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Showing posts from November, 2018

तुम्हारी सारी प्राथनाएं तुम्हारी शिकायतें हैं | और प्राथना कहीं शिकायत हो सकती है ? तुम उसी दिन मंदिर पहुंच पाओगे जिस दिन तुम धन्यवाद देने जाओगे, जिस दिन तुम कहने जाओगे कि मैं किसी योग्य न था, मेरी कोई क्षमता और पात्रता न थी, और तुमने इतना दिया ! जिस दिन तुम्हारे पास जो है, तुम्हारी पात्रता से तुम्हें ज्यादा दिखाई पड़ेगा, उसी दिन प्राथना का जन्म होगा |फिर उस प्राथना का कोई अंत नहीं है | वह बढ़ती जाती है, बढ़ती जाती है | और एक घड़ी ऐसी आती है कि तुम्हारी पात्रता शून्य हो जाती है | उस शून्य पात्र में ही सारा अस्तित्व उतर आता है | जिस दिन तुम कह पाते हो, मेरी कोई भी योग्यता नहीं, मैं जीवन के योग्य भी न था, एक सांस भी ले सकूं अस्तित्व की, इसकी भी मेरी कोई क्षमता न थी, और तूने मुझे अनंत जीवन दिया, जिस दिन तुम्हें इसमें परमात्मा के अनुग्रह के अतिरिक्त कुछ भी दिखाई न पड़ेगा, तुम बिल्कुल शून्य मात्र हो जाओगे, उसी क्षण फिर तुम्हारी कोई मृत्यु नहीं है |

*परमात्मा कभी भाग्य नहीं लिखता....* *जीवन के हर कदम पर हमारी सोच,हमारे व्यवहार एवं हमारे कर्म ही हमारा भाग्य लिखते हैं...!* *🙏🏻🌹सुप्रभात 🌹🙏🏻*

*हमारी नीयत से ईश्वर प्रसन्न होते हैं, और* *दिखावे से इंसान !* *यह हम पर निर्भर करता है कि* *हम किसे प्रसन्न करना चाहते है!!* *🙏🌷सुप्रभात🌷🙏*

*हमारी नीयत से ईश्वर प्रसन्न होते हैं, और* *दिखावे से इंसान !* *यह हम पर निर्भर करता है कि* *हम किसे प्रसन्न करना चाहते है!!* *🙏🌷सुप्रभात🌷🙏*

