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कमल को पंकज कहते हैं।
पंक यानी कीचड़;
कीचड़ से जो जन्मता है
उसका नाम पंकज।
कितना अदभुत रूपांतरण होता है।
कहां कीचड़, गंदी कीचड़,
एक गंदी तलैया तालाब की,
और कहां फिर यह प्यारा कमल!
इस देश ने तो कमल के ऊपर
किसी फूल को नहीं रखा।
इसलिए विष्णु की नाभि
में कमल को उगाया है।
इसलिए बुद्ध को कमल पर बिठाया है।
कमल इस देश के प्राणों में बसा है।
कमल की कुछ खूबी है,
कमल में कुछ जादू है,
जो किसी फूल में नहीं है।
वह जादू क्या है?
वह जादू यह है
कि कमल बड़ी अशुद्ध
कीचड़ से उठता है,
और इतना शुद्ध,
इतना निर्विकार;
चमत्कार है कमल!
कमल रहस्यपूर्ण है।
कमल इस जगत में
रूपांतरण का प्रतीक है।
अदभुत रूपांतरण का।
सारा रसायन बदल गया।
कहां कीचड़ थी गंदगी से भरी,
बदबू से भरी,
सोच भी न सकते थे कि
इसमें कमल पैदा हो सकता है।
जिसने जाना नहीं है कि
कमल कीचड़ में पैदा होता है,
वह कमल को देखकर कभी
कल्पना भी नहीं कर सकता है
कि कीचड़ से इसका
कोई संबंध हो सकता है।
एक दाग भी तो नहीं होता है
कमल पर कीचड़ का।
और सुरभि,
और रंग अनूठा और खिलावट!
इस पृथ्वी पर कमल से कोमल और क्या है?
तुमने प्रेम का आधा ही हिस्सा देखा।
जिसने प्रेम में सिर्फ कामवासना देखी,
उसने कीचड़ देखी।
जिसने प्रेम में सिर्फ संभोग देखा,
उसने कीचड़ देखी।
और जिसने प्रेम में समाधि देखी,
उसने कमल देखा।
जिसने प्रेम में भक्ति देखी,
उसने कमल देखा।
उठो, कीचड़ से कमल की यात्रा करो!
🌹🌹🔥🔥✍
अथातो भक्ति जिज्ञासा ( भाग 1 )
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