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*यहां सब सपने ही सपने हैं । जिसको यह दिखायी पड़ गया कि बाहर कुछ भी नहीं है , वही अंतर की खोज पर निकलता है । बाहर से हारा हुआ ही भीतर जाता है । हारे को हरिनाम ! इसलिए हार बड़ा सौभाग्य है , जीत बड़ी महंगी पड़ती है । इस दुनिया में जो सफल हो जाते हैं , वे चूक जाते हैं । इस दुनिया में सफल होना महंगा सौदा है । धन मिल गया , पद मिल गया , प्रतिष्ठा मिल गयी , इतरा गये , अकड़ गये , मदमस्त हो गये — चूक गये.....!*
*धन्य हैं वे जो हार जाते हैं ; जिन्हें न पद न प्रतिष्ठा न सफलता — कुछ भी नहीं मिलता । धन्य हैं वे , अगर समझ पायें तो । अगर अपनी धन्यता को पहचान पायें तो । अगर देख पायें कि कुछ भी नहीं मिलता । सब घरौंदे फूट जाते हैं । जिनको ऐसा दिखायी पड़ जाये , उनके जीवन में क्रांति का अपूर्व क्षण आ गया......!!
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