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हाथ में चंद धागे लपेट लेने से हमारी जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। हम अपनी आत्मा से पूछें कि हमने बहनों को कितनी आर्थिक सुरक्षा दी है? क्या हम उन्हें पैतृक सम्पत्ति का हक दे रहे हैं? अगर नहीं तो हाथ में धागा लपेटने की सांकेतिक सुरक्षा का हजारों वर्षों का परिणाम हमारे सामने है।
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