Skip to main content
पिछले दस दिनों में हर राज्य के हर "बैंक" के सैंकड़ों "बैंक कर्मचारियों" और "अफसरों" से बात कर गया हूं। उनकी बातचीत से जो "सरकारी बैंकों" के भीतर का जो सच जाना है, वो भयावह है। आप बुज़दिल इंडिया चाहते हैं या बहादुर इंडिया ?
Popular posts from this blog
Comments
Post a Comment