भारत के बड़े कलाकार और खिलाड़ी जो किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे है या भूतकाल में उन्हें ये बीमारी हो चुकी है। पहले ध्यान से ये लिस्ट देख लीजिए👇🏼 *सोनाली बेंद्रे* - कैंसर *अजय देवगन* - लिट्राल अपिकोंडिलितिस (कंधे की गंभीर बीमारी) *इरफान खान* - कैंसर *मनीषा कोइराला* - कैंसर *युवराज सिंह* - कैंसर *सैफ अली खान* - हृदय घात *रितिक रोशन* - ब्रेन क्लोट *अनुराग बासु* - खून का कैंसर *मुमताज* - ब्रेस्ट कैंसर *शाहरुख खान* - 8 सर्जरी (घुटना, कोहनी, कंधा आदि) *ताहिरा कश्यप* (आयुष्मान खुराना की पत्नी) - कैंसर *राकेश रोशन* - गले का कैंसर *लीसा राय* - कैंसर *राजेश खन्ना* - कैंसर ये वो लोग है या थे। जिनके पास पैसे की कोई कमी नहीं है। खाना हमेशा डाइटीशियन की सलाह से खाते है। दूध भी ऐसी गाय या भैंस का पीते है जो AC में रहती है और बिसलेरी का पानी पीती है। जिम भी जाते है। रेगुलर शरीर के सारे टेस्ट करवाते है। सबके पास अपने हाई क्वालिफाइड डॉक्टर है। अब सवाल उठता है। कि आखिर अपने शरीर की इतनी देखभाल के बावजूद भी इन्हें इतनी गंभीर बीमारी अचानक कैसे हो गई।🥺 क्योंकि ये प्राक्रतिक चीजों का इस्तेमाल बहुत कम करते है। या मान लो बिल्कुल भी नहीं करते। जैसा हमें प्रकृति ने दिया है उसे उसी रूप में ग्रहण करो वो कभी नुकसान नहीं देगा। कितनी भी फ्रूटी पी लो वो शरीर को आम के गुण नहीं दे सकती। अगर हम इस धरती को प्रदूषित ना करते तो धरती से निकला पानी बोतल बन्द पानी से लाख गुण अच्छा था। *आप एक बच्चे को जन्म से ऐसे स्थान पर रखो जहां एक भी कीटाणु ना हो।* *बड़ा होने से बाद उसे सामान्य जगह पर रहने के लिए छोड़ दो* *वो बच्चा एक सामान्य सा बुखार भी नहीं झेल पाएगा* क्योंकि उसके शरीर का तंत्रिका तंत्र कीटाणुओ से लड़ने के लिए विकसित ही नही हो पाया। कंपनियों ने लोगो को इतना डरा रखा है। मानो एक दिन साबुन से नहीं नहाओगे तो तुम्हे कीटाणु घेर लेंगे और शाम तक पक्का मर जाओगे। समझ नहीं आता हम कहां जी रहे है। एक दूसरे से हाथ मिलाने के बाद लोग सेनिटाइजर लगाते हुए देखे है मैंने। इंसान सोच रहा है। पैसों के दम पर हम जिंदगी जियेंगे। कभी गौर किया है🤔 👇🏼पिज़्ज़ा बर्गर वाले शहर के लोगों की एक बुखार में धरती घूमने लगती है। और वहीं दूध दही छाछ के शौकीन गांव के बुजुर्ग लोगों का वही बुखार बिना दवाई के ठीक हो जाता है। क्योंकि उनकी डॉक्टर प्रकृति है। क्योंकि वे पहले से ही सादा खाना खाते आए है। *प्राक्रतिक चीजों को अपनाओ* *विज्ञान के द्वारा लैब में तैयार हर एक वस्तु शरीर के लिए नुकसानदायक है* पैसे से कभी भी स्वस्थ और खुशियां नहीं मिलती। * धन्यवाद * आगे आपकी समझ ।

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🌷 *राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर*🌷 ♨ *।। कोई अर्थ नहीं।।* ♨ नित जीवन के संघर्षों से जब टूट चुका हो अन्तर्मन, तब सुख के मिले समन्दर का *रह जाता कोई अर्थ नहीं*।। जब फसल सूख कर जल के बिन तिनका -तिनका बन गिर जाये, फिर होने वाली वर्षा का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन यदि दुःख में साथ न दें अपना, फिर सुख में उन सम्बन्धों का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* छोटी-छोटी खुशियों के क्षण निकले जाते हैं रोज़ जहाँ, फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* मन कटुवाणी से आहत हो भीतर तक छलनी हो जाये, फिर बाद कहे प्रिय वचनों का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* सुख-साधन चाहे जितने हों पर काया रोगों का घर हो, फिर उन अगनित सुविधाओं का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* :::बहुत सुंदर मार्मिक ह्रदयस्पर्शी कविता

🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 *🔥सबसे ऊँची प्रार्थना🔥* *एक व्यक्ति जो मृत्यु के करीब था, मृत्यु से पहले अपने बेटे को चाँदी के सिक्कों से भरा थैला देता है और बताता है की "जब भी इस थैले से चाँदी के सिक्के खत्म हो जाएँ तो मैं तुम्हें एक प्रार्थना बताता हूँ, उसे दोहराने से चाँदी के सिक्के फिर से भरने लग जाएँगे । उसने बेटे के कान में चार शब्दों की प्रार्थना कही और वह मर गया । अब बेटा चाँदी के सिक्कों से भरा थैला पाकर आनंदित हो उठा और उसे खर्च करने में लग गया । वह थैला इतना बड़ा था की उसे खर्च करने में कई साल बीत गए, इस बीच वह प्रार्थना भूल गया । जब थैला खत्म होने को आया तब उसे याद आया कि "अरे! वह चार शब्दों की प्रार्थना क्या थी ।" उसने बहुत याद किया, उसे याद ही नहीं आया ।अब वह लोगों से पूँछने लगा । पहले पड़ोसी से पूछता है की "ऐसी कोई प्रार्थना तुम जानते हो क्या, जिसमें चार शब्द हैं । पड़ोसी ने कहा, "हाँ, एक चार शब्दों की प्रार्थना मुझे मालूम है, "ईश्वर मेरी मदद करो ।" उसने सुना और उसे लगा की ये वे शब्द नहीं थे, कुछ अलग थे । कुछ सुना होता है तो हमें जाना-पहचाना सा लगता है । फिर भी उसने वह शब्द बहुत बार दोहराए, लेकिन चाँदी के सिक्के नहीं बढ़े तो वह बहुत दुःखी हुआ । फिर एक फादर से मिला, उन्होंने बताया की "ईश्वर तुम महान हो" ये चार शब्दों की प्रार्थना हो सकती है, मगर इसके दोहराने से भी थैला नहीं भरा । वह एक नेता से मिला, उसने कहा "ईश्वर को वोट दो" यह प्रार्थना भी कारगर साबित नहीं हुई । वह बहुत उदास हुआ उसने सभी से मिलकर देखा मगर उसे वह प्रार्थना नहीं मिली, जो पिताजी ने बताई थी । वह उदास होकर घर में बैठा हुआ था तब एक भिखारी उसके दरवाजे पर आया । उसने कहा, "सुबह से कुछ नहीं खाया, खाने के लिए कुछ हो तो दो ।" उस लड़के ने बचा हुआ खाना भिखारी को दे दिया । उस भिखारी ने खाना खाकर बर्तन वापस लौटाया और ईश्वर से प्रार्थना की, *"हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद ।" अचानक वह चौंक पड़ा और चिल्लाया की "अरे! यही तो वह चार शब्द थे ।" उसने वे शब्द दोहराने शुरू किए-"हे ईश्वर तुम्हारा धन्यवाद"........और उसके सिक्के बढ़ते गए... बढ़ते गए... इस तरह उसका पूरा थैला भर गया ।इससे समझें की जब उसने किसी की मदद की तब उसे वह मंत्र फिर से मिल गया । "हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद ।" यही उच्च प्रार्थना है क्योंकि जिस चीज के प्रति हम धन्यवाद देते हैं, वह चीज बढ़ती है । अगर पैसे के लिए धन्यवाद देते हैं तो पैसा बढ़ता है, प्रेम के लिए धन्यवाद देते हैं तो प्रेम बढ़ता है । ईश्वर या गुरूजी के प्रति धन्यवाद के भाव निकलते हैं की ऐसा ज्ञान सुनने तथा पढ़ने का मौका हमें प्राप्त हुआ है । बिना किसी प्रयास से यह ज्ञान हमारे जीवन में उतर रहा है वर्ना ऐसे अनेक लोग हैं, जो झूठी मान्यताओं में जीते हैं और उन्हीं मान्यताओं में ही मरते हैं । मरते वक्त भी उन्हें सत्य का पता नहीं चलता । उसी अंधेरे में जीते हैं, मरते हैं ।* *ऊपर दी गई कहानी से समझें की "हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद" ये चार शब्द, शब्द नहीं प्रार्थना की शक्ति हैं । अगर यह चार शब्द दोहराना किसी के लिए कठिन है तो इसे तीन शब्दों में कह सकते हैं, "ईश्वर तुम्हार धन्यवाद ।" ये तीन शब्द भी ज्यादा लग रहे हों तो दो शब्द कहें, "ईश्वर धन्यवाद !" और दो शब्द भी ज्यादा लग रहे हों तो सिर्फ एक ही शब्द कह सकते हैं, "धन्यवाद ।" आइए, हम सब मिलकर एक साथ धन्यवाद दें उस ईश्वर को, जिसने हमें मनुष्य जन्म दिया और उसमें दी दो बातें - पहली "साँस का चलना" दूसरी "सत्य की प्यास ।" यही प्यास हमें खोजी से भक्त बनाएगी । भक्ति और प्रार्थना से होगा आनंद, परम आनंद, तेज आनंद ।* *सभी को धन्यवाद*🌼🌸🌼 🐄🐄🐄🐄🙏🐄🐄🐄🐄