ईश्वर ने दुनिया बनाई। अलग—अलग जातियां बनाईं। हिंदुओं से पूछा: तुम क्या चाहते हो? उन्होंने कहा: गायत्री मंत्र। जैनों से पूछा: तुम क्या चाहते हो? उन्होंने कहा: नमोकार मंत्र। मुसलमानों से पूछा: तुम क्या चाहते हो? उन्होंने कहा: कुरान। ईसाइयों से पूछा: तुम क्या चाहते हो ? ऐसे वह पूछता गया अलग—अलग लोगों से, अलग—अलग देशों से, अलग—अलग जातियों से। और सबसे आखिरी में बनाया उसने अमरीकन। पूछा: तुम क्या चाहते हो। उसने कहा: डालर! ईश्वर थोड़ा हैरान हुआ। उसने कहा: देखो, तुम्हारे सामने ही किसी ने गायत्री, किसी ने गीता, किसी ने कुरान, किसी ने बाइबिल, किसी ने तालमुद, किसी ने नमोकार, मंत्र, तंत्र, यंत्र, ध्यान, प्रार्थना, पूजा, ये सब चीजें मांगी—और तू मांगता है डालर! अमरीकन ने कहा: फिक्र छोड़ो, सिर्फ डालर मुझे चाहिए और सब मंत्रत्तंत्र जानने वाले लोग अपने—आप डालर के पीछे चले आएंगे। वैसा ही हुआ भी है। सारी दुनिया अमरीका की तरफ भागी जा रही है। अब काबा में काबा नहीं है और काशी में काशी नहीं है। काशी—काबा के सब पंडित—पुरोहित तुम्हें कैलिफोर्निया में मिलेंगे! भयभीत आदमी अगर भय के कारण गायत्री भी मांग ले तो उसकी गायत्री खरीदी जा सकती है। भय के कारण अगर कोई भगवान का नाम लेता हो तो उसका भगवान भी खरीदा जा सकता है। क्योंकि भयभीत मूलतः लोभी होता है। लोभी ही भयभीत होता है।

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