🌅 *"भीड़ मर गयी गैलीलियो नहीं मरा"* हम सब को बहुत गुस्सा आता है *जब हम पढते हैं कि किस तरह क्रूर ईसाई धर्मान्धों ने गैलीलियो को जिंदा जला दिया था !* गैलीलियो का गुनाह क्या था? उसने सच बोला था ! उसने कहा था कि *सूर्य पृथ्वी के चारों तरफ नहीं घूमता बल्कि पृथ्वी सूर्य के चारों तरफ घूमती है !* जबकि धर्मग्रन्थ में लिखा था कि... *पृथ्वी केन्द्र में है और सूर्य तथा अन्य गृह उसके चारों तरफ घुमते हैं !* गैलीलियो ने जो बोला वो सच था ! धर्मग्रन्थ में झूठ लिखा था | इसलिए... *धर्मग्रंथ को ही सच मानने वाले सारे अंधे गैलीलियो के विरुद्ध हो गये !* गैलीलियो को पकड़ लिया गया *गैलीलियो पर मुकदमा चलाया गया ! अदालत ने सत्य को अपने फैसले का आधार नहीं बनाया !* बल्कि ... *अदालत भीड़ से डर गयी ! भीड़ ने कहा यह हमारे धर्म के खिलाफ बोलता है इसे जिंदा जला दो !* अदालत ने फ़ैसला दिया... *इसे ज़िंदा जला दो क्योकि इसने लोगों की धार्मिक आस्था के खिलाफ बोला है !* जिंदा जला दिया गया गैलीलियो, सत्य बोलने के कारण ! *सत्य हार गया अंधविश्वासीआस्था जीत गयी !* आज भी जब हम ये पढते हैं तो... *सोचते हैं कि काश तब हम जैसे समझदार लोग होते तो ऐसा गलत काम न होने देते !* लेकिन अगर मैं आपको बताऊँ कि *ऐसा आज भी हो रहा और आप इसे होते हुए चुपचाप देख भी रहे हैं तो भी क्या आप में इसका विरोध करने का साहस है ?* आप अपनी तो छोडि़ये *इस देश के सर्वोच्च न्यायालय में भी ये साहस नहीं है !* *न्यायालय के एक नहीं अनेकों निर्णय ऐसे हैं जो सत्य के आधार पर नहीं धर्मान्ध भीड़ को खुश करने के लिए दिये गये हैं !* भयंकर स्थिति है ! *सच नहीं बोला जा सकता !* विज्ञान बढ़ रहा है ! *विज्ञान का उपयोग हथियार बनाने में हो रहा है !* विज्ञान की खोज टीवी है, सोशल मीडिया है, मोबाइल है, कम्प्यूटर है। *टीवी और सोशल मीडिया का इस्तेमाल लोगों के दिमाग बंद करने में किया जा रहा है !* इतना ही नहीं.... *लोगों को भीड़ में बदला जा रहा है !* भीड़ की मानसिकता को एक जैसा बनाया जा रहा है ! *जो अलग तरह से बोले उसे मारो या जेल में डाल दो !* अलग बात बोलने वाला अपराधी है ! सच बोलने वाला अपराधी है ! यह भीड़ भारत से लेकर अमेरिका तक फ़ैली है, *वही भीड़ संसद भवनों और विधान सभाओं में दाखिल हो गयी है !* वो कुर्सियों पर बैठ गयी है ! वो तर्क को नहीं मानेगी, इतिहास को नहीं मानेगी ! *ये भीड़ राजनीति को चलाएगी !* *विज्ञान को जूतों तले रोंद देगी !* *कमजोर किसान मजदूर को मार देगी !* और फिर *ढोंग करके खुद को धर्मिक, राष्ट्रभक्त और मुख्यधारा कहेगी !* मगर.... *मैं खुद को इस भीड़ के राष्ट्रवाद, धर्म और राजनीति से अलग करता हूं !* मुझे इसके खतरे पता हैं ! *पर मैंने इतिहास में जाकर जलते हुए गैलीलियो के साथ खड़े होने का फ़ैसला किया है !* मुझे पता है *मेरा अंत उससे ज्यादा बुरा हो सकता है !* पर देखो न.... *भीड़ मर गयी गैलीलियो नहीं मरा !*

*कभी भी ईश्वर को यह मत बताईये, कि बहुत सी मुश्किलें है मेरे साथ...* *बल्कि मुश्किलों को यह जरूर बताईये, कि ईश्वर है मेरे साथ...*✍🏼💕 *... आपका दिन मंगलमय हो* *🌹शुभ प्रभात 🌹* JAI SHREE MADAN JI AAP SABHI KO. *😊🌻🙏🙏🌻*😊

ईश्वर ने दुनिया बनाई। अलग—अलग जातियां बनाईं। हिंदुओं से पूछा: तुम क्या चाहते हो? उन्होंने कहा: गायत्री मंत्र। जैनों से पूछा: तुम क्या चाहते हो? उन्होंने कहा: नमोकार मंत्र। मुसलमानों से पूछा: तुम क्या चाहते हो? उन्होंने कहा: कुरान। ईसाइयों से पूछा: तुम क्या चाहते हो ? ऐसे वह पूछता गया अलग—अलग लोगों से, अलग—अलग देशों से, अलग—अलग जातियों से। और सबसे आखिरी में बनाया उसने अमरीकन। पूछा: तुम क्या चाहते हो। उसने कहा: डालर! ईश्वर थोड़ा हैरान हुआ। उसने कहा: देखो, तुम्हारे सामने ही किसी ने गायत्री, किसी ने गीता, किसी ने कुरान, किसी ने बाइबिल, किसी ने तालमुद, किसी ने नमोकार, मंत्र, तंत्र, यंत्र, ध्यान, प्रार्थना, पूजा, ये सब चीजें मांगी—और तू मांगता है डालर! अमरीकन ने कहा: फिक्र छोड़ो, सिर्फ डालर मुझे चाहिए और सब मंत्रत्तंत्र जानने वाले लोग अपने—आप डालर के पीछे चले आएंगे। वैसा ही हुआ भी है। सारी दुनिया अमरीका की तरफ भागी जा रही है। अब काबा में काबा नहीं है और काशी में काशी नहीं है। काशी—काबा के सब पंडित—पुरोहित तुम्हें कैलिफोर्निया में मिलेंगे! भयभीत आदमी अगर भय के कारण गायत्री भी मांग ले तो उसकी गायत्री खरीदी जा सकती है। भय के कारण अगर कोई भगवान का नाम लेता हो तो उसका भगवान भी खरीदा जा सकता है। क्योंकि भयभीत मूलतः लोभी होता है। लोभी ही भयभीत होता है।

