*_मोती मेरे अंदर में थे.._* *_मैं खोजता रहा सागर में.._* *_मन के तल पर तो उतर न सका._* *_डूब जाता जग की गागर में.._* *_अगर पनाह ना मिलती.._* *_सतगुरु के आंचल में._*

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