Skip to main content
प्रातः वन्दन
जय श्री मदन जी
रंग रूप से सदा मुक्त जो
शक्ति रूप है अपरम्पारा
नहीं सीमित शब्दों बोलों में
वो सर्वरूपणी निराकारा।।
सबकुछ रचा युग्म सत्य में
जीवन मृत्यु सुबह सकारा।।
मृत्यु हीन भी लोक सृष्टि में
ज्ञान प्रकाश जिसका अधारा।।
नहीं असम्भव ईश्वर को कुछ भी
सर्वसमर्थ निर्भव औ निरवैरा।L
वर्णित शास्त्रों से कहीं श्रेष्ठ जो
सर्वोच्च शक्ति का सकल पसारा।।
सत्य मात्र एक ही शक्ति सृष्टि में
सर्व्याप्त भू अम्बर जल वायु
सारा।।
मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी सृष्टि का
है असमर्थ निर्माण ये सारा
जैसे सूर्य और किरण की रश्मि
ईश्वर वेअन्त और वेअन्त है माया
है द्विज किन्तु अभेद्य जगत में
शक्ति परम का परम पसारा।।
है धर्म प्रथम मानष का जग में
पहचान करे क्यों जगत वो आया।।
रहे समर्पित उस शक्ति के प्रति
जिसने कर्मफल का नियम बनाया।।
जाने क्या है ईश्वर सच्चाई
क्या भक्ति क्या भेद अपारा।।
करे सदा व्यवहार औरों से वो
जो चाहे स्वयं को सर्वेसरा
भयमुक्त हो जाता सत्य से
आत्म ज्ञान के खोले द्वारा
हर पल स्मरण करे ईश का
रहे उसी का शुक्र गुजारां
नित्य प्रातः नमन करूँ मैं
करो दयामय भव से हमें पारा
🙏👏🙏👏🙏👏🙏👏🙏
Popular posts from this blog
Comments
Post a Comment