🇲🇰 प्रेरणादायी कहानियाँ 🇲🇰 राबिया बसरी एक महशूर फ़क़ीर हुई है! जवानी में वह बहुत खूबसूरत थी। *एक बार चोर उसे उठाकर* *ले गए और एक वेश्या के कोठे पर ले जाकर उसे बेच दिया।* *अब उसे वही कार्य करना था* *जो वहाँ की बाक़ी औरते* *करती थी।* *इस नए घर में पहली रात को उसके पास एक आदमी लाया गया।उसने फौरन बातचीत शुरू कर दी।* *"आप जैसे भले आदमी को देखकर मेरा दिल बहुत खुश है " वह बोली।"* *आप सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ जायें , मैं थोड़ी देर परमात्मा की याद में बैठ लूँ।* *अगर आप चाहें तो आप भी परमात्मा की याद में बैठ जाएँ।* *यह सुनकर उस नौजवान की हैरानी की कोई हद न रही। वह भी राबिया के साथ ज़मीन पर बैठ गया।* *फिर राबिया उठी और बोली* *मुझे विश्वास है कि अगर मैं* *आपको याद दिला दूँ कि* *एक दिन हम सबको मरना है तो आप बुरा नहीं मानोगें। आप यह भी भली भाँति समझ लें की जो गुनाह करने की आपके मन में चाह है , वह आपको नर्क की आग में धकेल देगा।* *आप खुद ही फैसला कर लें कि आप यह गुनाह करके नर्क की आग में कूदना चाहते हैं, या इससे बचना चाहते हैं?* *यह सुनकर नौजवान हक्का बक्का रह गया।उसने संभलकर कहा,* *ऐ नेक और पाक औरत!* *तुमने मेरी आँखे खोल दी,* *जो अभी तक गुनाह के भयंकर नतीजे की और बंद थी मै वादा करता हूँ कि फिर कभी कोठे की तरफ कदम नही बढ़ाऊंगा।* *हर रोज नए आदमी राबिया के पास भेजे जाते।पहले दिन आये नौजवान की तरह उन सबकी जिंदगी भी पलटती गयी।* *उस कोठे के मालिक को बहुत हैरानी हुई की इतनी खूबसूरत और नौजवान औरत है और एक बार आया ग्राहक दोबारा उसके पास जाने के लिए नही आता।* *जबकि लोग ऐसी सुन्दर लड़कियों के दीवाने होकर उसके इर्दगिर्द ऐसे घूमते है जैसे परवाने शमा के इर्दगिर्द।* *यह राज जानने के लिए एक रात अपनी बीवी को ऐसी जगह छुपाकर बिठा दिया, जहां से वह राबिया के कमरे के अंदर सब कुछ देख सकती थी।* *वह यह जानना चाहता था की जब कोई आदमी राबिया के पास भेजा जाता है तो वह उसके साथ कैसे पेश आती है?* *उस रात उसने देखा कि जैसे हीं ग्राहक ने अंदर कदम रखा, राबिया उठकर खड़ी हो गई और बोली, आओ भले आदमी, आपका स्वागत है।* *पाप के इस घर में मुझे हमेशा याद रहता है की परमात्मा हर जगह मौजूद है।* *वह सब कुछ देखता है और जो चाहे कर सकता है। आपका इस बारे में क्या ख्याल है ?* *यह सुनकर वह आदमी* *हक्का बक्का रह गया* *और उसे कुछ समझ न आया कि क्या करे ?* *आखिर वह कुछ हिचकिचाते हुए बोला, हाँ पंडित और मौलवी कुछ ऐसा ही कहते हैं।* *राबिया कहती गई, 'यहाँ गुनाहों से घिरे इस घर में, मैं कभी नही भूलती कि ख़ुदा सब गुनाह देखता है और पूरा न्याय भी करता है।* *वह हर इंसान को उसके गुनाहो की सजा देता है। जो लोग यहाँ आकर गुनाह करते है, उसकी सजा पाते हैं।* *उन्हें अनगिनत दुःख और मुसीबत झेलनी पड़ती है।* *मेरे भाई, हमें मनुष्य जन्म मिला है, भजन, बंदगी करने के लिए दुनिया के दुखों से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिये, ख़ुदा से मुलाकात करने के लिए, न की जानवरों से भी बदतर बनकर उसे बर्बाद करने के लिए।* *पहले आये लोगों की तरह इस आदमी को भी राबिया की बातों में छुपी सच्चाई का अहसास हो गया।* *उसे जिंदगी में पहली बार महसूस हुआ की वह कितने घोर पाप करता रहा है और आज फिर करने जा रहा था।वह फूटफूट कर रोने लगा और राबिया के पाव पर गिरकर माफ़ी मांगने लगा।* *राबिया के शब्द इतने सहज, निष्कपट और दिल को छू लेने वाले थे कि उस कोठे के मालिक की पत्नी भी बाहर आकर अपने पापो का पश्चाताप करने लगी।* *फिर उसने कहा ऐ नेक पाक लड़की, तुम तो वास्तव में फ़क़ीर हो। हमने कितना बड़ा गुनाह तुम पर लादना चाहा।* *इसी वक्त इस पाप की दलदल से बहार निकल जाओ। इस घटना ने उसकी अपनी जिंदगी को भी एक नया मोड़ दे दिया और उसने पाप की कमाई हमेशा के लिए छोड़ दी।* 👉 *मालिक के सच्चे भक्त जहां कहीं भी हों, जिस हालात में हो, वे हमेशा मनुष्य जन्म के असली उद्देश्य की ओर इशारा करते हैं और भूले भटके जीवों को नेकी की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं।* 😴😴😴😴😴😴😴😴😴😴😴

