वो बाबा किसी के घर नहीं गया था किसी को बुलाने और कहने की अपनी लड़की मुझे दे दो । बाबा ने जो किया गलत किया, लेकिन ये लड़कियाँ जिनकी बेटियाँ है क्या इनके अच्छे बुरे की जिम्मेदारी उन माँ बाप की नहीं थी वो कैसे अपनी बेटी को उसके आश्रम में छोड़ आये ? भगवान के नाम पर । लड़कियों से छुटकारा पाने का एक शातिर तरीका अपना रखा है कुछ लोगों ने । धर्म के नाम पर कुछ भी कर लो, कोई कुछ कह ही नहीं सकता । लड़की शाम सहेलियों के साथ घर से बाहर जाने को या पिक्चर जाने को बोले तो घरवालो के सीने पर सांप लोट जाता है, छत की बालकनी में खड़ी हो जाए तो पूरे मोहल्ले में चर्चे होने लगते हैं, किसी से हंस कर बात कर ले तो मां-बाप शर्मिंदा महसूस करते हैं, रूढ़ियाँ बीच मे आ जाती है, परिवार की इज्जत पर बन आती है, - लेकिन उसी लड़की को साध्वी बनाकर ऐसे ढोंगियों के हवाले करते माँ बाप की इज्जत में बट्टा नहीं लगता ? - अपने कलेजे के टुकड़े को बिना उसकी मर्जी के अपने से दूर कर किसी भेड़िए के पास छोड़ आते हैं तब तब इनकी आत्मा नहीं कचोटती ? "ढोंगी बाबओं से भी पहले ऐसे भक्तों को जेल में डालना चाहिए, ये सब बाबा इन्ही भक्तों के खड़े किए हुए राक्षस हैं" ये राक्षस धर्म नाम की अफीम चटाते रहते हैं और लोग पागल हुए ,जयकारे लगाते घूमते रहते हैं । जितनी सजा बाबा को मिले उससे अधिक सज़ा ऐसे माँ बाप को भी मिलनी चाहिए । अपील" भारत सरकार में अगर हिम्मत है तो उसको चाहिए एक ऐसा बिल पास करें ।जिससे हमारे मन्दिरों- मस्जिदों के चढ़ावो का 50% हर माह हमारे देश का कर्ज उतारने एवं कर्ज से मरते किसानों पर सर्वे कराकर मानक के अनुकूल उनको सहायता दे। जिससे किसानों की दशा में सुधार हो और उस पैसे को देस के विकाश पर खर्च करे ख़ासकर शिक्षा एवंम स्वास्थ। प्राप्त सूचना के आधार पर भारत में कुछ मन्दिरों की एक महीना की कमाई के ये आंकड़े आपको सोचने को मजबूर कर देंगे- 1. *तिरुपति बालाजी* 1 हजार 325 करोड़ 2. *वैष्णौंदेवी* 400 करोड़ 3. *रामकृष्ण मिशन* 200 करोड़ 4. *जगनाथपुरी* 160 करोड़ 5. *शिर्डी सांईबाबा* 100 करोड़ 6. *द्वारकाधीश* 50 करोड़ 7. *सिद्धी विनायक* 27 करोड़ 8. *वैधनाथ धाम देवगढ* 40 करोड़ 9. *अंबाजी गुजरात* 40 करोड़ 10. *त्रावणकोर* 35 करोड़ 11. *अयोध्या* 140 करोड़ 12. *काली माता मन्दिर कोलकाता* 250 करोड़ 13. *पदमनाभन* 5 करोड़ 14. *सालासर बालाजी* 300 करोड़ इसके अलावा *भारत के छोटे बड़े मन्दिरों की सालाना आय 280 लाख करोड़*और *भारत का कुल बजट 15 लाख करोड़।* *अगर हर आदमी गरीब किसानों की मदद करे तो भारत से गरीबी महज साल भर मे हट सकती है। याद रहे भगवान तो केवल आपके प्यार का भूखा है, उसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता। *एक तरफ़ तो भगवान को दाता कहते हो दूसरी तरफ़ मंदिरो मे पैसे चढा कर उसी भगवान को भिखारी बना रखा है l* *वैसे भी आपके उस पैसे से भगवान नही भगवान के ठेकेदार मौज उड़ा रहे है l* अगर आप सहमत है और भारत से गरीबी खत्म करना चाहते है ...तो सिर्फ पढ़ कर डिलीट ना करें इस पर अमल करने की कोशिश करें । इस पर आम सहमति बनाने की कोशिश करें । ये एक ऐसा मुद्दा है जिसे कोई भी नेता या राजनीतिक दल उठाने की जुर्रत नहीं करेगा।केवल और केवल आप और हम ही इस जागरूकता अभियान को आगे बढ़ा सकते है । कोशिश तो कीजिए ।धन्यवाद ।🙏

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🌷 *राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर*🌷 ♨ *।। कोई अर्थ नहीं।।* ♨ नित जीवन के संघर्षों से जब टूट चुका हो अन्तर्मन, तब सुख के मिले समन्दर का *रह जाता कोई अर्थ नहीं*।। जब फसल सूख कर जल के बिन तिनका -तिनका बन गिर जाये, फिर होने वाली वर्षा का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन यदि दुःख में साथ न दें अपना, फिर सुख में उन सम्बन्धों का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* छोटी-छोटी खुशियों के क्षण निकले जाते हैं रोज़ जहाँ, फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* मन कटुवाणी से आहत हो भीतर तक छलनी हो जाये, फिर बाद कहे प्रिय वचनों का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* सुख-साधन चाहे जितने हों पर काया रोगों का घर हो, फिर उन अगनित सुविधाओं का *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।* :::बहुत सुंदर मार्मिक ह्रदयस्पर्शी कविता

🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 *🔥सबसे ऊँची प्रार्थना🔥* *एक व्यक्ति जो मृत्यु के करीब था, मृत्यु से पहले अपने बेटे को चाँदी के सिक्कों से भरा थैला देता है और बताता है की "जब भी इस थैले से चाँदी के सिक्के खत्म हो जाएँ तो मैं तुम्हें एक प्रार्थना बताता हूँ, उसे दोहराने से चाँदी के सिक्के फिर से भरने लग जाएँगे । उसने बेटे के कान में चार शब्दों की प्रार्थना कही और वह मर गया । अब बेटा चाँदी के सिक्कों से भरा थैला पाकर आनंदित हो उठा और उसे खर्च करने में लग गया । वह थैला इतना बड़ा था की उसे खर्च करने में कई साल बीत गए, इस बीच वह प्रार्थना भूल गया । जब थैला खत्म होने को आया तब उसे याद आया कि "अरे! वह चार शब्दों की प्रार्थना क्या थी ।" उसने बहुत याद किया, उसे याद ही नहीं आया ।अब वह लोगों से पूँछने लगा । पहले पड़ोसी से पूछता है की "ऐसी कोई प्रार्थना तुम जानते हो क्या, जिसमें चार शब्द हैं । पड़ोसी ने कहा, "हाँ, एक चार शब्दों की प्रार्थना मुझे मालूम है, "ईश्वर मेरी मदद करो ।" उसने सुना और उसे लगा की ये वे शब्द नहीं थे, कुछ अलग थे । कुछ सुना होता है तो हमें जाना-पहचाना सा लगता है । फिर भी उसने वह शब्द बहुत बार दोहराए, लेकिन चाँदी के सिक्के नहीं बढ़े तो वह बहुत दुःखी हुआ । फिर एक फादर से मिला, उन्होंने बताया की "ईश्वर तुम महान हो" ये चार शब्दों की प्रार्थना हो सकती है, मगर इसके दोहराने से भी थैला नहीं भरा । वह एक नेता से मिला, उसने कहा "ईश्वर को वोट दो" यह प्रार्थना भी कारगर साबित नहीं हुई । वह बहुत उदास हुआ उसने सभी से मिलकर देखा मगर उसे वह प्रार्थना नहीं मिली, जो पिताजी ने बताई थी । वह उदास होकर घर में बैठा हुआ था तब एक भिखारी उसके दरवाजे पर आया । उसने कहा, "सुबह से कुछ नहीं खाया, खाने के लिए कुछ हो तो दो ।" उस लड़के ने बचा हुआ खाना भिखारी को दे दिया । उस भिखारी ने खाना खाकर बर्तन वापस लौटाया और ईश्वर से प्रार्थना की, *"हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद ।" अचानक वह चौंक पड़ा और चिल्लाया की "अरे! यही तो वह चार शब्द थे ।" उसने वे शब्द दोहराने शुरू किए-"हे ईश्वर तुम्हारा धन्यवाद"........और उसके सिक्के बढ़ते गए... बढ़ते गए... इस तरह उसका पूरा थैला भर गया ।इससे समझें की जब उसने किसी की मदद की तब उसे वह मंत्र फिर से मिल गया । "हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद ।" यही उच्च प्रार्थना है क्योंकि जिस चीज के प्रति हम धन्यवाद देते हैं, वह चीज बढ़ती है । अगर पैसे के लिए धन्यवाद देते हैं तो पैसा बढ़ता है, प्रेम के लिए धन्यवाद देते हैं तो प्रेम बढ़ता है । ईश्वर या गुरूजी के प्रति धन्यवाद के भाव निकलते हैं की ऐसा ज्ञान सुनने तथा पढ़ने का मौका हमें प्राप्त हुआ है । बिना किसी प्रयास से यह ज्ञान हमारे जीवन में उतर रहा है वर्ना ऐसे अनेक लोग हैं, जो झूठी मान्यताओं में जीते हैं और उन्हीं मान्यताओं में ही मरते हैं । मरते वक्त भी उन्हें सत्य का पता नहीं चलता । उसी अंधेरे में जीते हैं, मरते हैं ।* *ऊपर दी गई कहानी से समझें की "हे ईश्वर ! तुम्हारा धन्यवाद" ये चार शब्द, शब्द नहीं प्रार्थना की शक्ति हैं । अगर यह चार शब्द दोहराना किसी के लिए कठिन है तो इसे तीन शब्दों में कह सकते हैं, "ईश्वर तुम्हार धन्यवाद ।" ये तीन शब्द भी ज्यादा लग रहे हों तो दो शब्द कहें, "ईश्वर धन्यवाद !" और दो शब्द भी ज्यादा लग रहे हों तो सिर्फ एक ही शब्द कह सकते हैं, "धन्यवाद ।" आइए, हम सब मिलकर एक साथ धन्यवाद दें उस ईश्वर को, जिसने हमें मनुष्य जन्म दिया और उसमें दी दो बातें - पहली "साँस का चलना" दूसरी "सत्य की प्यास ।" यही प्यास हमें खोजी से भक्त बनाएगी । भक्ति और प्रार्थना से होगा आनंद, परम आनंद, तेज आनंद ।* *सभी को धन्यवाद*🌼🌸🌼 🐄🐄🐄🐄🙏🐄🐄🐄🐄