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छोटे पत्रकार आज भी गरीब हैं और गैरतमंद भी। पत्रकार आजकल बड़ा कॉर्पोरेट की कठपुतली बन के ही होता है। ज्यादातर बड़े पत्रकार को देखो राजनेताओं की तरह करोड़ो की सम्पत्ति और मंहगी गाड़ियां भोग करते है जो उनकी मेहनत राशि से मेल नही खाती। अब बड़े बनोगे, कठपुतली बनोगे, रातोरात अमीर बनोगे, चाहे वो पुण्यप्रसुन हो, विनोद दुआ हों, अजित अंजुम हो तो कभी कभी कॉरपोरेट की मार तो झेलनी ही पड़ेगी। आखिर खसम भी तो वही हैं। बड़े पत्रकारों, बड़े नेताओं और बड़े अफसरों की संपत्ति जांच लो स्विश बैंक यही मिल जाएगा।
चोर ऑफिसर, बेईमान नेता और बिका हुआ मीडिया यही आज का हिंदुस्तान है।
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