भ्रांति पनपती है* । " सुप्रभात जी "
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