☕☕ *क्रोध, गुस्सा, नफरत* *ये सब धीमा ज़हर हैं....* *इन्हें पीते हम खुद हैं* *और सोचते हैं मरेगा कोई दूसरा!* इन तीनों को अपने जीवन से निकाल कर देखो तो यह जीवन हसीन लगेगा *शुभ प्रभात*

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