*जब कोई इंसान इस दुनिया से विदा हो जाता है तो उसके कपड़े, उसका बिस्तर, उसके इस्तेमाल किया हुआ सभी सामान उसी के साथ तुरन्त घर से निकाल दिये जाते है ।* *पर कभी भी कोई उसकी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, उसका घर, उसका पैसा या उसी के बच्चे इन सब को क्यों नही छोड़ते ? बल्कि उन चीजों को तो ढूंढते है, इससे पता चलता है कि आखिर रिश्ता किन चीजों से था।* *सच्चा रिश्ता खोजिए पहचानिए एक दूसरे का जितना सहयोग कर सकते हैं करिये।भौतिक नही आध्यात्मिक सम्बन्ध बनाइये शरीर से नही आत्मा से जुड़िये* विचार

*_● सहारे मत तलाश करें ●_* *_ईरान का एक बादशाह सर्दियों की शाम जब अपने महल में दाखिल हो रहा था तो एक बूढ़े दरबान को देखा जो महल के सदर दरवाज़े पर पुरानी और बारीक वर्दी में पहरा दे रहा था।_* *_बादशाह ने उसके करीब अपनी सवारी को रुकवाया और उस ज़ईफ़ दरबान से पूछने लगा ;_* *_"सर्दी नही लग रही ?"_* *_दरबान ने जवाब दिया "बोहत लग रही है हुज़ूर ! मगर क्या करूँ, गर्म वर्दी है नही मेरे पास, इसलिए बर्दाश्त करना पड़ता है।"_* *_"मैं अभी महल के अंदर जाकर अपना ही कोई गर्म जोड़ा भेजता हूँ तुम्हे।"_* *_दरबान ने खुश होकर बादशाह को फर्शी सलाम किया और आजिज़ी का इज़हार किया।_* *_लेकिन बादशाह जैसे ही महल में दाखिल हुआ, दरबान के साथ किया हुआ वादा भूल गया।_* *_सुबह दरवाज़े पर उस बूढ़े दरबान की अकड़ी हुई लाश मिली और करीब ही मिट्टी पर उसकी उंगलियों से लिखी गई ये तहरीर भी ;_* *_"बादशाह सलामत ! मैं कई सालों से सर्दियों में इसी नाज़ुक वर्दी में दरबानी कर रहा था, मगर कल रात आप के गर्म लिबास के वादे ने मेरी जान निकाल दी।"_* *_सहारे इंसान को खोखला कर देते है। उसी तरह उम्मीदें कमज़ोर कर देती है, अपनी ताकत के बल पर जीना शुरू कीजिए, असल सहारा उस ख़ालिक़ का है जो ज़िन्दगी में भी हमारे साथ है और मरने के बाद भी जिसकी रहमत हम को तनहा नही छोड़ती।_*

