किसी ने क्या खूब लिखा। *हे पार्थ! मै ऋषियों मे 'आसाराम' हूँ!, संतो मे 'रामरहीम' हूँ! चोरों मे 'विजय माल्या' हूँ! अमीरों मे 'मुकेश अम्बानी' हूँ! स्थानों मे 'गोधरा' हूँ! शब्दों मे 'मितरौं' हूँ! हिन्दुओं मे 'राममन्दिर' हूँ! मुसलमानों मे 'तीन तलाक' हूँ! यूपी मे 'गंगा का बेटा' हूँ! गुजरात मे 'पटेल का चेला' हूँ! महाराष्ट्र मे 'शिवाजी का शिष्य' हूँ! देवों मे 'बाबा रामदेव' हूँ! सिंहों मे 'गिरिराज सिंह' हूँ! कानूनों मे 'नोटबन्दी' हूँ! रंगो मे 'भगवा' हूँ! टैक्सो मे 'GST' हूँ! मशीनों मे 'EVM' हूँ! वकीलों मे 'सुब्रमण्यम स्वामी' हूँ! वक्ताओं मे 'संबित पात्रा' हूँ! ऐंकरों मे 'सुधीर चौधरी' हूँ! चैनलों मे 'ZEE NEWS' हूँ! हे महाबाहो! मै कहने को तो 'विकास' हूँ, पर वास्तव मे* . *मै ही 'पकौड़ा' हूँ*

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