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मील पथर
मैं मील पथर
मेरे पैर जढ और आँखें खुली
कई मेरे पास से गुज़रें
कई वापिस नहीं आए
कई सेंक्ढ़े बार दुहराएँ
अपनी ही लाश ढो रहे हैं
कुछ हँसते कुछ रो रहे हैं
कई गरम सीत गाड़ी में
कई ग़रमी में बी ठंडे
संतों के रूप में चोर गुज़रते
कभी चोरों को संत बनते देखता
साइकल से झंडे वाली गाढ़ी का सफ़र देखा है
झंडे वाली गाड़ी से गुमनामी का हशार देखा है
लोक सोचते मैं बेजान पथर हूँ
मी उनकी कई कुल जानता हूँ
तरसेम
6-7-18
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