*कितनों ने खरीदा सोना* *मैने एक 'सुई' खरीद ली* *सपनों को बुन सकूं* *उतनी 'डोरी' खरीद ली* *सबने बदले नोट* *मैंने अपनी ख्वाहिशे बदल ली* *'शौक- ए- जिन्दगी' कम करके* *'सुकून-ए-जिन्दगी' खरीद ली...* *माँ लक्ष्मी से एक ही प्रार्थना है..* *धन बरसे या न बरसे..* *पर कोई गरीब..* *दो रोटी के लिए न तरसे..* *🙏🏻अलविदा दीपावली 🙏🏻* 🌼🌼🌸🌸

🙏🏻 ईश्वर का कर्ज 🙏🏻 एक 78 वर्ष का वृद्ध आदमी बेहोश होकर गिर पड़ा,उसे चिकित्सालय भर्ती करवाया गया तो डॉक्टर ने उसे 24 घंटो के लिए आक्सीजन में रखा,दूसरे दिन जब उसे होश आया तो डॉक्टर ने उसे पचास हजार रुपये का बिल उसके हाथ में थमा दिया जिसे देखकर वह वृद्ध आदमी जोर-जोर से रोने लगा। उसे देखकर डाक्टर ने कहा इसमे रोने वाली बात नहीं है अगर आपके पास अभी इतने पैसे नहीं हैं तो आप धीरे-धीरे करके दे दीजिएगा तब उस आदमी ने कहा कि मैं यह बिल देखकर नहीं रो रहा हूँ मैं तो इसलिए रो रहा हूँ कि मैंने 24 घण्टे आपकी आक्सीजन का इस्तेमाल किया तो आपने 50 हजार का बिल बना दिया तो जिस ईश्वर से मैं 78 वर्षों तक आक्सीजन ले रहा हूँ अगर उसका हिसाब मुझे देना पड़ जाए तो मैं क्या करूँगा ? कभी सोचिए कि ईश्वर के द्वारा दी गई अनमोल साँसों का हम क्या कर्ज उतार सकते हैं,क्या हमने आज तक ईश्वर का धन्यवाद किया नहीं किया है तो आज से ही उसका गुणगान करना शुरू कर दीजिए,धन्यवाद आपका मेरे द्वारा भेजी गई इस पोस्ट को पढने के लिए 🙏👏🏻🙏

जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी । वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी , कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी । उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिये । वहां पहुँचते ही उसे प्रसव पीडा शुरू हो गयी । उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे और बिजली कडकने लगी । उसने दाये देखा , तो एक शिकारी तीर का निशाना , उस की तरफ साध रहा था । घबराकर वह दाहिने मुड़ी , तो वहां एक भूखा शेर, झपटने को तैयार बैठा था । सामने सूखी घास आग पकड चुकी थी और पीछे मुड़ी , तो नदी में जल बहुत था। मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीडा से व्याकुल थी। अब क्या होगा ? क्या हिरनी जीवित बचेगी ? क्या वो अपने शावक को जन्म दे पायेगी ? क्या शावक जीवित रहेगा ? क्या जंगल की आग सब कुछ जला देगी ? क्या मादा हिरनी शिकारी के तीर से बच पायेगी ?क्या मादा हिरनी भूखे शेर का भोजन बनेगी ? वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है। क्या करेगी वो ? हिरनी अपने आप को शून्य में छोड़ , अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी । कुदरत का कारिष्मा देखिये । बिजली चमकी और तीर छोडते हुए , शिकारी की आँखे चौंधिया गयी । उसका तीर हिरनी के पास से गुजरते , शेर की आँख में जा लगा , शेर दहाडता हुआ इधर उधर भागने लगा । और शिकारी , शेर को घायल ज़ानकर भाग गया । घनघोर बारिश शुरू हो गयी और जंगल की आग बुझ गयी । हिरनी ने शावक को जन्म दिया । हमारे जीवन में भी कभी कभी कुछ क्षण ऐसे आते है , जब हम चारो तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं और कोई निर्णय नहीं ले पाते । तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए । अन्तत: यश , अपयश , हार , जीत , जीवन , मृत्यु का अन्तिम निर्णय ईश्वर करता है । हमें उस पर विश्वास कर उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए । कुछ लोग हमारी सराहना करेंगे , कुछ लोग हमारी आलोचना करेंगे । दोनों ही मामलों में हम फायदे में हैं , एक हमें प्रेरित करेगा और दूसरा हमारे भीतर सुधार लाएगा ।। *अच्छा सोचें*👌 *सच्चा सोचें*👍

🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 🌿 एक दिया ऐसा भी हो, जो भीतर तलक प्रकाश करे, एक दिया नश्वर जीवन में, फिर आकर क़ुछ श्वास भरे एक दिया सादा हो इतना, जैसे सरल साधु का जीवन, एक दिया इतना सुन्दर हो, जैसे देवों का उपवन एक दिया जो भेद मिटाये, क्या तेरा -क्या मेरा है, एक दिया जो याद दिलाये, हर रात के बाद सवेरा है एक दिया उनकी खातिर हो, जिनके घर में दिया नहीं , एक दिया उन बेचारों का, जिनको घर ही दिया नहीं एक दिया सीमा के रक्षक, अपने वीर जवानों का एक दिया मानवता रक्षक, चंद बचे इंसानों का ! एक दिया विश्वास दे उनको, जिनकी हिम्मत टूट गयी , एक दिया उस राह में भी हो , जो कल पीछे छूट गयी एक दिया जो अंधकार का , जड़ के साथ विनाश करे , एक दिया ऐसा भी हो , जो भीतर तलक प्रकाश करे। 🌿🌿🌿🌿 🌿🌿🌿🌿🌿 *आपको प्रकाशोत्सव* *“दीपावली ” की* *हार्दिक - मंगलकामना* 🌺🌸🌼🌸🌺 *॥शुभम् भवतु॥*

💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖दीपावली - आदमी है अँधेरा ,अमावस की रात आदमी एक अँधेरा है. आदमी है अमावस की रात. और दिवाली तुम बहार से कितनी ही मनाओ, भीतर का अँधेरा बहार के दीयो से कटता नहीं, कटेगा नहीं. धोखे तुम अपने को कितने ही दो, पछताओगे अंततः. देखते हो, दिवाली हम मनाते है अमावस की रात ! वह हमारे धोखे की कथा है. रात है अमावस की, दीयो की पंक्तिया जला लेते है. पर दीये तो होंगे बाहर. दीये तो भीतर नहीं जा सकते. बाहर की कोई प्रकाश की किरण भीतर प्रवेश नहीं कर सकती. बाहर की पूर्णिमा कितनी ही बनाओ , तुम तो भीतर जानते ही रहोगे कि बुझे हुए दीपक हो. तुम तो भीतर रोते ही रहोगे. तुम्हारी सब मुस्कुराहटें भी तुम्हारे आंसुओ को छुपाने में असमर्थ है. और छुपा भी ले तो सार क्या ? मिटाने में निश्चित असमर्थ है. धोखे छोड़ो ! इस सीधे सत्य को स्वीकार करो कि तुम बुझे हुए दीपक हो. होने की जरुरत नहीं है. होना तुम्हारी नियति भी नहीं है. ऐसा होना ही चाहिए, ऐसा कोई भाग्य का विधान नहीं है. अपने ही कारन तुम बुझे हुए हो. अपने ही कारन चाँद नहीं उगा. अपने ही कारण भीतर प्रकाश नहीं जगा. कहा भूल हो गई है ? कहा चुक हो गई है ? हमारी सारी जीवन-उर्जा बहार की तरफ यात्रा कर रही है. इस बहिर्यात्रा में ही हम भीतर अंधेरे में पड़े है. यह ऊर्जा भीतर की तरफ लौटे तो यही ऊर्जा प्रकाश बनेगी. यह ऊर्जा ही प्रकाश है. तुम्हारा सारा प्रकाश बाहर पड़ रहा है- वृक्षों पर, पर्वतो पर,पहाड़ो पर, लोगो पर. लेकिन तुम एक अपने पर अपनी रोशनी नहीं डालते. सबको देख लेते हो अपने प्रति अंधे रह जाते हो, और सबको देखने से क्या होगा? जिसने अपने को न देखा, उसने कुछ भी न देखा. 🍁🍁