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उनकी आंखों से मुहब्बतजो बयां होती हैइक कहानी सी इबादत कीशुरु होती है। होश में आते ही मदहोशीचढ़ने लगती हैजब मुलाकात खुद से हीखुद की होती है।खाना-ए-दिल में खनकती हैअनाहत की धुनजैसे बरसात सी शबनम कीकहीं होती है।कितना पुरनूर हो उठता हैसफर मंजिल काचांदनी रात सितारोंसे जड़ी होती है।कौन सा राज-ए-हकीकतनहीं खुल जाता हैचुप्पी में डूब के जोबात कभी होती है।जिंदगी, जिंदगी हो गईमिल के ओशो सेबिना मुर्शिद के कहींजिंदगी भी होती है। 🌹🌹🌹
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