*एक दिन उम्र ने तलाशी ली,* *तो जेब से लम्हे बरामद हुए* *कुछ ग़म के थे,_* *कुछ नम से थे,_* *कुछ टूटे हुए थे,_* *जो सही सलामत मिले..* *वो बचपन के थे..!!* *"बचपन" कितना खूबसूरत था,* *तब"खिलौने जिंदगी"थे* *आज "जिंदगी खिलौना" है* *🍀🍀🙏🙏शुभ प्रभात🙏🙏🍀🍀*

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