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प्रातः वन्दन
जय श्री मदन जी
अनादि काल से अनन्त समय तक
वही शक्ति सर्वोच्च कहलाये
जो व्याप्त कण कण में सृष्टि के
सृष्टि सन्चालन नियम बनाये
बान्धा निश्चित गति दिशा समय मे
जीव निर्जीव आधार सजाये
जो मानव के अन्तर्क्रियाओं को
स्वयं अपनी इच्छा से चलाये
पाचन रक्त और श्वांस प्रणाली
अंश उसी का आत्मा में समाए
समय समय महानात्मा धरती पर
उसी शक्ति की पहचान कराए
जिसका जितना म्यार रहा
उससे प्रदर्शन शक्ति करवाये
गुण नियम शक्तियां उसके द्वारा
एक सीमा तक सिद्ध कराए
सदव्यवहार और नेककर्म का
जीवन मे उपयोग बताये
जो चाहें स्वयं को करें औरों से
पुण्य मात्र यही सत्य कहाये
विपरीत इसी के जो भी कर्म हो
पाप अधर्म वही कहलाये
कर्मफल का आधार यही है
सुख दुःख कारण यहीं छिपाये
प्रथम स्थान हम दें ईश्वर को सदा ही
जो स्वांसों को तन में महकाये
न्यायप्रिये करुनानिधि स्वामी
हमे सदा ही सदमार्ग दिखाएं
क्षमाशील दोषों को हमारे
दूर करें सदमार्ग दिखाएं
रहे सदा प्रभु सिमरन तुम्हारा
इच्छा तिहारी को हम पा जाए
नित्य समर्पित हो चरणों में
अरदास सदा प्रभु तेरी हम गाएँ
🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏
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