Posts

मुफ़्त खोरी

मुफ्तखोरी ------------ देश के राजनीतिक हलकों में यह शब्द पिछले तीन चार दिनों से गूंज रहा है। भाजपा के नेता, उनके समर्थक और कुछ दक्षिणपंथी झुकाव वाले पत्रकार साथी खास तौर पर इस शब्द को दिल्ली के वोटरों को अपमानित करने के लिये इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी और महिलाओं के लिये मुफ्त यात्रा के लालच में आम आदमी पार्टी को वोट दे दिया।  मगर क्या यह वाकई मुफ्तखोरी है, इसे समझने के लिए जरा इन आंकड़ों पर गौर कीजिए। दिल्ली में 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने में सरकार हर साल 1720 करोड़ रुपये खर्च करती है, पानी मुफ्त देने का खर्च 400 करोड़ रुपये सालाना है और महिलाओं को मुफ्त यात्रा कराने का खर्च 140 करोड़ रुपये है। यानी इस कथित मुफ्तखोरी का कुल बजट 2260 करोड़ रुपये है। यानी दो करोड़ की आबादी वाली दिल्ली के हर व्यक्ति को सरकार सिर्फ 1130 रुपये की मुफ्तखोरी करा रही है। और इस मुफ्तखोरी को कुछ इस तरह प्रचारित किया जा रहा है कि सारा खजाना लुटाया जा रहा है। इसके बनिस्पत इस आंकड़े पर गौर कीजिए। एनडीए सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में कुल 6 लाख करोड़ की कर्जमाफी की थी। इसमें किसानों का...
पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं - 1. युधिष्ठिर    2. भीम    3. अर्जुन 4. नकुल।      5. सहदेव ( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है ) यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी । वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र….. कौरव कहलाए जिनके नाम हैं - 1. दुर्योधन      2. दुःशासन   3. दुःसह 4. दुःशल        5. जलसंघ    6. सम 7. सह            8. विंद         9. अनुविंद 10. दुर्धर्ष       11. सुबाहु।   12. दुषप्रधर्षण 13. दुर्मर्षण।   14. दुर्मुख     15. दुष्कर्ण 16. विकर्ण     17. शल       18. सत्वान 19. सुलोचन   20. चित्र       21. उपचित्र 22. चित्राक्ष  ...

क्या कभी तुम भीगए हो उस गली में?जहाँ चाँद को छुकरमीरा दीवानी हुई..जहाँ कदम से कदम मिलाकरसंग चलते है तारेजहाँ सूरज समेट लेता हैचाँदनी को अपनी बाहों मेंऔर किरण संग मुस्कुरा करनिकलती है जिंदगी..क्या गए हो तुम वहाँ..जहाँ है गोपियों का स्थल वहाँ की हवाओ में स्वर है..जो पी ले वहाँ का पानीहो जाता है मगन प्रेम मेंजहाँ दिल की ज़मीन परभीगी-भीगी सी चाहत उगती हैलहराता है उसका ही चेहराहर मुस्कुराते हुए फूलों मेंजहा जुगनुओं की बस्ती मेंआज भी वो मुस्कुराता है..जिसने कहा था..तुम जब भी मुझे पुकारोगेमैं जरुर आऊँगा..जहाँ बादलों पर पड़ी,सिलवटों को देख..उसके होने का सबूत मिलता हैक्या कभी गए हो तुम,उस गली में..जिसके चारों और..मैं तुम्हें देखता हूँ..तुम्हारे हर शब्दों के जादू से..बिखर जाता हूँजब भी मेरी ज़मी परतुम्हारे नाम का चाँद उगता हैक्या गए हो तुम भी कभी वहाँ?जहाँ रुह अपनी देह बदलकर,नया जीवन रचती है..

*पाँच सीढ़ियाँ संबंधों की...देखना.. अच्छा लगना..चाहना.. पाना..यह चार बहुत सरल सीढ़ियाँ हैं**सबसे कठिन पाँचवी सीढ़ी है..."निभाना"* *🙏🏻🌹||जय श्री मदन जी ||🌹🙏🏻*

जुड़े हम सब से है, पर डूबे सिर्फ तुम में हैं . . .

उनकी आंखों से मुहब्बतजो बयां होती हैइक कहानी सी इबादत कीशुरु होती है। होश में आते ही मदहोशीचढ़ने लगती हैजब मुलाकात खुद से हीखुद की होती है।खाना-ए-दिल में खनकती हैअनाहत की धुनजैसे बरसात सी शबनम कीकहीं होती है।कितना पुरनूर हो उठता हैसफर मंजिल काचांदनी रात सितारोंसे जड़ी होती है।कौन सा राज-ए-हकीकतनहीं खुल जाता हैचुप्पी में डूब के जोबात कभी होती है।जिंदगी, जिंदगी हो गईमिल के ओशो सेबिना मुर्शिद के कहींजिंदगी भी होती है। 🌹🌹🌹